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	<title>कॉमन सिविल कोड &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>मध्य प्रदेश में UCC पर बड़ा दांव! मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी, मोहन सरकार ने तेज किए कदम</title>
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		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:20:18 +0000</pubDate>
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<p><strong>भोपाल:</strong> मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी से संबंधित प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कॉमन सिविल कोड को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रयास रहेगा कि इसे इसी सत्र में पारित कराया जाए।</p>



<p><strong>मुख्यमंत्री ने दिए स्पष्ट संकेत</strong></p>



<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि मानसून सत्र में प्रस्ताव विधानसभा के समक्ष लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सब कुछ अनुकूल रहा तो इसी सत्र में प्रस्ताव पारित भी हो सकता है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है।</p>



<p><strong>भाजपा नेताओं ने किया समर्थन</strong></p>



<p>यूसीसी को लेकर सरकार की पहल को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता देशभर की मांग है और इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से कई सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में एकरूपता आएगी।</p>



<p><strong>यूसीसी के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति</strong></p>



<p>राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता और मसौदा तैयार करने के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा 27 अप्रैल 2026 को गठित इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।</p>



<p>समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह को भी शामिल किया गया है। समिति को विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।</p>



<p><strong>प्रदेशभर में लिए गए लोगों के सुझाव</strong></p>



<p>समिति ने राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर अलग-अलग वर्गों के लोगों से संवाद किया है। इसके साथ ही आम नागरिकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया था। यूसीसी को लेकर सुझाव और प्रस्ताव प्राप्त करने की अवधि 15 मई से 15 जून तक निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद लोगों से ऑनलाइन माध्यमों के जरिए सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।</p>



<p><strong>रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया</strong></p>



<p>समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और प्रारूप विधेयक सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। प्राप्त सुझावों और विभिन्न वर्गों के साथ संवाद के आधार पर मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार की योजना इसे मानसून सत्र में विधानसभा के समक्ष रखने की है और वर्ष के अंत तक इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।</p>



<p><strong>20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र</strong></p>



<p>मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। पांच दिवसीय इस सत्र की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। सत्र के दौरान विधायकों द्वारा प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय सूचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी।</p>



<p><strong>अनुपूरक बजट भी रहेगा प्रमुख एजेंडा</strong></p>



<p>सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी इस सत्र में पेश कर सकती है। अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों का प्रस्ताव सदन में रखा जा सकता है। इससे विभिन्न विभागों को अतिरिक्त संसाधन मिलने की संभावना है।</p>



<p><strong>स्वामित्व योजना और अन्य विधेयकों पर भी नजर</strong></p>



<p>मानसून सत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने वाली स्वामित्व योजना पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति से जुड़े विधेयक और अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण से संबंधित प्रस्ताव भी विधानसभा में पेश किए जा सकते हैं।</p>



<p><strong>यूसीसी पर चर्चा की संभावना, अंतिम फैसला बाकी</strong></p>



<p>हालांकि सरकार यूसीसी को लेकर सक्रिय है, लेकिन विधेयक इसी सत्र में पेश होगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के हालिया बयान ने यूसीसी को प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना दिया है।</p>



<p><strong>सत्र की अवधि पर विपक्ष ने उठाए सवाल</strong></p>



<p>पांच दिवसीय मानसून सत्र को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इतने कम समय में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर पर्याप्त चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है।</p>



<p><strong>सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष</strong></p>



<p>विपक्ष इस सत्र में किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और राज्यसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। वहीं सरकार विकास योजनाओं, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रमुखता से सदन में रखने की तैयारी कर रही है।</p>



<p><strong>यूसीसी पर बढ़ी राजनीतिक हलचल</strong></p>



<p>मुख्यमंत्री के बयान के बाद यूसीसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार कोई बड़ा कदम उठा सकती है।</p>



<p></p>
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