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	<title>एनडीए सरकार &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>लालू-राबड़ी की सुरक्षा पर फिर बदला फैसला! दोबारा तैनात हुए 42 पुलिसकर्मी, सरकार ने दी सफाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 05:08:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/photo6-2-300x225.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/photo6-2-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/photo6-2.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा के केंद्र में आ गई है। सुरक्षा में कटौती और पुलिस बल हटाए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच अब राज्य प्रशासन ने लालू-राबड़ी आवास पर दोबारा पुलिस बल की तैनाती कर दी है। हालांकि इस &#8230;]]></description>
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<p><strong>पटना:</strong> बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा के केंद्र में आ गई है। सुरक्षा में कटौती और पुलिस बल हटाए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच अब राज्य प्रशासन ने लालू-राबड़ी आवास पर दोबारा पुलिस बल की तैनाती कर दी है। हालांकि इस बार सुरक्षा में लगाए गए जवानों की संख्या पहले की तुलना में कम रखी गई है।</p>



<p><strong>लालू-राबड़ी आवास पर फिर लौटे पुलिसकर्मी</strong></p>



<p>मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा के लिए कुल 42 पुलिसकर्मियों को फिर से तैनात किया गया है। इनमें दारोगा स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इससे पहले सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के दौरान तैनात जवानों को पुलिस लाइन भेज दिया गया था, लेकिन अब उन्हें दोबारा ड्यूटी पर लगाया गया है।</p>



<p>प्रशासन का कहना है कि आवास पर लगातार लोगों की आवाजाही और भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था। इसी कारण सुरक्षा बलों की पुनः तैनाती का निर्णय लिया गया।</p>



<p><strong>जेड प्लस सुरक्षा में बदलाव के बाद हुआ संशोधन</strong></p>



<p>लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को पहले जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत 40 से 50 कमांडो और अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात रहते थे। हाल ही में सुरक्षा समीक्षा समिति द्वारा सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा किए जाने के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया था, जिसके तहत सुरक्षा बलों की संख्या में संशोधन किया गया।</p>



<p>इसी प्रक्रिया के दौरान तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई थी, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया।</p>



<p><strong>सरकार बोली- सभी फैसले नियमों के तहत</strong></p>



<p>सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर बिहार सरकार ने अपना पक्ष रखा है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सुरक्षा संबंधी सभी फैसले तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर सुरक्षा का आकलन करती है और आवश्यकता के अनुरूप बदलाव करती है।</p>



<p>मंत्री ने यह भी कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर सभी कदम निर्धारित प्रक्रिया के तहत उठाए गए हैं।</p>



<p><strong>एनडीए सरकार पर दुर्भावना का आरोप बेबुनियाद: मंत्री</strong></p>



<p>भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए सरकार किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्भावना के आधार पर निर्णय नहीं लेती। उन्होंने कहा कि चाहे आवास आवंटन का मामला हो या सुरक्षा व्यवस्था का, सभी निर्णय नियमों के अनुरूप लिए जाते हैं।</p>



<p><strong>सुरक्षा मुद्दे पर तेज हुई सियासत</strong></p>



<p>दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल लगातार आरोप लगा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव राजनीतिक सोच से प्रेरित हैं। इसी को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।</p>



<p>सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव के बाद राबड़ी देवी के आवास के बाहर समर्थकों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि हालात पूरी तरह सामान्य हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है।</p>



<p><strong>बिहार की राजनीति में फिर बना चर्चा का विषय</strong></p>



<p>लालू-राबड़ी परिवार की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों में बड़ा मुद्दा बन गया है। सुरक्षा बहाली के बावजूद जवानों की संख्या में कमी और इसे लेकर उठ रहे सवालों ने बिहार की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है।</p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>विदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में PM मोदी, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब बड़े सुधारों पर होगी अहम बैठक</title>
		<link>https://dastaktimes.org/pm-modi-in-action-as-soon-as-he-returns-from-foreign-tour-after-petrol-diesel-and-gold/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 10:44:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="185" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6-300x185.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6-300x185.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार अब बड़े प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 15 से 20 मई 2026 तक प्रस्तावित विदेश दौरे से लौटते ही एक अहम मंत्रिपरिषद बैठक करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक 21 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="185" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6-300x185.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6-300x185.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/p7-6.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार अब बड़े प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 15 से 20 मई 2026 तक प्रस्तावित विदेश दौरे से लौटते ही एक अहम मंत्रिपरिषद बैठक करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक 21 मई को होने वाली इस बैठक में सरकार के बड़े सुधार एजेंडे और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।</p>



<p>प्रधानमंत्री मोदी यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के बाद होने वाली बैठक को मौजूदा वैश्विक हालात और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>



<p><strong>‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर रहेगा बड़ा फोकस</strong></p>



<p>सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य फोकस ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करना होगा। सरकार विभिन्न मंत्रालयों की प्रक्रियाओं, नियमों और अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने की दिशा में बड़े फैसले ले सकती है।</p>



<p>बताया जा रहा है कि आम लोगों और उद्योग जगत के लिए प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।</p>



<p><strong>करीब एक दर्जन मंत्रालय देंगे प्रेजेंटेशन</strong></p>



<p>बैठक में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण एवं वन, श्रम, सड़क परिवहन और परमाणु ऊर्जा समेत कई मंत्रालयों के सचिव अपने-अपने विभागों में किए गए सुधारों पर प्रस्तुति दे सकते हैं।</p>



<p>इन प्रेजेंटेशन में उन जन-केंद्रित नीतिगत बदलावों पर फोकस रहेगा, जिन्हें एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में लागू किया गया है।</p>



<p><strong>‘डीरेगुलेशन’ और सरलीकरण पर होगी चर्चा</strong></p>



<p>सूत्रों के मुताबिक बैठक में नियमों को आसान बनाने और अनुपालन में ढील देने यानी ‘डीरेगुलेशन’ पर विशेष चर्चा की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को ज्यादा पारदर्शी, तेज और व्यावहारिक बनाया जाए।</p>



<p>माना जा रहा है कि इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और आम नागरिकों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ जल्दी मिल सकेगा।</p>



<p><strong>‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को फिर मिलेगी रफ्तार</strong></p>



<p>गौरतलब है कि 4 जून 2025 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तरह काम करने का संदेश दिया था। हालांकि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक हालात के चलते कुछ समय के लिए सुधार प्रक्रिया की गति प्रभावित हुई थी।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड काल की तरह मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भी बड़े सुधारों को आगे बढ़ाना जरूरी हो गया है।</p>



<p><strong>नीति आयोग की रिपोर्ट्स पर भी हो सकती है चर्चा</strong></p>



<p>सूत्रों के अनुसार, बैठक में नीति आयोग से जुड़े कुछ अहम सुझावों और रिपोर्ट्स पर भी चर्चा संभव है। सरकार मौजूदा सुधारों की समीक्षा करने के साथ-साथ आने वाले समय के लिए नई रणनीति तैयार कर सकती है।</p>



<p></p>
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		<title>हिमंता बिस्वा सरमा ने दूसरी बार संभाली असम की कमान, मुख्यमंत्री पद की ली शपथ; समारोह में जुटे देशभर के दिग्गज नेता</title>
		<link>https://dastaktimes.org/himanta-biswa-sarma-took-command-of-assam-for-the-second-time-took-oath-as-the-chief-minister/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 08:32:34 +0000</pubDate>
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<p><strong>गुवाहाटी:</strong> भाजपा नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। गुवाहाटी के खानापारा क्षेत्र स्थित पशु चिकित्सालय परिसर में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>



<p>शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल समेत भाजपा और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समारोह में देशभर से 40 से अधिक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल हुए।</p>



<p><strong>लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता</strong></p>



<p>हिमंता बिस्वा सरमा असम में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं। उनके नेतृत्व में राज्य में एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है।</p>



<p>असम में भाजपा नीत गठबंधन ने पहली बार वर्ष 2016 में सत्ता हासिल की थी। उस समय केंद्र सरकार में मंत्री रहे सरबानंदा सोनोवाल के नेतृत्व में एनडीए ने राज्य में सरकार बनाई थी। इसके बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने नेतृत्व संभालते हुए पार्टी को लगातार मजबूत किया।</p>



<p><strong>विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिला प्रचंड बहुमत</strong></p>



<p>हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी।</p>



<p>126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 82 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 10-10 सीटें हासिल कीं।</p>



<p>चुनावी नतीजों के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है और पार्टी नेतृत्व ने इसे विकास और स्थिरता की राजनीति पर जनता की मुहर बताया है।</p>



<p><strong>राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा समारोह का महत्व</strong></p>



<p>शपथ ग्रहण समारोह में देश के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय राजनीतिक महत्व दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी समारोह में शामिल हुए।</p>



<p>राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पूर्वोत्तर में भाजपा की मजबूत पकड़ और लगातार तीसरी बार सरकार बनना पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।</p>



<p></p>
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		<title>वन नेशन वन इलेक्शन की राह पर आगे बढ़ती भारत की संघीय व्यवस्था</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 06:50:08 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[वन नेशन वन इलेक्शन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली ( दस्तक ब्यूरो ) : भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने &#8216;एक राष्ट्र-एक चुनाव&#8217; प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दे दी है। यह बिल संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। यह फैसला &#8216;एक राष्ट्र-एक चुनाव&#8217; पर बनी उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट कैबिनेट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Former-President-Ram-Nath-Kovind-who-heads-High-L_1710521899083_1710521909017.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली ( दस्तक ब्यूरो ) : भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने &#8216;एक राष्ट्र-एक चुनाव&#8217;  प्रस्ताव को हाल ही में  मंजूरी दे दी है। यह बिल संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। यह फैसला &#8216;एक राष्ट्र-एक चुनाव&#8217; पर बनी उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट कैबिनेट के सामने पेश होने के बाद आया है। वन नेशन वन इलेक्शन का प्रस्ताव, लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि वन नेशन वन इलेक्शन आधिकारिक तौर पर एक राजनीतिक वास्तविकता बनती है तो सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ कराए जायेंगे, एक चुनावी बूथ में दो मशीनें होंगी और वोटर एक मशीन में सांसद चुनेगा तो दूसरी में विधायक। 11 घंटे की वोटिंग में प्रधानमंत्री भी तय हो जाएगा और सारे मुख्यमंत्री भी। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1.webp"><img loading="lazy" decoding="async" width="1000" height="563" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1.webp" alt="" class="wp-image-826218" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1.webp 1000w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1-300x169.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1-768x432.webp 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/Cabinet-accepts-‘one-nation-1-390x220.webp 390w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></figure>



<p>वन नेशन वन इलेक्शन पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। मोदी सरकार 2.0 ने इस समिति का गठन किया था ताकि एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता के बारें में पता किया जाये। यह सत्ताधारी दल बीजेपी के लोकसभा चुनावी घोषणा पत्र के प्रमुख वादों में से भी एक था। समिति ने इस साल मार्च में राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति की 18,626 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में पहला कदम लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है, जिसके लिए राज्यों की सहमति आवश्यक नहीं होगी, बल्कि संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी। 47 राजनीतिक दलों ने अपने विचार समिति के साथ साझा किए थे जिनमें से 32 राजनीतिक दल &#8216;वन नेशन वन इलेक्शन&#8217; के समर्थन में थे। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one-nation-one-election-report.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="760" height="443" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one-nation-one-election-report.jpg" alt="" class="wp-image-826219" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one-nation-one-election-report.jpg 760w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one-nation-one-election-report-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 760px) 100vw, 760px" /></a></figure>



<p>रिपोर्ट में कहा गया है है &#8220;केवल 15 राजनीतिक दलों को छोड़कर शेष 32 दलों ने न केवल साथ-साथ चुनाव प्रणाली का समर्थन किया बल्कि सीमित संसाधनों की बचत, सामाजिक तालमेल बनाए रखने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए ये विकल्प अपनाने की ज़ोरदार वकालत की है। उल्लेखनीय है कि जब आज़ादी के बाद देश में पहली बार 1951-52 में चुनाव हुए थे, तब लोकसभा चुनाव और सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए थे। इसके बाद तीन और टर्म्स &#8211; 1957, 1962 और 1967 &#8211; में यही क्रम रहा। एक अपवाद के साथ, जब 1959 में केरल की तत्कालीन नंबूदरीपाद सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा। 1968 और 1969 में कुछ राज्यों की विधानसभाएं भंग कर दी गईं और आख़िर में साल 1970 में लोकसभा भी भंग हो गई। ऐसे में देश में चुनावी प्रबंधन पर पुनर्विचार जरूरी हो गया था। </p>



<p><strong>वन नेशन वन इलेक्शन के संबंध में सरकार के समक्ष चुनौती: </strong></p>



<p>एक देश-एक चुनाव विधेयक पर मुहर तभी लगेगी, जब इससे संबंधित विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो जायेगा । इसके लिए संविधान में संशोधन जरूरी होगा।  संविधान के अनुच्छेद 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करना होगा।  सरकार के सामने बड़ी चुनौती संविधान संशोधन की होगी।। इसके लिए दो तिहाई बहुमत होना जरूरी है। आम चुनाव में संविधान बदलने का मुद्दा भी तीखे विमर्श का कारण रहा है। विपक्ष इसे हथियार बना सकता है और नैरेटिव सेट कर सकता है। सरकार को देश के संघीय व्यवस्था को भी क्षति न होने देने के मुद्दे पर देश और राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना होगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/ANI-20240214162457.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/ANI-20240214162457.jpg" alt="" class="wp-image-826220" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/ANI-20240214162457.jpg 600w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/ANI-20240214162457-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></a></figure>



<p><strong>वन नेशन वन इलेक्शन के विपक्ष में तर्क :</strong></p>



<p> इस प्रस्ताव के विरोधियों की दलील है कि एक साथ चुनाव करवाने से देश के संघीय ढांचे पर सीधा असर पड़ेगा, क्षेत्रीय मुद्दे नज़रअंदाज हो जाएंगे और जनता के प्रति जवाबदेही पर ख़तरा होगा।  भारत में 7 राष्ट्रीय पार्टियां और 50 से ज़्यादा क्षेत्रीय पार्टियां हैं। चुनावी ट्रेंड्स के आधार पर कहा जा सकता है कि जनता आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में अलग-अलग मांगों, अलग-अलग एजेंडे के लिए वोट करती है।  राष्ट्र के मुद्दे अलग हैं, राज्य के अलग, हर राज्य के भी अलग।  आम चुनावों के दौरान विदेश नीति, आयकर या राष्ट्रीय सुरक्षा की चर्चा होती है जबकि लोकल बॉडीज़ और प्रदेश के चुनावों के दौरान पानी, सड़कों और ऐसी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे एजेंडे पर हावी रहते हैं। ऐसे में हर चुनाव को एक साथ कराना तार्किक नही होगा। क्षेत्रीय दल ऐसा कहते हैं कि अगर लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ करवाए गए, तो राष्ट्रीय मुद्दों के सामने क्षेत्रीय मुद्दे ढक जाएंगे। राज्य स्तर पर बार-बार चुनाव होने से क्षेत्रीय मुद्दों पर जो ध्यान दिया जाता है, वो केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित हो जाएगा। राष्ट्रीय पार्टियां भर-भर के डबल इंजन वाली सरकार का हवाला देंगी और इससे क्षेत्रीय पार्टियों के वोटर बंटेंगे। राज्य सरकारों की स्वायत्ता पर असर पड़ेगा। सीधे-सीधे केंद्र सरकार में जो भी प्रमुख पार्टी होगी, एक नीतिगत फ़ैसले की आड़ में उसे ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है। समय-समय पर चुनाव होते रहने की वजह से जनप्रतिनिधियों को लगातार जवाबदेह बने रहना पड़ता है। कोई भी पार्टी या नेता एक चुनाव जीतने के बाद निरंकुश होकर काम नहीं कर सकता।  चुनाव निकालना है, तो बस प्रचार से काम नहीं चलेगा। उसके लिए काम भी कराना पड़ेगा लेकिन अगर एक ही पार्टी को प्रभुत्व मिल जाए या एक नेता को ये भरोसा हो जाए कि वही सब कुछ है तो इससे निरंकुशता की आशंका बढ़ जाएगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="538" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039-1024x538.jpg" alt="" class="wp-image-826221" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039-1024x538.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039-300x158.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039-768x403.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/866022-79849-zvbrujbakd-1516640039.jpg 1200w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p><strong>वन नेशन वन इलेक्शन के पक्ष में तर्क: </strong></p>



<p>जो इस धारा के पक्ष में है, उनका तर्क है कि ख़र्च कम होगा, सुविधा होगी और काम में बाधा नहीं होगी। देश में जब भी, जहां भी चुनाव होते हैं, तब एक आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है और  चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद सरकार किसी प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं कर सकती, नई स्कीमें नहीं शुरू कर सकती, कोई वित्तीय मंज़ूरी या नई नियुक्ति नहीं कर सकती है। अब हर साल ही कोई न कोई चुनाव पड़ता है, तो हर साल ही आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है।  प्रशासन तो काम में बझता ही है, नेतागण भी प्रचार में ही जुटे रहते हैं। चुनाव के दौरान ज़रूरी नीतिगत फ़ैसले नहीं लिए जाते और कई योजनाओं को लागू करने में समस्या आती है। इसलिए सीधे-सीधे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि अगर देश में एक ही बार में लोकसभा और विधानसभा चुनाव हो जाएं, तो आदर्श आचार संहिता कुछ ही समय तक लागू रहेगी। इसके बाद धड़ल्ले से ‘विकास ही विकास’ होगा। फिर देश में चुनाव के दौरान शिक्षकों और सरकारी मुलाज़िमों की सेवाएं ली जाती हैं। भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि अगर सभी चुनाव साथ होंगे, तो सरकारी मुलाज़िमों और सुरक्षा बलों को बार-बार चुनावी ड्यूटी पर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। उनका समय बचेगा, वो अपनी ड्यूटी ठीक से कर पाएंगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/381a0eef7e2393932d3d85e7a9ac8f381708184772612935_original.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="755" height="425" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/381a0eef7e2393932d3d85e7a9ac8f381708184772612935_original.jpg" alt="" class="wp-image-826222" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/381a0eef7e2393932d3d85e7a9ac8f381708184772612935_original.jpg 755w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/381a0eef7e2393932d3d85e7a9ac8f381708184772612935_original-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/381a0eef7e2393932d3d85e7a9ac8f381708184772612935_original-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 755px) 100vw, 755px" /></a></figure>



<p> सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 1951-52 में भारत के पहले चुनाव के दौरान कुल 68 चरण हुए थे और लागत आई थी, 10.5 करोड़ रुपये। 2019 में यही लागत बढ़कर 50,000 करोड़ पहुंच गई और 2024 के लिए इसी रिपोर्ट में 1.35 लाख करोड़ का अनुमान बताया गया है। इसके आलावा, प्रति मतदाता ख़र्च भी बढ़ा है. जो 1951 में प्रति मतदाता 6 पैसे था, 2014 में 46 रुपये हो गया है। एक देश-एक चुनाव के पक्षकार कहते हैं कि जितनी बार चुनाव होता है, देशवासियों का उतना ही पैसा ज़ाया होता है. सरकारी ख़ज़ाने पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। इसीलिए एक बार में चुनाव हो जाए, तो एक ही बार ख़र्चा होगा। </p>



<p><strong>वन नेशन वन इलेक्शन पर कोविंद समिति की सिफारिशें: </strong></p>



<p>वन नेशन वन इलेक्शन’ राम नाथ कोविंद उच्च समिति ने इस विषय पर अपनी जो महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं उनमें से प्रमुख हैं : आजादी के बाद पहले दो दशकों तक साथ में चुनाव न कराने का नकारात्मक असर अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज पर पड़ा है. पहले हर दस साल में दो चुनाव होते थे, अब हर साल कई चुनाव होने लगे हैं। इसलिए सरकार को साथ-साथ चुनाव के चक्र को बहाल करने के लिए क़ानूनी रूप से तंत्र बनाना करना चाहिए।चुनाव दो चरणों में कराए जाएं। पहले चरण में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव कराए जाएं।  दूसरे चरण में नगरपालिकाओं और पंचायतों के चुनाव हों। इन्हें पहले चरण के चुनावों के साथ इस तरह कोऑर्डिनेट किया जाए कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के सौ दिनों के भीतर इन्हें पूरा किया जाए। इसके लिए एक मतदाता सूची और एक मतदाता फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था की जाए। इसके लिए संविधान में ज़रूरी संशोधन किए जाएं। इसे निर्वाचन आयोग की सलाह से तैयार किया जाए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/63086650_1695476153_2023092335.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1000" height="596" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/63086650_1695476153_2023092335.jpg" alt="" class="wp-image-826223" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/63086650_1695476153_2023092335.jpg 1000w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/63086650_1695476153_2023092335-300x179.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/63086650_1695476153_2023092335-768x458.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></figure>



<p> समिति की सिफ़ारिश के अनुसार त्रिशंकु सदन या अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में नए सदन के गठन के लिए फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं। इस स्थिति में नए लोकसभा (या विधानसभा) का कार्यकाल, पहले की लोकसभा (या विधानसभा) की बाकी बची अवधि के लिए ही होगा। इसके बाद सदन को भंग माना जाएगा। इन चुनावों को &#8216;मध्यावधि चुनाव&#8217; कहा जाएगा, वहीं पांच साल के कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद होने वाले चुनावों को &#8216;आम चुनाव&#8217; कहा जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><a href="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-826224" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d-1024x576.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/09/one6_d.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a></figure>



<p>कोविंद समिति के अनुसार कैसे कराए जाएं चुनाव : आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक के दिन राष्ट्रपति एक अधिसूचना के ज़रिए इस अनुछेद के प्रावधान को लागू कर सकते हैं। इस दिन को &#8220;निर्धारित तिथि&#8221; कहा जाएगा। इस तिथि के बाद, लोकसभा का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले विधानसभाओं का कार्यकाल बाद की लोकसभा के आम चुनावों तक ख़त्म होने वाली अवधि के लिए ही होगा. इसके बाद लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के सभी एक साथ चुनाव कराए जा सकेंगे। एक समूह बनाया जाए जो समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर ध्यान दे। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए ज़रूरी लॉजिस्टिक्स, जैसे ईवीएम मशीनों और वीवीपीएटी खरीद, मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती और अन्य व्यवस्था करने के लिए निर्वाचन आयोग पहले से योजना और अनुमान तैयार करे। वहीं नगरपालिकाओं और पंचायतों के चुनावों के लिए ये काम राज्य निर्वाचन आयोग करे।</p>



<p></p>
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