Sunday, July 22, 2018 - 6:57 AM
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स्तम्भ

दस्तक-विशेष स्तम्भ

आशुतोष राणा की कलम से… उन्होंने अपने खेत पर अंगद का मंदिर बनाया हुआ था। ये पूरे संसार में एक मात्र मंदिर था जिसमें अंगद की पूजा होती ...
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दस्तक-विशेष राष्ट्रीय स्तम्भ

वैसे तो खेल अौर राजनीति में कोई सीधा रिश्ता होता नहीं है या कहूं कि होना नहीं चाहिए लेकिन हुअा ऐसा कि जिस दिन सरकार ने राष्ट्रपति-पद का ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ

-डॉ़ रहीस सिंह आजकल तीन तलाक (ट्रिपल तलाक) के जरिए समान नागरिक संहिता पर पहुंचने सम्बंधी एक भिन्न माहौल बनता दिख रहा है। इस माहौल के मुख्य रूप ...
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दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

माता पिता ने उनका नाम रामचंद्र रखा था। किंतु मेट्रिक की परीक्षा देने से ठीक पहले, वे एक शपथपत्र देकर वैधानिक रूप से रामचंद्र से बदलकर ‘लामचंद’ हो ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ

नवीन जोशी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचण्ड जीत बताती है कि नरेंद्र मोदी का जादू जनता के सिर चढ़कर बोला है। वे कुशल मदारी या ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ

आशुतोष राणा की कलम से (अपने जीवंत और प्रभावशाली अभिनय के बलबूते आशुतोष राणा ने सिनेजगत में जो ख्याति अर्जित की है वह सभी जानते हैं लेकिन यह ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ

सुभाष गाताडे अपनी सन्तान को क्या माता पिता के नाम जुड़ी जाति तथा धर्म की पहचान के संकेतकों से नत्थी करना अनिवार्य है। हैदराबाद उच्च न्यायालय ने स्वीकृत ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ

मृत्युंजय पाण्डेय बहुत प्रसिद्ध कहावत है ‘घर को आग लगी, घर के चिराग से ही।’ आज भोजपुरी के साथ भी यही हो रहा है, इस बोली के सहारे ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

वे लोगों से अभिवादन में केवल राम राम कहते थे, खाने में उन्हें सिर्फ़ रवा का हलवा, और बेसन का लपटा ही पसंद था। भगवान व भोजन के ...
Comments Off on ••राम रवा लपटा महाराज••
दस्तक-विशेष स्तम्भ

बलिहारी हो रंगों की सर्वत्र व्याप्त शून्यता से सिरजनहार अकुला उठे। अकुलाहट कौतूहल में तब्दील हो गई। कल्पना ने पहली बार अंगड़ाई ली। आड़ी-तिरछी रेखाएँ उभर आईं। आकृति ...
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