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	<title>जीवनशैली &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>जीवनशैली &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>सिर्फ भाई की कलाई नहीं, भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी, जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 09:20:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-300x169.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-300x169.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-390x220.png 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215.png 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है। हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व से जुड़ी कई क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं। इन्हीं में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-300x169.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-300x169.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215-390x220.png 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-215.png 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है। हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व से जुड़ी कई क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं। इन्हीं में एक खास परंपरा है भाभी को लुंबा राखी बांधने की। सामान्य राखी से अलग लुंबा राखी भाभी के लिए तैयार की जाती है और इसे कलाई पर बांधने के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जाता है।</p>



<p>लुंबा राखी की सबसे बड़ी पहचान उसका खास डिजाइन होता है। इसमें मोतियों, लटकन, कुंदन, सजावटी धागों और दूसरी खूबसूरत वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सीधे कलाई पर बांधने के बजाय भाभी की चूड़ियों या कंगन में लटकाया जाता है। यही वजह है कि यह राखी के साथ पारंपरिक आभूषण का सुंदर मेल नजर आती है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके डिजाइन और पहनने का तरीका अलग हो सकता है।</p>



<p><strong>भाभी को क्यों बांधी जाती है लुंबा राखी?</strong></p>



<p>कुछ पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भाभी को परिवार का अहम हिस्सा माना जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में उसकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी रिश्ते को सम्मान देने के लिए कई परिवारों में बहन भाई के साथ भाभी को भी रक्षाबंधन के उत्सव में शामिल करती है। ननद की ओर से भाभी को लुंबा राखी देना दोनों के बीच स्नेह, अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।</p>



<p><strong>ननद-भाभी के रिश्ते में बढ़ाती है अपनापन</strong></p>



<p>लुंबा राखी की परंपरा का भावनात्मक पक्ष भी खास है। इसके जरिए भाई और उसकी पत्नी को परिवार में एक साथ सम्मान और अपनापन देने की भावना व्यक्त की जाती है। इस तरह रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के दूसरे रिश्तों को भी प्रेम और स्नेह से जोड़ने का अवसर बन जाता है। लुंबा राखी इसी भावना का प्रतीक मानी जाती है।</p>



<p><strong>पूरे देश में नहीं निभाई जाती यह परंपरा</strong></p>



<p>यह समझना जरूरी है कि लुंबा राखी बांधने की परंपरा पूरे भारत में एक जैसी नहीं है। यह कुछ समुदायों, क्षेत्रों और परिवारों में ज्यादा प्रचलित है। इसलिए इसे रक्षाबंधन की अनिवार्य रस्म नहीं माना जाता, बल्कि क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के रूप में समझा जाता है। जिन परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है, वहां यह रक्षाबंधन के उत्सव में एक अलग तरह की खुशी और अपनापन जोड़ती है।</p>



<p>इस तरह लुंबा राखी केवल सजावटी राखी नहीं, बल्कि रिश्तों को सम्मान देने और परिवार में प्रेम तथा अपनापन बढ़ाने की परंपरा भी है। भाई की कलाई पर बंधी राखी जहां भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है, वहीं भाभी की चूड़ियों पर सजी लुंबा राखी ननद-भाभी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान की एक खूबसूरत कड़ी जोड़ती है।</p>



<p></p>
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		<title>रक्षाबंधन 27 या 28 अगस्त? दूर करें कन्फ्यूजन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
		<link>https://dastaktimes.org/rakshabandhan-on-27th-or-28th-august-remove-confusion/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 05:04:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: रक्षाबंधन की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस बना हुआ है कि पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को। वाराणसी पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि राखी बांधने के दौरान भद्रा नहीं रहेगी, इसलिए इस बार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Photo-4-16.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> रक्षाबंधन की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस बना हुआ है कि पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को। वाराणसी पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि राखी बांधने के दौरान भद्रा नहीं रहेगी, इसलिए इस बार भद्रा समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>



<p><strong>श्रावण पूर्णिमा की तिथि और भद्रा का समय</strong><br>पंडितों के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 8:31 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त सुबह 9:18 बजे तक रहेगी। 27 अगस्त को सुबह 8:31 बजे से रात 8:54 बजे तक भद्रा रहेगी। इसके बाद भद्रा समाप्त हो जाएगी। वहीं 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।</p>



<p><strong>राखी बांधने का शुभ मुहूर्त</strong><br>रक्षाबंधन पर राखी बांधने का प्रमुख शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। अगर किसी कारण से यह समय निकल जाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा।</p>



<p><strong>रक्षाबंधन में भद्रा को क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?</strong><br>हिंदू पंचांग में समय को अलग-अलग करणों में बांटा गया है। इनमें विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा को उग्र प्रकृति वाला समय माना गया है। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भद्रा की स्थिति का विचार किया जाता है। रक्षाबंधन में भी भद्रा की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में 27 अगस्त को भद्रा रहेगी, जबकि 28 अगस्त को राखी बांधने के समय इसका प्रभाव नहीं होगा।</p>



<p><strong>राखी बांधते समय करें रक्षासूत्र मंत्र का जाप</strong><br>राखी बांधते समय रक्षासूत्र मंत्र का जाप किया जा सकता है—</p>



<p>“येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः।<br>तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”</p>



<p>इस मंत्र का भावार्थ है कि जिस रक्षा सूत्र से शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र, स्थिर रहो और रक्षा करो। इसके अलावा भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।</p>



<p><strong>ऐसे करें रक्षाबंधन की पूजा</strong><br>रक्षाबंधन के दिन भाई और बहन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, मिठाई और राखी रखें। सबसे पहले भगवान का पूजन करें। इसके बाद भाई को तिलक और अक्षत लगाकर आरती करें। रक्षासूत्र मंत्र का जाप करते हुए भाई की कलाई पर राखी बांधें। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के सुख, स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें।</p>



<p><strong>पढ़ सकते हैं यह मंगल श्लोक</strong><br>रक्षाबंधन के अवसर पर “सर्वे भवन्तु सुखिनः” मंगल श्लोक का पाठ भी किया जा सकता है—</p>



<p>“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।<br>सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥”</p>



<p>इसका अर्थ है कि सभी लोग सुखी और निरोग रहें, सभी को शुभ दिखाई दे और कोई भी दुख का भागी न बने।</p>



<p><strong>वाराणसी और मिथिला पंचांग में कितना अंतर?</strong><br>वाराणसी और मिथिला पंचांग की गणना पद्धति में कुछ अंतर हो सकता है। स्थानीय सूर्योदय और गणना के आधार पर शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। हालांकि, वर्ष 2026 में दोनों परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाने की बात कही गई है।</p>



<p><strong>राखी के धागे में छिपा है प्रेम और जिम्मेदारी का भाव</strong><br>रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु, सुख और सफलता की कामना करती है। वहीं भाई बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेता है। इस लिहाज से रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सम्मान को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है।</p>



<p></p>
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		<title>रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण; जानें सूतक लगेगा या नहीं और राखी पर क्या होगा असर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/the-shadow-of-lunar-eclipse-will-not-be-visible-in-india-on-rakshabandhan-know-whether-sutak-will-be-imposed-or-not-and-what-will-be-the-effect-on-rakhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 13:08:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-203-300x169.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-203-300x169.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-203-390x220.png 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-203.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली। 28 अगस्त 2026 को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता है कि ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं, इसका सूतक मान्य होगा या नहीं और क्या &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली।</strong> 28 अगस्त 2026 को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता है कि ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं, इसका सूतक मान्य होगा या नहीं और क्या इसका असर राखी के त्योहार पर पड़ेगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार 28 अगस्त को गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा।</p>



<p><strong>भारत में दिन के समय होगा चंद्र ग्रहण</strong></p>



<p>भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का आंशिक चरण सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण सुबह करीब 9 बजकर 43 मिनट पर अपने चरम पर होगा। हालांकि भारत में उस समय दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। इसी वजह से देश के किसी भी हिस्से से इस चंद्र ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।</p>



<p><strong>भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?</strong></p>



<p>चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के लिहाज से भी स्थिति अलग होगी। परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई देता है, वहीं उससे जुड़े सूतक काल को मान्यता दी जाती है। ऐसे में भारत में 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य नहीं माना जाएगा।</p>



<p>इसका मतलब है कि ग्रहण के कारण रक्षाबंधन के पर्व पर कोई विशेष रोक नहीं रहेगी। लोग सामान्य तरीके से पूजा कर सकेंगे और भाई की कलाई पर राखी भी बांध सकेंगे।</p>



<p><strong>दिल्ली में सुबह इस समय बांध सकेंगे राखी</strong></p>



<p>दिल्ली में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है। भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को चंद्र ग्रहण के कारण राखी बांधने या रक्षाबंधन की पूजा को लेकर विशेष चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।</p>



<p><strong>इन देशों में दिखाई देगा ग्रहण</strong></p>



<p>यह खगोलीय घटना दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगी। अमेरिका के अलावा यूरोप और अफ्रीका के कई क्षेत्रों में लोग चंद्र ग्रहण देख सकेंगे। इन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय अपनी स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन कर सकते हैं।</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा रही है। भगवान शिव की आराधना करने वाले लोग इस दौरान ऊं नमः शिवाय का जाप कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, पूजा स्थल की सफाई और जरूरतमंदों को अन्न या आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।</p>



<p><strong>कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र को लेकर क्या मान्यता है?</strong></p>



<p>ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। इसी वजह से कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोगों को इस अवधि में थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव कैसा होगा, इसका आकलन केवल राशि के आधार पर नहीं किया जा सकता। ज्योतिष में इसके लिए पूरी जन्मकुंडली का विश्लेषण जरूरी माना जाता है।</p>



<p><strong>भारत में बिना चिंता मना सकेंगे रक्षाबंधन</strong></p>



<p>28 अगस्त का चंद्र ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन भारत में इसके दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में लोग सामान्य तरीके से रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे।</p>



<p></p>
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		<title>सावन के आखिरी सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि</title>
		<link>https://dastaktimes.org/flood-of-faith-gathered-in-the-shiva-temples-on-the-last-monday-of-sawan-know-the-auspicious-time-of-jalabhishek-and-the-correct-method-of-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 07:29:41 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सावन का आखिरी सोमवार]]></category>
		<category><![CDATA[सावन सोमवार पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[सावन सोमवार व्रत]]></category>
		<category><![CDATA[सावन सोमवार शुभ संयोग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="203" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-300x203.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-300x203.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-768x520.webp 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-220x150.webp 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18.webp 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: सावन के आखिरी सोमवार के मौके पर देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना में जुटे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="203" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-300x203.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-300x203.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-768x520.webp 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18-220x150.webp 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-18.webp 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सावन के आखिरी सोमवार के मौके पर देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना में जुटे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>



<p><strong>जलाभिषेक और पूजा के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>सावन के आखिरी सोमवार पर भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। सुबह की पूजा के लिए श्रेष्ठ समय सुबह 6 बजे से 9 बजकर 15 मिनट तक बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 6 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।</p>



<p><strong>आखिरी सोमवार पर बन रहे कई शुभ संयोग</strong></p>



<p>सावन के अंतिम सोमवार को प्रीति योग और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का भी संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>शिवलिंग पर जल चढ़ाने की ये है विधि</strong></p>



<p>भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए तांबे या चांदी के पात्र में शुद्ध जल या गंगाजल लें। उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करने की विधि बताई गई है। सबसे पहले जलाधारी के बाएं हिस्से यानी श्री गणेश और फिर दाएं हिस्से यानी भगवान कार्तिकेय को जल अर्पित करें। इसके बाद जलाधारी के मध्य भाग में माता अशोक सुंदरी और फिर गोल हिस्से में माता पार्वती के हस्तकमल पर जल चढ़ाएं।</p>



<p>इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर पतली धारा में जल अर्पित करें।</p>



<p><strong>पंचामृत से अभिषेक के बाद अर्पित करें ये चीजें</strong></p>



<p>सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत या पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।</p>



<p>इसके बाद भगवान शिव को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आंकड़े के फूल अर्पित करें।</p>



<p><strong>शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का करें पाठ</strong></p>



<p>पूजा के अंत में शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं। धूप-दीप से आरती करें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए भगवान शिव से क्षमा प्रार्थना करें।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन और कमजोरी को न समझें मामूली, पोटैशियम असंतुलन भी हो सकता है वजह</title>
		<link>https://dastaktimes.org/do-not-misunderstand-frequent-muscle-cramps-and-weakness-minor-potassium-imbalance-can-also-be-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 07:10:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="176" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/14-1-e1787387790223-300x176.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/14-1-e1787387790223-300x176.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/14-1-e1787387790223.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन, पैरों में कमजोरी या बिना अधिक मेहनत के थकान महसूस होना कई बार सामान्य परेशानी लग सकती है, लेकिन लगातार बने रहने वाले इन लक्षणों के पीछे शरीर में पोटैशियम का असंतुलन भी एक कारण हो सकता है। पोटैशियम शरीर के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है, जो नसों के सामान्य &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन, पैरों में कमजोरी या बिना अधिक मेहनत के थकान महसूस होना कई बार सामान्य परेशानी लग सकती है, लेकिन लगातार बने रहने वाले इन लक्षणों के पीछे शरीर में पोटैशियम का असंतुलन भी एक कारण हो सकता है। पोटैशियम शरीर के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है, जो नसों के सामान्य कामकाज, मांसपेशियों के संकुचन और शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर पोटैशियम की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।<br><strong>पोटैशियम कम ही नहीं, ज्यादा होना भी परेशानी</strong><br>शरीर में पोटैशियम का स्तर एक निश्चित सीमा में रहना जरूरी है। इसकी कमी के साथ-साथ अत्यधिक मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय सलाह के पोटैशियम की गोलियां या किसी तरह के पूरक लेना उचित नहीं है। खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।<br><strong>ऐंठन और कमजोरी हो सकती है पोटैशियम की कमी का संकेत</strong><br>पोटैशियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी और ऐंठन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। पैरों में अचानक तेज ऐंठन, सामान्य गतिविधियों के दौरान मांसपेशियों में कमजोरी या असामान्य थकान महसूस हो सकती है। हालांकि इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहना, अत्यधिक व्यायाम, शरीर में पानी की कमी और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी ऐंठन की वजह बन सकता है।<br><strong>लगातार थकान को केवल पोटैशियम की कमी न मानें</strong><br>कमजोरी या थकान लंबे समय तक बनी रहने पर इसे केवल पोटैशियम की कमी से जोड़ना सही नहीं है। नींद पूरी न होना, तनाव, खून की कमी, पोषण संबंधी कमियां और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी लगातार थकान का कारण बन सकती हैं। यदि कमजोरी बढ़ रही हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।<br><strong>गर्मी और ज्यादा मेहनत में बढ़ सकता है इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन</strong><br>गर्मी में लंबे समय तक पसीना आने या अधिक शारीरिक मेहनत करने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन या अस्वस्थ महसूस होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त तरल पदार्थ और संतुलित भोजन शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं, लेकिन समस्या लगातार बनी रहे तो इसके कारण की जांच जरूरी है।<br><strong>रक्त जांच से पता चल सकता है पोटैशियम का स्तर</strong><br>पोटैशियम की कमी या असंतुलन का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार रक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। जांच के परिणामों के आधार पर आहार में बदलाव या उपचार की आवश्यकता तय की जाती है। पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति को कितनी मात्रा में पोटैशियम की जरूरत है, यह उसकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।<br><strong>केला फायदेमंद, लेकिन इसे इलाज मानना सही नहीं</strong><br>केला पोटैशियम का जाना-पहचाना स्रोत है, लेकिन केवल केला खाने को पोटैशियम की कमी का इलाज मानना उचित नहीं है। संतुलित भोजन में विभिन्न पोषक तत्वों और खनिजों का पर्याप्त सेवन जरूरी है। यदि जांच में पोटैशियम की कमी सामने आती है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार में बदलाव और जरूरत पड़ने पर पूरक की व्यवस्था की जा सकती है।<br><strong>खुद से पोटैशियम की गोलियां लेना पड़ सकता है भारी</strong><br>मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन या कमजोरी होने पर खुद से पोटैशियम की गोलियां लेना शुरू नहीं करना चाहिए। शरीर में पोटैशियम का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ना भी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए बार-बार होने वाली ऐंठन, लगातार कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षणों की स्थिति में चिकित्सकीय जांच कराना सुरक्षित तरीका है।<br></p>
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		<title>पेट के दाईं तरफ दर्द को गैस समझना पड़ सकता है भारी, अपेंडिसाइटिस से पथरी तक ये हो सकते हैं कारण</title>
		<link>https://dastaktimes.org/pain-on-the-right-side-of-the-stomach-may-be-considered-as-gas-these-could-be-the-reasons-ranging-from-heavy-appendicitis-to-stones/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 07:08:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Appendicitis Symptoms]]></category>
		<category><![CDATA[Gallbladder Stone]]></category>
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		<category><![CDATA[पेट दर्द में डॉक्टर को कब दिखाएं]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="193" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease-300x193.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease-300x193.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: पेट में दर्द होना आम समस्या है और कई लोग इसे गैस, अपच या ज्यादा खाना खाने की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासतौर पर पेट के दाईं तरफ दर्द होने पर बिना जांच के गैस की दवा लेना सही नहीं माना जाता। इस हिस्से में होने वाला दर्द पित्ताशय, अपेंडिक्स, किडनी, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="193" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease-300x193.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease-300x193.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/stomach-disease.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> पेट में दर्द होना आम समस्या है और कई लोग इसे गैस, अपच या ज्यादा खाना खाने की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासतौर पर पेट के दाईं तरफ दर्द होने पर बिना जांच के गैस की दवा लेना सही नहीं माना जाता। इस हिस्से में होने वाला दर्द पित्ताशय, अपेंडिक्स, किडनी, लिवर और आंतों से जुड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकता है। हालांकि गैस और कब्ज भी इसके सामान्य कारण हो सकते हैं। इसलिए दर्द की तीव्रता, अवधि और उसके साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।</p>



<p><strong>ऊपरी दाईं तरफ दर्द हो तो पित्ताशय की पथरी का संकेत</strong></p>



<p>पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में लिवर और पित्ताशय मौजूद होते हैं। यदि तला-भुना या अधिक वसायुक्त भोजन खाने के बाद दर्द बढ़ता है और यह पीठ या दाएं कंधे तक महसूस होता है, तो इसकी वजह पित्ताशय की पथरी हो सकती है। इसके साथ मतली और उल्टी की समस्या भी हो सकती है। वहीं दर्द के साथ बुखार आए या आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे तो लिवर या पित्त नलिकाओं से जुड़ी परेशानी की आशंका को गंभीरता से लेना चाहिए।</p>



<p><strong>निचले दाएं हिस्से का दर्द अपेंडिसाइटिस का संकेत</strong></p>



<p>पेट के निचले दाएं हिस्से में अचानक बढ़ने वाला दर्द अपेंडिसाइटिस से जुड़ा हो सकता है। कई मामलों में दर्द नाभि के आसपास से शुरू होता है और धीरे-धीरे दाईं निचली तरफ केंद्रित हो जाता है। चलने, खांसने या शरीर को हिलाने पर दर्द बढ़ सकता है। भूख कम लगना, मतली, उल्टी और बुखार जैसे लक्षण भी इसके साथ दिखाई दे सकते हैं। ऐसे दर्द को लगातार गैस समझकर दवा लेते रहना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि गंभीर स्थिति में अपेंडिक्स फटने जैसी जटिलता हो सकती है।</p>



<p><strong>दर्द कमर और पीठ तक पहुंचे तो किडनी की पथरी भी वजह</strong></p>



<p>पेट या कमर के दाईं तरफ होने वाला दर्द किडनी की पथरी या मूत्र मार्ग से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। यदि दर्द पीठ या कमर की तरफ फैल रहा है और इसके साथ पेशाब करते समय जलन, पेशाब में खून या बार-बार पेशाब आने जैसी परेशानी हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।</p>



<p><strong>गैस और कब्ज में ऐसे हो सकते हैं लक्षण</strong></p>



<p>गैस, कब्ज या आंतों से जुड़ी सामान्य परेशानी में पेट फूलना, ऐंठन, भारीपन और मल त्याग में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार मल त्याग करने के बाद दर्द या भारीपन में राहत भी मिल जाती है। हालांकि यदि दर्द लगातार बना रहता है या बढ़ता जा रहा है, तो इसे केवल गैस मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।</p>



<p><strong>दर्द के साथ ये संकेत दिखें तो तुरंत रहें सतर्क</strong></p>



<p>पेट के दाईं तरफ दर्द कब शुरू हुआ, लगातार बना हुआ है या रुक-रुककर हो रहा है और इसके साथ कौन से लक्षण मौजूद हैं, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। तेज या लगातार बढ़ता दर्द, बुखार, बार-बार उल्टी, मल में खून, त्वचा या आंखों में पीलापन, बेहोशी और पेट में अत्यधिक जकड़न जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।</p>



<p><strong>जांच के बाद ही पता चलेगी दर्द की असली वजह</strong></p>



<p>दर्द की वजह जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच के साथ रक्त और पेशाब की जांच करा सकते हैं। स्थिति के आधार पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी कराई जा सकती है। समय पर सही कारण की पहचान होने से गंभीर बीमारी और उससे जुड़ी संभावित जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ऑक्सीजन की कमी को सिर्फ सांस फूलना न समझें, होंठ नीले पड़ना और भ्रम जैसे संकेत भी हो सकते हैं गंभीर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/do-not-consider-lack-of-oxygen-as-just-shortness-of-breath-signs-like-blue-lips-and-confusion-can-also-be-serious/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 07:00:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Cyanosis]]></category>
		<category><![CDATA[Hypoxemia]]></category>
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		<category><![CDATA[हाइपोक्सीमिया के लक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[होंठ नीले पड़ना]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="191" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509-300x191.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509-300x191.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: शरीर के हर अंग को सामान्य रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंची ऑक्सीजन रक्त में मिलकर दिमाग, हृदय, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है। जब रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, तो इस स्थिति को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="191" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509-300x191.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509-300x191.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/6-16-e1787469437509.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> शरीर के हर अंग को सामान्य रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंची ऑक्सीजन रक्त में मिलकर दिमाग, हृदय, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है। जब रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, तो इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में हाइपोक्सीमिया कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में समय पर ध्यान नहीं देने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।<br><strong>सांस फूलना सबसे आम संकेत</strong><br>ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर शरीर इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है। इस दौरान सांस लेने की गति और हृदय की धड़कन बढ़ सकती है। व्यक्ति को सांस फूलने, बेचैनी या घबराहट का अनुभव हो सकता है। सांस फूलना ऑक्सीजन की कमी का आम संकेत है। व्यक्ति को लग सकता है कि उसे पर्याप्त हवा नहीं मिल रही या पूरी सांस लेने के लिए बार-बार गहरी सांस लेनी पड़ रही है।<br>कुछ लोगों को थोड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद ही सांस तेज चलने लगती है, जबकि गंभीर स्थिति में आराम करते समय भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, सांस फूलने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसे अकेले ऑक्सीजन की कमी का संकेत नहीं माना जा सकता।<br><strong>होंठ और त्वचा का रंग नीला पड़ना</strong><br>ऑक्सीजन की गंभीर कमी होने पर होंठ, नाखून या त्वचा का रंग नीला या नीला-सा पड़ सकता है। इस स्थिति को सायनोसिस कहा जाता है। यदि चेहरे या होंठों का रंग बदलने के साथ सांस लेने में परेशानी भी हो रही है, तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।<br><strong>तेज धड़कन और बेचैनी भी संकेत</strong><br>ऑक्सीजन कम होने पर हृदय की धड़कन तेज होने के साथ बेचैनी महसूस हो सकती है। शरीर पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर उसकी आपूर्ति बनाए रखने के लिए सांस और हृदय की गति बढ़ाने की कोशिश करता है। यदि इसके साथ सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, तो चिकित्सकीय मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।<br><strong>चक्कर और भ्रम को नजरअंदाज न करें</strong><br>दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर चक्कर, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भ्रम या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अत्यधिक कमजोरी और असामान्य नींद भी ऑक्सीजन की कमी के गंभीर संकेत हो सकते हैं। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।<br><strong>पल्स ऑक्सीमीटर से जांची जाती है ऑक्सीजन</strong><br>शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति जानने के लिए आमतौर पर पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO₂ सामान्यतः 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि फेफड़ों या हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियों वाले लोगों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है। ऐसे लोगों की ऑक्सीजन रीडिंग का आकलन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।<br><strong>कई बीमारियों की वजह से घट सकता है ऑक्सीजन स्तर</strong><br>ऑक्सीजन का स्तर कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी स्थितियां शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियां, सांस लेने में रुकावट, फेफड़ों में रक्त का थक्का और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना भी ऑक्सीजन स्तर को प्रभावित कर सकता है।<br><strong>कम रीडिंग या गंभीर लक्षण दिखें तो जांच जरूरी</strong><br>केवल पल्स ऑक्सीमीटर की एक रीडिंग या किसी एक लक्षण के आधार पर बीमारी का कारण तय नहीं किया जा सकता। यदि ऑक्सीजन की रीडिंग लगातार कम आ रही है, सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है, होंठ नीले पड़ रहे हैं, भ्रम की स्थिति बन रही है या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। समय पर कारण की पहचान और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।<br></p>
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		<title>केमिकल फेसवॉश की जगह दही से धोएं चेहरा? डेड स्किन से टैनिंग तक, जानें स्किन पर दिख सकते हैं ये फायदे</title>
		<link>https://dastaktimes.org/wash-your-face-with-curd-instead-of-chemical-face-wash-from-dead-skin-to-tanning-know-these-benefits-can-be-seen-on-the-skin/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:37:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Curd Face Wash]]></category>
		<category><![CDATA[Curd for Face]]></category>
		<category><![CDATA[Dry Skin Care]]></category>
		<category><![CDATA[Lactric Acid for Skin]]></category>
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		<category><![CDATA[Skin Care Tips]]></category>
		<category><![CDATA[चेहरे पर दही लगाने के फायदे]]></category>
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		<category><![CDATA[दही से चेहरा साफ करने के फायदे]]></category>
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		<category><![CDATA[दही से डेड स्किन हटाएं]]></category>
		<category><![CDATA[रूखी त्वचा के लिए दही]]></category>
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<p><strong>लाइफस्टाइल:</strong> चेहरे की सफाई स्किनकेयर रूटीन का सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है। आमतौर पर इसके लिए फेसवॉश का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कुछ लोगों को बाजार में मिलने वाले फेसवॉश इस्तेमाल करने के बाद त्वचा में खिंचाव या रूखापन महसूस हो सकता है। ऐसे में दही को चेहरे की सफाई के लिए इस्तेमाल करने का विकल्प अपनाया जा सकता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। हालांकि, संवेदनशील या पहले से प्रभावित त्वचा पर इसे लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।</p>



<p><strong>डेड स्किन हटाने में मदद कर सकता है दही</strong></p>



<p>दही में प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड पाया जाता है। यह त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इससे त्वचा साफ और अपेक्षाकृत चमकदार दिखाई दे सकती है।</p>



<p><strong>त्वचा को मुलायम बनाने में मददगार</strong></p>



<p>दही में मौजूद वसा और प्रोटीन त्वचा को मुलायम और चिकना बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। खासतौर पर रूखी त्वचा वाले लोगों को इससे त्वचा में नरमी महसूस हो सकती है।</p>



<p><strong>संवेदनशील त्वचा पर बरतें सावधानी</strong></p>



<p>ठंडी दही चेहरे पर लगाने से कुछ लोगों को त्वचा पर ठंडक और आराम महसूस हो सकता है। लेकिन अगर पहले से चेहरे पर ज्यादा लालिमा, एलर्जी, खुजली या जलन है, तो दही जैसी अम्लीय चीज का इस्तेमाल समस्या बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में चेहरे पर इसे लगाने से बचना बेहतर है।</p>



<p><strong>टैनिंग और बेजान त्वचा में मिल सकती है मदद</strong></p>



<p>धूप के कारण त्वचा पर टैनिंग होने या चेहरा बेजान नजर आने पर दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की ऊपरी परत पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है, जिससे चेहरा साफ और चमकदार नजर आ सकता है। हालांकि, टैनिंग से बचने के लिए धूप से सुरक्षा जरूरी है।</p>



<p><strong>ऑयली स्किन वाले ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल</strong></p>



<p>अगर त्वचा तैलीय है तो दही में थोड़ा बेसन या मुल्तानी मिट्टी मिलाकर इस्तेमाल करने का तरीका अपनाया जा सकता है। वहीं चेहरे पर प्राकृतिक चमक के लिए इसमें चुटकी भर हल्दी मिलाने की बात भी कही जाती है। किसी भी घरेलू मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना जरूरी है।</p>



<p><strong>फेसवॉश की तरह कैसे लगाएं दही</strong></p>



<p>चेहरा साफ करने के लिए पहले त्वचा को पानी से गीला करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में दही लेकर चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से करीब 1 से 2 मिनट तक मालिश करें। इसके बाद पानी से चेहरा धो लें। समय हो तो दही को करीब 5 से 10 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दिया जा सकता है और फिर पानी से धोया जा सकता है।</p>



<p><strong>इन लोगों को दही लगाने से बचना चाहिए</strong></p>



<p>आमतौर पर दही कई तरह की त्वचा पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। अगर चेहरे पर मुंहासे, लालिमा, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या पहले से मौजूद है, तो दही लगाने से बचना बेहतर है। स्किनकेयर में किसी भी नए घरेलू उपाय को शामिल करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। त्वचा पर जलन या कोई अन्य प्रतिक्रिया होने पर उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।</p>



<p></p>
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		<title>दिखावे की दौड़ से दूर, सुकून के करीब ले जाती है मिनिमलिस्ट लिविंग; कम सामान में ऐसे आसान बनाएं अपनी जिंदगी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/minimalist-living-takes-you-away-from-the-race-of-show-off-and-closer-to-peace-make-your-life-easier-with-less-stuff/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 06:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[Mental Peace]]></category>
		<category><![CDATA[Minimalist Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Minimalist Living]]></category>
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		<category><![CDATA[Stress Free Life]]></category>
		<category><![CDATA[कम सामान में जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[तनाव कम करने के उपाय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/minimalist-living-benefits-and-r-300x169.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/minimalist-living-benefits-and-r-300x169.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/minimalist-living-benefits-and-r-390x220.webp 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/minimalist-living-benefits-and-r.webp 640w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर जरूरत से ज्यादा चीजें खरीदने, उन्हें सहेजने और दूसरों को दिखाने में उलझे रहते हैं। सोशल मीडिया के दौर में दिखावे की यह आदत कई बार मानसिक दबाव भी बढ़ा देती है। ऐसे में मिनिमलिस्ट लिविंग यानी कम सामान और जरूरत भर की चीजों के &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर जरूरत से ज्यादा चीजें खरीदने, उन्हें सहेजने और दूसरों को दिखाने में उलझे रहते हैं। सोशल मीडिया के दौर में दिखावे की यह आदत कई बार मानसिक दबाव भी बढ़ा देती है। ऐसे में मिनिमलिस्ट लिविंग यानी कम सामान और जरूरत भर की चीजों के साथ सादगी से जीने का तरीका जीवन को आसान और व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकता है।</p>



<p><strong>क्या है मिनिमलिस्ट लिविंग?</strong></p>



<p>मिनिमलिस्ट लिविंग का मतलब ऐसी जीवनशैली अपनाना है, जिसमें गैरजरूरी चीजों और दिखावे को प्राथमिकता देने के बजाय जरूरत और उपयोगिता पर ध्यान दिया जाता है। इस जीवनशैली में सामान की संख्या से ज्यादा उसकी गुणवत्ता और उपयोग को महत्व दिया जाता है।</p>



<p>इस तरह की जीवनशैली अपनाने वाले लोग अपने पास केवल जरूरी सामान रखने की कोशिश करते हैं। इसका उद्देश्य जीवन से हर सुविधा को हटाना नहीं, बल्कि ऐसी चीजों को कम करना है जो बिना जरूरत के जगह, पैसा और मानसिक ऊर्जा खर्च करती हैं।</p>



<p><strong>कम सामान और कम खर्च के लिए अपनाएं ये नियम</strong></p>



<p>मिनिमलिस्ट जीवनशैली अपनाने के लिए सबसे पहले खरीदारी की आदत पर ध्यान देना जरूरी है। जब भी कोई सामान खरीदने का मन हो तो खुद से पूछें कि क्या वास्तव में उसकी जरूरत है और वह आपके लिए कितनी उपयोगी होगी।</p>



<p>घर में मौजूद उन चीजों को भी अलग करें जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है। गैरजरूरी सामान हटाने से घर अधिक व्यवस्थित नजर आता है और रोजमर्रा के काम भी आसान हो सकते हैं।</p>



<p>सिर्फ सस्ता देखकर ज्यादा सामान खरीदने के बजाय उसकी गुणवत्ता पर ध्यान दें। ऐसी चीजें चुनना बेहतर है जो लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकें। इससे बार-बार खरीदारी करने की जरूरत कम हो सकती है।</p>



<p>मिनिमलिस्ट लिविंग केवल घर के सामान तक सीमित नहीं है। डिजिटल जीवन में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन में लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए जा रहे अनुपयोगी ऐप हटाकर डिजिटल अव्यवस्था कम की जा सकती है।</p>



<p><strong>तनाव कम करने में मिल सकती है मदद</strong></p>



<p>जब घर और आसपास गैरजरूरी सामान कम होता है तो चीजों को व्यवस्थित रखने और संभालने में कम समय लग सकता है। जरूरत के सामान तक सीमित रहने से अनावश्यक खरीदारी और उससे जुड़े दबाव को भी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि सादगी भरी जीवनशैली को मानसिक सुकून से भी जोड़ा जाता है।</p>



<p><strong>बचत बढ़ाने में भी मददगार</strong></p>



<p>मिनिमलिस्ट लिविंग में शौक और दिखावे के बजाय जरूरत को प्राथमिकता दी जाती है। इससे गैरजरूरी खरीदारी पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। बची हुई रकम को भविष्य की जरूरतों और योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>



<p><strong>संतोष और खुशी का एहसास</strong></p>



<p>घर या आसपास जरूरत से ज्यादा सामान बिखरा रहने से मानसिक रूप से भी बेचैनी महसूस हो सकती है। इसके विपरीत व्यवस्थित और सादा वातावरण मन को अधिक शांत महसूस करा सकता है। जब जीवन में चीजों की संख्या के बजाय उनकी उपयोगिता और गुणवत्ता को महत्व दिया जाता है तो संतोष और खुशी का एहसास बढ़ सकता है।</p>



<p>मिनिमलिस्ट लिविंग का मूल विचार यही है कि बेहतर जीवन के लिए हमेशा ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं होती। अपनी वास्तविक जरूरतों को समझकर गैरजरूरी चीजों को कम करना जीवन को अधिक सरल, व्यवस्थित और सुकून भरा बना सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>23 अगस्त का पंचांग: पुत्रदा एकादशी कब से शुरू, जानें सूर्योदय-सूर्यास्त से लेकर शुभ-अशुभ मुहूर्त तक पूरा विवरण</title>
		<link>https://dastaktimes.org/panchang-putrada-ekadashi-of-23rd-august-when-does-it-start-know-the-complete-details-from-sunrise-and-sunset-to-auspicious-and-inauspicious-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 05:15:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[23 August 2026 Panchang]]></category>
		<category><![CDATA[23 अगस्त 2026 पंचांग]]></category>
		<category><![CDATA[23 अगस्त का पंचांग]]></category>
		<category><![CDATA[Panchang Today]]></category>
		<category><![CDATA[Putrada Ekadashi 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Putrada Ekadashi Vrat]]></category>
		<category><![CDATA[अभिजीत मुहूर्त]]></category>
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		<category><![CDATA[आज का पंचांग]]></category>
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		<category><![CDATA[पुत्रदा एकादशी व्रत]]></category>
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		<category><![CDATA[हिंदू पंचांग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="166" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/202608223913697-300x166.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/202608223913697-300x166.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/202608223913697.webp 450w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले पंचांग के आधार पर तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित हिंदू काल-गणना पद्धति है। 23 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले पंचांग के आधार पर तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित हिंदू काल-गणना पद्धति है। 23 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी, जिसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।</p>



<p><strong>कब से कब तक रहेगी पुत्रदा एकादशी</strong></p>



<p>23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी की तिथि भोर में 2:00 बजे से शुरू होकर अगले दिन तड़के 4:00 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को ही रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन संतान प्राप्ति और संतान की सुख-समृद्धि की कामना से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से दंपति को मनोकामना का फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय</strong></p>



<p>23 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:09 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:49 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 3:41 बजे और चंद्रास्त रात 2:21 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा शाम 5:44 बजे तक मूल नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।</p>



<p><strong>अभिजीत और अमृत काल का समय</strong></p>



<p>23 अगस्त को हर्षण योग नहीं रहेगा। दिन की शुरुआत सुबह 6:14 बजे विष्कम्भ योग से होगी, जिसके बाद प्रीति योग प्रभावी हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा। इसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। वहीं अमृत काल सुबह 10:38 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा।</p>



<p><strong>राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड</strong></p>



<p>पंचांग के अनुसार रविवार को राहुकाल सुबह 5:14 बजे से दोपहर 6:49 बजे तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 3:39 बजे से शाम 5:14 बजे तक रहेगा। यमगंड काल दोपहर 12:29 बजे से 2:04 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों को अशुभ माना जाता है और इस दौरान नए कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।</p>



<p><strong>23 अगस्त को किस राशि में रहेंगे सूर्य और चंद्रमा</strong></p>



<p>रविवार को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यदि पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करना जरूरी हो तो प्रचलित ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।</p>



<p></p>
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