<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति? &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%af-rbi-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%82/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Wed, 05 Dec 2018 06:27:08 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति? &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति?</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%af-rbi-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Dec 2018 06:27:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति?]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=307251</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347.jpeg 618w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />केन्द्रीय रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक का आज तीसरा और आखिरी दिन है. दोपहर बाद इस बैठक में रिजर्व बैंक से उम्मीद है कि वह देश में ब्याज दरों पर अहम फैसला ले. हालांकि इस बैठक में केन्द्र सरकार समेत बाजार की नजर रिजर्व बैंक गलर्नर उर्जित पटेल पर लगी है. क्या मौद्रिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347.jpeg 618w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>केन्द्रीय रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक का आज तीसरा और आखिरी दिन है. दोपहर बाद इस बैठक में रिजर्व बैंक से उम्मीद है कि वह देश में ब्याज दरों पर अहम फैसला ले. हालांकि इस बैठक में केन्द्र सरकार समेत बाजार की नजर रिजर्व बैंक गलर्नर उर्जित पटेल पर लगी है. क्या मौद्रिक समीक्षा के लिए तीन दिनों तक चली बैठक के बाद उर्जित पटेल आरबीआई की स्वायतत्ता की मांग पर जोर देते हुए एक बार फिर केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच नई खींचतान की शुरुआत करेंगे.</p>
<p><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347.jpeg"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-307260 size-full" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347.jpeg" alt="जानीय RBI और सरकार में होगी जंग या जारी रहेगी शांति?" width="618" height="347" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347.jpeg 618w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/12/urjit2_main_1543989725_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></a>केंद्रीय रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा तीन कारणों से कारोबारी जगत में चर्चा का विषय बनती है. पहला, केन्द्रीय बैंक देश में महंगाई के खतरे को कैसे आंक रहा है और दूसरा क्या केन्द्रीय बैंक ने रेपो रेट (RR) और कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में बदलाव किया है. इस मौद्रिक समीक्षा में भी केन्द्रीय बैंक इन्हीं मुद्दों पर मंथन कर रहा है लेकिन इस बार के नतीजों में रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के मौजूदा रिश्ते का संकेत भी मिलेगा.</p>
<p>रेपो रेट वह दर है जिसपर कोई बैंक कम अवधि के लिए केन्द्रीय बैंक से कर्ज लेता है. इसके अलावा इस दर से देश में ब्याज दरें निर्धारित होती हैं जिसपर किसी कारोबारी अथवा आम उपभोक्ता को बैंक से कर्ज और निवेश पर ब्याज मिलता है. कैश रिजर्व रेश्यो बैंक के कुल पैसे का वह हिस्सा है जिसे वह केन्द्रीय बैंक के पास रखता है. इस दर को निर्धारित कर रिजर्व बैंक बाजार में तरलता तय करता है यानी इससे बैंक के पास कर्ज देने की क्षमता में बदलाव होता है.</p>
<p>आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा का नतीजा 5 दिसंबर को आएगा. इस बार कारोबारी जगत के साथ आम आदमी की नजर भी रिजर्व बैंक के फैसले पर टिकी है. इन नतीजों से साफ होगा कि क्या तीन दिन की कवायद के बाद रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के रिश्तों में कड़वाहट में कमी आई है या फिर यह नतीजे दोनों के बीच नई खींचतान का आधार तैयार करेंगे.</p>
<p>आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में कुल 6 सदस्य बैठते हैं. इनमें तीन सदस्य आरबीआई के अधिकारी हैं जिनमें रिजर्व बैंक गवर्नर शामिल हैं. वहीं अन्य तीन सदस्य अर्थशास्त्री होने के साथ-साथ केन्द्र सरकार द्वारा मनोनीत होते हैं. आरबीआई गवर्नर इस समीक्षा बैठक में प्रमुख किरदार है और तीन दिन की चर्चा के बाद रेपो रेट पर फैसला लेने का काम संख्या बल के आधार पर होता है.</p>
<p>समीक्षा बैठक में रेपो रेट पर फैसला बराबरी पर रहने की स्थिति में रिजर्व बैंक गवर्नर अंतिम फैसला लेने में अहम भूमिका अदा करते हैं. इसके साथ ही पूरे मामले की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बैठक से 7 दिन पहले और 7 दिन बाद तक समीक्षा बैठक के दौरान सदस्यों के मत को साझा नहीं किया जाता. हालांकि सभी सदस्य, देश की आर्थिक स्थिति समेत वैश्विक स्थिति और रेपो रेट निर्धारित करने के लिए अहम महंगाई का आकलन करने के लिए स्वतंत्र रहता है और बैठक की 7 दिन बाद सदस्यों का आकलन जारी किया जाता है.</p>
<p><b>क्या होगी ब्याज दरों में कटौती या कम होगा सीआरआर</b></p>
<p>आर्थिक आंकड़ों के आधार पर एक बात साफ है कि इस मौद्रिक समीक्षा बैठक के सामने ब्याज दर में कटौती न करने के वह सभी आधार मौजूद हैं जो पिछली मौद्रिक समीक्षा बैठक के सामने थे. अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर में खाद्य उत्पादों की महंगाई आरबीआई के टारगेट के बेहद नीचे थी. दूसरी तिमाही के दौरान आर्थिक विकास दर उम्मीद से कम रही और यहां तक की खपत के आंकड़े भी कमजोर होते दिखाई दिए.</p>
<p>पिछली बैठक के समय जहां वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें महंगाई का बड़ा खतरा पेश कर रही थीं, अक्टूबर-नवंबर के दौरान यह खतरा कुछ हद तक टलता दिखाई दिया. पिछली बैठक से लेकर अबतक पेट्रोल-डीजल की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक कम हो चुकी हैं. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में भी सुधार से अर्थव्यवस्था में दबाव बीते दो महीने के दौरान कम हुआ है. इस राहत के बावजूद कच्चे तेल को लेकर चुनौती अभी स्थायी तौर पर नहीं टली है.</p>
<p>रिजर्व बैंक के सामने मौद्रिक समीक्षा के दौरान सीआरआर एक पेचीदा विषय है. इसका अंदाजा इसी से लगता है कि केन्द्रीय बैंक ने 2013 के बाद से सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है. बीते कुछ महीनों के दौरान जिस तरह केन्द्र सरकार ने बाजार में तरलता बढ़ाने की मांग रखी है और इसको लेकर रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार ने खींचतान भी देखने को मिली है, ऐसे में तरलता को लेकर केन्द्रीय बैंक से अहम फैसले का उम्मीद की जा सकती है.</p>
<p>हालांकि बीते कुछ समय से रिजर्व बैंक ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिए बाजार में तरलता के स्तर में लगातार इजाफा कर रहा है. रिजर्व बैंक नवंबर और दिसंबर के दौरान भी ओएमओ के जरिए तरलता बढ़ाने की कवायद करेगी. इस तथ्य को देखते हुए मौद्रिक समीक्षा में सीआरआर कटौती की संभावना आधी हो जाती है. गौरतलब है कि सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती से बैंकों के पास 65,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता होगी.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-06-09 03:37:02 by W3 Total Cache
-->