Friday, April 27, 2018 - 2:00 AM

साहित्य

दस्तक-विशेष साहित्य

-सुबह बिस्तर छोड़ते के उपरान्त, अमूमन जैसी कि दिनचर्या है, दैनन्दिन की क्रिया-प्रक्रिया से पहले मेरी आदत है, कम-अज-कम दो गिलास गुनगुना पानी पीना। सो इसी क्रम में ...
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साहित्य

रचना का जीवद्रव्य’ जितेन्द्र श्रीवास्तव की सद्य: प्रकाशित आलोचनात्मक पुस्तक है जिसमें कविता, कहानी, उपन्यास, गजल, संस्मरण, आत्मकथा की समीक्षाओं के साथ-साथ डायरी के नोट्स तथा व्याख्यान भी ...
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राष्ट्रीय साहित्य

प्रकृति का सिद्धांत है जो विपरीत परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल पायेगा वही जीवित रहने का अधिकारी है , बाकी खल्लास . डार्विन ने भी बहुत पहले ...
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दस्तक-विशेष राष्ट्रीय साहित्य

पुस्तक-समीक्षा : रमेश नैयर पुस्तक ‘मोदी युग’ का शीर्षक देखकर प्रथम दृष्टया लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्तुति में धड़ाधड़ प्रकाशित हो रही पुस्तकों में एक कड़ी ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

आशुतोष राणा की कलम से… क्रॉकडायल की छाप वाला सूट्केस, उनकी दसों उँगलियों में विभिन्न नगों से जड़ी हुई कुछ सोने-चाँदी की अँगूठियाँ, तेल से पीछे खींचकर बांधे ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा और साहित्य की प्रोफेसर सुषम बेदी जी का नाम प्रवासी-साहित्य लेखन में अपरिचित नहीं है। परदेस में रहते हुए भी अपनी ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

उपन्यास ‘कालीचाट’ से गुजरते हुए किसान जीवन की त्रासदी की बड़ी तीखी अनुभूति से हमारा सामना होता है। यह अनुभूति न तो तात्कालिक है और न ही काल्पनिक। ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

पुस्तक समीक्षा भारतीय समाज में अनेक विविधता व्याप्त है उन्हीं के बीच मध्यवर्गीय जन-जीवन अपने आपको साबित करने के प्रयास में खुद से ही सवाल करता हुआ कहता है- ...
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दस्तक-विशेष शख्सियत साहित्य

साक्षात्कार : सुधा ओम ढींगरा सुधा ओम ढींगरा जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है, आप कथाकार, कवयित्री, सम्पादक, रंगकर्मी, समाजसेवी होने के साथ-साथ सुपरिचित पत्रकार भी हैं तथा उत्तरी अमेरिका ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

संस्मरण भारत में कोई जगह। दरवाजे पर दस्तक। कोई चौबे जी आए हैं। दरवाजा खोला। दो लोग। एक पुलिस सा आदमी। दूसरा शख्स – वाकई चौबे जी सा। ...
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