<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जाने कितनी है इस बात में सच्चाई &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Mon, 08 Oct 2018 03:12:16 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>जाने कितनी है इस बात में सच्चाई &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>क्या ज्यादा पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, जाने कितनी है इस बात में सच्चाई</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Oct 2018 03:12:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ज्ञान भंडार]]></category>
		<category><![CDATA[क्या ज्यादा पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग]]></category>
		<category><![CDATA[जाने कितनी है इस बात में सच्चाई]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=283529</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="210" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa-300x210.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="क्या ज्यादा पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, जाने कितनी है इस बात में सच्चाई" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa-300x210.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa.jpg 706w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में लोगों की औसत उम्र बड़ी तेजी से बढ़ी है। 1960 के दशक में पैदा होने वाले लोग औसतन 52.5 साल जीते थे। आज ये औसत 72 साल है। ब्रिटेन में काफी पहले से आबादी के जन्म और मौत के रिकॉर्ड रखे जाते रहे हैं। 1841 में पैदा हुई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="210" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa-300x210.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="क्या ज्यादा पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, जाने कितनी है इस बात में सच्चाई" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa-300x210.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa.jpg 706w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption">पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में लोगों की औसत उम्र बड़ी तेजी से बढ़ी है। 1960 के दशक में पैदा होने वाले लोग औसतन 52.5 साल जीते थे। आज ये औसत 72 साल है। ब्रिटेन में काफी पहले से आबादी के जन्म और मौत के रिकॉर्ड रखे जाते रहे हैं। 1841 में पैदा हुई किसी बच्ची के केवल 42 साल की उम्र तक जीने की उम्मीद की जाती थी। वहीं किसी लड़के की औसत उम्र उससे भी कम यानी 40 बरस हुआ करती थी।<a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa.jpg"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-283530 size-full" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa.jpg" alt="क्या ज्यादा पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, जाने कितनी है इस बात में सच्चाई" width="706" height="494" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa.jpg 706w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/10/paisa-300x210.jpg 300w" sizes="(max-width: 706px) 100vw, 706px" /></a></p>
<p>2016 में पैदा हुई किसी बच्ची के औसतन 83 साल और लड़के के औसतन 79 साल जीने की उम्मीद की जाती है। माना जाता है कि मेडिकल साइंस की तरक्की और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने इंसान की औसत आयु बढ़ाई है। पर, शायद हम तरक्की के उस पायदान पर पहुंच गए हैं, जहां साइंस और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करके भी इंसान की उम्र नहीं बढ़ाई जा सकती। सितंबर 2018 में जारी हुए ब्रिटेन के आंकड़े तो यही कहानी कहते हैं। इनके मुताबिक, ब्रिटेन में लोगों की औसत उम्र बढ़ने का सिलसिला थम गया है। वहीं, बाकी दुनिया में औसत आयु बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई है।</p></div>
<div id="desc" class="image-caption-text caption">
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption"><strong> </strong></div>
<div id="desc" class="image-caption-text caption"><strong>मेडिकल सुविधाओं से नहीं बढ़ी उम्र</strong><br />
माना जाने लगा है कि इंसान अपनी उम्र के मामले में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस सोच से कुछ गलतफहमियों को भी बल मिलता है। माना जाता है कि अगर प्राचीन काल के यूनानी या रोमन लोग इंसान को 50-60 साल से ज्यादा बरस तक जीते देखते, तो अचरज में पड़ जाते। हमारा ये सोचना कि मेडिकल सुविधाओं की वजह से इंसान की उम्र बढ़ गई है, गलत है। आज औसत आयु इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इंसान विकास की धारा में बहता हुआ यहां तक आ पहुंचा है।</p>
<p>स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इतिहासकार वॉल्टर शीडेल कहते हैं, &#8220;औसत आयु बढ़ने और उम्र बढ़ने में बहुत फर्क है। लोगों की उम्र की बात करें, तो उस में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है।&#8221; औसत आयु एक औसत है। अगर किसी के दो बच्चे हैं। उनमें से एक की मौत हो जाती है और दूसरा बच्चा 70 साल तक जीता है, तो औसत उम्र 35 बरस होती है। गणित के लिहाज से ये सही है।  ये किसी बच्चे की परवरिश के तौर-तरीके के बारे में भी बताता है। मगर ये पूरी तस्वीर नहीं बताता।</p>
<p>हमें याद रखना होगा कि इंसान के इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में नवजातों की मौत की दर बहुत ज्यादा रही है। आज भी कई देशों में बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं। औसत उम्र निकालने से कई बार ऐसे संकेत मिलते हैं कि लोग कम उम्र ही जीते थे। जैसे पुराने जमाने में रोमन या यूनानी साम्राज्य में रहने वालों की औसत उम्र 30-35 बरस बताई गई थी।</p>
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption"><strong>मगर इस बात में कितनी सच्चाई है?</strong><br />
अगर हम बहुत ज्यादा बुढ़ापे की बात करें, तो ईसा से सात सदी पहले के यूनानी कवि हेसियोड ने लिखा था, &#8220;आप को 30 साल से बहुत कम उम्र में ब्याह नहीं करना चाहिए।&#8221; पुराने रोमन साम्राज्य की ब्यूरोक्रेसी &#8216;करसस होनोरम&#8217; जो सबसे छोटा पद था, उस पर कोई 30 साल से कम उम्र का आदमी नहीं बहाल किया जा सकता था। बाद में रोमन सम्राट ऑगस्टस ने ये उम्र घटाकर 25 साल कर दी थी।</p>
<p>खुद ऑगस्टस की मौत 75 बरस की अवस्था में हुई रोमन साम्राज्य का दूत बनने की शर्तों में से एक थी उम्मीदवार का 43 बरस का होना। जबकि आज अमरीकी राष्ट्रपति बनने की न्यूनतम उम्र 35 साल है। रोमन भूगोलविद् प्लिनी ने पहली सदी में लिखी अपनी किताब में ऐसे लोगों की फेहरिस्त बनाई थी, जिन्होंने लंबी उम्र जी। इनमें से एक थे कॉन्सुल वैलेरियस कॉर्विनस थे, जो 100 साल जिए।</p>
<p>सिसेरो की पत्नी टेरेंशिया 103 बरस और क्लोडिया नाम की दूसरी महिला तो 115 साल जीती रही। प्लिनी की किताब में लुकेचिया नाम की अदाकारा का भी जिक्र मिलता है, जिसने 100 साल की उम्र में स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। मिस्र के शहर अल सिकंदरिया में एक कब्र मिलती है, जो ईसा से 3 सदी पहले की एक महिला की। उसके बारे में लिखा है कि 80 साल की उम्र में भी उसके हाथ कांपते नहीं थे। वो शानदार कशीदाकारी करती थी।</p>
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption">वैसे प्लिनी ने बुढ़ापे को इंसान की जिंदगी का सबसे बुरा वक्त बताया है। प्लिनी ने लिखा है, &#8220;इंसान को जो सबसे बड़ी कुदरती नेमत मिली है, वो है कम उम्र में मर जाने की। ज्यादा उम्र तक जीने पर पैर अकड़ जाते हैं। हाथ हिलते नहीं। दिखाई-सुनाई नहीं देता। दांत टूट जाते हैं। पेट कमजोर होने की वजह से खाना नहीं पचता। यानी इंसान के मरने से पहले उसके जिस्म का एक-एक अंग मर चुका होता है।&#8221;</p>
<p>प्लिनी की नजर में सिर्फ एक शख्स ऐसा गुजरा था, जो 105 साल की उम्र में भी चपल था। साम्राज्यवाद के दौर की बात करें, तो भी उम्र के ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। 1994 में एक रिसर्च हुई थी। जिसमें ऑक्सफ़ोर्ड क्लासिकल डिक्शनरी में दर्ज ऐतिहासिक लोगों की उम्र की पड़ताल की गई। इनकी तुलना हालिया चैम्बर्स बायोग्राफिकल डिक्शनरी में दर्ज लोगों के नामों से की गई।जैसे-जैसे हमारे पास आबादी की सेहत, उम्र और दूसरे आंकड़े जमा होने लगे, तैसे-तैसे हमें किसी नतीजे पर पहुंचने में आसानी होने लगी। पिछली एक सदी से ज्यादा वक्त के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों की मौत की दर पिछली सदी में बहुत ज्यादा थी, लेकिन अगर कोई इंसान 21 बरस की उम्र तक पहुंच गया, तो उसके आज के लोगों के बराबर ही जीने की उम्मीद थी। सन 1200 से लेकर 1745 तक 21 बरस की उम्र तक पहुंचने वाला इंसान 62 से 70 साल तक जीता था। इसका अपवाद केवल 14वीं सदी थी, जब प्लेग की वजह से इंसानों की औसत उम्र 45 बरस ही रह गई थी।</p>
<p><strong>पैसा होने पर ज्यादा उम्र तक जीते हैं लोग?</strong><br />
इस सवाल का जवाब हमेशा हां में हो ये जरूरी नहीं।  मध्य युग के एक लाख 15 हजार यूरोपीय लोगों की उम्र के आंकड़े बताते हैं कि वो अपने राजा या सामंतों से छह साल ज्यादा जीते थे। 17वीं सदी में इंग्लैंड में सामंती तबके के लोगों से ज्यादा उम्र गांव में रहने वालों की हुआ करती थी।</p>
<p>रईस लोग तमाम संसाधन होने के बावजूद इसलिए कम उम्र ही जीते थे, क्योंकि 18वीं सदी तक के शहरों में गंदगियों और बीमारियों का जमावड़ा था। नतीजा ये होता था कि वो बीमारियों के शिकार होते थे। जब सेहत और मेडिकल सुविधाओं में इंकलाबी सुधार आया, तो इसका फायदा सबसे पहले अमीरों को ही हुआ। औद्योगिक क्रांति से पैदा हुए प्रदूषण से लड़ाई में इंसान ने जीत हासिल की, तो यूरोपीय रईसों की औसत उम्र सबसे पहले बढ़ी।</p>
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption"><strong>जब टीबी थी भयंकर बीमारी</strong><br />
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में दर्ज 397 लोगों में से 99 की मौत हिंसा यानी क्त्ल, खुदकुशी या जंग के मैदान में लड़ने की वजह से हुई। ईसा से 100 साल पहले पैदा हुए बाकी के 298 लोगों की औसत उम्र 72 साल आंकी गई। जबकि इसके बाद के दौर में पैदा हुए लोगों की औसत उम्र 66 बरस ही देखी गई। इसकी वजह सीसे से फैलने वाले ज़हरीले केमिकल को माना गया।</p>
<p>जो लोग 1850 से 1949 के बीच जिए, उनकी औसत आयु 71 साल निकाली गई। अब ईसा से एक सदी पहले पैदा हुए लोगों और आधुनिक युग में जीने वालों में कोई खास फर्क तो नहीं है! वैसे इस सैंपल में महिलाएं नहीं थीं। ऐसे लोग थे, जो समाज के क्रीमी लेयर का हिस्सा थे। यानी उनके पास जिंदगी बसर करने के बेहतर साधन थे। शीडेल कहते हैं कि इस रिसर्च को पूरी तरह से नहीं खारिज किया जा सकता है। इटली की ला सैपिएंजा यूनिवर्सिटी की वैलेंटिना गजानिगा कहती हैं कि उस दौर में भी अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई थी।</p>
<p>2016 में वैलेंटिना ने अपनी एक रिसर्च प्रकाशित की थी। इसमें उन्होंने प्राचीन रोमन साम्राज्य के 2000 से ज्यादा कंकालों की पड़ताल की रिपोर्ट जुटाई थी। इन कंकालों की औसत उम्र 30 साल थी। यानी उस दौर के ये लोग उम्र के तीसरे दशक में ही मर गए थे। बहुत से लोग मेहनत-मजदूरी के बोझ से मरे, तो कई बीमारी के शिकार भी हुए। उस दौर में मर्दों को जंग से लेकर मेहनत-मजदूरी तक, अपने शरीर पर तमाम तरह के जुल्म बर्दाश्त करने पड़ते थे, लेकिन, महिलाओं की हालत कोई अच्छी नहीं थी।  तब भी महिलाएं खेतों में काम करती थीं। घर के काम तो वो करती ही थीं।</p>
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption">इसके अलावा जचगी के दौरान बहुत सी महिलाओं की मौत हो जाती थी। गर्भधारण करना ही बहुत बड़ी चुनौती होती है। महिला को अपनी कोख में एक और जिंदगी को पालना पड़ता है। इससे बीमारियों से लड़ने की महिलाओं की क्षमता पर असर पड़ता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इतिहासकार जेन हम्फ्रिस कहती हैं, &#8220;गर्भवती होने पर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। फिर आप को दूसरी बीमारियां होने का डर होता है। अगर कोई गर्भवती महिला टीबी की शिकार हो जाए, तो उसे इस बीमारी से लड़ने में बहुत मुश्किल होती है। पुराने जमाने में टीबी भयानक बीमारी हुआ करती थी।&#8221;</p>
<p>वैलेंटिना कहती हैं कि पुराने जमाने में महिलाओं को मर्दों के मुकाबले कम खाना मिलता था। पौष्टिक खाना तो और भी कम मिलता था। नतीजा ये होता था कि लड़कियों का ठीक से विकास नहीं हो पाता था। बच्चे पैदा करते वक़्त उनकी मौत हो जाती थी।पुराने दौर के लोगों की उम्र से जुड़े आंकड़े न होने से उस दौर की जनसंख्या की उम्र की सही-सही गणना मुश्किल होती है। उस दौर के लोगों के बारे में जानकारी टैक्स के दस्तावेजों, कब्र पर लिखे शिलालेखों से हासिल की जाती है। ऐसे आंकड़ों में उन नवजात बच्चों का जिक्र नहीं होता, जो पैदा होते ही मर गए।</p>
<p>शीडेल कहते हैं कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए ठोस आंकड़ों की जरूरत होती है। कुल मिलाकर ये कहें कि रोमन साम्राज्य में आबादी की हालत आज के दौर जैसी ही थी। बहुत ज्यादा फर्क नहीं था। औसत आयु में थोड़ा-बहुत ही अंतर था। हम ये नहीं कह सकते कि औसत आयु में बहुत फासला था। हां, नवजातों और गर्भवती महिलाओं के लिए पहले के मुकाबले आज हालात बेहतर हैं।</p>
<p>जैसे-जैसे हमारे पास आबादी की सेहत, उम्र और दूसरे आंकड़े जमा होने लगे, तैसे-तैसे हमें किसी नतीजे पर पहुंचने में आसानी होने लगी। पिछली एक सदी से ज्यादा वक्त के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों की मौत की दर पिछली सदी में बहुत ज्यादा थी, लेकिन अगर कोई इंसान 21 बरस की उम्र तक पहुंच गया, तो उसके आज के लोगों के बराबर ही जीने की उम्मीद थी। सन 1200 से लेकर 1745 तक 21 बरस की उम्र तक पहुंचने वाला इंसान 62 से 70 साल तक जीता था। इसका अपवाद केवल 14वीं सदी थी, जब प्लेग की वजह से इंसानों की औसत उम्र 45 बरस ही रह गई थी।</p>
<p><strong>पैसा होने पर ज्यादा उम्र तक जीते हैं लोग?</strong><br />
इस सवाल का जवाब हमेशा हां में हो ये जरूरी नहीं।  मध्य युग के एक लाख 15 हजार यूरोपीय लोगों की उम्र के आंकड़े बताते हैं कि वो अपने राजा या सामंतों से छह साल ज्यादा जीते थे। 17वीं सदी में इंग्लैंड में सामंती तबके के लोगों से ज्यादा उम्र गांव में रहने वालों की हुआ करती थी।</p>
<p>रईस लोग तमाम संसाधन होने के बावजूद इसलिए कम उम्र ही जीते थे, क्योंकि 18वीं सदी तक के शहरों में गंदगियों और बीमारियों का जमावड़ा था। नतीजा ये होता था कि वो बीमारियों के शिकार होते थे। जब सेहत और मेडिकल सुविधाओं में इंकलाबी सुधार आया, तो इसका फायदा सबसे पहले अमीरों को ही हुआ। औद्योगिक क्रांति से पैदा हुए प्रदूषण से लड़ाई में इंसान ने जीत हासिल की, तो यूरोपीय रईसों की औसत उम्र सबसे पहले बढ़ी।</p>
<section class="lead-gallery">
<div id="desc" class="image-caption-text caption">ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के युग में अगर आप बचपन की मुश्किलों से जीत गए, तो महिलाएं 73 साल और पुरुष 75 साल तक जी जाते थे। आज भी कामकाजी तबके के लोगों की औसत आयु 72 साल और महिलाओं की 76 साल निकाली जाती है। यानी ये मानना कि हम अपने पुरखों के मुकाबले ज्यादा जीते हैं, गलत होगा। आदिम काल में झांकें, जब के कोई आंकड़े हमारे पास नहीं हैं, तो उस वक्त इंसान कितने बरस जीता होगा?</p>
<p>माना जाता है कि आदि मानव अगर तमाम मुसीबतों से पार पा गया, तो उसकी औसत उम्र 51 से 58 साल होती रही होगी। हालांकि एक और रिसर्च ये कहता है कि आदि मानव की औसत उम्र 30 से 37 साल रहती होगी। वहीं, महिलाएं अगर 45 साल तक जीती रह गईं, तो उनके 65 से 67 साल तक जीने की उम्मीद जग जाती थी।</p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के एंथ्रोपोलॉजिस्ट क्रिस्टीन केव और मार्क ओक्सेनहैम ने 1500 साल पुराने कंकालों से निष्कर्ष निकाला कि ज्यादातर लोग 65 साल तक जिए थे। हालांकि, इनमें से 16 लोग ऐसे भी थे जो 65 से 74 साल तक जिए। वहीं, नौ ने तो 75 की उम्र भी पार की थी। तो, कुल मिलाकर ये कहना ठीक रहेगा कि हमारी अधिकतम उम्र में प्राचीन काल से लेकर आज तक कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है। मेडिकल साइंस की तरक्की और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी ने ये सुनिश्चित किया है कि हम में से ज्यादा लोग इस उम्र तक पहुंच पाते हैं।</p></div>
</section>
</div>
</section>
</div>
</section>
</div>
</section>
</div>
</section>
</div>
</section>
</div>
</section>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-07-09 18:05:50 by W3 Total Cache
-->