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	<title>व्यापार &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>व्यापार &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>होर्मुज स्ट्रेट पर टोल टैक्स की चर्चा शुरू, क्‍या भारत से 20 लाख डॉलर वसूलेगा ईरान ? सरकार ने दिया जवाब</title>
		<link>https://dastaktimes.org/discussion-on-toll-tax-on-strait-of-hormuz-started-will-iran-collect-20-lakh-dollars-from-india-government-replied/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:33:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p5-9-300x225.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p5-9-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/p5-9.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों (Ships) पर कथित तौर पर भारी शुल्क (Charge) लगाए जाने की खबरों के बीच ईरान (Iran) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से करीब 20 लाख &#8230;]]></description>
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<p>नई दिल्ली : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों (Ships) पर कथित तौर पर भारी शुल्क (Charge) लगाए जाने की खबरों के बीच ईरान (Iran) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर तक का टोल वसूल सकता है। हालांकि, भारत सरकार ने इन अटकलों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है।</p>



<p>सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत और ईरान के बीच इस तरह के किसी टोल या शुल्क को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस विषय पर पूछे गए सवालों के बावजूद दोनों देशों के बीच ऐसा कोई समझौता या चर्चा नहीं हुई है। सरकार ने साफ किया कि फिलहाल ऐसी खबरें सिर्फ अटकलों पर आधारित हैं।</p>



<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। कहा जा रहा है कि यह प्रस्ताव संसद स्तर पर चर्चा में है और इसे औपचारिक मंजूरी भी मिल सकती है। यह शुल्क प्रति जहाज लाखों डॉलर तक हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>



<p>कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस समुद्री मार्ग पर ईरान और ओमान दोनों शुल्क वसूल सकते हैं। माना जा रहा है कि युद्धविराम और हालिया समझौतों के बाद इस क्षेत्र में नियंत्रण व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया जा सकता है, जिससे ईरान को राजस्व का नया स्रोत मिल सके।</p>



<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अगर यहां किसी तरह का ट्रांजिट शुल्क लागू होता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागत पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत को भी प्रभावित कर सकता है।</p>



<p>संघर्ष के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी। इनमें भारत का नाम भी शामिल बताया गया था। उस समय भारतीय जहाजों ने सुरक्षित रूप से तेल और एलपीजी की आपूर्ति जारी रखी थी।</p>



<p>अभी स्थिति पर निगाहें टिकीं<br>फिलहाल इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की फीस या टोल को लेकर ईरान के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।</p>
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		<title>छोटे और मध्यम उद्योग संकट में, ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित</title>
		<link>https://dastaktimes.org/firozabad-glass-industry-also-affected-due-to-iran-war-in-small-and-medium-industries-crisis/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:15:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="194" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-300x194.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-300x194.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-768x496.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : फिरोजाबाद में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="194" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-300x194.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-300x194.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2-768x496.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/0000000000000000000-2.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : फिरोजाबाद में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे देश की कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित कर रहा है।</p>



<p>बेंगलुरु की कंपनी Mossant Craft Kombucha के को-फाउंडर शिशिर साथ्यान पिछले एक महीने से अपने प्रीमियम ड्रिंक्स के लिए कांच की बोतलें जुटाने में परेशान हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब कांच के फ्लास्क मिल ही नहीं रहे हैं, जबकि गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक की मांग सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती लागत को संभालने के लिए कंपनी अब मार्केटिंग और डिस्काउंट बजट में कटौती करने पर मजबूर हो गई है।</p>



<p>देश में कांच की कमी की सबसे बड़ी वजह गैस संकट है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरों की ओर मोड़ दी है। इसका सीधा असर कांच बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है, जो गैस पर निर्भर होते हैं।</p>



<p>पिछले 400 साल से कांच उद्योग का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है। यहां के कारखाने नेचुरल गैस से चलते हैं। कांच बनाने की भट्टियां 1500°C तापमान पर लगातार चलती रहती हैं। अगर ये ठंडी पड़ जाएं तो दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का खर्च लगता है।</p>



<p>गैस सप्लाई कम होने के कारण कई कंपनियों को उत्पादन 50% तक घटाना पड़ा है। कांच की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और विस्तार योजनाएं रोक दी गई हैं। ग्लोबल कंपनियों को सप्लाई करने वाले उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं।</p>



<p>कांच की कमी का असर सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं है। दूध की बोतलें, जैम के जार, दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, सबकी सप्लाई प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत 30% तक बढ़ानी पड़ी है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल को उम्मीद है कि कांच उत्पादन में यह रुकावट महीनों तक चलेगा। उनका कहना है, “अगर युद्ध एक सप्ताह बढ़ता है, तो हमारा कारोबार एक महीने के लिए गड़बड़ा जाता है। इसका मतलब है कि अभी अगले चार महीने बिगड़ चुके हैं।”</p>



<p>भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लगभग 50% नेचुरल गैस आयात होती है। करीब 40% LNG सिर्फ कतर से आता है। LPG का लगभग 90% आयात मिडिल-ईस्ट से होता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।</p>



<p>रेस्टोरेंट और शादी सीजन भी प्रभावित: गैस की कमी का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस भी LPG की कमी से जूझ रहे हैं। इसका असर शादी सीजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख रहा है।</p>



<p>जल्दी राहत की उम्मीद कम: हालांकि सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि अगर युद्ध एक हफ्ता भी बढ़ता है, तो इसका असर कई महीनों तक चलता है।</p>
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		<item>
		<title>रूस द्वारा 40% सस्ती LNG से भारत में एनर्जी कॉस्ट और महंगाई में कमी आ सकती</title>
		<link>https://dastaktimes.org/40-cheaper-lng-from-russia-can-reduce-energy-cost-and-inflation-in-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 08:54:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="156" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/9A_226-300x156.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/9A_226-300x156.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/9A_226-768x400.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/9A_226.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : Russian Gas: रूस द्वारा 40% सस्ती LNG से भारत में एनर्जी कॉस्ट और महंगाई कम हो सकती है। हालांकि, इसके साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। आइए जरा विस्तार से रशियन गैस (Russian Gas) के फायदे और नुकसान को समझते हैं। दुनिया में इस वक्त एनर्जी की समस्या &#8230;]]></description>
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<p>नई दिल्ली : Russian Gas: रूस द्वारा 40% सस्ती LNG से भारत में एनर्जी कॉस्ट और महंगाई कम हो सकती है। हालांकि, इसके साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। आइए जरा विस्तार से रशियन गैस (Russian Gas) के फायदे और नुकसान को समझते हैं। दुनिया में इस वक्त एनर्जी की समस्या अपने चरम पर है। इसके बीच रूस (Russia) से एक बड़ी खुशखबरी आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने एशियाई देशों को सस्ती गैस (Russian Gas) का बड़ा ऑफर दिया है, जिसने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। रूस अपनी प्रतिबंधित एलएनजी (Liquefied Natural Gas- LNG) सप्लाई को करीब 40% तक की भारी छूट पर बेचने की कोशिश कर रहा है, खासकर भारत और दक्षिण एशिया जैसे देशों को, जहां ऊर्जा की भारी मांग और खपत है। यह ऑफर ऐसे समय आया है, जब स्टेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव और कतर (Qatar) के एलएनजी प्लांट पर हमलों के कारण वैश्विक गैस सप्लाई का करीब 20% प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।</p>



<p>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी गैस को सस्ते दाम पर बेचकर नए खरीदार तलाश रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ बिचौलियों के जरिए यह भी दावा किया जा रहा है कि कागजी तौर पर इन शिपमेंट्स को ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों से आया दिखाया जा सकता है, ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके। हालांकि, इस तरह के ऑफर में कानूनी और कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। भारत और बांग्लादेश जैसे देशों पर इस संकट का सीधा असर पड़ा है। भारत (India) को अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ रही है, जबकि बांग्लादेश को तो अपनी उर्वरक (fertilizer) सेक्टर में गैस सप्लाई तक कम करनी पड़ी है। ऐसे में रूस का सस्ता ऑफर इन देशों के लिए आकर्षक जरूर है, लेकिन वे अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए सतर्क रुख अपना रहे हैं। रूस के लिए यह रणनीति अपने निर्यात को बढ़ाने और नए बाजार बनाने का एक तरीका है, खासकर तब जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण उसके रेगुलर बॉयर कम हो गए हैं। फिलहाल चीन (China) ही एक बड़ा देश है, जो इस तरह की प्रतिबंधित गैस खरीद रहा है, जबकि बाकी देश अभी दूरी बनाए हुए हैं।</p>



<p>अगर भारत (India) रूस से यह सस्ती LNG गैस खरीदता है, तो इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है। इस फैसले से कुछ फायदे भी होंगे और कुछ जोखिम भी हो सकता है। फायदे की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर आम जनता और इंडस्ट्री को मिल सकता है। गैस 40% तक सस्ती हो सकती है और देश की ऊर्जा लागत घट सकती है, जिससे बिजली उत्पादन, उर्वरक (fertilizer) और सीएनजी/पीएनजी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई को काबू करने में भी मदद मिलेगी और सरकार के सब्सिडी खर्च में राहत मिल सकती है। खासकर गैस आधारित उद्योगों और बिजली कंपनियों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है।</p>



<p>हालांकि, इसके साथ बड़ा जोखिम भी जुड़ा है। रूस की यह गैस अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आती है, इसलिए अगर भारत इस तरह की खरीद करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव या संभावित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इससे भारत के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।</p>
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		<title>सोना-चांदी में गिरावट से बाजार में हलचल, चांदी ₹3300 टूटी, 24 कैरेट गोल्ड भी फिसला</title>
		<link>https://dastaktimes.org/market-stirred-due-to-fall-in-gold-and-silver-silver-fell-by-%e2%82%b93300/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 10:52:34 +0000</pubDate>
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<p>कमोडिटी बाजार में गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे हाल के दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया है। वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के दबाव के चलते कीमती धातुओं में नरमी देखने को मिली है। ऐसे में बाजार पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह अहम संकेत माना जा रहा है।</p>



<p><strong>चांदी में तेज गिरावट, एक दिन में ₹3300 तक टूटी</strong></p>



<p>मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी करीब 2 प्रतिशत गिरकर ₹2,35,133 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एक ही दिन में लगभग ₹3,300 की गिरावट को बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से चांदी की कीमतों पर दबाव बना।</p>



<p><strong>सोने की कीमत भी आई नीचे</strong></p>



<p>सोने के भाव में भी गिरावट देखने को मिली। 24 कैरेट सोना मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर ₹500 टूटकर ₹1,51,272 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि गिरावट सीमित रही, लेकिन यह बाजार में बनी अनिश्चितता को दर्शाती है।</p>



<p><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर</strong></p>



<p>वैश्विक बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में रहे। स्पॉट सिल्वर गिरकर 73.83 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि सोना लगभग 4,715 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता रहा। डॉलर की मजबूती और निवेशकों की सतर्कता का सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है।</p>



<p><strong>निवेशकों के लिए संकेत क्या हैं</strong></p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। आगे वैश्विक आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक हालात सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ की नई उड़ान: ओम पावर ट्रांसमिशन आईपीओ से बढ़ाएगी रफ्तार</title>
		<link>https://dastaktimes.org/new-flight-of-infrastructure-growth-will-increase-pace-with-om-power-transmission-ipo/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[DN VERMA]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:48:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="143" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-300x143.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-300x143.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-1024x490.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-768x367.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-1536x734.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/1001497280-2048x979.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<h3 class="wp-block-heading">ओम पावर का आईपीओ लॉन्च, पावर सेक्टर में निवेश का सुनहरा मौका, पावर सेक्टर में नई हलचल: ओम पावर का आईपीओ खुलने को तैयार</h3>



<p>&#8211;<strong>मुंबई (अनिल बेदाग)</strong></p>



<p>पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सक्रिय ओम पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड अब पूंजी बाजार में अपनी मजबूत दस्तक देने जा रही है। कंपनी का आईपीओ 9 अप्रैल 2026 को खुलकर 13 अप्रैल तक निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा, जबकि एंकर निवेशकों की बोली 8 अप्रैल को पूरी हो चुकी है। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी ) सेवाओं के जरिए पहचान बना चुकी यह कंपनी अपने विस्तार की नई दिशा में कदम रख रही है। ₹166 से ₹175 प्रति शेयर के प्राइस बैंड और 85 शेयरों के लॉट साइज के साथ यह आईपीओ खास तौर पर रिटेल और संस्थागत दोनों निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।</p>



<p>करीब ₹150 करोड़ के इस इश्यू में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल दोनों शामिल हैं, जिससे कंपनी अपने बिजनेस को और मजबूती देने की योजना बना रही है। जुटाई गई राशि का उपयोग नई मशीनरी, कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल और कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। कंपनी के चेयरमैन कल्पेश धनजीभाई पटेल के अनुसार, यह आईपीओ न सिर्फ वित्तीय मजबूती देगा, बल्कि बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स में भागीदारी बढ़ाने का रास्ता भी खोलेगा। ऐसे में पावर सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी में यह इश्यू एक अहम कड़ी बन सकता है।</p>
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		<item>
		<title>समुद्र में शुरू हो सकता है अब नया वॉर, हॉर्मुज़ बना बड़ी वजह</title>
		<link>https://dastaktimes.org/now-a-new-war-can-start-in-the-sea-hormuz-became-a-big-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:03:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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<p>नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के उस प्लान से दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर लेवी (टैक्स) लगाने की बात कही जा रही है. जानकारों का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को स्थायी टोल बूथ में बदलने जैसा होगा. हालांकि होर्मुज स्ट्रेट ओमान और ईरान के समुद्री क्षेत्र में आती है. इससे सबसे बड़ा खतरा यह है कि होर्मुज में टैक्स लगते ही दुनिया के दूसरे समुद्री रास्तों पर भी यही मिसाल लागू हो सकती है और यह एक ‘टैक्स वॉर’ में बदल सकता है.</p>



<p>होर्मुज कोई साधारण जलमार्ग नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट है. यह UNCLOS के दायरे में आती है. UNCLOS के तहत सभी देशों के जहाजों को ट्रांजिट पैसेज (बिना रोक-टोक गुजरने) का अधिकार है. यह अधिकार बिना किसी टैक्स के मिलता है. यानी होर्मुज पर टोल लगाने का मतलब अंतरराष्ट्रीय कानून को सीधी चुनौती देना हो सकता है.</p>



<p>दुनिया में ऐसे कई और समुद्री रास्ते हैं, जहां ईरान के इस कदम के बाद टैक्स लगना शुरू हो सकता है. इनमें मलक्का स्ट्रेट जो मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर के बीच आती है. अगर इसपर ये देश लेवी लेने लगे तो, एशिया की सप्लाई चेन चरमरा जाएगी. वहीं बाब-अल-मंदेब जो यमन और जिबूती के बीच और पहले से अस्थिर है. वहीं तुर्की के पास भी बोस्पोरस स्ट्रेट रूप में ऐसा रास्ता है, जहां वह कंट्रोल कर सकता है. इसके अलावा स्वेज नहर में मिस्र पहले से टोल लेता, क्योंकि ये नहर मानव निर्मित इसलिए टोल कानूनी है. लेकिन होर्मुज में टोल लगने के बाद मिस्र भी स्वेज का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ईपीएफओ 3.0 के तहत कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, आइए जानते हैं</title>
		<link>https://dastaktimes.org/many-big-changes-are-going-to-happen-under-epfo-u200bu200b30-let-us-know/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:58:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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<p>नई दिल्&#x200d;ली : अक्&#x200d;सर ईपीएफओ (EPFO) सर्विसेज को लेकर कर्मचारियों की शिकायत देखी गई है कि उन्&#x200d;हें क्&#x200d;लेम (Claim) करने में देरी होती है, ज्&#x200d;यादा पेपरवर्क और कंपनी (Company) के ऊपर ज्&#x200d;यादा निर्भरता रहती है. इन्&#x200d;हीं सभी परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार (Government) EPFO 3.0 लेकर आ रही है, जो जल्&#x200d;द ही लॉन्&#x200d;च हो सकता है, जिसके बाद PF का एक्&#x200d;सेस पूरी तरह से आसान हो जाएगा.</p>



<p>आपका क्&#x200d;लेम फटाफट सेटल होगा, पेपरवर्क बहुत कम हो जाएगा और नियोक्&#x200d;ता पर निर्भरता भी घट जाएगी. आप आसानी से ATM और UPI की मदद से पैसे की निकासी कर सकते हैं. EPFO 3.0 खासतौर पर कर्मचारी भविष्&#x200d;य निधि संगठन के सिस्&#x200d;टम का एक डिजिटल अपडेट है, जो मैन्&#x200d;युअल काम को कम करने और लाखों कस्&#x200d;टमर्स के लिए सर्विस डिस्&#x200d;ट्रीब्&#x200d;यूशन में सुधार करने के लिए डिजाइन किया गया है. आने वाले महीनों में इसको पूरी तरह से चालू किया जा सकता है, जिसमें से कई सुविधाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं और अन्&#x200d;य पर काम चल रहा है.</p>



<p>सबसे बड़े बदलावों में से एक दावा क्&#x200d;लेम सेटलमेंट को लेकर है. ईपीएफओ ने दावों के ऑटो सेटलमेंट का विस्तार किया है और इसकी सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है. विड्रॉल रिक्&#x200d;वेस्&#x200d;ट का एक बड़ा हिस्&#x200d;सा अब ऑटोमैटिक रूप से अप्रूव किया जा रहा है, जिससे समय की बचत हो रही है और मैन्&#x200d;युअल अप्रूवल की आवश्&#x200d;यकता कम हो रही है.</p>



<p>इस बदलाव से नियोक्&#x200d;ताओं पर निर्भरता भी कम हो रही है. पहले नौकरी बदलने पर PF अकाउंट में पैसा ट्रांसफर के लिए अक्&#x200d;सर कंपनी के अपूवल की आवश्&#x200d;यकता होती थी, जिससे देरी होती थी. नए सिस्&#x200d;टम के तहत KYC अनुपालन वाले अकाउंट्स के लिए ऐसे कई ट्रांसफर ऑटोमैटिक तरीके से किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को अपने फंड को आसानी से ट्रांसफर करने की सुविधा मिल रही है.</p>



<p>नए डेवलपमेंट के तहत एक अन्&#x200d;य महत्&#x200d;वपूर्ण सुविधा डिजिटल पेमेंट सिस्&#x200d;ट के माध्&#x200d;यम से पीएफ निकालने की क्षमता है. ईपीएफओ यूपीआई के माध्&#x200d;यम से विड्रॉल को सक्षम करने पर काम कर रहा है, जिससे मौजूदा प्रॉसेस की तुलना में पैसा सीधे बैंक अकाउंट में बहुत तेजी से जमा को सकेगी.</p>



<p>इसके साथ ही क्&#x200d;लेम फाइल करने, ट्रैक करने और निकासी जैसी सेवाओं को सुव्&#x200d;यवस्थित करने के लिए एक नया मोबाइल ऐप पेश किए जाने की उम्&#x200d;मीद है, जिससे फिजिकल पेपरवर्क या ऑफिस जाने की आवश्&#x200d;यकता और भी कम हो जाएगी.</p>



<p>ईपीएफओ 3.0 के तहत पेंशन सिस्&#x200d;टम को भी यूनिफाइड किया जा रहा है. लाभार्थियों के लिए पेंशन का तेजी से और ज्&#x200d;यादा समान वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्&#x200d;य से यूनिफाइड पेंशन पेमेंट सिस्टम पहले ही सभी कार्यालयों में लागू की जा चुकी है. पीएफ बचत तक पहुंच में देरी, तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक अड़चनों को लेकर सालों से मिल रही शिकायतों के बाद सुधार की मांग उठाई गई है.</p>



<p>ऑटोमैटिक और डिजिटल वेरिफिकेशन की ओर बढ़ते हुए, सरकार इस सिस्&#x200d;टम को पारंपरिक नौकरशाही के बजाय बैंकिंग प्लेटफॉर्म की तरह कार्य करने का प्रयास कर रही है. हालांकि, अभी सभी सुविधाएं पूरी तरह से चालू नहीं हुई हैं. UPI बेस्&#x200d;ड विड्रॉल जैसी सर्विस और नए डिजिटल इंफ्रास्&#x200d;ट्रक्&#x200d;चर के कुछ हिस्से अभी भी शुरू किए जा रहे हैं, और सिस्टम अभी भी बदलाव के दौर में है.</p>



<p>सैलरी कर्मचारियों के लिए, इन बदलावों का मतलब इमरजेंसी के दौरान पैसे तक तुरंत पहुंच, नौकरी बदलते समय खातों में पैसा ट्रांसफर की सुगमता और नियोक्ताओं या मध्यस्थों पर कम निर्भरता हो सकती है. साथ ही आसान पहुंच से पीएफ के यूज के तरीके में भी बदलाव आ सकता है, क्&#x200d;योंकि यह चिंता बनी हुई है कि बार-बार विड्रॉल से लॉन्गटर्म रिटायरमेंट सेविंग प्रभावित हो सकती है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला</title>
		<link>https://dastaktimes.org/saudi-arabia-got-double-wound-in-iran-war-attack-on-other-route-of-oil-supply-also/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:06:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />तेहरान : पश्चिम एशिया (west asia) में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर (ceasefire) के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध (Iran War) के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/LPG-Tanker.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>तेहरान : पश्चिम एशिया (west asia) में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर (ceasefire) के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध (Iran War) के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है।</p>



<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है। सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है।</p>



<p>बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है।</p>



<p>तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है। बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी, 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट</title>
		<link>https://dastaktimes.org/crypto-market-booms-as-iran-war-stops-bitcoin-rates-reach-3-week-high/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:04:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="203" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-300x203.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-300x203.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-220x150.jpg 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin.jpg 749w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />वाशिंगटन : ईरान-अमेरिका युद्ध में सीजफायर के बाद बिटकॉइन की कीमतें (Bitcoin Price) तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गई हैं। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग में बिटकॉइन 5% चढ़कर 72,841 डॉलर तक पहुंच गया, जो 18 मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली। ईथर और अन्य क्रिप्टो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="203" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-300x203.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-300x203.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin-220x150.jpg 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Bitcoin.jpg 749w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>वाशिंगटन : ईरान-अमेरिका युद्ध में सीजफायर के बाद बिटकॉइन की कीमतें (Bitcoin Price) तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गई हैं। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग में बिटकॉइन 5% चढ़कर 72,841 डॉलर तक पहुंच गया, जो 18 मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली। ईथर और अन्य क्रिप्टो में भी उछाल: तेजी सिर्फ बिटकॉइन तक सीमित नहीं रही। ईथेरियम भी 7.5% उछलकर 2,273 डॉलर तक पहुंच गया। यानी पूरे क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों का भरोसा लौटा है।</p>



<p>डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले ने ग्लोबल मार्केट में पॉजिटिव माहौल बना दिया। इसके बाद शेयर बाजारों में तेजी आई और कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 95 डॉलर से नीचे आ गईं। होर्मूज स्ट्रेट के फिर से खुलने की उम्मीद ने निवेशकों का डर कम किया, जिससे जोखिम वाले ऐसेट्स जैसे क्रिप्टो में खरीदारी बढ़ी।</p>



<p>विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह तेजी स्थायी नहीं भी हो सकती। अगर सीजफायर टूटता है, तो बिटकॉइन फिर से गिरकर 66,000 डॉलर तक जा सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन 60,000 से 75,000 डॉलर के बीच ही झूल रहा है।</p>



<p>तेजी ने उन ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचाया, जो गिरावट पर दांव लगा रहे थे। डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की शॉर्ट पोजीशन खत्म हो गईं। ब्लूमबर्ग ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि अगर कीमत 73,500 डॉलर के ऊपर टिकती है, तो बिटकॉइन 80,000 डॉलर तक जा सकता है। ब्लॉकचेन डेटा के अनुसार, अभी स्पॉट मार्केट में मांग उतनी मजबूत नहीं है।</p>



<p>हालांकि, यूएस में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को $471.3 मिलियन का नेट इनफ्लो हुआ। यह पिछले हफ़्ते के $22.3 मिलियन के इनफ्लो से काफी अधिक था। यह संस्थागत निवेशकों की वापसी का शुरुआती संकेत हो सकता है।</p>



<p>राहत की रैली, पर नजर जरूरी:<br>सीजफायर ने क्रिप्टो मार्केट को मजबूती दी है, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह जियो-पॉलिटिकल हालात और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में तेजी है, लेकिन जोखिम भी बरकरार है।</p>
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		<title>कच्चे तेल में उछाल से बाजार पर दबाव, शुरुआती कारोबार में गिरावट</title>
		<link>https://dastaktimes.org/pressure-on-the-market-due-to-rise-in-crude-oil-decline-in-early-trading/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:24:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-1024x683.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-768x512.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />पिछले दिन की जबरदस्त तेजी के बाद कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। बाजार में यह गिरावट ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद आई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आने से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-1024x683.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1-768x512.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/GettyImages-1403956998-1536x1024-1.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>पिछले दिन की जबरदस्त तेजी के बाद कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। बाजार में यह गिरावट ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद आई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आने से निफ्टी50 और सेंसेक्स में गिरावट देखने को मिली।</p>



<p>इस दौरान, बीएसई सेंसेक्स पिछले दिन के बंद 77,562.90 से 243.57 अंक गिरकर 77,319.33 पर खुला, तो वहीं निफ्टी अपने पिछले बंद 23,997.35 से 88.3 अंक गिरकर 23,909.05 पर खुला।</p>



<p>हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.40 बजे के करीब) सेंसेक्स 444.41 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,118.49 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी50 101.45 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 23,895.90 पर था।</p>



<p>व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली 0.02 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।</p>



<p>सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा (1.17 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल, निफ्टी बैंक, निफ्टी रियल्टी में भी गिरावट देखने को मिली।</p>



<p>निफ्टी 50 इंडेक्स में इंफोसिस, एलएंडटी, इटरनल, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचसीएलटेक, इंडिगो और श्रीराम फाइनेंस के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि इसके विपरीत हिंडाल्को, मैक्सहेल्थ, एनटीपीसी, बजाज-ऑटो, बीईएल और पावरग्रिड के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली।</p>



<p>इस बीच, ब्रेंट क्रूड वायदा में सुबह के समय 3.31 प्रतिशत की तेजी आई और यह 97.89 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड पिछले बंद भाव से 4.2 प्रतिशत बढ़कर 98.38 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।</p>



<p>बुधवार को इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और ईरान ने जवाबी कार्रवाई की नई धमकी दी, जिससे स्थायी तनाव कम होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया और वैश्विक बाजारों में घबराहट बनी रही।</p>
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