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साहित्य

आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

आशुतोष राणा वे पूरे संसार के लिए आदरणीय होना चाहते थे किंतु ये बेहद मुश्किल काम था, तो भाईसाहब ने इसका एक तोड़ निकाला और कोर्ट में ऐफिडेविट ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

  अभिव्यक्ति हरेक व्यक्ति की स्वाभाविक अभिलाषा है। हम स्वयं को भिन्न-भिन्न आयामों में प्रकट करते हैं। अपने बाल काढ़ने का ढंग, मूंछों को छोटी, बड़ी या सफाचट ...
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दस्तक-विशेष शख्सियत साहित्य सुमन सिंह स्तम्भ

आदरणीया उषा वर्मा जी ब्रिटेन में बसी भारतीय मूल की जानी-मानी साहित्यकार और प्रतिष्ठित भाषा-साहित्य की शिक्षिका हैं। भारत में कुछ वर्ष भागलपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन करने के ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

शब्द रूठे हैं अर्थ भूखे हैं आत्मा सोई है परमात्मा खोया है मन मटमैला है तन पथरीला है अधर सूखा है अम्बर रूठा है लहरें लुप्त हैं तरंगें ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

अड़े हैं तो मंजिल की जिद में अड़े हैं बहुत छोड़कर ही हम आगे बढ़े हैं। अदब से उठाना ज़रा उन दियों को अमावस में जो तीरगी से ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

डॉ. पुष्पा सक्सेना हॉलिडे रिसोर्ट के बाहर युवा पीढ़ी कुछ रंग जमाने के मूड में थी। पिछले दो दिनों की लगातार बारिश ने सबको अपने कमरों में कैद ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी डॉ. पुष्पा सिंह विसेन जी द्वारा लिखित “जि़स्मगोई” नारी जागरूकता पर एक ऐसा शोधपरक संग्रह है जिसे बड़ी ही साफ़गोई से बिना किसी लाग लपेट ...
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अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ

भारतीय समाज हजारों वर्ष पहले से तर्कशील रहा है। दुनिया के अन्य आस्तिक समुदायों में ईश्वर अतक्र्य आस्था है लेकिन भारत में ईश्वर पर भी तर्क प्रतितर्क होते ...
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फीचर्ड राष्ट्रीय साहित्य

लखनऊ : अब से छह सौ वर्ष पहले पर्यावरण समस्या जैसी कोई बात नहीं थी, लेकिन संत कबीर ने वृक्ष, नदी, पहाड़, वन-पर्वतों के संरक्षण की बात कही ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

– कुमार मंगलम 1. हलचल और शोर से भरी हुई दुनिया में बुलबुल ने चहकना छोड़ दिया एक चुप रच रही है किसी के मृत्यु का महाआख्यान 2 ...
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