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	<title>अमेरिका ईरान तनाव &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>‘समझौता करो या कार्रवाई झेलो’&#8230; ट्रंप की ईरान को नई चेतावनी, पुल और पावर प्लांट बताए संभावित निशाने</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 05:56:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-iran.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनी तो पुल, बिजली संयंत्र और अन्य रणनीतिक ठिकाने संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।</p>



<p>फॉक्स न्यूज को दिए एक टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यदि बातचीत से कोई नतीजा नहीं निकलता, तो सैन्य विकल्प भी पूरी तरह खुले रहेंगे।</p>



<p><strong>समझौता नहीं हुआ तो फिर शुरू हो सकती है सैन्य कार्रवाई</strong></p>



<p>इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान समझौता करने से इनकार करता है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। उनका कहना था कि ऐसे हमलों के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में ईरान को कई वर्ष लग सकते हैं।</p>



<p>उन्होंने विशेष रूप से पुलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे रणनीतिक ढांचों पर कार्रवाई तेजी से की जा सकती है और इसका असर लंबे समय तक बना रहता है।</p>



<p><strong>बिजली संयंत्रों को भी बताया अहम लक्ष्य</strong></p>



<p>ट्रंप ने कहा कि किसी भी देश के बिजली उत्पादन संयंत्र उसकी सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में शामिल होते हैं। उनके अनुसार यदि इन प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचता है, तो उन्हें दोबारा तैयार करने में लंबा समय लगता है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था तथा बुनियादी क्षमताओं पर पड़ता है।</p>



<p><strong>नागरिक सुविधाओं पर हमले से किया इनकार</strong></p>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डिसेलिनेशन संयंत्रों को निशाना बनाने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा, इसलिए अमेरिका केवल रणनीतिक और सैन्य महत्व वाले ठिकानों पर ही ध्यान केंद्रित करेगा।</p>



<p>ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य आम लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ढांचों को लक्ष्य बनाना है।</p>



<p><strong>नेतन्याहू को लेकर भी दी सफाई</strong></p>



<p>इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू व्हाइट हाउस में मुलाकात से पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी नई खुफिया जानकारी साझा करना चाहते थे।</p>



<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले से ही ईरान की परमाणु गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए है और उसे इस संबंध में किसी अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बयान देकर अमेरिका की भागीदारी बनाए रखना चाहते थे।</p>



<p><strong>बातचीत जारी, लेकिन सैन्य विकल्प भी बरकरार</strong></p>



<p>ट्रंप के ताजा बयान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखना चाहता है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी उसके एजेंडे में बना रहेगा। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>



<p></p>
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		<title>ट्रंप की धमकी पर ईरान का तीखा जवाब! कहा- हमारा तेल रुका तो किसी देश का निर्यात भी नहीं होगा</title>
		<link>https://dastaktimes.org/irans-sharp-response-to-trumps-threat-said-that-if-our-oil-stops-no-country-will-export-it/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:39:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के जवाब में ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उसे तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र का कोई भी देश अपना तेल निर्यात नहीं कर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के जवाब में ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उसे तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र का कोई भी देश अपना तेल निर्यात नहीं कर सकेगा। ईरान ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी।</p>



<p><strong>ईरान ने दिया कड़ा संदेश</strong></p>



<p>ईरानी संसद के स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल दो ही विकल्प हैं—या तो सभी देश तेल का निर्यात करेंगे या फिर कोई भी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की सुरक्षा को खतरा बना रहा, तो पूरे क्षेत्र का ऊर्जा ढांचा भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा।</p>



<p>गालिबाफ ने यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थायी सुरक्षा तभी संभव है, जब वहां से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त हो जाए।</p>



<p><strong>ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी</strong></p>



<p>इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियारों से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।</p>



<p>ट्रंप ने कहा था कि ऐसी स्थिति में अमेरिका पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।</p>



<p><strong>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?</strong></p>



<p>हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस समय अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। शुरुआती युद्धविराम समझौते के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी हैं। अमेरिका ने कई ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।</p>



<p>दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए यहां निर्बाध समुद्री आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है।</p>



<p><strong>बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर</strong></p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के सख्त रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>



<p></p>
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		<title>चाबहार पर अमेरिकी कार्रवाई के बीच भारत ने दी बड़ी राहत, सरकार बोली- हमारे टर्मिनल को नहीं पहुंचा कोई नुकसान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/india-gives-big-relief-amid-us-action-on-chabahar-government-says-no-damage-to-our-terminal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:24:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत के संचालन वाले शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिका की ओर से चाबहार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/chawarbr.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत के संचालन वाले शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिका की ओर से चाबहार को मिली विशेष प्रतिबंध छूट समाप्त होने के बाद भी इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत जारी है।</p>



<p><strong>विदेश मंत्रालय ने बताया मौजूदा हालात</strong></p>



<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत अमेरिकी हमलों से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि चाबहार बंदरगाह को लेकर अमेरिका द्वारा दी गई विशेष प्रतिबंध छूट अप्रैल में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद भारत इस विषय पर संबंधित देशों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है।</p>



<p>हमले से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने सामने आई रिपोर्टों का संज्ञान लिया है, लेकिन भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और वहां किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।</p>



<p><strong>नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की अपील</strong></p>



<p>विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि किसी भी सैन्य संघर्ष के दौरान नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और विवादों के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात भी दोहराई।</p>



<p><strong>भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चाबहार बंदरगाह?</strong></p>



<p>ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक और व्यापारिक नीति का अहम हिस्सा माना जाता है। इस बंदरगाह के दो प्रमुख टर्मिनल हैं, जिनमें शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी शामिल हैं। शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल का संचालन भारत करता है।</p>



<p>इस परियोजना के माध्यम से भारत को पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर हुए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी व्यापारिक पहुंच मिलती है। यही कारण है कि चाबहार बंदरगाह को भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।</p>



<p><strong>आईएनएसटीसी परियोजना में भी है बड़ी भूमिका</strong></p>



<p>भारत और ईरान चाबहार बंदरगाह को 7,200 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस कॉरिडोर का उद्देश्य भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच माल परिवहन को तेज, कम लागत वाला और अधिक प्रभावी बनाना है।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना पूरी क्षमता के साथ विकसित होती है, तो इससे क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी और भारत की सामरिक तथा आर्थिक स्थिति भी और मजबूत होगी।</p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया संकट! US-ईरान तनाव से थमा समुद्री ट्रैफिक, तेल-गैस सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 06:19:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-768x463.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री जहाजों की आवाजाही बेहद धीमी पड़ गई है। भारत समेत दुनिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-768x463.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री जहाजों की आवाजाही बेहद धीमी पड़ गई है। भारत समेत दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।</p>



<p><strong>उत्तरी समुद्री मार्ग तक सीमित हुई जहाजों की आवाजाही</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक लगभग ठहर गया है। फिलहाल अधिकांश जहाज केवल उस उत्तरी समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिसे ईरान की मंजूरी प्राप्त है। वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित हो गई है। हाल के घंटों में केवल एक अमेरिकी मंजूरी प्राप्त सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज के इस जलमार्ग से गुजरने की जानकारी सामने आई है।</p>



<p><strong>सैन्य तनाव बढ़ते ही तेजी से घटी जहाजों की संख्या</strong></p>



<p>डेटा फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे थे। 24 जून को यह संख्या बढ़कर 59 तक पहुंच गई थी। हालांकि ताजा सैन्य टकराव के बाद जहाजों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर सके।</p>



<p><strong>होर्मुज पर नियंत्रण को रणनीतिक ताकत मानता है ईरान</strong></p>



<p>अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे अहम रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी वार्ता में इसे दबाव बनाने के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।</p>



<p>विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर यह सुनिश्चित करने का दबाव है कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।</p>



<p><strong>ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का लगाया आरोप</strong></p>



<p>ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया और इन हमलों को होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब के रूप में पेश करना महज एक बहाना है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।</p>



<p><strong>कतर, कुवैत और बहरीन तक पहुंचा संघर्ष</strong></p>



<p>अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। वहीं होर्मुज क्षेत्र के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप सहित कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग पर इसका लंबा असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, समुद्री परिवहन लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>खामनेई को इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक, अंतिम यात्रा में लगे अमेरिका-इजरायल विरोधी नारे; पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/khamenei-laid-to-rest-in-imam-reza-dargah-anti-us/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 05:56:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर मशहद में कर दिया गया। उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके साथ ही छह दिनों तक चले राजकीय शोक और अंतिम संस्कार कार्यक्रम का समापन हो गया। इस दौरान ईरान और इराक के विभिन्न शहरों से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0101.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>तेहरान:</strong> ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर मशहद में कर दिया गया। उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके साथ ही छह दिनों तक चले राजकीय शोक और अंतिम संस्कार कार्यक्रम का समापन हो गया। इस दौरान ईरान और इराक के विभिन्न शहरों से लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम यात्रा के दौरान अमेरिका और इजरायल के विरोध में नारे भी लगाए गए।</p>



<p><strong>101 वर्षीय धर्मगुरु ने पढ़ाई नमाज-ए-जनाजा</strong></p>



<p>अंतिम संस्कार से पहले खामनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान, कोम और अन्य प्रमुख शहरों में श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। अंतिम दिन उनका ताबूत मशहद पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, जनाजे की रस्म 101 वर्षीय धर्मगुरु अयातुल्ला हुसैन नूरी हमदानी ने नमाज-ए-जनाजा पढ़ाकर पूरी कराई। वर्ष 1925 में जन्मे हुसैन नूरी हमदानी को ईरान के सबसे कट्टरपंथी धर्मगुरुओं में गिना जाता है।</p>



<p><strong>मोजतबा खामनेई की गैरमौजूदगी से उत्तराधिकार पर बढ़ी चर्चा</strong></p>



<p>अंतिम संस्कार के दौरान खामनेई के बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सुरक्षा कारणों और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के चलते उन्होंने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने केवल एक लिखित संदेश जारी कर लोगों का आभार व्यक्त किया।</p>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामनेई समेत उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई थी।</p>



<p><strong>ईरान के परमाणु संयंत्र के पास अमेरिकी हवाई हमले</strong></p>



<p>इस बीच अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान पर नए हवाई हमले किए। ईरान ने आरोप लगाया कि बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास भी हमला किया गया, हालांकि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने दो दिनों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 14 लोगों की मौत हुई।</p>



<p><strong>ट्रंप के बयान के बाद और तेज हुए हमले</strong></p>



<p>ताजा हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुए, जिसमें उन्होंने ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समाप्त होने का संकेत बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि हमले नहीं रुके तो संघर्ष और अधिक बढ़ सकता है।</p>



<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइल भंडार, सैन्य स्पीड बोट तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित तटीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। कमांड ने कुछ वीडियो भी जारी किए, जिनमें हवाईअड्डों के रनवे और मिसाइल लॉन्चरों पर हमले दिखाई गए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करना है।</p>



<p><strong>कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक पहुंचा तनाव</strong></p>



<p>ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन हमले किए। इन हमलों में कुवैत के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर के अर्ली वॉर्निंग सैटेलाइट एंटीना और बहरीन में अमेरिकी सेना के फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया।</p>



<p>बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है, वहां तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे। इसके अलावा कुवैत और कतर की ओर भी मिसाइलें दागी गईं। गुरुवार दोपहर जॉर्डन के अजराक सैन्य अड्डे पर भी 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जहां अमेरिका ने अपने सैनिकों और लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रखी है।</p>



<p></p>
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		<title>ट्रंप की हत्या की नई साजिश का दावा! इजरायल के खुफिया अलर्ट से मची सनसनी, अमेरिका में बढ़ी चौकसी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 04:54:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-1-1-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-1-1-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-1-1-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-1-1.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई खुफिया रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इजरायल ने अमेरिका को ऐसी खुफिया जानकारी दी है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की नई साजिश तैयार की &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई खुफिया रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इजरायल ने अमेरिका को ऐसी खुफिया जानकारी दी है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की नई साजिश तैयार की है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है।</p>



<p><strong>इजरायल ने अमेरिका को दी खुफिया चेतावनी</strong><br>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजरायली खुफिया एजेंसियों ने इस सप्ताह अमेरिकी अधिकारियों को चेताया है कि ईरान डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की एक विशेष योजना पर काम कर रहा है। हालांकि अमेरिकी एजेंसियां अब तक इस खुफिया इनपुट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी हैं और इसकी जांच जारी है।</p>



<p><strong>सुलेमानी की मौत के बाद से बदले की बात करता रहा है ईरान</strong><br>रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से ईरान लगातार ट्रंप के खिलाफ बदले की बात करता रहा है। हाल ही में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान भी ट्रंप के खिलाफ नारे लगाए जाने की बात सामने आई थी।</p>



<p><strong>ट्रंप बोले- ईरान की &#8216;हिट लिस्ट&#8217; में सबसे ऊपर मेरा नाम</strong><br>इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि उनका नाम ईरान की कथित &#8220;हिट लिस्ट&#8221; में सबसे ऊपर है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसी सूचियों में अपना नाम देखा है और अब तक वह भाग्यशाली रहे हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा ऐसी बनी रहे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।</p>



<p><strong>अमेरिकी एजेंसियां कर रही हैं खुफिया जानकारी की जांच</strong><br>कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की ओर से साझा की गई यह जानकारी ट्रंप पर ईरान के खिलाफ और सख्त रुख अपनाने का दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है। अमेरिकी खुफिया समुदाय के अधिकारियों का कहना है कि इजरायल से मिले इनपुट का अभी तक पूरी तरह सत्यापन नहीं हो पाया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।</p>



<p><strong>तनाव के बीच बातचीत पर भी बना संशय</strong><br>अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद तनाव लगातार बढ़ा है। युद्धविराम जैसी व्यवस्था भी लगभग समाप्त हो चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि ईरान के साथ बातचीत खत्म हो गई है और वह आगे कोई वार्ता नहीं करना चाहते। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पर्दे के पीछे परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है और अगस्त के मध्य तक किसी संभावित समझौते की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>&#8216;मैं ईरान का नंबर वन टारगेट हूं&#8217;&#8230; ट्रंप का सनसनीखेज दावा, बोले- तेहरान मेरी हत्या की साजिश रच रहा, समझौते के सभी रास्ते बंद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 04:46:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि वह ईरान का &#8220;नंबर वन टारगेट&#8221; हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के साथ किसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>अंकारा:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि वह ईरान का &#8220;नंबर वन टारगेट&#8221; हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते की संभावना अब नहीं बची है। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर नई राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>



<p><strong>हत्या की साजिश का लगाया गंभीर आरोप</strong></p>



<p>ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व उन्हें अपना सबसे बड़ा निशाना मानता है और उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके कुछ विरोधी नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं और कुछ अन्य भी शायद नहीं रहे। उन्होंने कहा, &#8220;मैं भी शायद जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं।&#8221; ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले 47 वर्षों से उनका रवैया इसी प्रकार का रहा है।</p>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की पूर्व नेतृत्व व्यवस्था पूरी तरह अमेरिका विरोधी रही, जबकि मौजूदा नेतृत्व पहले की तुलना में कुछ अधिक समझदारी से काम करता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालना है।</p>



<p><strong>ईरान के साथ बातचीत खत्म करने का ऐलान</strong></p>



<p>ट्रंप ने बताया कि कुछ घंटे पहले ही उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते के प्रयासों को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की डील करना केवल समय की बर्बादी है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान लगातार समझौतों का उल्लंघन करता रहा है और अब अमेरिका उसे कड़ा जवाब देगा।</p>



<p>युद्धविराम को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां तक उनका सवाल है, युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना सख्त रुख जारी रखेगा।</p>



<p><strong>अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई</strong></p>



<p>अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने दावा किया कि बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।</p>



<p><strong>होर्मुज में बढ़ते तनाव पर कतर की चिंता</strong></p>



<p>ओमान तट के निकट तरलीकृत प्राकृतिक गैस वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद कतर ने ईरान से होर्मुज क्षेत्र में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है। कतर सरकार ने कहा कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखती है। कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>



<p>अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज मार्ग से जहाजों का संचालन नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग छह हजार नाविकों की सुरक्षा पर अनावश्यक खतरा उत्पन्न हो सकता है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>खामेनेई के मातम के बीच ईरान में बड़े हमले का दावा, 80 से ज्यादा सैन्य ठिकाने बने निशाना, फिर बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/amidst-khameneis-mourning-claims-of-major-attack-in-iran/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 07:08:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="160" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-300x160.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-300x160.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहे तीन जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई कार्रवाई की। दावा किया गया है कि केशम द्वीप, बंदर अब्बास समेत 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="160" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-300x160.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-300x160.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>तेहरान:</strong> पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहे तीन जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई कार्रवाई की। दावा किया गया है कि केशम द्वीप, बंदर अब्बास समेत 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।</p>



<p><strong>अमेरिका ने सैन्य प्रतिष्ठानों को बनाया निशाना</strong></p>



<p>अमेरिका की ओर से दावा किया गया कि यह सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हमलों में किसी रिहायशी इलाके को निशाना नहीं बनाया गया। कार्रवाई के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार नेटवर्क और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की 60 से अधिक स्पीड बोटों को लक्ष्य बनाया गया। हमले में कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा भी किया गया है।</p>



<p><strong>केशम द्वीप और बंदर अब्बास में भी कार्रवाई का दावा</strong></p>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने केशम द्वीप और बंदर अब्बास क्षेत्र में भी सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब ईरान में शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी के बीच हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।</p>



<p><strong>ईरान का पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। हमले के बाद दोनों देशों में सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। कुवैत की सेना ने कहा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों और ड्रोन को निष्क्रिय करने में जुटा है।</p>



<p><strong>ईरानी नेतृत्व लौटा, आपात रणनीति पर हो सकती है बैठक</strong></p>



<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यक्रम में शामिल होने इराक गए कई वरिष्ठ नेता वापस ईरान लौट आए हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में आपात बैठक कर आगे की रणनीति पर फैसला लिया जा सकता है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन की शांति डील का मसौदा तैयार! अब ट्रंप की मंजूरी पर टिकी दुनिया की नजर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/draft-of-60-day-peace-deal-between-america-and-iran-is-ready-now-the-worlds-eyes-are-on-trumps-approval/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 10:38:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="175" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/khamnai-trump-300x175.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/khamnai-trump-300x175.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/khamnai-trump.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों ने कथित तौर पर 60 दिन के एक प्रारंभिक शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बना ली है। इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य युद्धविराम को बनाए रखना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों ने कथित तौर पर 60 दिन के एक प्रारंभिक शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बना ली है। इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य युद्धविराम को बनाए रखना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोबारा वार्ता शुरू करना बताया जा रहा है। हालांकि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार है।</p>



<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में 60 दिन के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU के प्रारूप पर सहमति बनी है। यदि यह समझौता लागू होता है तो पिछले तीन महीनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जाएगा।</p>



<p><strong>परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर होगी बातचीत</strong></p>



<p>प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता देगा। इसके साथ ही अगले 60 दिनों के दौरान यूरेनियम एनरिचमेंट और ईरान के हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉकपाइल के भविष्य को लेकर विस्तृत बातचीत की जाएगी।</p>



<p>समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने का भी प्रावधान रखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान को 30 दिनों के भीतर इस क्षेत्र से समुद्री बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बदले अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी में चरणबद्ध तरीके से ढील दे सकता है।</p>



<p>इसके अलावा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करने और मानवीय सहायता पहुंचाने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ने की बात कही जा रही है।</p>



<p><strong>ट्रंप की मंजूरी का इंतजार, व्हाइट हाउस ने नहीं की पुष्टि</strong></p>



<p>सूत्रों के मुताबिक मंगलवार तक समझौते की अधिकांश शर्तों पर सहमति बन चुकी थी। ईरानी प्रतिनिधियों ने मध्यस्थों को बताया कि उन्हें तेहरान के शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी मिल चुकी है और वे आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।</p>



<p>हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं दी है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक ट्रंप ने इस मसौदे पर फैसला लेने के लिए कुछ और समय मांगा है। वहीं व्हाइट हाउस ने भी अभी तक किसी आधिकारिक समझौते की पुष्टि नहीं की है।</p>



<p>हाल ही में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने वार्ता की धीमी गति पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि अमेरिका फिलहाल प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार नहीं कर रहा है।</p>



<p><strong>युद्धविराम के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव</strong></p>



<p>कूटनीतिक हलचल के बीच जमीन पर तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास के पास एक ईरानी ड्रोन ऑपरेशन को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे कुवैत ने हवा में ही नष्ट कर दिया।</p>



<p>इसके अलावा ओमान और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के संयुक्त प्रबंधन की खबरों पर भी विवाद बढ़ गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा बयान दिया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है तथा किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।</p>



<p>ट्रंप के बयान के बाद तेहरान में नाराजगी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई राजनीतिक सहमति नहीं बनी तो मौजूदा युद्धविराम किसी भी समय टूट सकता है।</p>



<p><strong>ईरान की ओर से मिले-जुले संकेत</strong></p>



<p>जहां अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने प्रारंभिक सहमति दे दी है, वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने इन दावों को खारिज किया है। एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और ईरान ने मध्यस्थ देश को किसी आधिकारिक मसौदे की जानकारी नहीं दी है।</p>



<p>उधर अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट कहा कि ईरान को अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप किसी भी स्थिति में “खराब समझौता” स्वीकार नहीं करेंगे।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज संकट पर अमेरिका को बड़ा झटका, सऊदी ने नहीं दिया साथ; ट्रंप को 36 घंटे में रोकना पड़ा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 07:04:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="201" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-300x201.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-300x201.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-768x514.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ महज 36 घंटे के भीतर रोक दिया गया। अब अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह सऊदी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="201" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-300x201.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-300x201.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll-768x514.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_11_00_129470162trump-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ महज 36 घंटे के भीतर रोक दिया गया। अब अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब का रुख था, जिसने अमेरिका को सैन्य सहयोग देने से इनकार कर दिया।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने रविवार को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई कथित नाकेबंदी को हटाना और समुद्री मार्ग को फिर से खोलना था। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने के करीब डेढ़ दिन बाद ही व्हाइट हाउस को पीछे हटना पड़ा।</p>



<p><strong>सऊदी ने एयरबेस और हवाई क्षेत्र देने से किया इनकार</strong></p>



<p>अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की घोषणा से सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया था। सऊदी अरब ने अमेरिका को साफ संदेश दिया कि वह अपने प्रिंस सुल्तान एयरबेस से अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं देगा।</p>



<p>यही नहीं, सऊदी अरब ने अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। यह वही एयरबेस है जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान निशाना बनाया था। बताया गया कि ट्रंप ने खुद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।</p>



<p>इसके बाद अमेरिका को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोकने का फैसला लेना पड़ा।</p>



<p><strong>खाड़ी देशों में भी दिखी नाराजगी</strong></p>



<p>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केवल सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य अमेरिकी सहयोगी देश भी ट्रंप की अचानक की गई घोषणा से असहज थे। अमेरिका ने कतर और ओमान जैसे देशों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां भी पहले से कोई स्पष्ट रणनीतिक समन्वय नहीं था।</p>



<p>ओमान के एक राजनयिक ने दावा किया कि अमेरिका ने पहले सैन्य अभियान की घोषणा कर दी और बाद में सहयोगियों से संपर्क करना शुरू किया। इससे क्षेत्रीय देशों में असंतोष बढ़ा।</p>



<p><strong>पाकिस्तान की मध्यस्थता से चल रही बातचीत</strong></p>



<p>यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब इन कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन कर रहा है और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है।</p>



<p>हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि क्षेत्रीय सहयोगियों को पहले से जानकारी दी गई थी, लेकिन मीडिया रिपोर्टें इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।</p>



<p><strong>अमेरिकी युद्धपोत पहुंचे फारस की खाड़ी</strong></p>



<p>इस बीच अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान दो अमेरिकी विध्वंसक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर फारस की खाड़ी तक पहुंचे थे। अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने उन पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी सेना ने उसे विफल कर दिया।</p>



<p>हालांकि इस दावे पर ईरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>



<p><strong>पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के संकेत</strong></p>



<p>ट्रंप के इस फैसले ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है। अब किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों का बिना शर्त समर्थन मिलना आसान नहीं दिख रहा।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की प्राथमिकता अब बड़े युद्ध की बजाय क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा बन चुकी है।</p>



<p></p>
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