छोटे मछुआरे – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org By Dastak Times Hindi News Network Sat, 24 Oct 2026 07:11:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png छोटे मछुआरे – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org 32 32 भारत का बड़ा मिशन: 5 साल में 30 मिलियन टन मछली उत्पादन का लक्ष्य, 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा सीफूड निर्यात https://dastaktimes.org/indias-big-mission-is-to-produce-30-million-tonnes-of-fish-in-5-years-seafood-export-will-reach-rs-1-25-lakh-crore/ Sat, 24 Oct 2026 07:11:40 +0000 https://dastaktimes.org/?p=920721 भोपाल: भारत ने मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए अगले पांच वर्षों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। देश में मछली उत्पादन को बढ़ाकर 30 मिलियन टन तक पहुंचाने और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को 1.25 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी है। इस दिशा में राष्ट्रीय …]]>

भोपाल: भारत ने मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए अगले पांच वर्षों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। देश में मछली उत्पादन को बढ़ाकर 30 मिलियन टन तक पहुंचाने और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को 1.25 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी है। इस दिशा में राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे मछुआरों की आजीविका बेहतर बनाना, उनकी आय बढ़ाना और अंतर्देशीय मत्स्य पालन की संभावनाओं का विस्तार करना है।

अभी 19.7 मिलियन टन है सालाना मछली उत्पादन

भारत में मछली उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। फिलहाल देश में सालाना 19.7 मिलियन टन मछली का उत्पादन हो रहा है। इसमें लगभग तीन-चौथाई हिस्सेदारी अंतर्देशीय मत्स्य पालन की है। नदियों, जलाशयों, तालाबों और झीलों जैसे जल संसाधनों की इस क्षेत्र में अहम भूमिका है। वहीं, भारत का सीफूड निर्यात भी 70 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। अब सरकार उत्पादन और निर्यात, दोनों को अगले स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।

राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने राष्ट्रीय कार्य योजना यानी नेशनल प्लान ऑफ एक्शन (NPOA) विकसित करने की पहल शुरू कर दी है। केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने योजना तैयार करने के विकास चरण का शुभारंभ किया। इसके तहत मछुआरों की आजीविका सुधारने, मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला मजबूत करने और मीठे पानी के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने पर ध्यान दिया जाएगा। योजना में उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है।

छोटे मछुआरों तक पहुंचेगा योजना का लाभ

डॉ. अभिलक्ष लिखी ने योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और मिशन मोड में काम करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय कार्य योजना केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ मछुआरा समुदायों को मिलना चाहिए। इसके लिए योजना को व्यावहारिक बनाने के साथ मछुआरों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। उनकी आय बढ़ाने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और मत्स्य कारोबार की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के उपाय भी इसमें शामिल किए जाएंगे।

जलवायु परिवर्तन और पानी की गुणवत्ता बड़ी चुनौती

अंतर्देशीय मत्स्य पालन के सामने जलवायु परिवर्तन, पानी की गुणवत्ता में गिरावट और जलाशयों में ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियां हैं। इनका सीधा असर मछलियों के विकास और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रस्तावित योजना में जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने और मत्स्य संसाधनों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय मछुआरों के अनुभवों को भी योजना का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं के समाधान खोजे जा सकें।

नदी, नहर, तालाब और झीलों तक होगा योजना का विस्तार

राष्ट्रीय कार्य योजना का दायरा व्यापक रखा जाएगा। इसमें नदियों, नहरों, जलाशयों, झीलों, बाढ़ प्रभावित आर्द्रभूमियों, तालाबों और ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में मत्स्य पालन को शामिल किया जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।

FAO के अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत तैयार होगी योजना

इस राष्ट्रीय कार्य योजना को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के ढांचे के तहत विकसित किया जाएगा। इसकी अगुवाई केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग करेगा, जबकि बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) इसमें सहयोग देगा।

BOBP-IGO के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन के मुताबिक, योजना में मछली पकड़ने के अधिकार, मत्स्य संसाधनों के प्रबंधन, रोजगार, सम्मानजनक काम और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में आजीविका के अवसरों को मजबूत करने और छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मछली उत्पादन से लेकर बाजार तक मजबूत होगी व्यवस्था

योजना में मछली पकड़ने और उत्पादन के बाद होने वाली गतिविधियों को भी महत्व दिया जाएगा। इसके तहत प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और व्यापार से जुड़ी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर काम होगा। साथ ही आपदा जोखिम कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपायों को भी शामिल किया जाएगा। छोटे मछुआरों की जरूरतों और हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की कोशिश होगी, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।

अगले महीने सार्वजनिक हो सकता है अंतिम दस्तावेज

राष्ट्रीय कार्य योजना फिलहाल तैयार करने के चरण में है। इसे अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों और हितधारकों के साथ चर्चा की जाएगी। उनके सुझावों को शामिल करने के बाद अंतिम दस्तावेज तैयार किया जाएगा। योजना को अगले महीने सार्वजनिक करने की तैयारी है, जिसके बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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