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साहित्य

दस्तक-विशेष साहित्य

– कुमार मंगलम 1. हलचल और शोर से भरी हुई दुनिया में बुलबुल ने चहकना छोड़ दिया एक चुप रच रही है किसी के मृत्यु का महाआख्यान 2 ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

डॉ. संगीता जैन माँ, कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम? घर में हो या बाहर हो, खुद में हो या औरों में, पति में हो या परिवार में, ...
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उत्तर प्रदेश दस्तक-विशेष साहित्य

इलाहाबाद में कार्यक्रम का आयोजन भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान, आशि इंटरटेनमेंट प्रा. लि. तथा राष्ट्रीय मासिक पत्रिका भोजपुरी संगम के संयुक्त तत्वावधान में भोजपुरी समाज एवं संस्कृति ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

हृदयनारायण दीक्षित प्राचीन भारतीय दर्शन में बुद्धि की भूमिका है और बुद्धि भौतिक है। आत्मा अदृश्य है। उपनिषदों और गीता में आत्मबोध को सर्वोच्च ज्ञान कहा गया है। ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

तमन्ना शाहीन अभी कल की ही बात है दस बरस की शहज़ादी कुछ चचानुमा मेहरबानों ने चलती गाड़ी में उसे बिठा लिया और… उसके चीखने से पहले कई ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

अनुराग शर्मा सत्तर के दशक में अभिमन्यु अनत को पढ़ते और उनसे प्रभावित होते समय, उत्तर प्रदेश के एक साधारण शहर के एक निम्न-मध्यवर्गीय परिवार के मेरे जैसे ...
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दस्तक-विशेष साहित्य

डॉ. प्रेरणा आकांक्षा को शाम से ही एक सौ तीन डिग्री बुखार था। उसके पापा जैसे ही घर आए, तो दादी ने उन्हें उसकी हालत के बारे में ...
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आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

आशुतोष राणा तीन बंदर थे, बेहद उत्पाती..उनके तीन अलग-अलग दल थे। एक दल सिर्फ बुरा बोलता था, दूसरा दल सिर्फ बुरा देखता था, तीसरा दल सिर्फ बुरा सुनता ...
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फीचर्ड राष्ट्रीय साहित्य

30 मई ही वह तारीख थी, जब देश का पहला हिन्दी अखबार ‘उदंत मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ। इसी दिन को हिन्दी पत्रकारिता दिवस के रूप में भी मनाया जाता ...
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फीचर्ड राष्ट्रीय साहित्य

नई दिल्ली : झाड़ू-पोंछा करने वाली महिला ‘आलो आंधारि’ नाम की किताब लिखी। दिल्ली के पास गुड़गांव के एक घर में काम करती थी। झाड़ू-पोछा करने और खाना ...
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