बेमिसाल मुख्यमंत्री, सड़क चौड़ीकरण के लिए ढहा दी अपने ही मंदिर की दीवार

  • पिता के अंतिम संस्कार में न जाने के बाद कायम की एक और नजीर
  • साबित किया कि मामला जनहित और विकास का हो तो मंदिर-मस्जिद का कोई मतलब नहीं

लखनऊ (राघवेन्द्र प्रताप सिंह): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर नजीर कायम की, उन्होंने एक बार फिर बताया कि बड़ी जिम्मेदारी लेने वाले का फर्ज क्या होता है? गोरखपुर से सोनौली के लिए बन रहे फोरलेन के लिए उन्होंने गोरखनाथ मंदिर की दीवार को ढहा कर औरों के लिए एक नया मानक तय कर दिया। साथ ही उन लोगों को एक बड़ा सन्देश भी दिया, जो बड़े पद पर तो बैठ जाते हैं लेकिन अपनी सोच को बड़ा नहीं कर पाते। यह संदेश प्रदेश के विकास मानकों से इस प्रकार भी जुड़ा है, कि अगर विकास के लिए उनके मंदिर की दीवार ढहायी जा सकती है तो जनहित में विकास की जरूरत पर मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मजार या किसी भी धार्मिक स्थल की दीवार अब विकास के रास्ते का रोड़ा नहीं बन पाएगी।

हाल के दिनों में यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री ने बड़ी नजीर कायम की है। इसके पहले अपने पिता के अंतिम संस्कार में न जाकर उन्होंने बताया कि राजधर्म क्या होता है? एक बड़े परिवार का मुखिया होने का क्या मतलब होता है?

मालूम हो कि गोरखनाथ मंदिर का शुमार उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों में होता है। यह करोड़ों लोगों के आस्था का केंद्र भी है। यह उस नाथपंथ का मुख्यालय से जिससे योगी जी का ताल्लुक है। वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं।

गोरखपुर फोरलेन के रास्ते में आने वाले किसी और को अपने मकान और दुकान के ध्वस्तीकरण पर किसी को आपत्ति न हो इसके लिए इसके लिए मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्होंने अपने मंदिर की दीवार को ढहाने का आदेश दे दिया। बाकियों की दुकान और मकान के ध्वस्त होने पर बाया गोरखनाथ मंदिर, धर्मशाला, मोहद्दीपुर, कूड़ाघाट और नंदानगर होते हुए एयरपोर्ट तक का आना-जाना आसान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री होने के बाद और बतौर सांसद वह बार-बार यह कहते रहे हैं कि जनहित और विकास एक दूसरे के पूरक हैं। इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार्य नहीं। लोक कल्याण के लिए विकास हर जनप्रतिनिधि का फर्ज है। योगी इसे लगातार साबित भी कर रहे हैं।

मिर्जापुर हादसे में तीन श्रमिकों की मौत पर मुख्यमंत्री दुखी, परिजनों को दी आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुंबई से गोपालगंज बिहार जा रहे प्रवासी कामगारों का जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में एक हाइवा के कुचलने से तीन लोगों की मौत जैसी दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। साथ उत्तर के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख की आर्थिक मदद करने का निर्देश भी दिया है। वहीं हादसे में घायलों का समुचित इलाज कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिवंगतों के पार्थिव शरीर बिहार तक पहुचाने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि जनपद मिर्जापुर में थाना लालागंज के बसही गांव में हुई दुर्घटना में तीन यात्रियों के मौत होने से हड़कम्प मच गया। गुरुवार की रात्रि में मुम्बई से गोपालगंज बिहार के लिये इनोवा से यात्रा कर रहे सात यात्री नींद आने के कारण बसही गाँव में एक मकान के पास सड़क से लगभग 40 फुट की दूरी पर रुक कर सो रहे थे। तभी एक अनियंत्रित ट्रक वहां से गुजरा जो जो हाइवे के नीचे सो रहे इन यात्रियों को कुचलते हुए दीवार से जा कर लड़ गया। जिससे 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक की अस्पताल ले जाते समय जान चली गई।