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भारत का नये दशक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रवेश

प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम

पटना: वर्तमान दौर संपूर्ण विश्व के लिए काफी उथल-पुथल भरा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। लगभग चार महीनों से यह भी अनेक घटनाओं का साक्षी बना है। कुछ तो भू राजनीतिक घटना है तो कुछ प्राकृतिक आपदा है।कुछ क्षेत्रिय घटना है तो कुछ अंतरराष्ट्रीय घटना है। इन समस्त घटनाओं का प्रभाव अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से भारत पर भी हुआ है।

गत मास लगभग जून के मध्य में भारत के लिए एक अच्छी खबर आई। हालाँकि ऐसी खबर की आशा पहले से निश्चित थी। भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता के लिए चुन लिया गया।

अस्थायी सदस्यता के लिए विभिन्न क्षेत्रों से चुना जाना यूँ तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सामान्य प्रक्रिया है लेकिन भारत का कुल 193 सदस्य देशों में से 184 सदस्य देशों का समर्थन मिलना महत्वपूर्ण और सुखद घटना है। 184 सदस्य देशों का समर्थन भारत की स्वीकार्यता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करता है।

इस सुखद घटना पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा- “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए दुनियाँ ने समर्थन और सहयोग दिया। मैं उनका आभार प्रकट करता हूँ। भारत सभी के सहयोग से वैश्विक शांति, सुरक्षा, समुत्थानशक्ति और बराबरी के लिए काम करेगा।”

अमेरिका ने भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता प्राप्त करने पर खुशी जताई। अमेरिका ने कहा- “हम भारत का स्वागत करते हैं। उसे बधाई देते हैं। भारत और अमेरिका मिलकर दुनियाँ में अमन बहाली और सुरक्षा जैसे अहम् मुद्दों पर काम करेंगे। दोनों देश के बीच ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है हम इसे और आगे ले जाना चाहते हैं।”

अब जरा यह जानना आवश्यक है कि आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है? इसके स्थायी और अस्थायी सदस्य देश कौन-कौन हैं? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता का महत्व क्या है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा है क्या?

संयुक्त राष्ट्र संघ जिसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1945 ई० को हुई थी। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित है। वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र संघ स्थापना का 75 वाँ वर्ष पूरा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के छः अंग हैं। इन्हीं छः अंगों में एक अंग सुरक्षा परिषद भी है, जिसे पूर्ण रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कहा जाता है।

स्थायी और अस्थायी सदस्य

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चेप्टर पाँच, शीर्षक सुरक्षा परिषद में इसके संरचना, कार्य और शक्ति, मतदान और प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से चर्चा की गयी है। चार्टर का चेप्टर पाँच का अनुच्छेद 23 जो सुरक्षा परिषद के संरचना से संबंधित है।

अनुच्छेद 23 का उपानुच्छेद 23(1) के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद में पंद्रह सदस्य होंगे। इसी उपानुच्छेद 23(1) में कहा गया है कि द रिपब्लिक ऑफ चाईना, फ्रांस, द यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक(रूस), द यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड (ब्रिटेन) तथा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य होंगे।

उपानुच्छेद 23(1) यह भी कहता है कि महासभा दस अन्य सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को निर्वाचित करेगी। ये दस निर्वाचित सदस्य देश सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य देश होंगे। उपानुच्छेद 23(2) कहता है कि सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव दो साल के लिए किया जाएगा।

ग्यारह से पंद्रह तक सुरक्षा परिषद की सदस्यता में वृद्धि के बाद गैर-स्थायी सदस्यों के पहले चुनाव में, चार अतिरिक्त सदस्यों में से दो को एक वर्ष की अवधि के लिए चुना जाएगा। एक सेवानिवृत्त सदस्य तत्काल पुन: चुनाव के लिए पात्र नहीं होगा।

भारत का अस्थायी सदस्यता के लिए निर्वाचन 2021-2022 के लिए किया गया है। भारत आठवीं बार सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यता के लिए निर्वाचित हुआ है। इसके पहले 1950-1951,1967-68, 1972-73,1977-78, 1984-1985, 1991-1992, 2011-2012 में भी अस्थायी सदस्यता के लिए निर्वाचित हुआ था।

वर्तमान में अस्थायी सदस्य इस प्रकार हैंः

बेल्जियम(2020), डोमिनिसियम रिपब्लिक(2020), एस्टोनिया(2021),जर्मनी(2020), इण्डोनेशिया(2020), नाइजर(2021), सेंट विंसेंट और ग्रेनडाइन्स(2021), दक्षिण अफ्रीका(2020), ट्यूनिशिया(2021) और विएतनाम(2021)।

सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर सदस्य देश एक – एक महीने के लिए करता है। जून 2020 में अध्यक्षता फ्रांस के पास थी। वहीं जुलाई 2020 में अध्यक्षता जर्मनी के पास है और अगस्त 2020 में अध्यक्षता इंडोनेशिया के पास होगी। भारत का निर्वाचन अस्थायी सदस्यता के लिए एशिया प्रशांत समूह से हुआ है। इसके अलावा आयरलैंड, मैक्सिको और नार्वे भी भारत के साथ अस्थायी सदस्यता के लिए निर्वाचित हुए हैं। उपानुच्छेद 23(3) के अनुसार सुरक्षा परिषद के प्रत्येक सदस्य का एक प्रतिनिधि ही परिषद में रख सकेगा।

महत्व क्यों

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों के निर्वाचन का महत्व है कि परिषद में क्षेत्रिय संतुलन बना रहे। एक प्रकार से सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यपालिका होता है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने का उत्तरदायित्त्व सुरक्षा परिषद का हीं है। इसलिए इसे ‘संसार का पुलिस मैन’ की संज्ञा दी गयी है।

जब भारत स्वतंत्रता के 75 वीं वर्षगाँठ मनाने के दहलीज पर हो, नये दशक में मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के साथ सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य निर्वाचित होना निःसंदेह भारतीय होने के नाते गौरव और खुशी की बात है।

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