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	<title>जन्माष्टमी 2026 &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>जन्माष्टमी 2026 &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>जन्माष्टमी पर द्वापर जैसा नजारा, आधी रात मथुरा में गूंजे ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे; लाखों श्रद्धालु बने साक्षी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 05:57:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="183" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000-3-2-300x183.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000-3-2-300x183.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000-3-2-768x469.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000-3-2.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मथुरा: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव द्वापर युग की याद दिलाने वाला रहा। दिनभर हुई बारिश के बाद रात में भी आसमान में काली घटाएं छाई रहीं और बिजली चमकती रही। जैसे ही शुक्रवार रात घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, पूरा ब्रजमंडल ‘नंद घर आनंद &#8230;]]></description>
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<p><strong>मथुरा:</strong> भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव द्वापर युग की याद दिलाने वाला रहा। दिनभर हुई बारिश के बाद रात में भी आसमान में काली घटाएं छाई रहीं और बिजली चमकती रही। जैसे ही शुक्रवार रात घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, पूरा ब्रजमंडल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप, घंटे-घड़ियालों की ध्वनि और शंख-मृदंग की मंगलध्वनि के बीच घर-घर और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस अलौकिक दृश्य के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने।</p>



<p><strong>श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आधी रात हुआ जन्मोत्सव</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य आयोजन हुआ, जहां देर रात तक श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। रात 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू किया गया। इसके बाद रात 11.55 बजे तक कमल पुष्प और तुलसीदल से सहस्त्रार्चन किया गया। जैसे ही 11.59 बजे, भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद कर दिए गए। जन्म के इस एक मिनट के इंतजार ने श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ा दी।</p>



<p><strong>12 बजते ही हुआ लल्ला का अभिषेक</strong></p>



<p>रात ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किलोग्राम वजन की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल और पंचामृत भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया।</p>



<p><strong>ढोल-नगाड़ों और शंख की मंगलध्वनि से गूंजा जन्मस्थान</strong></p>



<p>भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही जन्मस्थान परिसर में उत्सव का माहौल और भव्य हो गया। ढोल-नगाड़ों और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि सुनाई देती रही। कान्हा के जन्म की खुशी में बधाई गीत गाए गए। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला रात 1.30 बजे तक जारी रहा।</p>



<p><strong>पहली बार मूल गर्भगृह से हुई लाइव स्ट्रीमिंग</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह यानी कारागार से अभिषेक और पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग भी कराई गई। गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण बाल-गोपाल स्वरूप में विराजमान हैं। अब तक लाइव प्रसारण केवल भागवत भवन से किया जाता रहा था, लेकिन इस बार शुक्रवार मध्यरात्रि को करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर मूल गर्भगृह से पूजा-अर्चना और अभिषेक का सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की ओर से अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए और डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।</p>



<p></p>
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		<title>दुनिया के सबसे महंगे धार्मिक शृंगारों में शामिल है ग्वालियर का गोपाल मंदिर! 120 करोड़ के गहनों से सजे राधा-कृष्ण, साल में सिर्फ एक बार होते हैं दर्शन</title>
		<link>https://dastaktimes.org/gwaliors-gopal-temple-is-included-among-the-worlds-most-expensive-religious-decorations-radha-krishna-adorned-with-jewelery-worth-rs-120-crore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 12:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="250" height="300" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-2-copy-2-250x300.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-2-copy-2-250x300.jpg 250w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-2-copy-2.jpg 500w" sizes="auto, (max-width: 250px) 100vw, 250px" />
<p><strong>ग्वालियर:</strong> देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा-अर्चना हो रही है, लेकिन ग्वालियर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर जन्माष्टमी पर अपने अनोखे राजसी शृंगार के लिए खास पहचान रखता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को करीब 120 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के बेशकीमती रत्नजड़ित आभूषणों से सजाया जाता है। इस भव्य शृंगार को दुनिया के सबसे महंगे धार्मिक शृंगारों में से एक माना जाता है।</p>



<p><strong>1921 में हुई थी गोपाल मंदिर की स्थापना</strong></p>



<p>ग्वालियर के गोपाल मंदिर की स्थापना वर्ष 1921 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराई थी। रियासतकाल में भगवान की पूजा और शृंगार के लिए खास तौर पर सोने-चांदी के बर्तन और बहुमूल्य आभूषण तैयार करवाए गए थे। इन आभूषणों में हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज, नीलम और मोती जैसे कीमती रत्न जड़े हुए हैं।</p>



<p><strong>राधारानी का तीन किलो का रत्नजड़ित मुकुट सबसे खास</strong></p>



<p>जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को इन्हीं दुर्लभ आभूषणों से सजाया जाता है। राधारानी का करीब तीन किलो वजनी मुकुट पुखराज, माणिक और पन्ने से जड़ा हुआ है। इसके साथ भगवान श्रीकृष्ण का राजसी मुकुट, सफेद मोतियों से बना पंचमढ़ी हार और सात लड़ी का विशेष हार भी शृंगार का हिस्सा होता है।</p>



<p>बताया जाता है कि सात लड़ी वाले हार में 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हैं। इसके अलावा सोने के झुमके, नथ, कंठी, चूड़ियां, कड़े और दूसरे बहुमूल्य आभूषण भी राधा-कृष्ण के शृंगार में शामिल किए जाते हैं।</p>



<p><strong>सोने-चांदी के बर्तनों से होती है पूजा</strong></p>



<p>गोपाल मंदिर में भगवान की पूजा के लिए रियासतकालीन सोने और चांदी के विशेष बर्तन भी मौजूद हैं। इनमें इत्रदान, पिचकारी, चलनी, धूपदान, छत्र और निरंजनी समेत कई पूजा सामग्री शामिल हैं। यह पूरा संग्रह ग्वालियर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की झलक दिखाता है।</p>



<p><strong>आजादी के बाद बैंक लॉकर में रखे गए बेशकीमती गहने</strong></p>



<p>देश की आजादी से पहले तक राधा-कृष्ण को नियमित रूप से इन बेशकीमती आभूषणों से सजाया जाता था। आजादी के बाद सुरक्षा कारणों से इन्हें बैंक लॉकर में सुरक्षित रख दिया गया। वर्ष 2007 से इन आभूषणों की देखरेख नगर निगम के पास है। इसके बाद हर साल जन्माष्टमी पर कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हें बैंक लॉकर से निकालकर गोपाल मंदिर लाया जाता है।</p>



<p><strong>भारी सुरक्षा के बीच निकाले जाते हैं करोड़ों के आभूषण</strong></p>



<p>आभूषणों को मंदिर लाने और शृंगार के दौरान सुरक्षा के खास इंतजाम किए जाते हैं। मंदिर परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहता है। वर्दी के साथ-साथ सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पूरे इंतजाम की लगातार निगरानी करते हैं।</p>



<p><strong>साल में सिर्फ एक बार होता है यह राजसी शृंगार</strong></p>



<p>गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण का यह दिव्य और राजसी शृंगार साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी के मौके पर किया जाता है। इस अनोखे स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे साल इंतजार करते हैं। जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं और हजारों श्रद्धालु राधा-कृष्ण के अलौकिक स्वरूप के दर्शन करने पहुंचते हैं।</p>



<p>आस्था, इतिहास और राजसी वैभव का यह संगम ग्वालियर के गोपाल मंदिर को देश के अन्य कृष्ण मंदिरों से अलग पहचान देता है। जन्माष्टमी पर जब राधा-कृष्ण करीब 120 करोड़ रुपये के रत्नजड़ित आभूषणों से सजे नजर आते हैं, तो श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ धार्मिक दर्शन नहीं, बल्कि ग्वालियर की गौरवशाली रियासतकालीन विरासत को करीब से देखने का अवसर भी होता है।</p>



<p></p>
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		<title>Janmashtami 2026: 4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में होगा कान्हा का जन्म, जानें निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://dastaktimes.org/janmashtami-2026-janmashtami-will-be-celebrated-on-4th-september-kanha-will-be-born-in-rohini-nakshatra-know-the-auspicious-time-of-nishith-puja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:24:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="186" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-300x186.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169-768x477.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/3A_169.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी के साथ ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और रात में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी &#8230;]]></description>
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<p>भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी के साथ ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और रात में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी की तारीख क्या है?</strong></p>



<p>साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। दिनभर उपवास और भक्ति के बाद रात में भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा की जाएगी।</p>



<p>जन्माष्टमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं। कई जगह बाल गोपाल को पालने में झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है। रात करीब 12 बजे मंदिरों में जन्मोत्सव शुरू होता है और आरती के साथ भक्त भगवान के जन्म की खुशी मनाते हैं।</p>



<p><strong>मथुरा में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव?</strong></p>



<p>श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष भव्यता के साथ मनाया जाता है। यहां आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव आयोजित किया जाता है।</p>



<p>मथुरा के पंचांग के अनुसार निशीथ पूजा का शुभ समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी।</p>



<p>निशीथ काल को जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग</strong></p>



<p>इस बार जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व बताया गया है।</p>



<p>पंचांग गणना के अनुसार 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहने की जानकारी दी गई है। वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?</strong></p>



<p>जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक व्रत रखते हैं। मथुरा की गणना के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में व्रत खोलने के नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।</p>



<p><strong>5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव</strong></p>



<p>जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है।</p>



<p>दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है और गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं। वहीं ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंदोत्सव मनाने की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी पर क्या है खास?</strong></p>



<p>इस बार जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मथुरा-वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>



<p></p>
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		<title>द्वापर जैसा दुर्लभ संयोग लेकर आ रही जन्माष्टमी, 4 सितंबर को बनेंगे खास योग; इन 4 राशियों पर बरसेगी कान्हा की कृपा!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 05:45:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-768x464.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-768x464.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/00000000000-1-2.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की मौजूदगी में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बनने की बात कही जा रही है।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे और रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का शुभ संयोग बनने वाला है। ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है, जबकि हर्षण योग को सुख और प्रसन्नता का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इन संयोगों का प्रभाव कुछ राशियों के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ रह सकता है।</p>



<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>



<p>जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे। इसके साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह स्थिति वृषभ राशि के जातकों के लिए शुभ परिणाम देने वाली हो सकती है।</p>



<p>लाभ की बात करें तो व्यक्तित्व में निखार आने और आत्मविश्वास बढ़ने के संकेत हैं। लंबे समय से रुकी योजनाओं में तेजी आ सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके फैसलों की सराहना हो सकती है और नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।</p>



<p><strong>सिंह राशि</strong></p>



<p>सिंह राशि के जातकों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का संयोग करियर और व्यापार के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता मिलने की संभावना है। कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।</p>



<p>मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो सकती है। सामाजिक स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ने के संकेत हैं। पैतृक संपत्ति या पुराने निवेश से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी जताई गई है।</p>



<p><strong>वृश्चिक राशि</strong></p>



<p>वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति वृश्चिक राशि के सप्तम भाव को प्रभावित करेगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इसका सकारात्मक असर दांपत्य जीवन और साझेदारी से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।</p>



<p>जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है और उनका सहयोग मिल सकता है। कारोबार में नए सौदे तय होने की संभावना है। इन सौदों से भविष्य में आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा भी वापस मिलने की संभावना जताई गई है।</p>



<p><strong>मकर राशि</strong></p>



<p>मकर राशि के जातकों के लिए रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग शुभ माना जा रहा है। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलने की संभावना है।</p>



<p>पारिवारिक जीवन में भी सुखद माहौल रहने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। परिवार में खुशी का वातावरण बना रह सकता है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी की रात करें ये उपाय</strong></p>



<p>ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय उनका पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें तुलसी पत्र के साथ माखन-मिश्री अर्पित करें।</p>



<p>रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में स्थित चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा बताई गई है। इसके साथ ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे जन्माष्टमी पर बनने वाले शुभ योगों का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।</p>



<p></p>
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