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साहित्य

साहित्य स्तम्भ

‘स्वतंत्र’ का अर्थ गहरा है। स्व का अर्थ सुस्पष्ट है। स्व यानी मैं। मेरा अन्तःक्षेत्र। हमारी अपनी अनुभूति। प्रत्येक व्यक्ति का अंतःकरण ‘स्व’ है। प्रत्येक प्राणी आनंद का ...
Comments Off on स्वतंत्र, स्वभाव, स्वराज और स्वाभिमान
लखनऊ साहित्य स्तम्भ

नया शैक्षिक सत्र चरित्र निर्माण का वर्ष हो बच्चों को भौतिक के साथ ही सामाजिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा भी दें : हमारा मानना है कि मनुष्य एक (1) ...
Comments Off on निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें : डाॅ. जगदीश गाँधी
अजब-गजब अद्धयात्म जीवनशैली साहित्य

नई दिल्ली : यदि विज्ञान या अध्यात्म से तुम्हारे भीतर विस्मय या भक्ति का भाव नहीं जगा, तो तुम गहरी नींद में हो। सृष्टि का रहस्य और रहस्यमय ...
Comments Off on सृष्टि का रहस्य और रहस्यमय होना भी एक रहस्य है, जाने इससे जुड़ी घटनाओ के बारे में
अद्धयात्म फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

‘हमारे पूर्वजों ने धरती को माता और आकाश को पिता बताया’ ‘हम भारत के लोग’ हैं। यही हमारा मूल परिचय है। भारत हमारा कुल, गोत्र, वंश और माता ...
Comments Off on ‘हम भारत के लोग’ : हृदयनारायण दीक्षित
अद्धयात्म फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

‘दर्शन’ का मूल उद्देश्य संसार को समझना और विश्व को आनंद से भरना है संसार हमारा आश्रय है। हम संसार का भाग है और संसार में है। इसका ...
Comments Off on अंधविश्वासी नहीं है भारतीय चिंतन
साहित्य

नई दिल्ली : सावन का महीना चल रहा है और देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खासतौर पर सावन सोमवार के दिन मंदिरों ...
Comments Off on जानें: शिवलिंग को दोनों हाथों से रगड़ें के लाभ, और शिवलिंग से जुड़ी कुछ खाश बातें
फीचर्ड राष्ट्रीय साहित्य

गोरखपुर : उपन्‍यासकार और साहित्‍य के पितामह…जितने भी नाम लें, वे कम ही हैं, उसका कारण भी साफ है, मुंशी प्रेमचंद ऐसी शख्सियत रहे हैं, जिन्‍होंने हमेशा सादगी ...
Comments Off on जयंती पर याद किये गये मुंशी प्रेमचंद, महात्‍मा गांधी का भाषण सुनकर छोड़ दी थी सरकारी नौकरी
अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ

दर्शन और विज्ञान का जन्म जिज्ञासा से हुआ। ऐसी जिज्ञासा ऋग्वेद में है। ऋग्वेद का रचनाकाल प्राचीन यूनानी दर्शन से भी बहुत प्राचीन है। ऋग्वेद के समय के ...
Comments Off on भारत की संस्कृति को सामाजिक संस्कृति कहते हैं : हृदयनारायण दीक्षित
साहित्य स्तम्भ

जीवन की सांझ आ रही है। श्रम गीत मद्धिम हो रहे हैं। गहन विश्राम की तैयारी है, लेकिन अपने परिजन डाट रहे हैं। भारत के करोड़ों वृद्ध अपने ...
Comments Off on देश में करोड़ों वृद्ध परिजनों से पीड़ित : हृदयनारायण दीक्षित
साहित्य स्तम्भ

उपनिषद् पूर्वाग्रह मुक्त हैं। इनमें पहले से बने बनाए विचारों का गहन विवेचन है। अंधविश्वासी कर्मकाण्ड का विरोध है। ये जिज्ञासा के जन्म और दर्शन के आदि स्रोत ...
Comments Off on भारतीय दर्शन के मूल स्रोत हैं उपनिषद्