स्तम्भ

अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

स्वयं के भीतर बैठकर अन्तःकरण की गति और विधि देखना ही अध्यात्म है हृदयनारायण दीक्षित : संसार प्रत्यक्ष है। दिखाई पड़ता है। लेकिन प्रत्यक्ष संसार के साथ ही ...
Comments Off on आखिर रूप, रस, गंध, स्पर्श और स्वाद के आनंद का केन्द्र क्या है?
लखनऊ साहित्य स्तम्भ

दशहरा पर्व हर्ष और उल्लास का त्योहार है डा. जगदीश गांधी : दशहरा हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी ...
Comments Off on अहंकार रूपी रावण को अपने अंदर मारने के लिए राम रूपी ईश्वरीय गुण विकसित करना है
अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक अखण्ड इकाई है। इस अखण्ड इकाई का नाम ...
Comments Off on भारत शक्ति उपासना में आनंदमगन है
अद्धयात्म जीवनशैली साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : प्रश्न और जिज्ञासा वैदिक परंपरा है। भारतीय इतिहास के वैदिक काल में सामाजिक अन्तर्विरोध कम थे। तब प्रश्नाकुलता का संबंध सृष्टि रहस्यों की जिज्ञासा से ...
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अद्धयात्म जीवनशैली दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : श्रद्धा भाव है और श्राद्ध कर्म। श्रद्धा मन का प्रसाद है और प्रसाद आंतरिक पुलक। पतंजलि ने श्रद्धा को चित्त की स्थिरिता या अक्षोभ से ...
Comments Off on प्रत्यक्ष मानवीय गुण है पितरों का आदर
अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

बोध आसान नहीं। शोध आसान है। शोध के लिए प्रमाण, अनुमान, पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा सिद्ध कथन और प्रयोग पर्याप्त हैं। बोध के लिए अनुभूति चाहिए। प्रत्यक्ष रूप प्रमाण ...
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अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हम सब कर्मशील प्राणी हैं। कर्म की प्रेरणा है कर्मफल प्राप्ति की इच्छा। कर्मफल प्राप्ति की अभिलाषा के कारण ही सभी प्राणी सक्रिय हैं। मानव जीवन अनंत अभिलाषा ...
Comments Off on क्या कर्मफल की इच्छा दोषपूर्ण अभिलाषा है, अनासक्त कर्म ही क्यों श्रेष्ठ है?
साहित्य स्तम्भ

हम सभी स्वतंत्र भारत के परतंत्र नागरिक हैं…यह वाक्य पढ़ने में बिल्कुल गलत लगा न? कड़वा तो ऐसा है जैसे कच्ची निबौरी हो। लगेगा भी क्यों नहीं, कहते हैं ...
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अद्धयात्म आशुतोष राणा फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ: कैकेयी के स्वर ने राम में अपार ऊर्जा का संचार किया। एक हल्के से विराम के बाद राम ने कहा- माँ मुझे ज्ञात हुआ की मेरे राज्याभिषेक की ...
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आशुतोष राणा फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ:  मंथरा के जाने के बाद कैकेयी मंथरा के विचारों का सूक्ष्म अवलोकन करने लगीं, मनुष्य स्वभाव से ही महत्वाकांक्षी होता है, वह सदैव अपनी प्रभुता को लेकर ...
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