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स्तम्भ

ज्ञानेंद्र शर्मा दस्तक-विशेष स्तम्भ

प्रसंगवश ज्ञानेन्द्र शर्मा स्तम्भ : ऐसे बहुत कम अवसर आते हैं जब पुलिस आम आदमी को दोस्त नजर आती है। वरना लोग उससे डरते हैं, उसे ज्यादातर मौकों ...
Comments Off on पुुलिसिया चेहरे पर गुलाबी रंग
दस्तक-विशेष राजनीति साहित्य स्तम्भ

के.एन. गोविन्दाचार्य भाग -1 भारत की राजनीति को एक और ढंग से कालखंडों में बाँटकर देखा जा सकता है। उसका पहला खंड है 1950 से 1965 । भारत ...
Comments Off on भारत की राजनैतिक स्थिति पर एक नजरियाँ
दस्तक-विशेष स्तम्भ

डॉ.धीरज फुलमती सिंह  मुबंई: विकास दुबे को गिरफ्तार करके सड़क के रास्ते कानपुर लाया जा रहा था, रास्ते में उसकी गाड़़ी पलट गई, जिसमें दो पुलिस कर्मी घायल ...
Comments Off on विकास दुबे का मारा जाना जरूरी था!
दस्तक-विशेष राजनीति साहित्य स्तम्भ

के.एन. गोविन्दाचार्य 30-30 वर्षों के 3 चरणों में देखी जा सकती राजनैतिक यात्रा है1950-1980, 1980-2010, 2010-2020 और आगे 2040 तक हर चरण के बारे मे समझने के 2 ...
Comments Off on अंग्रेजों के भारत से चले जाने के बाद राजनीतिक यात्रा
दस्तक-विशेष स्तम्भ

सर्वेश कुमार मौर्य बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में जब आर्थिक सुधारों की तथाकथित महान -ट्रिकिल डाउन थिअरी-आयी तो उसमें यह बताया समझाया गया कि जब समृद्धि शिखरों ...
Comments Off on महामारी, डिजिटलीकरण और स्त्रियां
दस्तक-विशेष संपादकीय स्तम्भ

डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित चुरियां मेरा पुस्तैनी गांव है। मेरा जन्म तो यहां मुंबई में हुआ है लेकिन मुझे अपना गाँव ...
Comments Off on तौबा-तौबा,गाँव की राजनीति से ईश्वर बचाये!
दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम पटना: जिस युग में हम जी रहें हैं,वह युग सूचनाओं का है। हर क्षण हम सभी सूचनाओं से घिरे रहते हैं। हमें प्रतियोगी परीक्षाओं की ...
Comments Off on प्रसार भारतीः सूचना व प्रसारण का सशक्त माध्यम
दस्तक-विशेष मनोरंजन स्तम्भ

विमल अनुराग जयंती पर विशेष संजीव कुमार भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं जिसपर भारतीय सिनेमा जगत और उसके चाहने वालों को नाज है। जब भी कभी ...
Comments Off on संजीव कुमार : एक ऐसा खिलौना जिसकी कोशिश ने अभिनय को नई दस्तक दी
BREAKING NEWS TOP NEWS स्तम्भ

के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: भारतीय समाज भगवद्सत्ता से प्रेरित है। इसका संचालन, धर्मसत्ता, समाजसत्ता, राजसत्ता और अर्थसत्ता-इस अनुक्रम से होता है। समाज और सत्ता दो पहलू है जो लोकतंत्र ...
Comments Off on सत्ता और दल की राजनीति को चाहिये कि चुनावी जीत या सरकार बनाने की करतब को सब कुछ न मान ले
जीवनशैली दस्तक-विशेष स्तम्भ

मुज़्तर खैराबादी के इस शेर को हकीकत का अमलीजामा पहनाने वाले एक ख़ास सख्शियत की याद आ गयी। दरअसल साल 2018 मेरे मुम्बई प्रवास का दौर था। 2019 ...
Comments Off on आईना देखकर ग़ुरूर फज़ूल, बात वो कर जो दूसरा न करे