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स्तम्भ

अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ

भारतीय समाज हजारों वर्ष पहले से तर्कशील रहा है। दुनिया के अन्य आस्तिक समुदायों में ईश्वर अतक्र्य आस्था है लेकिन भारत में ईश्वर पर भी तर्क प्रतितर्क होते ...
Comments Off on ‘भारत पर आर्यों का आक्रमण महाझूठ’
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

हृदयनारायण दीक्षित प्राचीन भारतीय दर्शन में बुद्धि की भूमिका है और बुद्धि भौतिक है। आत्मा अदृश्य है। उपनिषदों और गीता में आत्मबोध को सर्वोच्च ज्ञान कहा गया है। ...
Comments Off on ज्ञान, योग, ध्यान ही परिपूर्ण विज्ञान
आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

आशुतोष राणा तीन बंदर थे, बेहद उत्पाती..उनके तीन अलग-अलग दल थे। एक दल सिर्फ बुरा बोलता था, दूसरा दल सिर्फ बुरा देखता था, तीसरा दल सिर्फ बुरा सुनता ...
Comments Off on संतजी के तीन बंदर
फीचर्ड राजनीति स्तम्भ

कर्नाटक से निकला संदेश पूरी राजनीति को बदबूदार बना दिया है। राज्यपाल के विवेक का विवेक के विशेषाधिकार भी मजाक बन गया। सियासत और सत्ता के इस जय ...
Comments Off on साम, दाम और दंड में फंसा लोकतंत्र
अद्धयात्म फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

  प्रत्येक धर्म विश्वास पर बल देता है। धर्म पर ऑख बंद कर विश्वास करने की परंपरा हमने विरासत मे पाई हैं।इस कारण हमारे धार्मिक तर्क प्राय: अधूरे ...
Comments Off on धर्म बातो का विषय नही है- वह तो प्रत्यक्ष अनुभूति का विषय हैं
अद्धयात्म स्तम्भ

धर्म सांसारिक आचार संहिता है। देशकाल के अनुसार परिवर्तनीय है। भूत, भविष्य मनुष्य मन के गढ़े विचार हैं। गतिशील संसार दिक्काल के अधीन है। यहां दिक् और काल ...
Comments Off on ‘आत्मा’ : भारतीय चिंतन का निराला तत्व
दस्तक-विशेष फीचर्ड राष्ट्रीय स्तम्भ

भाईसाहब में ग़ज़ब की मोहिनी थी। आप उनकी पीठ के पीछे भले ही कितना कुछ कहते रहें लेकिन उनके सामने पड़ते ही आपको वही सब कहना पड़ता था ...
Comments Off on आशुतोष राणा की कलम से…मौन मुस्कान की मार
साहित्य स्तम्भ

कर्म इच्छा प्रेरित होते हैं। हम सब के भीतर अनेक अभिलाषाएं हैं। वे कर्म के लिए प्रेरित करती हैं। हम बिना कर्म किए रह नहीं सकते। महाआलसी भी ...
Comments Off on बड़ा प्रश्न, आखिर आत्मज्ञान था क्या?
अजब-गजब साहित्य स्तम्भ

हिन्दी विरोध वस्तुत: भाषा और साहित्य के कारण से नहीं, परन्तु आर्थिक-सामाजिक-राजनैतिक कारणों से होता है। पूर्वांचल में, असम में और बंगाल मारवाड़ी व्यापारियों का विरोध हिन्दी-विरोध का ...
Comments Off on हिन्दी के शत्रु : सत्ता, सम्पत्ति एवं सँस्थाएं : प्रभाकर माचवे
अजब-गजब अन्तर्राष्ट्रीय फीचर्ड स्तम्भ

नई दिल्ली : भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा इस ओर इशारा कर रही है कि फिर से दो पड़ोसी एक अच्छे दोस्त बनने जा रहे हैं। ...
Comments Off on भारत, चीन की दोस्ती का नया चेहरा