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	<title>जानिए ईसा मसीह का भारत से कैसा है कनेक्शन &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347.jpeg 618w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />क्या ईसा मसीह कभी भारत आए थे? यह सवाल काफी विवादास्पद है. हालांकि, एक तथ्य सबको पता है कि ईसा मसीह के जीवन के 18 वर्षों का विवरण &#8216;न्यू टेस्टामेंट&#8217; में नहीं मिलता है. ईसा मसीह के जीवन के इन गुमनाम सालों को &#8216;साइलेंट ईयर्स&#8217;, &#8216;लॉस्ट ईयर्स&#8217; या &#8216;मिसिंग ईयर्स&#8217; भी कहा जाता है. जीसस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347.jpeg 618w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>क्या ईसा मसीह कभी भारत आए थे? यह सवाल काफी विवादास्पद है. हालांकि, एक तथ्य सबको पता है कि ईसा मसीह के जीवन के 18 वर्षों का विवरण &#8216;न्यू टेस्टामेंट&#8217; में नहीं मिलता है. ईसा मसीह के जीवन के इन गुमनाम सालों को &#8216;साइलेंट ईयर्स&#8217;, &#8216;लॉस्ट ईयर्स&#8217; या &#8216;मिसिंग ईयर्स&#8217; भी कहा जाता है.</p>
<p><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347.jpeg"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-316695 size-full" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347.jpeg" alt="जानिए ईसा मसीह का भारत से कैसा है कनेक्शन" width="618" height="347" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347.jpeg 618w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/jesus_1545729534_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></a>जीसस के जीवन के इतिहास में 13 की उम्र से 29 तक की उम्र का बाइबिल में कोई उल्लेख नहीं मिलता है. बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बताया गया था कि ईसा मसीह एक बौद्ध भिक्षु थे. हालांकि, इससे पहले भी कई किताबों में जीसस के भारत आने की बात कही जा चुकी थी.</p>
<p>1887 में एक रूसी युद्ध संवाददाता निकोलस नोतोविच ने दावा किया था कि उसने लद्दाख में हेमिस मॉनेस्ट्री में रखे डॉक्युमेंट &#8216;लाइफ ऑफ सेंट ईसा, बेस्ट ऑफ द सन्स ऑफ मेन&#8217; का अध्ययन किया था. ईसा इस्लाम में जीसस का अरबी नाम है. नोतोविच की थ्योरी फ्रेंच भाषा में 1894 में प्रकाशित हुई थी.</p>
<p>रूसी विद्वान निकोलस नोतोविच ने 19वीं शताब्दी में भारत, तिब्बत और अफगानिस्तान का दौरा किया था और कहा जाता है कि उसने लेह की एक तिब्बत बौद्ध मॉनेस्ट्री में काफी वक्त बिताया. दावा किया जाता है कि निकोलस ने एक डॉक्युमेंट का अनुवाद किया था जिसमें ईसा (जीसस) की कहानी बताई गई थी. इस कहानी के मुताबिक, ईसा पहली शताब्दी में इजरायल के एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे.</p>
<p>एक लामा ने नोतोविच को यह भी बताया था कि ईसा मसीह ने 13 से 29 वर्ष की उम्र में मॉनेस्ट्री में ज्ञान प्राप्त किया था. लामा ने बताया था कि ईसा महान देवदूत थे और सभी दलाई लामाओं में से श्रेष्ठ थे. यहां से शिक्षा लेकर वह जेरूसलम पहुंचे और इसराइल के मसीहा या रक्षक बन गए.</p>
<p>मॉनेस्ट्री के एक अनुभवी लामा ने एक न्यूज एजेंसी को बताया था कि ईसा मसीह ने भारत में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी और वह बुद्ध के विचार और नियमों से बहुत प्रभावित थे. यह भी कहा जाता है कि जीसस ने कई पवित्र शहरों जैसे जगन्नाथ, राजगृह और बनारस में दीक्षा दी और इसकी वजह से ब्राह्मण नाराज हो गए और उन्हें बहिष्कृत कर दिया गया. इसके बाद जीसस हिमालय भाग गए और बौद्ध धर्म की दीक्षा लेना जारी रखा. जर्मन विद्वान होल्गर केर्सटन ने जीसस के शुरुआती जीवन के बारे में लिखा था और दावा किया था कि जीसस सिंध प्रांत में आर्यों के साथ जाकर बस गए थे.</p>
<p><b>लेवी एच. डोलिंग, 1908</b></p>
<p>1908 में लेवी एच डोलिंग ने &#8216;एक्वेरियन गॉस्पेल ऑफ जीसस द क्राइस्ट&#8217; प्रकाशित किया जिसमें उसने दावा किया था कि उसे सारी जानकारी सुपरनैचुरल ताकतों से मिली है जो जीसस की जिंदगी की सच्ची कहानी है. इसमें न्यू टेस्टामेंट से गायब 18 वर्षों का भी विवरण दिया गया था. इस किताब के मुताबिक, युवा जीसस ने भारत, तिब्बत, ईरान, ग्रीस और मिस्त्र देशों का भ्रमण किया था.</p>
<p><b>कश्मीर में भी रहे जीसस-</b></p>
<p>बीबीसी ने “Jesus Was A Buddhist Monk” नाम से एक डॉक्युमेंट्री बनाई थी जिसमें बताया गया था कि जीसस को सूली पर नहीं चढ़ाया गया था और जब वह 30 वर्ष के थे तो वह अपनी पसंदीदा जगह वापस चले गए थे. डॉक्युमेंट्री के मुताबिक, जीसस की मौत नहीं हुई थी और वह यहूदियों के साथ अफगानिस्तान चले गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने इस बात की पुष्टि की कि जीसस ने कश्मीर घाटी में कई वर्ष व्यतीत किए थे और 80 की उम्र तक वहीं रहे. अगर जीसस ने 16 वर्ष किशोरावस्था में और जिंदगी के आखिरी 45 साल व्यतीत किए तो इस हिसाब से वह भारत, तिब्बत और आस-पास के इलाकों में करीब 61 साल रहे. कई स्थानीय लोगों का मानना है कि कश्मीर के श्रीनगर में रोजा बल श्राइन में जीसस की समाधि बनी हुई है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह मजार एक मध्यकालीन मुस्लिम उपदेशक यूजा आसफ का मकबरा है.</p>
<p>यह भी कहा जाता है कि एक महान बौद्ध की मृत्यु के बाद तीन विद्वान अपने लामा की खोज के लिए निकले थे. बौद्धों की परंपरा में जब लामा की मृत्यु होती है तो विद्वान ग्रह-नक्षत्रों को देखकर एक शिशु की खोज में एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. यह नवजात लामा का अवतार माना जाता है. ये वही तीन विद्वान थे जो जीसस के जन्म की रात को बेथलेहम पहुंचे थे. एक यह भी विश्वास है कि जीसस 13 की उम्र में तीन विद्वानों के साथ भारत आए थे और एक बौद्ध की तरह भारत में उनकी परवरिश हुई.</p>
<p><b>ओशो ने भी कही ईसा मसीह के भारत आने की बात</b></p>
<p>भारतीय दार्शनिक ओशो ने भी ईसा मसीह के भारत से संबंधित होने की बात कही है. ओशो के मुताबिक, &#8216;जब भी कोई सत्&#x200d;य के लिए प्&#x200d;यासा होता है, अनायास ही वह भारत में उत्&#x200d;सुक हो उठता है. अचानक पूरब की यात्रा पर निकल पड़ता है और यह केवल आज की ही बात नहीं है. आज से 2500 वर्ष पूर्व, सत्&#x200d;य की खोज में पाइथागोरस भारत आया था. ईसा मसीह भी भारत आए थे.</p>
<p>ओशो के मुताबिक,ईसामसीह के 13 से 30 वर्ष की उम्र के बीच का बाइबिल में कोई उल्&#x200d;लेख नहीं है और यही उनकी लगभग पूरी जिंदगी थी, क्&#x200d;योंकि 33 वर्ष की उम्र में तो उन्&#x200d;हें सूली ही चढ़ा दिया गया था. तेरह से 30 तक 17 सालों का हिसाब बाइबिल से गायब है! इतने समय वे कहां रहे? आखिर बाइाबिल में उन सालों को क्&#x200d;यों नहीं रिकार्ड किया गया? उन्&#x200d;हें जानबूझ कर छोड़ा गया है, कि ईसायत मौलिक धर्म नहीं है, कि ईसा मसीह जो भी कह रहे हैं वे उसे भारत से लाए हैं.&#8217;</p>
<p>&#8216;ईसा जब भारत आए थे-तब बौद्ध धर्म बहुत जीवंत था, यद्यपि बुद्ध की मृत्&#x200d;यु हो चुकी थी. गौतम बुद्ध के पांच सौ साल बाद जीसस यहां आए थे. पर बुद्ध ने इतना विराट आंदोलन, इतना बड़ा तूफान खड़ा किया था कि तब तक भी पूरा मुल्&#x200d;क उसमें डूबा हुआ था. अंतत: जीसस की मृत्&#x200d;यु भी भारत में हुई! और ईसाई रिकार्ड्स इस तथ्&#x200d;य को नजरअंदाज करते रहे हैं.&#8217;</p>
<p><b>फिफ्थ गॉस्पेल</b> नाम की किताब में भी इसी दावे का समर्थन किया गया है कि ईसा मसीह 13 से 29 वर्ष तक भारत भ्रमण करते रहे.</p>
<p>19वीं और 20वीं शताब्दी में कई थ्योरीज सामने आईं जिसमें दावा किया गया कि 12 से 30 वर्ष की आयु के बीच में जीसस भारत आए थे. हालांकि, आधुनिक मुख्यधारा के ईसाई विद्वानों ने इन सभी थ्योरीज को खारिज कर दिया है. इन विद्वानों के मुताबिक, जीसस के जीवन के इस समय के बारे में कुछ भी स्पष्ट ज्ञात नहीं है.</p>
<p><b>ईसाई विद्वानों ने खारिज किया-</b></p>
<p>तमाम विद्वान जीसस के भारत आने के दावे को पूरी तरह से खारिज करते हैं. स्कॉलर मार्कस बोर्ग का कहना है कि जीसस के भारत जाने का दावा और उनका बौद्ध धर्म से संबंध का कोई भी ऐतिहासिक आधार नहीं है. लेसली होल्डन कहते हैं, बुद्ध और जीसस की शिक्षाओं में काफी समानताएं हैं लेकिन ये तुलना 19वीं सदी में मिशनरियों के संपर्क के बाद शुरू हुई. जीसस और बौद्ध धर्म का संबंध का कोई भी विश्वसनीय ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद नहीं है.</p>
<p>अलग-अलग विद्वानों ने इस विषय पर अलग-अलग सिद्धांत दिए हैं. 1992 में आई किताब जीसस द मैन में कहा गया कि जीसस सूली पर चढ़ाए जाने के बाद जिंदा बच गए थे और फिर मैरी मैग्डेलेन से शादी की. जीसस की मृत्यु रोम में हुई.</p>
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