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कविता

कविता साहित्य

सूर्य कांत शर्मा काश कि अब दो जीवन होते एक का ताना-बाना बुनते मन में पैठी तरुणाई से।एक का ताना-बाना बुनते मस्तिष्क में बैठी गहराई से।अब भी देखते ...
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