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	<title>अद्धयात्म &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>अद्धयात्म &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>सावधान इन 3 पेड़ों की परछाई से घर में बढ़ सकता है कलह और आर्थिक संकट</title>
		<link>https://dastaktimes.org/be-careful-the-shadow-of-these-3-trees-can-increase-discord-and-financial-crisis-in-the-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:33:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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<p>नई दिल्ली : सनातन परंपरा में प्रकृति को दिव्य शक्ति का स्वरूप माना गया है और पेड़ पौधों को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि घर में तुलसी और शमी जैसे पौधों को शुभ माना जाता है और उन्हें लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पेड़ पौधे केवल वातावरण को ही नहीं बल्कि जीवन की दिशा को भी प्रभावित करते हैं। जहां कुछ वृक्ष घर में सुख समृद्धि और शांति लाते हैं वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी छाया तक को अशुभ माना गया है।</p>



<p>वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि कुछ विशेष पेड़ों की छाया घर पर पड़ती है तो इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और परिवार में तनाव आर्थिक परेशानी तथा मानसिक अशांति जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इन पेड़ों को घर से उचित दूरी पर लगाना ही बेहतर माना जाता है।</p>



<p>सबसे पहले बात करें पीपल के पेड़ की तो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है और इसमें देवताओं का वास बताया गया है। पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों में इसका विशेष महत्व है लेकिन वास्तु के अनुसार इसकी छाया घर पर पड़ना अनुकूल नहीं माना जाता। इसकी ऊर्जा बहुत अधिक शक्तिशाली और आध्यात्मिक होती है जो गृहस्थ जीवन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। यदि इसकी परछाई घर पर पड़ती है तो परिवार के सदस्यों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।</p>



<p>दूसरा पेड़ है इमली जिसका स्वाद भले ही लोगों को पसंद आता हो लेकिन वास्तु में इसकी छाया को नकारात्मक माना गया है। मान्यता है कि इमली के पेड़ की छाया जिस घर पर पड़ती है वहां रहने वाले लोगों के बीच मतभेद बढ़ने लगते हैं। खासतौर पर पति पत्नी के रिश्तों में तनाव और तकरार की स्थिति पैदा हो सकती है। धीरे धीरे यह स्थिति परिवार के अन्य संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है और घर का माहौल अशांत हो जाता है।</p>



<p>तीसरी श्रेणी में आते हैं कांटेदार और दूधिया रस वाले पेड़ जैसे बबूल या कैक्टस। इन पेड़ों की प्रकृति ही कठोर और रक्षात्मक होती है इसलिए वास्तु में इन्हें घर के पास रखना उचित नहीं माना गया है। इनकी छाया घर पर पड़ने से नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच कटुता पैदा हो सकती है। इससे आपसी विश्वास कमजोर होता है और जीवन में असंतुलन की स्थिति बन सकती है।</p>



<p>यदि आपके घर के आसपास पहले से ऐसे पेड़ मौजूद हैं और उनकी छाया घर पर पड़ रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ सरल उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। सप्ताह में एक बार घर में गंगाजल का छिड़काव करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। इसके साथ ही रोज शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और घर सुरक्षित रहता है।</p>



<p>इसके अलावा घर में तुलसी का पौधा लगाना बेहद लाभकारी माना गया है। ध्यान रखें कि तुलसी पर इन अशुभ पेड़ों की सीधी छाया न पड़े। तुलसी का पौधा घर के वातावरण को संतुलित करता है और वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होता है।इस तरह थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से आप अपने घर को नकारात्मक प्रभावों से बचाकर सुख शांति और समृद्धि बनाए रख सकते हैं।</p>
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		<title>यह मंदिर किन्नर समाज के लिए है गहरी आस्था का केंद्र, जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/this-temple-is-a-center-of-deep-faith-for-the-kinnar-community-where-the-mother-rides-a-cock/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 08:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="195" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar-300x195.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar-300x195.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मेहसाणा : देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्‍यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य (Temple wonder) का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="195" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar-300x195.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar-300x195.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/kinar.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>मेहसाणा : देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्&#x200d;यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य (Temple wonder) का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज (temple wonder) की गहरी आस्था जुड़ी है. देश के कोने-कोने से यहां किन्नर पहुंचते हैं और बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. आइए बहुचरा माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं.</p>



<p>स्&#x200d;थानीय मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता ने एक साथ बहुत सारे राक्षसों का अंत किया था जिसके कारण देवी का नाम बहुचरा पड़ा. मंद&#x200d;िर में बहुत सारे मुर्गे घूमते है जिसके कारण मंदिर को मुर्गों वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती है. यह मंदिर किन्नरों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मंदिर को लेकर मान्&#x200d;यता है क&#x200d;ि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा कर माता का आशीर्वाद लेता है उसे अगले किसी भी जन्म में क&#x200d;िन्&#x200d;नर के रूप में नहीं जन्&#x200d;म लेना पड़ता. वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा भी देवी बहुचरा पूरी करती है. मान्यता है कि जब माता के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हो जाती है तो बच्चे के केश मंदिर में छोड़े जाती है और मंदिर में मुर्गों के दान भी किया जाता है.</p>
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		<title>बुध प्रदोष पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये खास चीज, चमक उठेगी किस्मत, कर्ज से भी मिलेगी मुक्ति</title>
		<link>https://dastaktimes.org/offer-this-special-thing-to-shivalinga-on-mercury-pradosh-luck-will-shine-and-you-will-also-get-freedom-from-debt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 08:31:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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<p>नई दिल्ली : प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन महादेव की पूजा-अर्चना करना अत्यंत ही फलदायी होता है। प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। प्रदोष व्रत का नाम सप्ताह के दिन के हिसाब से रखा जाता है और हर प्रदोष का अलग-अलग महत्व होता है। पुराणों में बताया गया है कि त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है उसके समस्त समस्याओं का शीघ्र समाधान निकल जाता है। वैशाख माह में प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा, इसलिए इसे बुध प्रदोष कहेंगे। बुध प्रदोष का व्रत करने से कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही आर्थिक परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है।बुध प्रदोष के दिन शिवलिंग पर इस खास को चढ़ाने से जातक को कई तरह के शुभ परिणाम मिलते हैं।</p>



<p>बुध प्रदोष के दिन शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये खास चीज<br>बुध प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर हरी मूंग चढ़ाना बहुत ही शुभ और लाभकारी माना गया है। प्रदोष के दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में शिवलिंग पर हरी मूंग अर्पित कर दें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं और नौकरी में भी तरक्की मिलती है।<br>शिवलिंग पर मूंग चढ़ाने से व्यापार में भी कई गुना अधिक मुनाफा मिलता है। इसके साथ ही धन-धान्य में भी वृद्धि होती है।<br>शिवलिंग पर मूंग चढ़ाने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।<br>वहीं शिवलिंग पर मूंग चढ़ाने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।</p>



<p>बुध प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त<br>त्रयोदशी तिथि प्रारंभ &#8211; अप्रैल 15, 2026 को 12:12 ए एम बजे<br>त्रयोदशी तिथि समाप्त &#8211; अप्रैल 15, 2026 को 10:31 पी एम बजे<br>प्रदोष पूजा मुहूर्त &#8211; 06:56 पी एम से 09:13 पी एम</p>
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		<title>गुरु गोचर 2026 का प्रभाव, कई राशियों के जीवन में उभरेंगे सफलता और समृद्धि के नए संकेत</title>
		<link>https://dastaktimes.org/impact-of-jupiter-transit-2026-new-signs-of-success-and-prosperity-will-emerge-in-the-lives-of-many-zodiac-signs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:33:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="215" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3-300x215.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3-300x215.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: जून 2026 में होने वाला गुरु (Jupiter) का महत्वपूर्ण गोचर (Transit) ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है। जब गुरु ग्रह कर्क राशि (Cancer Zodiac Sign) में प्रवेश करेगा, तब इसका असर कई राशियों के जीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। गुरु को ज्ञान, समृद्धि, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="215" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3-300x215.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3-300x215.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/2-3.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली: जून 2026 में होने वाला गुरु (Jupiter) का महत्वपूर्ण गोचर (Transit) ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है। जब गुरु ग्रह कर्क राशि (Cancer Zodiac Sign) में प्रवेश करेगा, तब इसका असर कई राशियों के जीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। गुरु को ज्ञान, समृद्धि, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका यह परिवर्तन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसरों और संभावनाओं को जन्म दे सकता है। विशेष रूप से मेष, वृषभ, कर्क और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय कई मायनों में अनुकूल संकेत दे रहा है।</p>



<p>मेष राशि के लोगों के लिए यह गोचर पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन में स्थिरता लेकर आ सकता है। लंबे समय से चली आ रही चिंताओं में कमी आएगी और मानसिक शांति का अनुभव होगा। आर्थिक मामलों में सुधार की संभावना है और नई योजनाओं पर कार्य करने का अवसर मिल सकता है। पारिवारिक सहयोग भी इस दौरान मजबूत रहेगा, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों को अधिक आत्मविश्वास के साथ प्राप्त कर सकेगा।</p>



<p>वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय संचार और संबंधों के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। कार्यस्थल पर आपकी बातों को महत्व मिलेगा और नए संपर्क आपके करियर को नई दिशा दे सकते हैं। छोटी यात्राएं लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं और नए अनुभव जीवन में उत्साह भर सकते हैं। आर्थिक रूप से भी स्थिति मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे भविष्य की योजनाओं को गति मिल सकती है।</p>



<p>कर्क राशि के लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गुरु का प्रवेश इसी राशि में हो रहा है। यह समय आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल रहेगा। समाज में मान सम्मान बढ़ सकता है और आपके कार्यों की सराहना होगी। जीवन के कई क्षेत्रों में संतुलन स्थापित करने का अवसर मिलेगा, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ सकेगा।</p>



<p>मकर राशि के जातकों के लिए यह गोचर संबंधों और साझेदारी के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी और व्यापारिक साझेदारी में भी लाभ के संकेत हैं। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में प्रगति हो सकती है और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने की संभावना है। यह समय धैर्य और समझदारी के साथ निर्णय लेने का संकेत देता है, जिससे भविष्य में स्थिरता प्राप्त की जा सके।</p>



<p>गुरु का यह गोचर केवल आर्थिक और व्यावसायिक ही नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। व्यक्ति अपने भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का अनुभव करेगा। जीवन में संतुलन और स्पष्टता आने से निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी और व्यक्ति अपने लक्ष्यों की ओर अधिक केंद्रित रह सकेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>वरूथिनी एकादशी : नारायण की आराधना का सर्वोत्तम दिन, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय</title>
		<link>https://dastaktimes.org/varuthini-ekadashi-note-down-the-best-day-to-worship-narayana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:48:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="240" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831-300x240.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831-300x240.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831.jpg 572w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी पड़ती है। इस वर्ष यह पवित्र व्रत 13 अप्रैल सोमवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 13 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 8 मिनट पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="240" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831-300x240.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831-300x240.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/202604123744831.jpg 572w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी पड़ती है। इस वर्ष यह पवित्र व्रत 13 अप्रैल सोमवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 13 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के आधार पर भक्त 13 अप्रैल को दिन भर व्रत रखेंगे। व्रत का पारण 14 अप्रैल को सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में किया जाएगा।</p>



<p>मान्यता है कि वरूथिनी एकादशी व्रत भक्तों को सभी प्रकार की बाधाओं और पापों से सुरक्षा (वरूथ) प्रदान करता है। मान्यता है कि इस दिन पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, सौभाग्य बढ़ता है व मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। पुराणों में कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत कई गुना पुण्य फल देता है।</p>



<p>बैशाख मास, कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सूर्योदय 5 बजकर 58 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। नक्षत्र धनिष्ठा शाम 4 बजकर 3 मिनट तक, उसके बाद शतभिषा रहेगा। योग शुभ शाम 5 बजकर 17 मिनट तक, करण बव दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।</p>



<p>वरूथिनी एकादशी पर शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 28 मिनट से 5 बजकर 13 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। साथ ही गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।</p>



<p>अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक, यमगंड सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार में 111 जेवरात, आज फिर खुलेगा 12वीं सदी का खजाना, होगी हर चीज की वीडियोग्राफी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/111-jewels-in-the-jewel-store-of-lord-jagannath-will-be-opened-again-today-the-treasure-of-12th-century-will-have-videography-of-everything/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:29:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भुवनेश्वर : पुरी (Puri) की सुबह में हमेशा एक दिव्यता होती है… समुद्र (Sea) की लहरों की आवाज, शंखनाद की गूंज, और जय जगन्नाथ के स्वर. भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार आज फिर खुल रहा है. यह प्रक्रिया करीब आधी सदी बाद शुरू हुई है. यह वह स्थान है, जहां सदियों से भगवान के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Jagannath.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>भुवनेश्वर : पुरी (Puri) की सुबह में हमेशा एक दिव्यता होती है… समुद्र (Sea) की लहरों की आवाज, शंखनाद की गूंज, और जय जगन्नाथ के स्वर. भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार आज फिर खुल रहा है. यह प्रक्रिया करीब आधी सदी बाद शुरू हुई है. यह वह स्थान है, जहां सदियों से भगवान के आभूषण, राजाओं के दान और अनगिनत भक्तों की आस्था सुरक्षित है. आखिरी बार 1978 में इस खजाने की गिनती हुई थी. उसके बाद समय बीतता गया, पीढ़ियां बदलती गईं, लेकिन रत्न भंडार अपने रहस्यों के साथ बंद ही रहा.</p>



<p>एजेंसी के अनुसार, मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की इन्वेंट्री का दूसरा चरण बुधवार को शुरू हुआ. यह 11 अप्रैल तक चलेगा. एक अधिकारी ने बताया कि इन्वेंट्री के सेकंड फेज में पहले दिन सात घंटे तक टीम ने काम किया.</p>



<p>रत्न भंडार समिति के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने बताया कि इन्वेंट्री का काम 9, 10 और 11 अप्रैल को होगा, जबकि इसके बाद के सत्र 13 अप्रैल को और फिर 16 से 18 अप्रैल तक होंगे. यह प्रक्रिया 48 साल में पहली बार हो रही है, जो 25 मार्च को शुरू हुई थी.</p>



<p>2026 में जब प्रशासन ने तय किया कि इस धरोहर को नई तकनीक से सुरक्षित किया जाए. खजाने के दरवाजे खुले… और मानो 12वीं सदी की परछाइयां बाहर झांकने लगीं. रत्न भंडार तक पहुंच हर किसी के लिए संभव नहीं. सिर्फ चुनिंदा लोग ही वहां जा सके- इनमें सेवायत, रत्न विशेषज्ञ, सुनार और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे. इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ और एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी.</p>



<p>1978 की सूची के अनुसार, रत्न भंडार में कुल 111 आभूषण दर्ज हैं. इनमें 78 सोने से मिश्रित गहने और 33 चांदी के आभूषण हैं. किसी आभूषण को किसी राजा ने दान किया होगा, किसी को किसी भक्त ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाया होगा. हर एक गहना, हर एक रत्न- एक कहानी है, जो सदियों से इस खजाने में सुरक्षित है.</p>



<p>इस बार की इन्वेंट्री में खास ध्यान उन आभूषणों पर है, जो सुनाबेशा के दौरान भगवान को पहनाए जाते हैं. रथ यात्रा के दौरान जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित होते हैं, तो वह एक परंपरा के साथ आस्था का उत्सव होता है.</p>



<p>हर आभूषण की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और 3D मैपिंग की जा रही है. मतलब अब यह खजाना डिजिटल रूप में भी सुरक्षित हो जाएगा. यह एक तरह से अतीत और भविष्य का संगम है, जहां 12वीं सदी की धरोहर 21वीं सदी की तकनीक से जुड़ रही है. इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव भी वहां पहुंचे. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. सबसे जरूरी है- सटीकता और पारदर्शिता.</p>



<p>इस खजाने को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. आंतरिक कक्ष- जहां सदियों पुराने और मूल्यवान आभूषण रखे हैं. दूसरा बाहरी कक्ष है, यहां त्योहारों में उपयोग होने वाले गहने रखे जाते हैं. वहीं तीसरी कैटेगरी में भगवान के रोजाना श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली चीजें शामिल हैं. पहले चरण में दैनिक उपयोग के गहनों की गिनती हो चुकी है. अब आज से सेकंड फेज में बाहरी कक्ष के खजाने की गिनती होगी.</p>



<p>रत्न भंडार की प्रक्रिया के दौरान मंदिर के सभी अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी हैं. श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें थोड़ी दूरी से ही भगवान के दर्शन करने पड़ रहे हैं. सेकंड फेज की यह प्रक्रिया 11 अप्रैल तक चलेगी.</p>



<p>यह सवाल हर किसी के मन में है. दरअसल, समय के साथ पारदर्शिता और संरक्षण की जरूरत बढ़ी है. 1978 के बाद पहली बार इस तरह का आधुनिक तकनीकों से इन्वेंटरी किया जा रहा है. अब सिर्फ यह जानना ही काफी नहीं कि क्या है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह कैसे सुरक्षित है, किस स्थिति में है, और आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचेगा.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बुध का मीन राशि में गोचर, 11 अप्रैल से बनेगा &#8216;नीचभंग राजयोग&#8217;, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत</title>
		<link>https://dastaktimes.org/transit-of-mercury-in-pisces-will-create-neechbhang-rajyoga-from-11th-april-luck-of-these-5-zodiac-signs-will-shine/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:35:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/75-3-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/75-3-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/75-3-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/75-3-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/75-3.jpg 1000w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : 11 अप्रैल 2026 को बुध ग्रह मीन राशि में प्रवेश करने जा रहा है. बुध मीन में 29 अप्रैल तक रहने वाले हैं. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, बोलचाल, व्यापार और निर्णय लेने की क्षमता का कारक माना जाता है. ऐसे में इसका यह गोचर कई राशियों के जीवन पर असर डाल &#8230;]]></description>
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<p>नई दिल्ली : 11 अप्रैल 2026 को बुध ग्रह मीन राशि में प्रवेश करने जा रहा है. बुध मीन में 29 अप्रैल तक रहने वाले हैं. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, बोलचाल, व्यापार और निर्णय लेने की क्षमता का कारक माना जाता है. ऐसे में इसका यह गोचर कई राशियों के जीवन पर असर डाल सकता है. खास बात यह है कि मीन राशि में बुध कमजोर स्थिति में माना जाता है, लेकिन इस बार कुछ खास योग बन रहे हैं, जो इसके नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं.</p>



<p>इस दौरान गुरु ग्रह की स्थिति के कारण नीचभंग राजयोग बन रहा है. इसका मतलब है कि भले ही बुध अपनी कमजोर राशि में हो, लेकिन अच्छे ग्रहों का साथ मिलने से इसके शुभ परिणाम मिल सकते हैं. इसके साथ ही अन्य ग्रहों की स्थिति भी मिलकर कुछ सकारात्मक योग बना रही है, जिससे कई लोगों को फायदा हो सकता है. जानते हैं वो कौन सी राशियां हैं जिनपर यह समय खास तौर पर अच्छा रहने वाला है</p>



<p>वृषभ &#8211; वृषभ राशि के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है. आय बढ़ने के योग बनेंगे . परिवार का सहयोग भी मिलेगा. मिथुन राशि वालों के लिए करियर में तरक्की के संकेत हैं. उन्हें काम में सम्मान और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं.</p>



<p>कर्क- कर्क राशि के लोगों को विदेश से जुड़े अवसर मिल सकते हैं . समाज में उनकी पहचान मजबूत हो सकती है. वहीं कन्या राशि के जातकों को प्रमोशन या सैलरी बढ़ने जैसी खुशखबरी मिल सकती है. उनकी मेहनत का पूरा फल मिलने के संकेत हैं.</p>



<p>मीन- मीन राशि के लिए यह गोचर मिलाजुला असर लेकर आएगा. एक तरफ करियर में नए मौके मिल सकते हैं , आय बढ़ सकती है, तो दूसरी तरफ रिश्तों में थोड़ी उलझन या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसलिए इस समय धैर्य और समझदारी से काम लेना जरूरी होगा.</p>



<p>हालांकि कुछ स्थितियों में संचार से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. गलतफहमियां बढ़ सकती हैं या बातों को सही तरीके से समझने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए इस समय सोच-समझकर बोलना और निर्णय लेना बहुत जरूरी होगा.</p>



<p>कुल मिलाकर, बुध का यह गोचर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. सही प्रयास और संतुलित व्यवहार से लोग इस समय का अच्छा लाभ उठा सकते हैं. यह समय समझदारी, धैर्य और सही निर्णय लेने का है, जिससे जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>कालाष्टमी 2026, 10 अप्रैल को रखा जाएगा व्रत, शनि-राहु के दोषों से मुक्ति दिलाएगी काल भैरव की पूजा</title>
		<link>https://dastaktimes.org/kalashtami-2026-fast-will-be-observed-on-10th-april-worship-of-kaal-bhairav-u200bu200bwill-provide-relief-from-the-evils-of-shani-rahu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:34:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3.jpg 1000w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि काल भैरव की उपासना से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, भय खत्म होता है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/74-3.jpg 1000w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि काल भैरव की उपासना से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, भय खत्म होता है और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है. वैशाख मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल रात 9 बजकर 18 मिनट से होगी और इसका समापन 10 अप्रैल रात 11 बजकर 14 मिनट पर होगा. उदयातिथि और गृहस्थ जीवन को ध्यान में रखते हुए कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखना उचित माना जा रहा है.</p>



<p>कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है. जो लोग मानसिक तनाव, डर या किसी अनजाने भय से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह व्रत काफी लाभकारी माना गया है. साथ ही, काल भैरव की कृपा से शत्रुओं से रक्षा होती है और जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है. ऐसा भी कहा जाता है कि कालाष्टमी का व्रत करने से पूर्व जन्म के पापों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-शांति आती है.</p>



<p>इस बार की कालाष्टमी ज्योतिष के लिहाज से भी खास मानी जा रही है. इस दिन शनि मीन राशि में अस्त हो रहे हैं, जबकि राहु कुंभ राशि में स्थित हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन दोनों ग्रहों का सीधा असर व्यक्ति के मन, सोच और जीवन की दिशा पर पड़ता है. ऐसे में काल भैरव की पूजा करने से शनि और राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है. इससे मानसिक स्थिरता मिलती है और भ्रम व तनाव में कमी आती है.</p>



<p>कालाष्टमी के दिन पूजा की शुरुआत सुबह से ही कर देनी चाहिए. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद घर में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें. माना जाता है कि काल भैरव भगवान शिव के ही अंश हैं, इसलिए शिव पूजा का विशेष महत्व होता है.</p>



<p>रात के समय काल भैरव की पूजा करना अधिक शुभ माना जाता है. इसके लिए रात 9 बजे से 11 बजे के बीच का समय उपयुक्त रहता है. जरूरी नहीं कि पूजा आधी रात को ही की जाए, आप अपने अनुसार इस समय के बीच कभी भी पूजा शुरू कर सकते हैं. पूजा करते समय सबसे पहले गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें, फिर तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद फूल चढ़ाएं और दीपक जलाकर आरती करें. पहले भगवान शिव की आरती करें और फिर काल भैरव की आरती करें. यदि समय हो तो शिव चालीसा और भैरव चालीसा का पाठ भी करना लाभकारी माना जाता है.</p>



<p>काल भैरव की पूजा में कुछ विशेष चीजों का अर्पण करना शुभ माना जाता है. इसमें काला उड़द, सरसों का तेल, कच्चा दूध और मीठी रोटी शामिल हैं. कच्चे दूध से अभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है. इसके अलावा काल भैरव की सवारी कुत्ता मानी जाती है, इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना भी बहुत शुभ माना जाता है.</p>



<p>कालाष्टमी के दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन दूध, काले कपड़े, सरसों का तेल, जूते-चप्पल और भोजन सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है. हालांकि, दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए.</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत और पूजा करने से जीवन के कई कष्ट दूर हो सकते हैं. इससे रोगों में राहत मिलती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और भय खत्म होता है. साथ ही, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में भी मदद मिलती है और व्यक्ति का जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>लिविंग रूम में लगाएं ये 4 खास तस्वीरें, वास्तु दोष होगा दूर और घर में आएगी सुख-समृद्धि</title>
		<link>https://dastaktimes.org/put-these-4-special-pictures-in-the-living-room-vastu-defects-will-go-away-and-happiness-and-prosperity-will-come-in-the-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:30:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="187" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-300x187.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-300x187.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-768x478.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4.jpg 1000w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : वास्तुशास्त्र में लिविंग रूम में कुछ तस्वीरों को लगाना बहुत शुभ माना जाता है। अगर घर में छोटी-छोटी बातों पर बहस होती हो, माहौल अशांत हो या तनाव बना रहता हो तो इसके लिए वास्तु में सरल उपाय बताए गए हैं। मान्यता है कि लिविंग रूम में पहाड़, झरना सहित कुछ तस्वीरों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="187" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-300x187.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-300x187.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4-768x478.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/81-4.jpg 1000w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : वास्तुशास्त्र में लिविंग रूम में कुछ तस्वीरों को लगाना बहुत शुभ माना जाता है। अगर घर में छोटी-छोटी बातों पर बहस होती हो, माहौल अशांत हो या तनाव बना रहता हो तो इसके लिए वास्तु में सरल उपाय बताए गए हैं। मान्यता है कि लिविंग रूम में पहाड़, झरना सहित कुछ तस्वीरों को लगाने से आसपास का माहौल पॉजिटिव होने लगता है और इन्हें देखकर प्रसन्नता व शांति महसूस होती है। ऐसे में अपने लिविंग रूम की सजावट करते समय वास्तु के अनुसार कुछ तस्वीरें जरूर लगानी चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए विस्तार से जानें कि वास्तु अनुसार लिविंग रूम में कौन-कौन सी तस्वीरें लगाना शुभ होता है।</p>



<p>आप अपने लिविंग रूम की दीवार पर भागते हुए सात सफेद घोड़ों की तस्वीर या पेंटिंग लगा सकते हैं। मान्यता है कि ये तस्वीर प्रगति, तरक्की और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। ऐसे में इसे घर में लगाने से गुड लक आ सकता है। इसे उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। अगर ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व दिशा में भी सात घोड़ों की तस्वीर लगा सकते हैं। तस्वीर के बैकग्राउंड में समुद्र और शांति दिखाने वाला मौसम होना चाहिए। इस प्रकार की तस्वीर को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती और आसपास का माहौल भी पॉजिटिव बना रहता है।</p>



<p>वास्तुशास्त्र के अनुसार, लिविंग रूम में प्राकृतिक दृश्य की तस्वीर लगाना भी शुभ होता है। इसमें सूर्योदय, पहाड़, नदी आदि की पेंटिंग लगाना अच्छा माना जाता है। ऐसी तस्वीरें मनमोहक होती हैं जिन्हें देखकर मन भी प्रसन्न रहता है और इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। इसके अलावा, आप रंग-बिरंगे फूलों की तस्वीर भी लिविंग रूम में लगा सकते हैं। मान्यता है कि ऐसी तस्वीरों को लगाने से उत्साह में वृद्धि होती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। ऐसी पेंटिंग मन को शांत करती है। साथ ही, आसपास का माहौल भी अच्छा बनाए रखने में सहायक हो सकती है।</p>



<p>अपने घर के लिविंग रूम में आप तैरती हुई मछलियों की तस्वीर भी लगा सकते हैं। इसे घर में लगाना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, फिश पेंटिंग को उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व दिशा में भी यह तस्वीर लगा सकते हैं। मान्यता है कि तैरती हुई मछलियां जीवंतता का सूचक होती हैं। ऐसे में इसे घर में लगाना लाभदायी माना जाता है। इससे घर में पॉजिटिविटी आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है।</p>



<p>वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए लिविंग रूम में झरने, समुद्र, बहते पानी आदि तस्वीरें लगाना बहुत अच्छा होता है। शांति से बहते पानी की तस्वीर को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में घर का माहौल खुशनुमा और पॉजिटिव बनाए रखने के लिए इन पेंटिंग को लिविंग रूम में लगा सकते हैं। इससे मन शांत करने में मदद मिलती है और घर से नेगेटिविटी भी दूर रह सकती है। हालांकि, इन तस्वीरों को सही दिशा और स्थान पर लगाना भी आवश्यक होता है। साथ ही, कोई भी तस्वीर लिविंग रूम में लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।</p>



<p>वास्तुशास्त्र के अनुसार, लिविंग रूम में कुछ तस्वीरों को लगाना बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन साथ ही, कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है। लिविंग रूम में कभी भी ऐसी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए जो क्रोध, युद्ध, शोक आदि से संबंधित हों। इसका प्रतिकूल प्रभाव के घर के माहौल पर पड़ सकता है। ऐसे में हमेशा लिविंग रूम में ऐसी तस्वीर लगाएं जो प्रसन्नता, शांति, खुशहाली आदि को दिखाती हों और उन्हें देखकर मन प्रसन्नता महसूस करें।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर बन रहे ‘अक्षय योग’ से इन राशियों की चमकेगी किस्‍मत, खुलेगा धन और तरक्की का द्वार</title>
		<link>https://dastaktimes.org/due-to-akshay-yoga-being-formed-on-akshaya-tritiya-the-luck-of-these-zodiac-signs-will-shine-and-the-door-to-wealth-and-progress-will-open/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:39:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : ज्योतिष शास्त्र में अक्षय योग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है- जो कभी समाप्त न हो। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का फल लंबे समय तक बना रहता है। यह विशेष योग तब बनता है जब सूर्य और चंद्रमा अपनी-अपनी उच्च &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p3-7.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : ज्योतिष शास्त्र में अक्षय योग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है- जो कभी समाप्त न हो। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का फल लंबे समय तक बना रहता है। यह विशेष योग तब बनता है जब सूर्य और चंद्रमा अपनी-अपनी उच्च राशियों में स्थित होते हैं।</p>



<p>द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे अक्षय तृतीया के दिन यह शुभ योग बन रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस योग का प्रभाव कई राशियों के जीवन में धन, सफलता और समृद्धि लेकर आएगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आइए जानते हैं किन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ।</p>



<p>मेष राशि (Aries)<br>मेष राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास और प्रगति लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में लाभदायक साबित होंगी। नौकरीपेशा लोगों के प्रमोशन के योग हैं, वहीं व्यवसाय में भी अच्छे अवसर मिल सकते हैं। निवेश के फैसले आपके पक्ष में रहेंगे।</p>



<p>वृषभ राशि (Taurus)<br>वृषभ राशि वालों के लिए यह योग सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जमीन, मकान या वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है। परिवार का सहयोग मिलेगा और हर काम में सफलता के संकेत हैं।</p>



<p>सिंह राशि (Leo)<br>सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला रहेगा। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होंगे। व्यापारियों को बड़ी डील या नए अवसर मिल सकते हैं, जिससे भविष्य में लगातार लाभ होने की संभावना है।</p>



<p>वृश्चिक राशि (Scorpio)<br>वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से शुभ रहेगा। अचानक धन लाभ हो सकता है और पुराने निवेश से भी फायदा मिलेगा। विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।</p>
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