Saturday, August 18, 2018 - 6:35 AM
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स्तम्भ

साहित्य स्तम्भ

उपनिषद् पूर्वाग्रह मुक्त हैं। इनमें पहले से बने बनाए विचारों का गहन विवेचन है। अंधविश्वासी कर्मकाण्ड का विरोध है। ये जिज्ञासा के जन्म और दर्शन के आदि स्रोत ...
Comments Off on भारतीय दर्शन के मूल स्रोत हैं उपनिषद्
साहित्य स्तम्भ

पृथ्वी व्यथित है। इसके अंगभूत जल, वायु, वनस्पति और सभी प्राणी आधुनिक जीवनशैली के हमले के शिकार हैं। पृथ्वी असाधारण संरचना है। “ऋग्वेद के अनुसार वह पर्वतों का ...
Comments Off on व्यथित है पृथ्वी : हृदयनारायण दीक्षित
साहित्य स्तम्भ

  पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया तेजी से पूरे देश में क्रांति की तरह फैल रहा है,सुदूर प्रान्तों में रह रहे लोगों से सम्पर्क के साथ साथ ...
Comments Off on अभिशाप बनते जा रहे हैं सोशल मीडिया पर प्रचलित अफवाह
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

आशुतोष राणा वे पूरे संसार के लिए आदरणीय होना चाहते थे किंतु ये बेहद मुश्किल काम था, तो भाईसाहब ने इसका एक तोड़ निकाला और कोर्ट में ऐफिडेविट ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

हृदयनारायण दीक्षित अभिव्यक्ति हरेक व्यक्ति की स्वाभाविक अभिलाषा है। हम स्वयं को भिन्न-भिन्न आयामों में प्रकट करते हैं। अपने बाल काढ़ने का ढंग, मूंछों को छोटी, बड़ी या ...
Comments Off on सोशल मीडिया में सत्य, शिव और सुंदर
दस्तक-विशेष शख्सियत साहित्य स्तम्भ

आदरणीया उषा वर्मा जी ब्रिटेन में बसी भारतीय मूल की जानी-मानी साहित्यकार और प्रतिष्ठित भाषा-साहित्य की शिक्षिका हैं। भारत में कुछ वर्ष भागलपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन करने के ...
Comments Off on मातृभूमि की तरफ़ वापसी का अब प्रश्न ही नहीं उठता
अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ

भारतीय समाज हजारों वर्ष पहले से तर्कशील रहा है। दुनिया के अन्य आस्तिक समुदायों में ईश्वर अतक्र्य आस्था है लेकिन भारत में ईश्वर पर भी तर्क प्रतितर्क होते ...
Comments Off on ‘भारत पर आर्यों का आक्रमण महाझूठ’
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

हृदयनारायण दीक्षित प्राचीन भारतीय दर्शन में बुद्धि की भूमिका है और बुद्धि भौतिक है। आत्मा अदृश्य है। उपनिषदों और गीता में आत्मबोध को सर्वोच्च ज्ञान कहा गया है। ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

आशुतोष राणा तीन बंदर थे, बेहद उत्पाती..उनके तीन अलग-अलग दल थे। एक दल सिर्फ बुरा बोलता था, दूसरा दल सिर्फ बुरा देखता था, तीसरा दल सिर्फ बुरा सुनता ...
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फीचर्ड राजनीति स्तम्भ

कर्नाटक से निकला संदेश पूरी राजनीति को बदबूदार बना दिया है। राज्यपाल के विवेक का विवेक के विशेषाधिकार भी मजाक बन गया। सियासत और सत्ता के इस जय ...
Comments Off on साम, दाम और दंड में फंसा लोकतंत्र