<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>क्या है मांगलिक दोष &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b7/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Sun, 17 Dec 2017 11:46:43 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>क्या है मांगलिक दोष &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>क्या है मांगलिक दोष, और क्या हैं इसके प्रभाव..?</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Dec 2017 11:46:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[और क्या हैं इसके प्रभाव..?]]></category>
		<category><![CDATA[क्या है मांगलिक दोष]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=199129</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-300x225.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="क्या है मांगलिक दोष, और क्या हैं इसके प्रभाव..?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-90x68.jpg 90w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव..jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है.कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष लगता है. इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है.यह दोष &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-300x225.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="क्या है मांगलिक दोष, और क्या हैं इसके प्रभाव..?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-90x68.jpg 90w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव..jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p><strong>मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है.कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष लगता है. इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है.यह दोष जिनकी कुण्डली में हो उन्हें मंगली जीवनसाथी ही तलाश करनी चाहिए ऐसी मान्यता है. सातवाँ भाव जीवन साथी एवम गृहस्थ सुख का है। इन भावों में स्थित मंगल अपनी दृष्टि या स्थिति से सप्तम भाव अर्थात गृहस्थ सुख को हानि पहुँचाता है ज्योतिशास्त्र में कुछ नियम बताए गये हैं जिससे वैवाहिक जीवन में मांगलिक दोष नहीं लगता है।</strong></p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-199132" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव..jpg" alt="क्या है मांगलिक दोष, और क्या हैं इसके प्रभाव..?" width="600" height="450" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव..jpg 600w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/12/क्या-है-मांगलिक-दोष-और-क्या-हैं-इसके-प्रभाव.-90x68.jpg 90w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>मांगलिक होने का अर्थ क्&#x200d;या है ?</strong></span></h3>
<p><strong>कोई जातक चाहे वह स्&#x200d;त्री हो या पुरुष उसके मांगलिक होने का अर्थ है कि उसकी कुण्&#x200d;डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है। शादी के लिए मंगल को जिन स्&#x200d;थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं। इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्&#x200d;य तौर पर खराब माना जाता है। सामान्&#x200d;य तौर का अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में इन स्&#x200d;थानों पर बैठा मंगल भी अच्&#x200d;छे परिणाम दे सकता है। तो लग्&#x200d;न का मंगल व्&#x200d;यक्ति की पर्सनेलिटी को बहुत अधिक तीक्ष्&#x200d;ण बना देता है, चौथे का मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्&#x200d;ठभूमि देता है। सातवें स्&#x200d;थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है। </strong></p>
<p><strong>आठवें और बारहवें स्&#x200d;थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। इन स्&#x200d;थानों पर बैठा मंगल यदि अच्&#x200d;छे प्रभाव में है तो जातक के व्&#x200d;यवहार में मंगल के अच्&#x200d;छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे। मांगलिक व्&#x200d;यक्ति देखने में ललासी वाले मुख का, कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, प्&#x200d;लान बनाकर काम करने वाला, कठोर अनुशासन बनाने और उसे फॉलो करने वाला, एक बार जिस काम में जुटे उसे अंत तक करने वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई से नहीं घबराने वाला होता है। इन्&#x200d;हीं विशेषताओं के कारण गैर मांगलिक व्&#x200d;यक्ति अधिक देर तक मांगलिक के सानिध्&#x200d;य में नहीं रह पाता।</strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>मंगलिक दोष</strong></span></h3>
<ol>
<li><strong>कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष (manglik dosha)लगता है</strong></li>
<li><strong>कुण्डली में चतुर्थ और सप्तम भाव में मंगल मेष अथवा कर्क राशि के साथ योग बनाता है तो मंगली दोष लगता है</strong></li>
</ol>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>मंगल भी निम्न लिखित परिस्तिथियों में दोष कारक नहीं होगा</strong></span></h3>
<ol>
<li><strong>चतुर्थ और सप्तम भाव में मंगल मेष, कर्क, वृश्चिक अथवा मकर राशि में हो और उसपर क्रूर ग्रहों की दृष्टि नहीं हो</strong></li>
<li><strong>मंगल राहु की युति होने से मंगल दोष का निवारण हो जाता है</strong></li>
<li><strong>लग्न स्थान में बुध व शुक्र की युति होने से इस दोष का परिहार हो जाता है.</strong></li>
<li><strong>कर्क और सिंह लग्न में लगनस्थ मंगल अगर केन्द्र व त्रिकोण का स्वामी हो तो यह राजयोग बनाता है जिससे मंगल का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है.</strong></li>
<li><strong>वर की कुण्डली में मंगल जिस भाव में बैठकर मंगली दोष बनाता हो कन्या की कुण्डली में उसी भाव में सूर्य, शनि अथवा राहु हो तो मंगल दोष का शमन हो जाता है.</strong></li>
<li><strong>जन्म कुंडली के 1,4,7,8,12,वें भाव में स्थित मंगल यदि स्व ,उच्च मित्र आदि राशि -नवांश का ,वर्गोत्तम ,षड्बली हो तो मांगलिक दोष नहीं होगा</strong></li>
<li><strong>यदि 1,4,7,8,12 भावों में स्थित मंगल पर बलवान शुभ ग्रहों कि पूर्ण दृष्टि हो</strong></li>
</ol>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>मंगल दोष के लिए व्रत और अनुष्ठान </strong></span></h3>
<p><strong>अगर कुण्डली में मंगल दोष का निवारण ग्रहों के मेल से नहीं होता है तो व्रत और अनुष्ठान द्वारा इसका उपचार करना चाहिए. मंगला गौरी और वट सावित्री का व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला है. अगर जाने अनजाने मंगली कन्या का विवाह इस दोष से रहित वर से होता है तो दोष निवारण हेतु इस व्रत का अनुष्ठान करना लाभदायी होता है.</strong></p>
<p><strong>जिस कन्या की कुण्डली में मंगल दोष होता है वह अगर विवाह से पूर्व गुप्त रूप से घट से अथवा पीपल के वृक्ष से विवाह करले फिर मंगल दोष से रहित वर से शादी करे तो दोष नहीं लगता है.प्राण प्रतिष्ठित विष्णु प्रतिमा से विवाह के पश्चात अगर कन्या विवाह करती है तब भी इस दोष का परिहार हो जाता है.मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमान जी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है.कार्तिकेय जी की पूजा से भी इस दोष में लाभ मिलता है.महामृत्युजय मंत्र का जप सर्व बाधा का नाश करने वाला है. इस मंत्र से मंगल ग्रह की शांति करने से भी वैवाहिक जीवन में मंगल दोष का प्रभाव कम होता है.लाल वस्त्र में मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्टान एवं द्रव्य लपेट कर नदी में प्रवाहित करने से मंगल अमंगल दूर होता है.</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-06-24 18:33:10 by W3 Total Cache
-->