<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Sat, 22 Sep 2018 06:48:30 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों से ऐसे जनता का तेल निकाल रही सरकार</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Sep 2018 06:48:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=274125</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से ऐसे जनता का तेल निकाल रही सरकार" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347.jpeg 618w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रतिदिन नया रिकॉर्ड बना रही हैं. मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 90 रुपये प्रति लीटर के स्तर के पार हैं तो राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर के स्तर के ऊपर बिक रहा है. ऐ दरअसल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को निर्धारित करने के फॉर्मूले पर लगातार सवाल उठा रहा है. इन सवालों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347-300x168.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से ऐसे जनता का तेल निकाल रही सरकार" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347-300x168.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347.jpeg 618w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रतिदिन नया रिकॉर्ड बना रही हैं. मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 90 रुपये प्रति लीटर के स्तर के पार हैं तो राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर के स्तर के ऊपर बिक रहा है. ऐ</p>
<p><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347.jpeg"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-274132 size-full" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347.jpeg" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से ऐसे जनता का तेल निकाल रही सरकार" width="618" height="347" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347.jpeg 618w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/09/petrol_1537584625_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></a>दरअसल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को निर्धारित करने के फॉर्मूले पर लगातार सवाल उठा रहा है. इन सवालों के बीच केन्द्र सरकार अपने राजस्व को होने वाले नुकसान के चलते कटौती करने से मना कर रही है तो राज्य सरकारें अपनी कमाई का सबसे बड़ा जरिए गंवाने के लिए तैयार नहीं हैं. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आधे से अधिक हिस्सा केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जा रहे टैक्स का है. यही कारण है कि मुंबई में पेट्रोल 90 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंचने वाला है और दिल्ली में 80 रुपये के स्तर पर बिक रहा है.</p>
<p>हालांकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को निर्धारित करने के फॉर्मूले को देखें तो साफ है कि इन टैक्सों से सरकार की बड़ी आमदनी हो रही है. इस फॉर्मूले के ऐसे पक्ष भी हैं जहां सरकार समेत तेल कंपनियों को दोहरा फायदा भी हो रहा है जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में विंडफॉल गेन कह सकते हैं. इन दोनों फायदों के चलते वैश्विक स्तर पर जैसे ही कच्चे तेल की कीमत में इजाफा होता है केन्द्र और राज्य सरकारों समेत देश में पेट्रोल-डीजल बनाने और बेचने वाली कंपनियों के मुनाफा का स्तर बढ़ जाता है.</p>
<p>भारत में पेट्रोल-डीजल का आयात नहीं किया जाता. आयात महज कच्चे तेल का किया जाता है. लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल की बिक्री के लिए पेट्रोल-डीजल के आयात रेट को चुना जाता है. यदि सरकार ने कच्चे तेल, जो कि पेट्रोल-डीजल तैयार करने में कच्चा माल है, की जगह सीधे पेट्रोल-डीजल का आयात किया होता, तो उस रेट पर पोर्ट डयूटी लगाते हुए केन्द्र और राज्य सरकारों के एक्साइज और वैट को जोड़कर देश में पेट्रोल-डीजल को बेचने का रेट तय किया जाता है. पेट्रोल-डीजल के रेट को तय करने के इस फॉर्मूला को  इंपोर्ट पैरिटी प्राइस कहा जाता है.</p>
<p>गौरतलब है कि इससे पहले 2002 तक देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करने के लिए कॉस्ट-प्लस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता था. इस फॉर्मूले के तहत केन्द्र सरकार लंबी अवधि में कच्चे तेल की खरीद पर खर्च निकालते हुए पेट्रोल-डीजल के रीटेल रेट को निर्धारित करती थी. हालांकि इस फॉर्मूले की सबसे बड़ी आलोचना यह थी कि पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करने के काम में पारदर्शिता की कमी थी.</p>
<p>वहीं इपोर्ट पैरिटी प्राइस में पारदर्शिता अधिक है. लिहाजा, 2002 में पेट्रोल-डीजल की कीमत को डीरेगुलेट करते हुए बाजार के हवाले कर दिया गया. इसके बाद नई फॉर्मूले की समीक्षा 2006 में सी रंगाराजन कमेटी ने किया और इपोर्ट पैरिटी प्राइस को सही तरीका बताया.</p>
<p>इंपोर्ट पैरिटी प्राइस में यदि कच्चे तेल की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है तो जाहिर है पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अधिक इजाफा हो रहा होगा. ऐसा इसलिए कि कच्चे माल में इजाफे से उत्पाद की कीमत में अधिक इजाफा होता है. सरकार पेट्रोल-डीजल पर अधिक टैक्स वसूल पाती है और तेल कंपनियां रॉ मटेरियल में इजाफे के बाद उत्पाद की कीमत में इजाफा करती हैं.</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल रिफाइनिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज का टैक्स के बाद जहां 2015-16 में 11,242 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ वहीं 2017-18 के दौरान यह मुनाफा बढ़कर 21,346 करोड़ पर पहुंच गया. वहीं सरकारी रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल का इस दौरान टैक्स के बाद मुनाफा 22,426 करोड़ रुपये  से बढ़कर 33,612 करोड़ रुपये हो गया.</p>
<p>गौरतलब है कि यदि केन्द्र सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमत का आंकलन करने के लिए पेट्रोल-डीजल की इंपोर्ट पैरिटी प्राइस की जगह कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनाने में लागत, टैक्स और मुनाफा को जोड़कर निर्धारित करे तो आम आदमी को पेट्रोल-डीजल के रास्ते ने वाली मंहगाई की मार से बचाया जा सकता है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2018 14:03:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=237551</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="171" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H-300x171.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H-300x171.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />जून महीने में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी के पार चली गई है। वहीं औद्योगिक उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी हो गई। मई महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.87 फीसदी थी, जो पिछले चार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="171" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H-300x171.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H-300x171.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p><strong>जून महीने में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी के पार चली गई है। वहीं औद्योगिक उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी हो गई। मई महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.87 फीसदी थी, जो पिछले चार महीनों में सबसे अधिक थी।अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 4.58 फीसदी थी।</strong></p>
<p><strong><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-237556" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H.jpg" alt="पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आखिर बढ़ ही गई खुदरा महंगाई दर" width="700" height="400" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H.jpg 700w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/07/sab3jAk30H-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></a>लगातार बढ़ रही है महंगाई दर</strong><br />
<strong>पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और फिर गिरावट के बाद भी महंगाई दर में उछाल देखने को मिला। हालांकि इनकी कीमतों में केवल चार दिन गिरावट रही। 26 जून से पेट्रोल-डीजल के दाम गिरना शुरू हुए थे, उससे पहले इनमें लगातार तेजी का दौर बना हुआ था।</strong><br />
<strong>मई में भी ज्यादा थे फल-सब्जियों के दाम</strong></p>
<p><strong>मई महीने में सब्जियों से जुड़ी महंगाई दर 7.29 फीसदी से बढ़कर 8.4 फीसदी हो गई थी। वहीं दालों की महंगाई दर 2.56 फीसदी से बढ़कर 2.78 फीसदी रही थी। केंद्र सरकार की तरफ से आंकड़ों के मुताबिक मई में औद्योगिक उत्पादन दर गिरकर 3.2 फीसदी रह गया। यह अप्रैल में 4.9 फीसदी था।</strong></p>
<p><strong>आरबीआई ने जताई थी महंगाई की आशंका</strong></p>
<p><strong>इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जून के पहले हफ्ते में हुई मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में रेपो रेट को बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया था। बढ़ती महंगाई और अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की वजह से आरबीआई ने यह फैसला लिया था।</strong></p>
<p><strong>आरबीआई ने महंगाई के 4.8 से 4.9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई को खुदरा महंगाई दर को चार फीसदी के आसपास रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, लेकिन पिछले चार महीनों के दौरान महंगाई दर इस लक्ष्य से अधिक रही है। खुदरा महंगाई दर के ताजा आंकड़े आने से पहले ब्लूमबर्ग के इकोनॉमिस्ट पोल में इसके 4.9 फीसदी के करीब रहने का अनुमान लगाया गया था।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-06-10 05:18:22 by W3 Total Cache
-->