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	<title>अद्धयात्म &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>अद्धयात्म &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>26 साल में चौथी बार बना महासंयोग, एक ही दिन होगी माता-पिता और पुत्र की पूजा; 14 सितंबर को तीज के साथ गणपति बप्पा की स्थापना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:09:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="158" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/0903-300x158.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/0903-300x158.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/0903.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>इन्दौर:</strong> हरतालिका तीज और श्री गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर को एक ही दिन मनाई जाएगी। तिथि भेद के कारण बने इस विशेष संयोग में सुबह हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा, जबकि दोपहर में गणपति बप्पा की स्थापना होगी। वर्ष 2000 के बाद 26 साल में यह चौथी बार है, जब एक ही दिन माता-पिता और पुत्र यानी भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का संयोग बन रहा है। इससे पहले 2023, 2011 और 2004 में भी ऐसी स्थिति बनी थी।</p>



<p>आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा के मुताबिक 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में तृतीया होने के कारण हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। वहीं धर्मशास्त्रों में भगवान श्रीगणेश का जन्मकाल दोपहर में माना गया है और 14 सितंबर की दोपहर चतुर्थी तिथि रहने से इसी दिन गणेश चतुर्थी की शुरुआत होगी।</p>



<p><strong>2023 में भी बनी थी ऐसी स्थिति</strong></p>



<p>अगले दिन 15 सितंबर को उदया समय में चतुर्थी तिथि रहेगी, लेकिन दोपहर में पंचमी शुरू हो जाएगी। इससे पहले 2023 में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी। उस समय कई लोगों ने चतुर्थी तिथि को 18 और 19 तारीख, दोनों दिन माना था।</p>



<p><strong>इस बार 12 दिन चलेगा गणेशोत्सव</strong></p>



<p>पारंपरिक रूप से गणेश चतुर्थी का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा विसर्जन के साथ होता है। इस बार चंद्र तिथियों के विशेष संयोग के कारण गणेशोत्सव 12 दिनों तक चलेगा। 14 सितंबर को गणेश स्थापना के साथ उत्सव शुरू होगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ इसका समापन होगा।</p>



<p><strong>चित्रा-स्वाति नक्षत्र के साथ ब्रह्म और इंद्र योग</strong></p>



<p>14 सितंबर को पूरे शिव परिवार की आराधना का भी विशेष संयोग बन रहा है। सोमवार होने के कारण यह दिन भगवान शिव से जुड़ा है। पंचांग के अनुसार इस दिन चित्रा और स्वाति नक्षत्र के साथ ब्रह्म योग और इंद्र योग भी रहेंगे। पंडितों के अनुसार ऐसा संयोग बार-बार नहीं बनता। माता पार्वती, भगवान शिव और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की एक साथ पूजा होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।</p>



<p><strong>खजराना गणेश को चढ़ेगा सवा लाख मोदक का महाभोग</strong></p>



<p>गणेश चतुर्थी पर खजराना श्री गणेश को सवा लाख मोदक का महाभोग समर्पित किया जाएगा। इसके लिए आठ भट्टियों पर पूजन-अर्चन के बाद मोदक बनाने का काम शुरू हो चुका है। शहर के प्रसिद्ध रसोइये खेमजी महाराज और उनके 20 सहयोगी लगातार पांच दिन तक मोदक तैयार करेंगे। निर्माण का काम 13 सितंबर की रात तक चलेगा और 14 सितंबर की सुबह भक्त मंडल की ओर से सवा लाख मोदक का प्रसाद खजराना गणेश को अर्पित किया जाएगा।</p>



<p>मोदक निर्माण की शुरुआत मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट और पं. पुनीत भट्ट ने वैदिक मंगलाचरण के बीच की। इस दौरान भक्त मंडल की ओर से वरुण पार्थ बागड़ी, कविश गोयल, सुभाष नायक और दिलीप सर के साथ मंदिर प्रबंधक घनश्याम शुक्ला, सहायक गौरीशंकर मिश्रा और अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्त मंडल के अरविंद बागड़ी और कैलाश पंच ने बताया कि मोदक निर्माण के लिए 20 रसोइये लगातार काम कर रहे हैं।</p>



<p><strong>620 किलो शुद्ध घी समेत इतनी सामग्री लगेगी</strong></p>



<p>सवा लाख मोदक तैयार करने के लिए 1100 किलो मैदा, करीब 620 किलो शुद्ध घी, 500 किलो सफेद गुड़, 400 किलो सफेद तिल्ली, 400 किलो मूंगफली दाना और 40 किलो खोपरा बूरा इस्तेमाल किया जा रहा है। शुद्ध घी 40 टीन डिब्बों में करीब 620 किलो है।</p>



<p><strong>50 बड़ी परात और 100 ट्रे से होगा प्रसाद वितरण</strong></p>



<p>तैयार किए गए मोदक प्रसाद को मंदिर आने वाले गणेश भक्तों में वितरित किया जाएगा। इसके लिए 50 बड़ी परातों और 100 ट्रे का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>



<p></p>
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		<title>पिठौरी अमावस्या दो दिन, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन; जानें 8 से 14 सितंबर तक का पूरा पंचांग</title>
		<link>https://dastaktimes.org/pithori-amavasya-two-days-hartalika-teej-and-ganesh-chaturthi-on-the-same-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 06:59:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> इस सप्ताह भाद्रपद मास के कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ने वाले हैं। कुशाग्रहणी अमावस्या यानी पिठौरी अमावस्या इस बार दो दिन रहेगी। इनमें एक दिन कुशा तोड़ने के लिए विशेष माना गया है, जबकि दूसरे दिन स्नान, दान और पितरों के तर्पण का विधान बताया गया है। इसके अलावा हरतालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी भी एक ही दिन पड़ रही हैं। हरतालिका तीज पर महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है।</p>



<p><strong>8 सितंबर, मंगलवार: भौम प्रदोष व्रत</strong></p>



<p>8 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 2:44 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और इसी दिन भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।</p>



<p><strong>9 सितंबर, बुधवार: मास शिवरात्रि</strong></p>



<p>9 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। इस दिन मास शिवरात्रि व्रत रहेगा। साथ ही कैलास यात्रा का प्रारंभ होगा।</p>



<p><strong>10 सितंबर, गुरुवार: कुशाग्रहणी अमावस्या और कुशा तोड़ने का दिन</strong></p>



<p>10 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 10:34 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। कुशाग्रहणी अमावस्या होने के कारण इस दिन कुशा तोड़ने का विधान बताया गया है। इसे पिठौरी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार पंडित सालभर होने वाले धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल के लिए इसी दिन कुशा तोड़कर रख लेते हैं।</p>



<p><strong>11 सितंबर, शुक्रवार: पितरों के तर्पण के लिए अमावस्या</strong></p>



<p>11 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 8:57 बजे तक रहेगी। इस दिन स्नान और दान के लिए अमावस्या को विशेष शुभ माना गया है। इसे मातृ अमावस्या भी कहा जाता है। पितरों के लिए दान आदि करने के साथ तर्पण के लिए भी यही अमावस्या मानी जाएगी।</p>



<p><strong>12 सितंबर, शनिवार: भाद्रपद शुक्ल पक्ष शुरू</strong></p>



<p>12 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:47 बजे तक रहेगी। इसके बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। इस दिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रथम प्रकाश दिवस मनाया जाएगा।</p>



<p><strong>13 सितंबर, रविवार: हरतालिका तीज की तिथि शुरू</strong></p>



<p>13 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 7:09 बजे तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। इस दिन श्री वराह जयंती भी मनाई जाएगी। साथ ही हरतालिका तीज व्रत की तिथि शुरू हो जाएगी।</p>



<p><strong>14 सितंबर, सोमवार: हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी</strong></p>



<p>14 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 7:07 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तृतीया व्रत इसी दिन रखा जाएगा।</p>



<p>इसी दिन चतुर्थी का चंद्रमा दिखाई देने के कारण सिद्धिविनायक व्रत यानी गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। कई स्थानों पर इसे कलंक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन चंद्रदर्शन निषिद्ध माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या दोष लगता है। पत्थर चौथ का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। बिहार में इसे चौठचंद्र के नाम से जाना जाता है।</p>



<p></p>
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		<title>घर में कछुआ रखना कितना शुभ? जानें जीवित कछुए से लेकर धातु के कछुए तक, वास्तु के ये खास नियम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 06:53:45 +0000</pubDate>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> वास्तु शास्त्र में घर में कछुए को रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कछुए का संबंध भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि घर में कछुआ रखने से शांति बनी रहती है और सुख-समृद्धि आती है। इसे सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, वास्तु के अनुसार कछुआ किस धातु का हो, उसे किस दिशा में रखा जाए और उसका मुंह किस ओर हो, इन बातों का भी विशेष महत्व बताया गया है।</p>



<p><strong>जीवित कछुआ रखें या धातु का?</strong></p>



<p>वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में कछुआ रखा जा सकता है। हालांकि, जीवित कछुए के बजाय पीतल या तांबे से बने कछुए को रखना अधिक शुभ माना जाता है। इसके अलावा स्फटिक या चांदी का कछुआ भी घर में रखा जा सकता है। इन वस्तुओं को वास्तु में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।</p>



<p><strong>किस दिशा में रखना माना जाता है शुभ?</strong></p>



<p>कछुए को घर में रखने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। वास्तु में इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इसके अलावा कछुए को उत्तर दिशा में भी रखा जा सकता है। मान्यता है कि इन दिशाओं में कछुआ रखने से घर में सकारात्मकता और स्थिरता बनी रहती है।</p>



<p><strong>धातु और स्फटिक के कछुए को पानी में रखें</strong></p>



<p>वास्तु नियमों के अनुसार धातु या स्फटिक से बने कछुए को साफ पानी में रखना चाहिए। जिस पात्र में कछुआ रखा गया है, उसके पानी को समय-समय पर बदलते रहना और पात्र को साफ रखना जरूरी माना जाता है। गंदे पानी या गंदे पात्र में कछुआ रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।</p>



<p><strong>कछुए का मुंह किस तरफ होना चाहिए?</strong></p>



<p>अगर घर में धातु का कछुआ रखा जा रहा है तो उसका मुंह घर के अंदर की ओर होना चाहिए। वास्तु मान्यता के अनुसार कछुए का मुंह अंदर की तरफ रखने से घर में बरकत आती है और कामकाज में सकारात्मक प्रगति बनी रहती है।</p>



<p></p>
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		<title>सितंबर में इन 3 राशियों पर शनि की कड़ी नजर, बढ़ सकती हैं मुश्किलें, इन बातों का रखें खास ध्यान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/saturn-keeps-a-close-eye-on-these-3-zodiac-signs-in-september-problems-may-increase/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 04:35:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Phone-4-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Phone-4-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Phone-4-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Phone-4.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली। ज्योतिष के अनुसार सितंबर का महीना मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। इस दौरान कर्म और न्याय के देवता शनि की दृष्टि इन तीनों राशियों के स्वामी ग्रहों पर रहने की बात कही गई है। ऐसे में जातकों को धैर्य, सही निर्णय और कार्यकुशलता &#8230;]]></description>
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<p>नई दिल्ली। ज्योतिष के अनुसार सितंबर का महीना मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। इस दौरान कर्म और न्याय के देवता शनि की दृष्टि इन तीनों राशियों के स्वामी ग्रहों पर रहने की बात कही गई है। ऐसे में जातकों को धैर्य, सही निर्णय और कार्यकुशलता की परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।</p>



<p>ज्योतिषीय गणना के मुताबिक शनि की दृष्टि सिंह राशि के स्वामी सूर्य और मिथुन तथा कन्या राशि के स्वामी बुध पर रहने की बात कही गई है। इसके प्रभाव से इन राशियों के जातकों के जीवन में परिस्थितियों में बदलाव और कामकाज में रुकावट जैसी स्थिति बन सकती है। हालांकि ज्योतिषीय मान्यता है कि शनि कर्म प्रधान ग्रह हैं, इसलिए ईमानदारी और मेहनत से किए गए प्रयासों का अच्छा परिणाम भी मिल सकता है। वहीं आलस्य और केवल भाग्य के भरोसे रहने से नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।</p>



<p><strong>मिथुन राशि: जल्दबाजी में फैसला लेना पड़ सकता है भारी</strong></p>



<p>मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और सितंबर में बुध पर शनि की दृष्टि रहने की वजह से मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति बन सकती है। नौकरी या कारोबार से जुड़े मामलों में सहकर्मियों और अधिकारियों से बातचीत करते समय संयम रखना जरूरी होगा। कारोबारी मामलों में जल्दबाजी से लिया गया निर्णय परेशानी बढ़ा सकता है।</p>



<p>क्या सावधानी रखें: अपनी क्षमताओं पर भरोसा बनाए रखें और आसान रास्ते या किसी शॉर्टकट के बजाय मेहनत को प्राथमिकता दें। प्रयासों में मजबूती रहेगी तो सफलता की नींव भी मजबूत होगी।</p>



<p><strong>सिंह राशि: बढ़ सकता है काम का दबाव, अधिकारियों से तालमेल जरूरी</strong></p>



<p>सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। ज्योतिष में सूर्य और शनि के बीच शत्रुता मानी जाती है। ऐसे में सितंबर का समय सिंह राशि वालों के लिए धैर्य रखने वाला हो सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ काम का दबाव भी बढ़ सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।</p>



<p>मान-सम्मान से जुड़े मामलों में भी इस दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।</p>



<p>क्या सावधानी रखें: अहंकार से बचें और अपना ध्यान काम पर केंद्रित रखें। किसी नए जोखिम में केवल भाग्य के भरोसे कदम न बढ़ाएं, बल्कि अपनी मेहनत और क्षमता के आधार पर निर्णय लें।</p>



<p><strong>कन्या राशि: काम अटकने से बढ़ सकती है परेशानी, आर्थिक फैसलों में सावधानी</strong></p>



<p>कन्या राशि के स्वामी भी बुध हैं। सितंबर में बुध पर शनि की दृष्टि रहने से रोजमर्रा के काम और योजनाओं में देरी या रुकावट आने की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों से जुड़ा कोई भी फैसला सोच-विचार करने के बाद ही लेने की सलाह दी गई है।</p>



<p>इस दौरान फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। साथ ही अपनी सेहत को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।</p>



<p>क्या सावधानी रखें: आलस्य को खुद पर हावी न होने दें। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनि इस अवधि में निरंतरता और अनुशासन की परीक्षा ले सकते हैं। इसलिए लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में लगातार काम करते रहना बेहतर रहेगा।</p>



<p><strong>शनि के प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिषीय उपाय</strong></p>



<p>शनिवार को दान: हर शनिवार काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान करने की सलाह दी गई है।</p>



<p>पीपल की पूजा: शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।</p>



<p>हनुमान जी की उपासना: प्रतिदिन या मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे शनि से जुड़े कष्टों से राहत मिल सकती है।</p>



<p></p>
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		<title>जन्माष्टमी पर द्वापर जैसा नजारा, आधी रात मथुरा में गूंजे ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे; लाखों श्रद्धालु बने साक्षी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/a-dwapar-like-scene-on-janmashtami-lakhs-of-devotees-witnessed-the-chants-of-jai-kanhaiya-lal-ki-echoed-in-mathura-at-midnight/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 05:57:47 +0000</pubDate>
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<p><strong>मथुरा:</strong> भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव द्वापर युग की याद दिलाने वाला रहा। दिनभर हुई बारिश के बाद रात में भी आसमान में काली घटाएं छाई रहीं और बिजली चमकती रही। जैसे ही शुक्रवार रात घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, पूरा ब्रजमंडल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप, घंटे-घड़ियालों की ध्वनि और शंख-मृदंग की मंगलध्वनि के बीच घर-घर और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस अलौकिक दृश्य के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने।</p>



<p><strong>श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आधी रात हुआ जन्मोत्सव</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य आयोजन हुआ, जहां देर रात तक श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। रात 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू किया गया। इसके बाद रात 11.55 बजे तक कमल पुष्प और तुलसीदल से सहस्त्रार्चन किया गया। जैसे ही 11.59 बजे, भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद कर दिए गए। जन्म के इस एक मिनट के इंतजार ने श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ा दी।</p>



<p><strong>12 बजते ही हुआ लल्ला का अभिषेक</strong></p>



<p>रात ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किलोग्राम वजन की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल और पंचामृत भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया।</p>



<p><strong>ढोल-नगाड़ों और शंख की मंगलध्वनि से गूंजा जन्मस्थान</strong></p>



<p>भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही जन्मस्थान परिसर में उत्सव का माहौल और भव्य हो गया। ढोल-नगाड़ों और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि सुनाई देती रही। कान्हा के जन्म की खुशी में बधाई गीत गाए गए। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला रात 1.30 बजे तक जारी रहा।</p>



<p><strong>पहली बार मूल गर्भगृह से हुई लाइव स्ट्रीमिंग</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह यानी कारागार से अभिषेक और पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग भी कराई गई। गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण बाल-गोपाल स्वरूप में विराजमान हैं। अब तक लाइव प्रसारण केवल भागवत भवन से किया जाता रहा था, लेकिन इस बार शुक्रवार मध्यरात्रि को करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर मूल गर्भगृह से पूजा-अर्चना और अभिषेक का सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की ओर से अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए और डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।</p>



<p></p>
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		<title>आज बदलेगी 4 राशियों की किस्मत! नवपंचम राजयोग से मिलेगा धन लाभ, प्रमोशन और सफलता का जबरदस्त योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 05:54:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[5 सितंबर 2026 राशिफल]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-51-1-300x169.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-51-1-300x169.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-51-1-390x220.png 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-51-1.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की बदलती चाल और उनके विशेष संयोगों को जीवन में होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। आज यानी 5 सितंबर को ग्रहों की स्थिति के बीच एक विशेष नवपंचम राजयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह शुभ योग सुबह 10 बजे बनेगा और इसका निर्माण शुक्र तथा चंद्रमा के प्रभाव से हो रहा है। इस ग्रह संयोग को सुख-समृद्धि, कला और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है। माना जा रहा है कि इस विशेष योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ संकेत लेकर आ सकता है। इन राशियों में मेष, मिथुन, सिंह और तुला शामिल हैं।</p>



<p><strong>मेष राशि</strong></p>



<p>मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बना नवपंचम योग लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत हो सकती है और सहकर्मियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना जताई गई है। लंबे समय से अटके हुए प्रोजेक्ट्स में गति आ सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए कोई बड़ी डील या लाभ का अवसर सामने आ सकता है। आर्थिक मोर्चे पर राहत मिलने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना बताई जा रही है। पारिवारिक जीवन में भी खुशियों का माहौल रह सकता है और जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है।</p>



<p><strong>मिथुन राशि</strong></p>



<p>मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय सुख-सुविधाओं में वृद्धि के संकेत लेकर आ सकता है। समाज में मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई गई है। लोग आपके विचारों और कार्यशैली की सराहना कर सकते हैं। यदि आप किसी नए काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय अनुकूल माना जा रहा है। मित्रों और प्रियजनों का साथ मिलने से मानसिक प्रसन्नता भी बनी रह सकती है।</p>



<p><strong>सिंह राशि</strong></p>



<p>सिंह राशि के लोगों के लिए नवपंचम राजयोग आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और करियर में प्रगति के अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या मनचाही जगह स्थानांतरण की खुशखबरी मिलने की संभावना बताई जा रही है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है। आर्थिक मामलों में अप्रत्याशित सफलता के योग माने जा रहे हैं। निवेश से अच्छा लाभ मिलने और पुराने कर्जों से राहत मिलने की संभावना भी जताई गई है।</p>



<p><strong>तुला राशि</strong></p>



<p>तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह नवपंचम योग विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है और जीवन स्तर में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। विद्यार्थियों के साथ-साथ मीडिया, कला और ग्लैमर के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय सफलता के अवसर लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।</p>



<p>शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बन रहा यह नवपंचम राजयोग मेष, मिथुन, सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। करियर, व्यापार, आर्थिक स्थिति, मान-सम्मान और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को सामान्य मान्यताओं के रूप में देखा जाता है और किसी व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>Janmashtami 2026: 4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में होगा कान्हा का जन्म, जानें निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://dastaktimes.org/janmashtami-2026-janmashtami-will-be-celebrated-on-4th-september-kanha-will-be-born-in-rohini-nakshatra-know-the-auspicious-time-of-nishith-puja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:24:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="186" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-768x477.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी के साथ ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और रात में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="186" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-768x477.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी के साथ ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और रात में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी की तारीख क्या है?</strong></p>



<p>साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। दिनभर उपवास और भक्ति के बाद रात में भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा की जाएगी।</p>



<p>जन्माष्टमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं। कई जगह बाल गोपाल को पालने में झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है। रात करीब 12 बजे मंदिरों में जन्मोत्सव शुरू होता है और आरती के साथ भक्त भगवान के जन्म की खुशी मनाते हैं।</p>



<p><strong>मथुरा में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव?</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष भव्यता के साथ मनाया जाता है। यहां आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव आयोजित किया जाता है।</p>



<p>मथुरा के पंचांग के अनुसार निशीथ पूजा का शुभ समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी।</p>



<p>निशीथ काल को जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग</strong></p>



<p>इस बार जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व बताया गया है।</p>



<p>पंचांग गणना के अनुसार 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहने की जानकारी दी गई है। वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?</strong></p>



<p>जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक व्रत रखते हैं। मथुरा की गणना के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में व्रत खोलने के नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।</p>



<p><strong>5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव</strong></p>



<p>जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है।</p>



<p>दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है और गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं। वहीं ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंदोत्सव मनाने की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी पर क्या है खास?</strong></p>



<p>इस बार जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मथुरा-वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>



<p></p>
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		<title>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव: इस्कॉन मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों पर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/shri-krishna-janmashtami-mahamahotsav-preparations-for-krishna-janmashtami-in-full-swing-in-iskcon-temple/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[KP Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:14:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मेरठ]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ISKCON Temple Meerut]]></category>
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<p><strong>Meerut News: </strong>मेरठ में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एक यादगार के रूप में मनाए जाने की तैयारी है। इस्कॉन मंदिर, शास्त्रीनगर, मेरठ द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य श्री श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव -2026 का आयोजन बड़े स्तर पर करने जा रहा है।<br>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव का विशाल आयोजन 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को, ला फ्लोरा रिसोर्ट, गढ़ रोड, मेरठ में शाम 6:30 बजे से मध्यरात्रि 1:00 बजे तक होगा।<br><strong>जन्माष्टमी मनाने का उद्देश्य?<br></strong>श्रील प्रभुपाद जी के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान के साथ अपने भूले हुए संबंध को फिर से जागृत करने का अवसर है। भौतिक संसार में हम अपने परिजनों का जन्मदिन बड़े उत्साह से मनाते हैं, तो फिर समस्त सृष्टि के पालनहार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन क्यों न और भी अधिक धूमधाम से मनाया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक भगवान के दिव्य संदेश &#8211; प्रेम, भक्ति और धर्म को पहुंचाना है।<br><strong>महोत्सव के दिव्य आकर्षण</strong></p>



<p><strong>पंचामृत महा-अभिषेक &#8211; विशेष नियम</strong><br>यह महोत्सव का सबसे पवित्र क्षण होगा। रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के समय 5 पवित्र द्रव्यों जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शर्करा (गंगाजल मिश्रित) से अभिषेक किया जाएगा।<br>_अभिषेक का नियम यह है कि भक्तजन बारी-बारी से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान का अभिषेक करेंगे। मान्यता है कि इस अभिषेक में भाग लेने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सभी भक्तों को अभिषेक के लिए पारंपरिक वस्त्रों में आने का अनुरोध है।<br><strong>फूल बंगला दर्शन<br></strong>भगवान के लिए विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन से लाए गए ताजे फूलों और देशी-विदेशी फूलों से 30 फीट का भव्य फूल बंगला बनाया जाएगा, जिसमें भगवान अपने भक्तों को दर्शन देंगे।<br><strong>256 भोग का अन्नकूट महोत्सव<br></strong>भगवान को छप्पन भोग नहीं, बल्कि इस बार 256 प्रकार के शुद्ध सात्विक, लहसुन-प्याज रहित व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया जाएगा, जिसमें माखन-मिश्री, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां, नमकीन, फल और केक शामिल होंगे।<br><strong>दिव्य झूला उत्सव<br></strong>बाल गोपाल को सोने-चांदी से जड़ित सुंदर झूले में झुलाया जाएगा। सभी माताएं और भक्त भगवान को अपने हाथों से झूला झुला सकेंगे, जैसा नंद बाबा के घर में माता यशोदा करती थीं।<br>इस्कॉन मंदिर, मेरठ के अध्यक्ष ने मेरठ के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे सपरिवार इस महामहोत्सव में पधार कर भगवान के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाएं। प्रवेश निःशुल्क है। भक्तों के लिए महाप्रसाद की भी विशेष व्यवस्था रहेगी।<br>प्रेस वार्ता में इस्कॉन मंदिर शास्त्री नगर के काउंसिल मेंबर के रूप में नवीन गौर दास, चारु गोविंद दास, सव्यसाची दास, महाबाहु अर्जुन दास व अंकेश अग्रवाल, मीडिया प्रभारी के रूप में विपुल सिंघल व मयंक अग्रवाल उपस्थित रहे।</p>



<ol class="wp-block-list"></ol>
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		<title>द्वापर जैसा दुर्लभ संयोग लेकर आ रही जन्माष्टमी, 4 सितंबर को बनेंगे खास योग; इन 4 राशियों पर बरसेगी कान्हा की कृपा!</title>
		<link>https://dastaktimes.org/janmashtami-is-bringing-a-rare-coincidence-like-dwapar-special-yoga-will-be-formed-on-4th-september/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 05:45:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-768x464.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-768x464.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की मौजूदगी में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बनने की बात कही जा रही है।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे और रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का शुभ संयोग बनने वाला है। ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है, जबकि हर्षण योग को सुख और प्रसन्नता का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इन संयोगों का प्रभाव कुछ राशियों के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ रह सकता है।</p>



<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>



<p>जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे। इसके साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह स्थिति वृषभ राशि के जातकों के लिए शुभ परिणाम देने वाली हो सकती है।</p>



<p>लाभ की बात करें तो व्यक्तित्व में निखार आने और आत्मविश्वास बढ़ने के संकेत हैं। लंबे समय से रुकी योजनाओं में तेजी आ सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके फैसलों की सराहना हो सकती है और नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।</p>



<p><strong>सिंह राशि</strong></p>



<p>सिंह राशि के जातकों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का संयोग करियर और व्यापार के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता मिलने की संभावना है। कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।</p>



<p>मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो सकती है। सामाजिक स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ने के संकेत हैं। पैतृक संपत्ति या पुराने निवेश से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी जताई गई है।</p>



<p><strong>वृश्चिक राशि</strong></p>



<p>वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति वृश्चिक राशि के सप्तम भाव को प्रभावित करेगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इसका सकारात्मक असर दांपत्य जीवन और साझेदारी से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।</p>



<p>जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है और उनका सहयोग मिल सकता है। कारोबार में नए सौदे तय होने की संभावना है। इन सौदों से भविष्य में आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा भी वापस मिलने की संभावना जताई गई है।</p>



<p><strong>मकर राशि</strong></p>



<p>मकर राशि के जातकों के लिए रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग शुभ माना जा रहा है। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलने की संभावना है।</p>



<p>पारिवारिक जीवन में भी सुखद माहौल रहने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। परिवार में खुशी का वातावरण बना रह सकता है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी की रात करें ये उपाय</strong></p>



<p>ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय उनका पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें तुलसी पत्र के साथ माखन-मिश्री अर्पित करें।</p>



<p>रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में स्थित चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा बताई गई है। इसके साथ ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे जन्माष्टमी पर बनने वाले शुभ योगों का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>मंगल-बुध की लाभकारी युति से बदलेगा भाग्य, इन 4 राशियों को करियर-कारोबार में मिलेंगे बड़े मौके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:47:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Photo-3-1-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Photo-3-1-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Photo-3-1-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Photo-3-1.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मंगल और बुध के विशेष संबंध से लाभ-दृष्टि योग बनने जा रहा है, जिसे त्रिएकादश राजयोग भी कहा जाता है। मंगल को साहस, ऊर्जा और पराक्रम का कारक माना जाता है, जबकि बुध &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मंगल और बुध के विशेष संबंध से लाभ-दृष्टि योग बनने जा रहा है, जिसे त्रिएकादश राजयोग भी कहा जाता है। मंगल को साहस, ऊर्जा और पराक्रम का कारक माना जाता है, जबकि बुध बुद्धि, व्यापार और संवाद का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों ग्रहों का शुभ संबंध कुछ राशियों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे रहा है।</p>



<p><strong>मंगल-बुध का संबंध क्यों माना जा रहा खास?</strong><br>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ऊर्जा, साहस, नेतृत्व और कार्यक्षमता से जुड़ा ग्रह है। वहीं बुध बुद्धि, तर्क, संवाद, व्यापार और गणना का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में दोनों ग्रहों का विशेष संबंध व्यक्ति की निर्णय क्षमता, कार्यशैली और आर्थिक मामलों पर प्रभाव डाल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस योग का असर नौकरी, कारोबार, निवेश और आय से जुड़े मामलों में दिखाई दे सकता है। चार राशियों के जातकों के लिए यह अवधि खास तौर पर अनुकूल मानी जा रही है।</p>



<p><strong>मेष: आय बढ़ाने के बन सकते हैं नए रास्ते</strong><br>मेष राशि के जातकों के लिए मंगल-बुध का यह योग आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए साधन बनने से आर्थिक स्थिति में मजबूती आने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों को पदोन्नति, वेतन वृद्धि या नई जिम्मेदारी मिलने की खबर मिल सकती है।<br>लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने के भी योग बन सकते हैं। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ के अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि आर्थिक निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा।</p>



<p><strong>मिथुन: करियर में बढ़ेगी पहचान</strong><br>मिथुन राशि वालों के लिए मंगल-बुध का यह योग करियर के लिहाज से सकारात्मक बदलाव ला सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और काम करने के तरीके से वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित हो सकते हैं। आगे बढ़ने के नए अवसर मिलने की संभावना भी है।<br>पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। घर या संपत्ति से संबंधित कोई पुराना मामला सुलझने की दिशा में बढ़ सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास मजबूत रहने की संभावना है, जिससे महत्वपूर्ण फैसले लेने में मदद मिलेगी।</p>



<p><strong>सिंह: मेहनत का मिल सकता है पूरा लाभ</strong><br>सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में बेहतर रह सकता है। कार्यक्षेत्र में किए गए प्रयासों का उचित परिणाम मिलने और अलग पहचान बनने के योग हैं।<br>इस अवधि में लिए गए सही फैसले भविष्य की योजनाओं को नई दिशा दे सकते हैं। निवेश और आर्थिक योजनाओं में सोच-समझकर कदम उठाने से फायदा मिल सकता है। लगातार प्रयास करने वाले जातकों को अपनी मेहनत का लाभ मिलने की संभावना है। आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत रह सकती है।</p>



<p><strong>तुला: नौकरी और कारोबार में खुल सकते हैं नए रास्ते</strong><br>तुला राशि के जातकों के लिए मंगल-बुध का यह योग विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। कारोबार करने वालों को नए अवसर मिल सकते हैं। कोई महत्वपूर्ण समझौता या कारोबारी सौदा भविष्य में अच्छा लाभ दिला सकता है।<br>नौकरीपेशा लोगों के लिए भी करियर में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे लोगों को सकारात्मक खबर मिल सकती है। नई नौकरी तलाश रहे जातकों को अच्छा प्रस्ताव मिलने के योग हैं। अटका हुआ धन वापस आने और आय में बढ़ोतरी की संभावना भी है। इसके साथ ही सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।</p>



<p></p>
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