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स्तम्भ

अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से बुरी तरह प्रभावित थी। मन की शांति के ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग ६} 
अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना ही कठिन और नीरस है। भगवान् कोई आकार ...
Comments Off on संसार भगवान की छाया, भगवान मिल जाए तो छाया के लिए प्रयास करने की क्या जरूरत
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष फीचर्ड स्तम्भ

स्तम्भ : काम का ज्वर उतरते ही पवनरेखा की देह पर आरूढ़ उग्रसेन ने भी अपनी दृष्टि की कोर से प्रकोष्ठ के द्वार पर खड़ी उस पुरुष आकृति ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_७}
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

 स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य में संतान सुख नहीं लिखा था। किंतु महाराज ...
Comments Off on रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से..भाग ३
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

 स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है ? ये क्या कह रही हो तुम ? ...
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अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक उनकी चरण पादुकाएँ की रघुवंश के सिंहासन पर ...
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अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी भूतकाल नहीं बदल सकते। लेकिन इस भूत इतिहास ...
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अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

भाव का केन्द्र हृदय है और ज्ञान का केन्द्र बुद्धि। बुद्धि का आधार स्मृति है। हम प्रत्यक्ष जगत का विवेचन करते समय स्मृति को ही आधार बनाते हैं। ...
Comments Off on भाव और विचार एक नहीं होते
लखनऊ स्तम्भ

लखनऊ : विचार ही व्यक्ति को महान बनाते हैं और विचार ही उसे नीचे भी गिराते हैं। जो व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी असफल नहीं हुआ वो ...
Comments Off on थक कर न बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर!
फीचर्ड स्तम्भ

है नरेंद्र मोदी के वुजूद पर हिंदोस्तां को नाज कहते हैं उसे अहल-ए-नजर ही इमाम-ए-पदक हम जब भी किसी मामले में तुलना करते हैं तो यह आवश्यक नहीं ...
Comments Off on समय मिले तो नेहरू, वाजपेयी और इंदिरा से आगे निकलेंगे नरेंद्र मोदी