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	<title>टमाटर 3 रुपये किलो &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>टमाटर के दाम धड़ाम! इंदौर मंडी में 3 रुपये किलो तक पहुंचा भाव, बंपर पैदावार से किसानों की बढ़ी मुसीबत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:02:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="164" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/0232-300x164.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/0232-300x164.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/0232.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p>इंदौर: मध्य और उत्तर भारत में टमाटर की बंपर पैदावार ने बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। इंदौर की चोइथराम मंडी में टमाटर के भाव गिरकर 3 से 8 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। मंडी में मांग के मुकाबले भारी आवक होने से किसानों को अपनी उपज की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। पिछले साल इसी मौसम में 25 से 35 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर इस बार बेहद सस्ते दामों पर बिक रहा है। इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है, लेकिन किसानों की मेहनत और कमाई पर संकट गहरा गया है।</p>



<p><strong>खपत से 3 हजार कैरेट ज्यादा पहुंच रही टमाटर की खेप</strong></p>



<p>चोइथराम मंडी में टमाटर की रोजाना खपत करीब 7 हजार कैरेट है, जबकि आवक बढ़कर 10 हजार कैरेट तक पहुंच गई है। यानी हर दिन मांग की तुलना में करीब 3 हजार कैरेट ज्यादा टमाटर मंडी में आ रहा है। एक कैरेट में लगभग 25 किलो टमाटर होता है। अधिक आपूर्ति के कारण साधारण टमाटर 3 से 6 रुपये किलो और बेहतर गुणवत्ता वाला टमाटर अधिकतम 8 रुपये किलो तक बिक रहा है।</p>



<p><strong>अच्छे भाव की उम्मीद में किसानों ने बढ़ाया था उत्पादन</strong></p>



<p>पिछले साल टमाटर के अच्छे दाम मिलने के बाद इस बार निमाड़ के साथ राजगढ़, शाजापुर, शिवपुरी और गुना के किसानों ने बड़े पैमाने पर इसकी खेती की थी। किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर भाव मिलने से उनकी आमदनी बढ़ेगी, लेकिन इस बार बंपर उत्पादन के चलते बाजार में कीमतें बुरी तरह गिर गईं। मौजूदा भाव लंबे समय तक बने रहे तो किसानों के लिए फसल की तुड़ाई, पैकिंग और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ किसानों को खेतों में ही फसल नष्ट करने का कदम उठाना पड़ सकता है।</p>



<p><strong>एक कैरेट मंडी तक पहुंचाने में 100 रुपये का खर्च</strong></p>



<p>टमाटर की कीमतों में गिरावट के बीच किसानों की सबसे बड़ी परेशानी उपज को मंडी तक पहुंचाने की लागत है। एक कैरेट टमाटर की तुड़ाई और पैकिंग पर करीब 50 रुपये खर्च होते हैं, जबकि परिवहन में भी लगभग 50 रुपये लग जाते हैं। इस तरह एक कैरेट को खेत से मंडी तक लाने का खर्च करीब 100 रुपये बैठता है। कम कीमत पर बिक्री होने से किसानों के सामने लागत की भरपाई करना भी चुनौती बन गया है।</p>



<p><strong>अगले डेढ़ से दो महीने तक सस्ते रह सकते हैं टमाटर</strong></p>



<p>साईंकृपा ट्रेडिंग के योगेश वीरहे के मुताबिक, टमाटर के भाव अगले डेढ़ से दो महीने तक कमजोर बने रहने की आशंका है। कीमतों में सुधार तभी संभव है, जब मौसम में बड़ा बदलाव आए या मंडी में टमाटर की आवक कम हो जाए। फिलहाल उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।</p>



<p><strong>मंडी में 30 से 35 हजार कैरेट क्षमता वाले शेड की मांग</strong></p>



<p>इंदौर की चोइथराम मंडी में स्थानीय क्षेत्रों के अलावा महाराष्ट्र से भी टमाटर पहुंचता है। अधिक आवक के दौरान कैरेट रखने के लिए पर्याप्त शेड उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आ रही है। व्यापारियों ने मंडी में 30 से 35 हजार कैरेट की क्षमता वाला शेड बनाने की मांग की है। उनका मानना है कि पर्याप्त जगह मिलने से अधिक आवक के दौरान कारोबार को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।</p>



<p><strong>टमाटर बाजार के प्रमुख आंकड़े</strong></p>



<p>रोजाना खपत करीब 7,000 कैरेट है, जबकि अधिकतम आवक 10,000 कैरेट तक पहुंच रही है। एक कैरेट में लगभग 25 किलो टमाटर होता है। मंडी में टमाटर का भाव 3 से 8 रुपये प्रति किलो है और खेत से मंडी तक एक कैरेट पहुंचाने में करीब 100 रुपये खर्च होते हैं। व्यापारियों ने 30 से 35 हजार कैरेट की क्षमता वाला शेड बनाने की मांग की है।</p>



<p><strong>सस्ती कीमतों से सॉस और प्यूरी बनाने वाली कंपनियों को फायदा</strong></p>



<p>टमाटर के दाम गिरने से सॉस, प्यूरी और दूसरे प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को सस्ता कच्चा माल मिल सकता है। बंपर पैदावार के दौरान टमाटर के प्रसंस्करण की बेहतर व्यवस्था होने से उपज की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों की अतिरिक्त उपज का इस्तेमाल बढ़ाने और उन्हें राहत देने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।</p>



<p></p>



<p></p>
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