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	<title>राज्य &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>राज्य &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<item>
		<title>मन्नत से मंच तक : जब जसपिंदर के सुर बने हनुमत चरणों का अर्पण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[DN VERMA]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[वाराणसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="135" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-300x135.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-300x135.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1024x461.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-768x346.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1536x692.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1.jpg 1698w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />काशी की आध्यात्मिक वायुमंडल में जब जसपिंदर नरूला के कंठ से भक्ति के स्वर फूटे, तो यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी मन्नत के पूर्ण होने का भावुक क्षण बन गया। संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर उन्होंने जिस श्रद्धा और समर्पण के साथ “राम आएंगे” और “भज ले राम” जैसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="135" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-300x135.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-300x135.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1024x461.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-768x346.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1536x692.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1.jpg 1698w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong><em>काशी की आध्यात्मिक वायुमंडल में जब जसपिंदर नरूला के कंठ से भक्ति के स्वर फूटे, तो यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी मन्नत के पूर्ण होने का भावुक क्षण बन गया। संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर उन्होंने जिस श्रद्धा और समर्पण के साथ “राम आएंगे” और “भज ले राम” जैसे भजन प्रस्तुत किए, उसमें उनकी पूरी साधना और जीवन-दर्शन समाहित दिखा। कुछ वर्ष पूर्व काशी आगमन के दौरान हनुमत दरबार में की गई प्रार्थना आज साकार हुई, और यही अनुभूति उनकी आंखों की नमी और स्वर की गहराई में स्पष्ट झलकी। अपने पचास वर्षों के संगीत सफर को वह तपस्या मानती हैं, एक ऐसी यात्रा, जिसमें सिद्धांत, परिश्रम और ईश्वर में अटूट विश्वास ही उनके मार्गदर्शक रहे। युवाओं को संदेश देते हुए उनका सरल किंतु प्रभावी वाक्य गूंजता है, “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।” जसपिंदर नरूला के लिए संगीत केवल पेशा नहीं, बल्कि साधना है, और यही कारण है कि उनके सुर सीधे हृदय से निकलकर श्रोताओं की आत्मा को स्पर्श करते हैं।</em></strong></p>



<p>&#8211;<strong>सुरेश गांधी</strong></p>



<p>वाराणसी की आध्यात्मिक धड़कनों के बीच, जहां हर गली में इतिहास सांस लेता है और हर मंदिर में भक्ति गूंजती है, वहीं संकट मोचन संगीत समारोह की एक भावभीनी रात साक्षी बनी, संगीत, साधना और समर्पण के अद्भुत संगम की। इस पावन अवसर पर पचास वर्षों की तपस्या, पंजाब की सूफियाना मिट्टी, काशी की भक्ति और जीवन-दर्शन, पद्मश्री गायिका जसपिंदर नरूला ने न केवल अपनी प्रस्तुति से वातावरण को राममय किया, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों और संगीत यात्रा के रहस्यों को वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी के साथ साझा किया। यह संवाद केवल प्रश्नोत्तर नहीं, बल्कि एक कलाकार की आत्मा से निकली वह यात्रा है, जिसमें संघर्ष है, श्रद्धा है, और अंततः एक गहरा संतोष भी, सुरों की साधना ने उन्हें वहां पहुंचाया, जहां संगीत ईश्वर का माध्यम बन जाता है। प्रस्तुत है उनसे हुए बातचीत के कुछ प्रमुख अंशः-</p>



<p><strong>सुरेश गांधी : संकट मोचन के इस पावन मंच पर गाने का अनुभव कैसा रहा?<br>जसपिंदर नरूला : </strong>काशी में गाना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है, एक जीवंत आध्यात्मिक ऊर्जा है। लेकिन जब बात संकट मोचन मंदिर की हो, तो यह अनुभव और भी गहरा हो जाता है। यहां गाना केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक अर्पण है। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं नहीं गा रही, बल्कि मुझसे गवाया जा रहा है। यहां हर सुर सीधे हनुमान जी तक पहुंचता है। आज मैंने जो भी गाया, वह मेरी ओर से एक विनम्र भेंट थी। कुछ वर्ष पहले जब मैं गंगा महोत्सव में आई थी, तब मैंने हनुमान जी के दरबार में माथा टेका था और मन ही मन एक मन्नत मांगी थी, एक दिन मुझे यहां भजन गाने का अवसर मिले। आज वह मन्नत पूरी हुई है। यह मेरे लिए अत्यंत भावुक क्षण है… ये खुशी के आंसू हैं।</p>



<p><strong>प्रश्न : आपकी गायकी में सूफी, भक्ति और शास्त्रीय संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यह संतुलन कैसे संभव हुआ?<br>उत्तर :</strong> मैं पंजाब की मिट्टी से हूं, जहां सूफी संतों की परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है। वहां का संगीत अपने आप में इबादत है। बचपन से ही मैंने यह सीखा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा है। मैंने हमेशा अपनी मौलिकता को बनाए रखने की कोशिश की है। चाहे फिल्मी गीत गाऊं या भजन, मेरे लिए हर सुर एक साधना है। शायद यही कारण है कि मेरी गायकी में सूफियाना रंग भी है और भक्ति की गहराई भी।</p>



<p><strong>प्रश्न : आपने फिल्मी दुनिया में अपार सफलता हासिल की, फिर भी भक्ति और शास्त्रीय संगीत से जुड़ी रहीं। इसका क्या कारण रहा?<br>उत्तर : </strong>लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन जड़ों से जुड़ाव स्थायी होता है। मैंने कभी अपने मूल को नहीं छोड़ा। शास्त्रीय संगीत मेरी नींव है और भक्ति मेरी आत्मा। फिल्मों में गाना मेरे करियर का हिस्सा है, लेकिन जब मैं भजन गाती हूं, तो वह मेरे भीतर की सच्ची अभिव्यक्ति होती है। यही मुझे संतुलित रखता है।</p>



<p><strong>प्रश्न : “प्यार तो होना ही था” गीत ने आपके करियर को नई ऊंचाई दी। उस दौर को कैसे याद करती हैं?<br>उत्तर :</strong> प्यार तो होना ही था का वह गीत मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट था. रेमो फर्नांडीज के साथ गाया गया यह गीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। जब यह गीत आया, तो मुझे इतनी लोकप्रियता मिली, मैं खुद भी हैरान थी। लेकिन मैंने इसे सिर पर चढ़ने नहीं दिया, क्योंकि मुझे पता था कि असली यात्रा अभी बाकी है।</p>



<p><strong>प्रश्न : आपके संगीत सफर की शुरुआत कैसे हुई?<br>उत्तर :</strong> मेरा संगीत से रिश्ता बचपन से ही है। मेरे पिता केसर सिंह नरूला स्वयं संगीतकार थे। उन्होंने ही मुझे संगीत की पहली शिक्षा दी। घर का माहौल ऐसा था कि हर दिन रियाज़ होता था। आगे चलकर मैंने उस्ताद गुलाम सादिक खान से प्रशिक्षण लिया। शास्त्रीय संगीत ने मेरी आवाज़ को आधार दिया। यही आधार आज तक मेरे साथ है।</p>



<p><strong>प्रश्न : आपने अपने करियर में कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। उस अनुभव को कैसे देखती हैं?<br>उत्तर :</strong> मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे कल्याणजी जैसे महान संगीतकार का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने मुझे इंडस्ट्री में आने का रास्ता दिखाया। इसके बाद विजू शाह और अन्य कई संगीत निर्देशकों के साथ काम करने का अवसर मिला। हर अनुभव ने मुझे कुछ नया सिखाया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="461" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1-1024x461.jpg" alt="" class="wp-image-882087" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1-1024x461.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1-300x135.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1-768x346.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1-1536x692.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/jaspndar-narula1-1.jpg 1698w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p><strong>प्रश्न : संकट मोचन में आपकी प्रस्तुति के दौरान “राम आएंगे” और “भज ले राम” जैसे भजनों ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। उस क्षण आपकी अनुभूति क्या थी?<br>उत्तर : </strong>जब मैं “राम आएंगे…” गा रही थी, तो मुझे लगा जैसे पूरा वातावरण राममय हो गया है। लोग झूम रहे थे, आंखें बंद कर प्रार्थना कर रहे थे, वह दृश्य शब्दों में नहीं कहा जा सकता। “मनवा रे जीवन है संग्राम, भज ले राम…” यह केवल गीत नहीं, जीवन का सार है। जब हम कठिनाइयों में होते हैं, तो भक्ति ही हमें संभालती है। प्रभु हर दिल में हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि विश्वास है, जब हम सच्चे मन से पुकारते हैं, तो भगवान जरूर आते हैं। उस समय मैं खुद भी एक श्रोता बन जाती हूं और संगीत मुझे भीतर से छूता है।</p>



<p><strong>प्रश्न : आपने युवाओं को मेहनत और ईश्वर में विश्वास का संदेश दिया। आज के समय में यह कितना जरूरी है?<br>उत्तर : </strong>आज की दुनिया बहुत तेज हो गई है। हर कोई जल्दी सफलता चाहता है, धैर्य की कमी दिखती है। लेकिन मैं यही कहना चाहूंगी कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मैंने 50 वर्षों तक लगातार मेहनत की है। यह कोई एक दिन की उपलब्धि नहीं है। अगर आप ईश्वर में विश्वास रखते हैं और अपने काम के प्रति ईमानदार हैं, तो सफलता जरूर मिलती है। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। जो लोग साधना से नहीं गुजरते, वे सफलता को टिकाकर नहीं रख पाते।</p>



<p><strong>प्रश्न : काशी और यहां के श्रोताओं के बारे में आपका क्या अनुभव रहा?<br>उत्तर : </strong>काशी के श्रोता बहुत विशेष होते हैं। वे केवल सुनते नहीं, बल्कि महसूस करते हैं। यहां संगीत आत्मा से जुड़ जाता है। जब मैंने देखा कि लोग छतों पर, बाहर स्क्रीन के सामने खड़े होकर भी सुन रहे हैं, तो मुझे लगा कि यह केवल मेरा नहीं, बल्कि संगीत का सम्मान है।</p>



<p><strong>प्रश्न : मंदिर के महंत से मुलाकात और काशी की पौराणिकता के बारे में जानकर आपकी क्या प्रतिक्रिया रही?<br>उत्तर : </strong>कार्यक्रम के बाद मेरी मुलाकात पंडित विश्वंभरनाथ मिश्र से हुई। उन्होंने मुझे काशी की परंपरा, गोस्वामी तुलसीदास और मंदिर की स्थापना की कथा सुनाई। उसे सुनकर मैं सच में भावुक हो गई। काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक अनुभव है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे यहां गाने का अवसर मिला।</p>



<p>फिलहाल, यह संवाद केवल एक साक्षात्कार नहीं, बल्कि एक साधिका की आत्मकथा का अंश है। उनका जीवन-दर्शन सामने आया, जहां संगीत, भक्ति और संघर्ष एक-दूसरे के पूरक बन जाते हैं। जसपिंदर नरूला की आवाज़ में जो गूंज है, वह केवल सुरों की नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या, विश्वास और समर्पण की है। काशी की इस पावन भूमि पर उन्होंने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया, जब संगीत साधना बन जाता है, तो वह केवल सुना नहीं जाता… वह जिया जाता है। समारोह में उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि उनकी आवाज़ में आज भी वही ऊर्जा और भावनात्मक गहराई है। “भज ले राम… राम… राम…” जैसे भजनों की गूंज ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। श्रोता झूम उठे, और हर सुर के साथ आस्था का प्रवाह और प्रगाढ़ होता गया। उनकी गायकी में भाव, ऊर्जा और आध्यात्मिकता का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने श्रोताओं को भीतर तक स्पर्श किया। यह केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक साधना थी, एक ऐसी साधना, जिसमें सुर ईश्वर को समर्पित हो जाते हैं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>जब काशी ने ओढ़ी सुरों की चादर : जाग उठा संगीत का आत्मलोक</title>
		<link>https://dastaktimes.org/when-kashi-covered-itself-with-the-sheet-of-tunes-the-soul-world-of-music-woke-up/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[DN VERMA]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:39:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[वाराणसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="144" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-300x144.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-300x144.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-1024x492.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-768x369.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-1536x738.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1.jpg 1806w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />स्वरों की नींव पर सजा रागों का महल, सुर, साधना और समरसता की रात, काशी में गूंजा रागों का अनंत संसार &#8211;सुरेश गांधी वाराणसी : काशी की आध्यात्मिक वेला में जब रात अपने चरम पर होती है, तब संकट मोचन संगीत समारोह केवल एक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि वह साधना, समर्पण और सुरों का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="144" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-300x144.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-300x144.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-1024x492.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-768x369.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1-1536x738.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-shiromani1.jpg 1806w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<h3 class="wp-block-heading">स्वरों की नींव पर सजा रागों का महल, सुर, साधना और समरसता की रात, काशी में गूंजा रागों का अनंत संसार</h3>



<p>&#8211;<strong>सुरेश गांधी</strong></p>



<p><strong>वाराणसी :</strong> काशी की आध्यात्मिक वेला में जब रात अपने चरम पर होती है, तब संकट मोचन संगीत समारोह केवल एक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि वह साधना, समर्पण और सुरों का जीवंत महाकुंभ बन जाता है। 103वें समारोह की दूसरी निशा भी कुछ ऐसी ही रही, जहां थकान का अस्तित्व संगीत की तरंगों में विलीन हो गया और हर श्रोता सुरों की धारा में डूबता चला गया. दिनभर की व्यस्तता और रात्रि जागरण के बावजूद जैसे ही शाम ढली, मंदिर परिसर में संगीत प्रेमियों का सैलाब उमड़ पड़ा। यह वही काशी है, जहां संगीत केवल सुना नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है। और जब मंच सजा, तो लगा मानो स्वरों की नींव पर रागों का एक विराट महल खड़ा हो रहा हो।</p>



<p><strong>ड्रम, धुन और दैवीय स्पंदन : पहली प्रस्तुति ने बांधा समां<br></strong>डिड-डिग-डिग, तुम-टी-तुम, शुवे…ईप… की अनुगूंज के साथ शुरू हुई पहली प्रस्तुति ने पारंपरिक संगीत की सीमाओं को तोड़ते हुए एक नए प्रयोग का द्वार खोल दिया। मंच पर जब ड्रम, बाल्टी, थाली, घंट और परात जैसे सामान्य प्रतीत होने वाले वस्त्र वाद्य बनकर सजे, तो श्रोताओं ने एक अद्भुत संगीत प्रयोग का साक्षात्कार किया। इस प्रस्तुति के केंद्र में थे विख्यात पर्कशनिस्ट पंडित शिवमणि, जिनकी उंगलियां किसी यांत्रिक गति से वाद्यों पर थिरक रही थीं। उनके साथ मेंडोलिन पर यू. राजेश और पखावज पर विश्वंभर नाथ मिश्र की संगत ने इस प्रस्तुति को शास्त्रीयता और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम में बदल दिया। “रघुपति राघव राजाराम” और “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” जैसे भजनों को साउथ इंडो-वेस्टर्न शैली में प्रस्तुत कर कलाकारों ने यह सिद्ध कर दिया कि भक्ति का स्वर किसी एक शैली का मोहताज नहीं होता। श्रोताओं के कदम स्वतः थिरक उठेकृकहीं कोई बैठा नहीं रहा, हर कोई इस लय का हिस्सा बन गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="517" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii-1024x517.jpg" alt="" class="wp-image-882082" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii-1024x517.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii-300x151.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii-768x388.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pamdit-shiromanaiii.jpg 1347w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p><strong>मोहन वीणा और सात्विक वीणाः शांति का राग, आत्मा का संवाद<br></strong>दूसरी प्रस्तुति में ग्रैमी सम्मानित पंडित विश्व मोहन भट्ट और उनके सुपुत्र सलिल भट्ट ने मोहन वीणा और सात्विक वीणा की जुगलबंदी से वातावरण को दिव्यता से भर दिया। राग विश्वरंजनी में आलाप, जोड़ और झाला के क्रम ने जैसे श्रोताओं को ध्यान की अवस्था में पहुंचा दिया। मध्य लय और द्रुत लय की गतकारी के साथ तीन ताल की प्रस्तुति में दोनों वाद्यों के बीच संवाद ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो दो साधक आत्मा के स्तर पर एक-दूसरे से संवाद कर रहे हों। रामधुन के साथ इस प्रस्तुति का समापन हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति में रंग दिया। तबले पर पं. रामकुमार मिश्र और कौशिक कुंवर की संगत ने इस जुगलबंदी को और प्रभावशाली बना दिया।</p>



<p><strong>तबला जुगलबंदी : लय के भीतर संवाद का सौंदर्य</strong><br>तीसरी प्रस्तुति में अजराड़ा घराना के जरगाम अकरम खां और दिल्ली घराना के खुर्रम अली नियाजी ने तबले की जुगलबंदी प्रस्तुत कर श्रोताओं को लय की गहराइयों से परिचित कराया। तीनताल में पेशकार, कायदा, टुकड़ा और रेला की प्रस्तुति के दौरान दोनों कलाकारों के बीच सवाल-जवाब का क्रम अत्यंत रोचक रहा। हर तिहाई के साथ श्रोताओं की वाहवाही गूंज उठती। संवादिनी पर मोहित साहनी और सारंगी पर अमान खां की संगत ने इस प्रस्तुति में मधुरता का स्पर्श जोड़ा, जिससे पूरी प्रस्तुति एक संतुलित संगीत अनुभव बन गई।</p>



<p><strong>गायन में रागों की गरिमा : उस्ताद गुलाम अब्बास खां का प्रभाव</strong><br>चौथी प्रस्तुति में रामपुर घराना के गुलाम अब्बास खां ने अपने गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राग बिहाग में विलंबित ख्याल से शुरुआत करते हुए उन्होंने स्वर विस्तार की ऐसी बुनावट रची कि वातावरण पूरी तरह रसमय हो उठा। इसके बाद द्रुत लय में छोटा ख्याल और राग सोहनी की बंदिश “ऐसो कन्हाई मानत नाहीं” ने प्रस्तुति को चरम पर पहुंचा दिया। तबले पर उस्ताद अकरम खां, संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र और सारंगी पर विनायक सहाय की संगत ने इस प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="479" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1-1024x479.jpg" alt="" class="wp-image-882083" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1-1024x479.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1-300x140.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1-768x359.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1-1536x718.jpg 1536w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pandit-vishvmohan1.jpg 1915w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p><strong>बनारस घराने की थाप : जब इतिहास ने ली ताल में सांस</strong><br>पांचवीं प्रस्तुति में पं. शुभ महाराज ने तबले की थाप से जैसे संकट मोचन मंदिर की ईंट-ईंट में इतिहास की गूंज भर दी। तीनताल और धमार की जटिल संरचनाओं के बीच उन्होंने 16 और 14 मात्राओं की ऐसी कड़ियां स्थापित कीं, जिनमें बनारस घराने की परंपरा सजीव हो उठी। सारंगी पर विनायक सहाय और संवादिनी पर मोहित साहनी की संगत ने इस ऐतिहासिक प्रस्तुति को और भी रंगीन बना दिया।</p>



<p><strong>सितार की साधना : राग परमेश्वरी में डूबा परिसर</strong><br>छठवीं प्रस्तुति में कोलकाता से आए विख्यात सितार वादक पं. कुशल दास ने राग परमेश्वरी में आलापचारी से शुरुआत की। उनके सितार के सुर जैसे मंदिर परिसर में एक अदृश्य धारा की तरह बहने लगे। इसके बाद तीनताल में गतकारी और राग ललित के स्पर्श ने इस प्रस्तुति को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। तबले पर पं. संजू सहाय की संगत ने इस प्रस्तुति को और भी सजीव बना दिया। श्रोता इस दौरान पूर्णतः ध्यानमग्न दिखाई दिए।</p>



<p><strong>अंतिम प्रस्तुति : भैरव के साथ भोर की आहट<br></strong>दूसरी निशा की अंतिम प्रस्तुति में पं. जसराज के शिष्य पं. रतन मोहन शर्मा ने अपने पुत्र स्वर शर्मा के साथ गायन प्रस्तुत किया। राग भैरव की गंभीरता और प्रातःकालीन रागों की मधुरता ने इस प्रस्तुति को एक अद्भुत समापन प्रदान किया। ऐसा लगा मानो संगीत स्वयं भोर का स्वागत कर रहा हो। तबले पर पं. रामकुमार मिश्र और संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र की संगत ने इस प्रस्तुति को पूर्णता प्रदान की।</p>



<p><strong>संगीत बना साधना, काशी बनी साक्षी</strong><br>इस प्रकार संकट मोचन की दूसरी निशा केवल प्रस्तुतियों का क्रम नहीं रही, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा बन गईकृजहां हर राग एक प्रार्थना था, हर ताल एक ध्यान। काशी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यहां संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना है, और जो इस साधना में डूब गया, वह स्वयं को पा गया।</p>



<p></p>
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		<title>DU के इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय और यूनेस्को ने मासिक धर्म पर पहला सर्टिफिकेट कोर्स किया लॉन्च</title>
		<link>https://dastaktimes.org/dus-indraprastha-mahila-mahavidyalaya-and-unesco-launch-the-first-certificate-course-on-menstruation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[DN VERMA]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:30:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="144" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-2-1-300x144.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-2-1-300x144.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-2-1-1024x491.jpeg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-2-1-768x369.jpeg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-2-1.jpeg 1171w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए, दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय ने यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से &#8216;एम्पॉवर फ्लो: स्पॉटलाइट रेड&#8217; नामक सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ किया। इस अनूठी पहल के साथ, इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली :</strong> मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए, दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय ने यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से &#8216;एम्पॉवर फ्लो: स्पॉटलाइट रेड&#8217; नामक सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ किया। इस अनूठी पहल के साथ, इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करने वाला भारत का पहला संस्थान बन गया है। पीएम मोदी के महिला गरिमा और सशक्तीकरण के विजन के अनुरूप, इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नयना सहस्रबुद्धे (उपाध्यक्ष, भारतीय स्त्री शक्ति) रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वीडन से लीना बैकर और जॉयस पोअन (शिक्षा क्षेत्र प्रमुख, यूनेस्को नई दिल्ली) उपस्थित रहीं। यूनेस्को नई दिल्ली की डॉ.हुमा मसूद ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का सफल आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो.पूनम कुमरिया के नेतृत्व में किया गया, जिसकी समन्वयक डॉ.चेतना गुप्ता रहीं।</p>



<p>मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़ियों, सामाजिक वर्जनाओं और जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम स्वास्थ्य, शिक्षा और लैंगिक दृष्टिकोण को एक साथ लाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को ज्ञान और संवेदनशीलता से लैस करना है ताकि वे समाज में नेतृत्व कर सकें और मासिक धर्म समानता पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ा सकें। इस मुद्दे की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए, प्राचार्या प्रो. पूनम कुमरिया ने कहा कि मासिक धर्म के प्रति जागरूकता और संसाधनों की कमी आज भी कई युवतियों की शिक्षा में बाधा बनती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="440" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3-1024x440.jpeg" alt="" class="wp-image-882078" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3-1024x440.jpeg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3-300x129.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3-768x330.jpeg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Image-3.jpeg 1188w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p>मुख्य अतिथि सहस्रबुद्धे ने इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में सामान्य बनाने और इस पर खुलकर संवाद करने का आह्वान किया। वहीं जॉयस पोअन ने इसे सार्वजनिक शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बताया और डॉ. हुमा मसूद ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संस्थागत प्रणालियों व नीतिगत ढांचे में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। देशभर के अन्य महाविद्यालयों और समुदायों तक पहुंचने की योजना के साथ, यह पहल समावेशी प्रथाओं और जागरूक समाज के निर्माण की ओर एक बड़ा कदम है। इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय और यूनेस्को की यह साझेदारी लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा और युवा कल्याण के साझा लक्ष्यों को दर्शाती है।</p>
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		<title>MP : बुरहानपुर में पंचायत का फैसला, गाली देना पड़ेगा भारी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/mp-abuse-of-panchayats-decision-in-burhanpur-will-cost-heavily/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />बुरहानपुर : मध्यप्रदेश (MP) के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा गांव है जिसे गाली-गलौच मुक्त गांव का दर्जा मिला है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर 6 हजार की आबादी वाला बोरसर गांव मध्य प्रदेश का पहला ऐसा गांव बन गया है. जहां गाली नहीं दी जाती.अगर कोई यहां गाली देने की गलती कर दे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000009.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>बुरहानपुर : मध्यप्रदेश (MP) के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा गांव है जिसे गाली-गलौच मुक्त गांव का दर्जा मिला है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर 6 हजार की आबादी वाला बोरसर गांव मध्य प्रदेश का पहला ऐसा गांव बन गया है. जहां गाली नहीं दी जाती.अगर कोई यहां गाली देने की गलती कर दे तो तुरंत उसपर जुर्माना (Fine) ठोका जाता है और यहां तक की सजा का भी प्रावधान है.</p>



<p>ग्राम पंचायत बोरसर के सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे सहित अभिनेता अश्विन पाटिल ने गांव को गाली मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने गांव में संस्कार नवाचार की ऐसी नींव रखी है कि पूरे गांव में कोई भी गाली देने से बचता है. क्या अमीर और क्या गरीब गांव का ये नियम सभी पर लागू होता है. अगर कोई लड़ाई झगड़े में गाली दे भी दे. तो उसपर तुरंत 500 रुपए जुर्माना लगाया जाता है या एक घंटे तक गांव में झाड़ू मारकर साफ सफाई करवाई जाती है.</p>



<p>यहां बच्चों से लेकर युवाओं को सभ्य और जागरूक बनाने के लिए यहां पुस्तकालय भी खोला गया है जहां धर्म-कर्म, जनरल नॉलेज और स्कूली पाठयक्रम की किताबों का खजाना उपलब्ध कराया गया है. इसके अलावा गांव में इंटरनेट क्रांति लाई गई है और 4 स्थानों पर फ्री वाईफाई स्थापित किया है जिससे गांव का हर व्यक्ति फ्री इंटरनेट का लाभ उठा रहा है. साथ में हर घर हरियाली अभियान के तहत लोगों को पौधे वितरित किए गए हैं, जिससे गांव को हरित क्रांति से भी जोड़ा जा सके.</p>



<p>अभिनेता व समाजसेवी अश्विन पाटिल ने कहा जब मुंबई से गांव लौटा तो देखा बेहद छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौच की वजह से बड़े विवाद बन जाते थे. यानी विवाद की जड़ उतनी बड़ी नहीं होती थी. जितनी गाली बन जाती थी.इसके बाद मैंने ग्राम पंचायत के सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे से संपर्क किया.उन्होंने एक बैठक बुलाई, यहां सभी को मौजूदगी में फैसला लिया और ग्राम पंचायत ने एक आदेश जारी किया. अब जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं, जहां साफ शब्दों में लिखा है कि बोरसर मध्यप्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव है.यहां मां-बहन की गाली देने पर ₹500 का दंड या एक घंटा गांव की सफाई कराई जाएगी.</p>



<p>गांव में एक सेवा भाव कक्ष भी शुरू किया गया है, यहां जरूरतमंदो के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध है. दानदाता और समाजसेवियों ने सामग्री दान की है, जरूरत के मुताबिक किसी भी धर्म और जाति का व्यक्ति लाभ उठा सकता है, यह पहल ग्रामीणों के लिए मददगार साबित हो रही है.</p>
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		<title>इंदौर: एनटीसी की जमीन पर नहीं खोल सकते शराब की दुकान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/indore-liquor-shop-cannot-be-opened-on-ntc-land/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:55:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1-300x180.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1-300x180.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />इंदौर : मालवा मिल (Malwa Mill) क्षेत्र में एनटीसी (NTC) की जमीन (Land) पर शराब दुकान (Liquor Shop ) खोलने के मामले में अधिकारियों ने कलेक्टर (Collector) को शिकायत की है। उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में आपत्ति जताई है, साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश का हवाला भी दिया है। एनटीसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1-300x180.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1-300x180.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/indore-high-court-768x461-1.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>इंदौर : मालवा मिल (Malwa Mill) क्षेत्र में एनटीसी (NTC) की जमीन (Land) पर शराब दुकान (Liquor Shop ) खोलने के मामले में अधिकारियों ने कलेक्टर (Collector) को शिकायत की है। उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में आपत्ति जताई है, साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश का हवाला भी दिया है। एनटीसी की इस जमीन पर कल एक शराब ठेकेदार द्वारा शराब दुकान खोलने के लिए सामान रख दिया गया था, जिसकी भनक रहवासियों को लगी तो उन्होंने इसका पुरजोर विरोध कर दिया और कहा कि रहवासी एरिया में दुकान नहीं खुलने दी जाएगी। सुबह रहवासियों ने चक्काजाम किया। पुलिस ने बाद में उसे खुलवा तो दिया, लेकिन आंदोलनकारियों को वहां से हटा नहीं पाई। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही पोहे बनाकर नाश्ता किया और शाम को खाना बनाकर खाया भी। इसके बाद रात में अधिकारियों और ठेकेदार की सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड पाठ भी किया गया। दिन में आबकारी अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन वह भी मायूस नजर आए और कहा कि दुकान यहां खुलकर ही रहेगी।</p>



<p>बाद में इस मामले में विधायक महेंद्र हार्डिया और क्षेत्रीय पार्षद नंदकिशोर पहाडिय़ा ने हस्तक्षेप किया और कलेक्टर से बात की। कलेक्टर ने भी लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए यहां दुकान नहीं खोलने का आश्वासन दिया। दूसरी ओर एनटीसी की जमीन पर खुल रही इस शराब दुकान को लेकर एनटीसी के अधिकारियों ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर 2023 में उच्च न्यायालय में लगी एक याचिका का उल्लेख किया है, जिसमें न्यायालय ने यथास्थिति रखने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पत्र में लिखा कि जमीन भारत सरकार के अधीन है। इसकी अनुमति के बिना यहां कुछ नहीं हो सकता है। विदित है कि इस जमीन को रवींद्र लिमजे ने गोदाम के लिए लिया हुआ है, लेकिन यहां कपड़ा दुकान संचालित हो रही थी और अब गोदाम मालिक ने इसे शराब दुकान खोलने के लिए दे दिया, जो नियमों के खिलाफ है। हालांकि कल दुकान खुली थी, लेकिन आज सुबह से दुकान के शटर बंद हंै। इसे रहवासियों ने अपनी जीत बताया है .</p>



<p>जैन बहुल इस इलाके को शांतिप्रिय माना जाता है। जब लोगों को यहां शराब दुकान खोलने की जानकारी लगी तो वह भडक़ गए। कुछ रहवासी तो भावुक हो गए। लोगों के यहां कल खाना नहीं बना तो मोहल्ले के युवाओं ने यहीं उनके लिए पोहे बनवाए और शाम को खाना बनाकर खिलाया। यहां शुरू से रहने वाले पूनमचंद सतभैया और अन्य बुजुर्गों की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि यहां शराब दुकान खुलेगी। शराब दुकान खोलने के बाद यहां का माहौल खराब होगा, जो यहां के रहवासी नहीं चाहते। यह जैन समाज का क्षेत्र है और समाज के लोग शांतिप्रिय हैं।</p>



<p>कल गोदाम मालिक के प्रति लोगों में आक्रोश देखने को मिला। गोदाम मालिक रवींद्र लिमजे पर भी लोगों ने आरोप लगाया और कहा कि उसने खुद गोदाम किराए से लिया है तो इसे गोदाम बनाया जाए, जबकि यहां कपड़े की एक बड़ी दुकान खोल दी गई है और उसका किराया वसूला जा रहा है। नियम अनुसार कोई भी किराएदार दूसरा किराएदार नहीं रख सकता है, जबकि जमीन पर कोर्ट द्वारा यथास्थिति रखने के आदेश दिए गए हैं</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>दिल्ली में बुधवार का दिन रहा अप्रैल का सबसे ठंडा दिन, तोड़ा 11 साल का रिकॉर्ड</title>
		<link>https://dastaktimes.org/wednesday-was-the-coldest-day-of-april-in-delhi-breaking-record-of-11-years/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:51:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="176" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-300x176.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-300x176.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-768x450.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : दिल्लीवालों (Delhiites) के लिए बुधवार का दिन अप्रैल का सबसे ठंडा दिन (April Coldest day) रहा. तापमान में आई गिरावट ने 11 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा. अप्रैल के महीने में बुधवार 11 सालों का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड हुआ. कल सफदरजंग (Safdarjung) में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="176" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-300x176.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-300x176.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6-768x450.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/00000-6.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : दिल्लीवालों (Delhiites) के लिए बुधवार का दिन अप्रैल का सबसे ठंडा दिन (April Coldest day) रहा. तापमान में आई गिरावट ने 11 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा. अप्रैल के महीने में बुधवार 11 सालों का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड हुआ. कल सफदरजंग (Safdarjung) में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.9 डिग्री कम है।</p>



<p>इससे पहले अप्रैल में सबसे कम तापमान 23 अप्रैल, 2016 को 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. दिनभर बादलों की चादर, तेज हवाओं और हल्की, छिटपुट बारिश के कारण शहर में अप्रैल के मौसम के हिसाब से असामान्य ठंड महसूस हुई. इसी वजह से लोगों को गर्मी कम महसूस हुई और कई दिनों बाद वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी रही।</p>



<p>सफदरजंग मुख्य मौसम केंद्र के अनुसार, बुधवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटे में 6.4 मिमी बारिश हुई, जो 4 अप्रैल, 2023 के बाद सबसे ज्यादा है. वहीं पालम में 0.6 मिमी, लोधी रोड में नाममात्र और सफदरजंग, रिज और आयानगर में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई।</p>



<p>अधिकतम तापमान की बात करें तो<br>– पालम में अधिकतम 27.2 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 8.3 डिग्री कम<br>– लोधी रोड में 28.0 डिग्री, सामान्य से 6.0 डिग्री कम<br>– रिज में 28.8 डिग्री, सामान्य से 6.3 डिग्री कम<br>– आयानगर में 28.0 डिग्री, सामान्य से 6.9 डिग्री कम</p>



<p>न्यूनतम तापमान भी सामान्य से कम रहा<br>– सफदरजंग 16.8 डिग्री, सामान्य से 3.2 कम<br>– पालम 15.5 डिग्री, सामान्य से 4.5 कम<br>– लोधी रोड 16.2 डिग्री, सामान्य से 2.8 कम<br>– रिज 15.3 डिग्री, सामान्य से 4.8 कम<br>– आयानगर 16.4 डिग्री, सामान्य से 2.5 कम</p>



<p>आईएमडी के वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव के अनुसार, यह ठंड मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हुई है. यह वर्तमान में उत्तरी पंजाब और जम्मू-कश्मीर के ऊपर सक्रिय है, जिससे उत्तर-पश्चिमी भारत में गरज और बारिश का दौर जारी है. उन्होंने कहा कि बुधवार के बाद से तापमान में वृद्धि होने की संभावना है. देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में अधिकतम तापमान में 6–8 डिग्री और पश्चिमी हिमालय में 8–10 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. आज से आसमान साफ रहने की उम्मीद है।</p>



<p>मौसम विभाग के अनुसार, 9 अप्रैल को न्यूनतम तापमान 15.0 डिग्री और अधिकतम 31.0 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. तापमान धीरे-धीरे गर्मियों जैसी स्थिति में लौट आएगा और आसमान ज्यादातर साफ रहेगा। शहर में मौसम के अनुकूल होने के कारण प्रदूषण का स्तर भी कम रहा. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 93 दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 0–50 AQI ‘अच्छा’, 51–100 ‘संतोषजनक’, 101–200 ‘मध्यम’, 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बहुत खराब’ और 401–500 ‘गंभीर’ माना जाता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>राजगढ़ में स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, डिलीवरी एक भी नहीं और बना दिए 250 बर्थ सर्टिफिकेट…</title>
		<link>https://dastaktimes.org/big-fraud-in-health-department-in-rajgarh-not-even-one-delivery-and-250-birth-certificates-were-made/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:49:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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<p>राजगढ़ : मध्य प्रदेश (MP) में राजगढ़ जिले के रामगढ़ गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा (Fraud) सामने आया है. यहां स्वास्थ्य विभाग के कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. हैरानी की बात यह है कि फरवरी माह में इस छोटे से स्वास्थ्य केंद्र पर 137 बच्चों का बर्थ रजिस्टर किया गया, जबकि वास्तविकता में वहां एक भी डिलीवरी (Delivery) नहीं हुई थी.</p>



<p>मामले का खुलासा तब हुआ जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को इसकी जानकारी मिली. इसके बाद फरवरी में ही संबंधित ऑपरेटर को हटा दिया गया. वहीं, 6 अप्रैल को माचलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ. जांच में यह भी सामने आया कि केवल एक महीने ही नहीं, बल्कि वर्ष 1950 से 1980 तक के भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए गए, जबकि उस समय गांव में न स्वास्थ्य केंद्र मौजूद था और न ही वहां डिलीवरी होती थी.</p>



<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी यहां से प्रमाण पत्र जारी किए गए. कुल मिलाकर 250 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि में संशोधन कराने के लिए ये फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते थे. इसके लिए लोकसेवा केंद्र, आधार सेंटर और एमपी ऑनलाइन संचालकों के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था. प्रति प्रमाण पत्र 500 से 1000 रुपये तक लेकर बिना किसी वैध दस्तावेज के सीआरएस पोर्टल पर एंट्री कर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते थे.</p>



<p>पूछताछ में आरोपियों ने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर 35 हजार रुपये अवैध रूप से कमाना स्वीकार किया है. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. एएसपी केएल बंजारे ने बुधवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि 6 अप्रैल को डॉ. सुनील चौरसिया, बीएमओ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीरापुर की शिकायत पर थाना माचलपुर में आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 338 और 336(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया.</p>



<p>प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रामगढ़ अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्जुन बैरागी, जिसने फरवरी 2026 में एक भी डिलीवरी न होने के बावजूद 137 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए. कई प्रमाण पत्र बिना आवेदन के, कई पुराने वर्षों के और कई अन्य राज्यों के व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए. सीआरएस पोर्टल पर भी फर्जी दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए गए, जिसकी जानकारी संबंधित मेडिकल अधिकारी को नहीं थी.</p>



<p>पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामगढ़ का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया है. साथ ही आमजन से अपील की है कि फर्जी दस्तावेज बनाना या बनवाना गंभीर अपराध है, इसलिए वैध प्रक्रिया का ही पालन करें.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>MP : एनटीसी की जमीन पर नहीं खोल सकते शराब की दुकान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/mp-liquor-shop-cannot-be-opened-on-ntc-land/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:45:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-1-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-1-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-1.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>इंदौर : मालवा मिल (Malwa Mill) क्षेत्र में एनटीसी (NTC) की जमीन (Land) पर शराब दुकान (Liquor Shop ) खोलने के मामले में अधिकारियों ने कलेक्टर (Collector) को शिकायत की है। उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में आपत्ति जताई है, साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश का हवाला भी दिया है।</p>



<p>एनटीसी की इस जमीन पर कल एक शराब ठेकेदार द्वारा शराब दुकान खोलने के लिए सामान रख दिया गया था, जिसकी भनक रहवासियों को लगी तो उन्होंने इसका पुरजोर विरोध कर दिया और कहा कि रहवासी एरिया में दुकान नहीं खुलने दी जाएगी। सुबह रहवासियों ने चक्काजाम किया। पुलिस ने बाद में उसे खुलवा तो दिया, लेकिन आंदोलनकारियों को वहां से हटा नहीं पाई। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही पोहे बनाकर नाश्ता किया और शाम को खाना बनाकर खाया भी। इसके बाद रात में अधिकारियों और ठेकेदार की सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड पाठ भी किया गया। दिन में आबकारी अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन वह भी मायूस नजर आए और कहा कि दुकान यहां खुलकर ही रहेगी।</p>



<p>बाद में इस मामले में विधायक महेंद्र हार्डिया और क्षेत्रीय पार्षद नंदकिशोर पहाडिय़ा ने हस्तक्षेप किया और कलेक्टर से बात की। कलेक्टर ने भी लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए यहां दुकान नहीं खोलने का आश्वासन दिया। दूसरी ओर एनटीसी की जमीन पर खुल रही इस शराब दुकान को लेकर एनटीसी के अधिकारियों ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर 2023 में उच्च न्यायालय में लगी एक याचिका का उल्लेख किया है, जिसमें न्यायालय ने यथास्थिति रखने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पत्र में लिखा कि जमीन भारत सरकार के अधीन है। इसकी अनुमति के बिना यहां कुछ नहीं हो सकता है। विदित है कि इस जमीन को रवींद्र लिमजे ने गोदाम के लिए लिया हुआ है, लेकिन यहां कपड़ा दुकान संचालित हो रही थी और अब गोदाम मालिक ने इसे शराब दुकान खोलने के लिए दे दिया, जो नियमों के खिलाफ है। हालांकि कल दुकान खुली थी, लेकिन आज सुबह से दुकान के शटर बंद हंै। इसे रहवासियों ने अपनी जीत बताया ह</p>



<p>जैन बहुल इस इलाके को शांतिप्रिय माना जाता है। जब लोगों को यहां शराब दुकान खोलने की जानकारी लगी तो वह भडक़ गए। कुछ रहवासी तो भावुक हो गए। लोगों के यहां कल खाना नहीं बना तो मोहल्ले के युवाओं ने यहीं उनके लिए पोहे बनवाए और शाम को खाना बनाकर खिलाया। यहां शुरू से रहने वाले पूनमचंद सतभैया और अन्य बुजुर्गों की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि यहां शराब दुकान खुलेगी। शराब दुकान खोलने के बाद यहां का माहौल खराब होगा, जो यहां के रहवासी नहीं चाहते। यह जैन समाज का क्षेत्र है और समाज के लोग शांतिप्रिय हैं।</p>



<p>कल गोदाम मालिक के प्रति लोगों में आक्रोश देखने को मिला। गोदाम मालिक रवींद्र लिमजे पर भी लोगों ने आरोप लगाया और कहा कि उसने खुद गोदाम किराए से लिया है तो इसे गोदाम बनाया जाए, जबकि यहां कपड़े की एक बड़ी दुकान खोल दी गई है और उसका किराया वसूला जा रहा है। नियम अनुसार कोई भी किराएदार दूसरा किराएदार नहीं रख सकता है, जबकि जमीन पर कोर्ट द्वारा यथास्थिति रखने के आदेश दिए गए हैं।ै।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>असम, केरल और पुदुचेरी में मतदान, PM मोदी की युवाओं से अपील, बोले- रिकॉर्ड संख्या में डालें वोट</title>
		<link>https://dastaktimes.org/voting-in-assam-kerala-and-puducherry-pm-modi-appeals-to-youth-to-vote-in-record-numbers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:42:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : आज तीन राज्यों- असम, पुदुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने आज तीनों प्रदेशों के मतदाताओं (Voters) से बड़ी संख्या में बाहर आकर लोकतंत्र के इस उत्सव में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/pm-modi-bjp-foundation-day.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली : आज तीन राज्यों- असम, पुदुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने आज तीनों प्रदेशों के मतदाताओं (Voters) से बड़ी संख्या में बाहर आकर लोकतंत्र के इस उत्सव में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिला मतदाताओं से लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर वोट देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>



<p>विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड मतदान की अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वोट डालना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। सभी को अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को सशक्त बनाना चाहिए। यह प्रक्रिया राज्य के भविष्य को आकार देने में सहायक होगी। प्रत्येक नागरिक का योगदान महत्वपूर्ण है।</p>



<p>पीएम मोदी ने केरल, पुदुचेरी और असम की जनता से अलग-अलग एक्स पोस्ट में अपील की। 2026 के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने राज्य के युवाओं और महिलाओं से आगे आकर बड़ी संख्या में अपने वोट डालने का अनुरोध किया।</p>



<p>विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू होते ही पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा,पुदुचेरी के प्रत्येक मतदाता से रिकॉर्ड संख्या में इस चुनाव में भाग लेने की अपील है। उन्होंने कहा कि पुदुचेरी के भविष्य को आकार देने में प्रत्येक वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>



<p>मतदान शुरू होने के बाद पीएम मोदी ने असम के लोगों से भी बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा, राज्य के युवा और महिला मतदाता उत्साहपूर्वक चुनाव में भाग लें। यह चुनाव लोकतंत्र और सार्वजनिक कर्तव्य का उत्सव बनेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>MP में आज से गेहूं खरीदी, किसानों के लिए सिस्टम सुधारने का सख्त निर्देश</title>
		<link>https://dastaktimes.org/strict-instructions-to-improve-the-system-for-farmers-to-purchase-wheat-from-today-in-mp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:39:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भोपाल: मध्य प्रदेश में आज से गेहूं खरीदी आरंभ हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपील की है कि इसका लाभ उठाएं. उन्होंने बताया कि सभी उपार्जन केंद्रों पर सहज-सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को दिए गए हैं. उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/04/Untitled-1-copy-125.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>भोपाल: मध्य प्रदेश में आज से गेहूं खरीदी आरंभ हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपील की है कि इसका लाभ उठाएं. उन्होंने बताया कि सभी उपार्जन केंद्रों पर सहज-सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को दिए गए हैं. उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की व्यवस्था की जा रही है.</p>



<p>सीएम मोहन यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन जैसी महत्वपूर्ण और व्यापक गतिविधि में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाएं भी सहयोग करें. प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर फैसले लिए जा रहे हैं.</p>



<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार किसान और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल संवाद के दौरान व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है. गेहूं की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना बड़ी चुनौती थी, हम इसे 2700 रूपये प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे.</p>



<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किये जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी. उपार्जन केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के द्वारा भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हित से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराया जाए.</p>
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