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	<title>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सामने झुक गए थे पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी: आरिफ मोहम्मद &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ट्विटर पर एंट्री, फॉलोवर्स बोले- हैलो नहीं, सलाम करो</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Jan 2018 06:28:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[फॉलोवर्स बोले- हैलो नहीं]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="167" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324-300x167.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ट्विटर पर एंट्री, फॉलोवर्स बोले- हैलो नहीं, सलाम करो" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324-300x167.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324.jpeg 759w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट से शिकस्त खाने के बाद अब ऑल इंडिया मुस्लिम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया पर एंट्री की है. बदलते समय में युवाओं के बीच सक्रिय भूमिका अदा करने  के लिए बोर्ड ने ये कदम बढ़ाया है. पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया के ट्विटर से लेकर फेसबुक, वाट्सएप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="167" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324-300x167.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ट्विटर पर एंट्री, फॉलोवर्स बोले- हैलो नहीं, सलाम करो" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324-300x167.jpeg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324.jpeg 759w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p><strong>तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट से शिकस्त खाने के बाद अब ऑल इंडिया मुस्लिम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया पर एंट्री की है. बदलते समय में युवाओं के बीच सक्रिय भूमिका अदा करने  के लिए बोर्ड ने ये कदम बढ़ाया है. पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया के ट्विटर से लेकर फेसबुक, वाट्सएप और टेलीग्राम प्लेटफार्म पर आधिकारिक रूप से अपना अकाउंट बनाया है.<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-205856" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324.jpeg" alt="मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ट्विटर पर एंट्री, फॉलोवर्स बोले- हैलो नहीं, सलाम करो" width="759" height="422" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324.jpeg 759w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2018/01/all-india-muslim-personal-law-board_1476388324-300x167.jpeg 300w" sizes="(max-width: 759px) 100vw, 759px" /></strong></p>
<p><strong>बोर्ड के पहले ट्वीट पर सवाल</strong></p>
<p><strong>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 19 जनवरी को पहला ट्वीट करते हुए लिखा Hello twitter. पर्सनल लॉ बोर्ड के के पहले ट्वीट पर फॉलोवर्स ने जमकर सवाल उठाए. रिट्वीट करते हुए लोगों ने लिखा कि पहले ट्वीट में हैलो नहीं, सलाम दुआ करनी चाहिए. अधिकतर लोगों ने सलाम करते हुए रिट्वीट किया</strong></p>
<p><strong>प्रतिबंधित होने का खतरा?</strong></p>
<p><strong>पर्सनल लॉ ने आज ट्वीट करते हुए लिखा है कि आप लोग चाहते हैं कि शरियत किसी तरह के हस्तक्षेप से सुरक्षित रहे, तो आपको प्रैक्टिस करनी चाहिए. आप इसे व्यवहार में लाते हैं तो कोई सरकार इसे प्रतिबंधित नहीं कर सकती है. अगर कभी इसे प्रतिबंधित भी किया जाता है तो प्रभावी नहीं होगा. ये सब आपके हाथ में हैं.</strong></p>
<p><strong>बोर्ड के इस ट्वीट के पीछे कई मायने हैं. तीन तलाक के खिलाफ मोदी सरकार सख्त है. इतना ही नहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लेकर भी सवाल लगातार खड़े हो रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान सहित कई मुस्लिम समाज के लोग भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को खत्म कर देने की वकालत करते रहे हैं. योगी सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा ने तो बोर्ड को बैन करने की भी वकालत की है.</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया में सक्रीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड</strong></p>
<div id="inarticle_wrapper_div"><strong>बता दें कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पिछले दिनों लखनऊ में अपने सचिवों की बैठक की थी. इसी बैठक में तय हुआ था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को सोशल मीडिया में अपनी अहम भूमिका अदा करनी चाहिए. बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी ने बकायदा इसकी स्वीकृति दी.</strong></div>
<p><strong>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रेस रिलीज में कहा था कि सोशल मीडिया के जरिए इस्लामिक तालीम को आम करने और शरीयत की खूबियों को फैलाने की कोशिश है. बोर्ड के इस कदम से लोगों के सामने सही बातें सामने आएंगी और विरोधी अपनी साजिश से बेनकाब होंगे.</strong></p>
<p><strong>ट्विटर पर 6401 फॉलोवर्स</strong></p>
<p><strong>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी की देखरेख में सोशल मीडिया पर बोर्ड सक्रिय है. बोर्ड ने देश भर के मुसलमानों से अपील की है कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ट्विटर,फेसबुक, वाट्सएप और टेलीग्राम आधिकारिक अकाउंट से जुड़ें.</strong></p>
<p><strong>बोर्ड के ट्विटर अकाउंट को 6401 लोग अभी तक फॉलो कर रहे हैं. जबकि वहीं बोर्ड सिर्फ 7 लोगों को फॉलो कर रहा है. इनमें तीन मीडिया के ट्विटर अकांउट हैं तो तीन चार मुस्लिम शख्सियत हैं.</strong></p>
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		<title>मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सामने झुक गए थे पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी: आरिफ मोहम्मद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2017 11:28:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या विवाद]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-1024x576.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />मुसलमानों और कांग्रेस के बीच हुई थी डील नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद आपसी सहमति से हल करने के सुझाव के बीच वरिष्ठ नेता आरिफ मोहम्मद ने कहा कि 1986 में बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाना तत्कालीन राजीव गांधी सरकार का संतुलनकारी कदम था। क्योंकि शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-1024x576.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><h3><strong><span style="color: #ff0000;">मुसलमानों और कांग्रेस के बीच हुई थी डील</span></strong></h3>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद आपसी सहमति से हल करने के सुझाव के बीच वरिष्ठ नेता आरिफ मोहम्मद ने कहा कि 1986 में बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाना तत्कालीन राजीव गांधी सरकार का संतुलनकारी कदम था। क्योंकि शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने से हिंदू-मुस्लिम संतुलन बिगड़ गया था।इसी की परिणिति अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास में हुई। यह सब कुछ मुस्लिम नेताओं और कांग्रेस सरकार के बीच डील के तहत हुआ था।</strong></p>
<p><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-151975 size-full" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद.jpg" alt="मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सामने झुक गए थे पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी: आरिफ मोहम्मद " width="1280" height="720" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद.jpg 1280w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/03/आरिफ-मोहम्मद-1024x576.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a></p>
<p><strong>खान उस वक्त के बड़े घटनाक्रमों व अग्रणी नेताओं में शुमार रहे हैं।खान के अनुसार,शाहबानो केस के वक्त राजीव गांधी सरकार अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांग के आगे झुक गई थी और उसने तलाकशुदा मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलट दिया था। इसीलिए हिंदुओं की मांग के आगे भी उसे झुकना पड़ा।हिंदुओं को संतुष्ट करने के लिए राजीव सरकार ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे। शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद संसद से कानून बनाकर उसे पलटने और बाबरी मस्जिद के ताले खोलने का फैसला मात्र दो हफ्ते में किया गया।</strong></p>
<p><strong>खान ने बताया कि शाहबानों केस में तुष्टीकरण के आरोप झेल रही राजीव सरकार दूसरे ऐसे बडे मुद्दे की खोज में थी। तभी उसके हाथ अयोध्या मसला आ गया। फैजाबाद की जिला अदालत में स्थानीय कलेक्टर व एसपी ने पेश होकर कहा कि विवादित ढांचे के मुख्य द्वार का ताला खोला जाता है तो कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा नहीं होगी। इसके बाद जिला कोर्ट के आदेश पर फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद परिसर के ताले खोल दिए गए। आरिफ मोहम्मद खान ने ’टेक्स्ट एंड कांटेक्स्ट-कुरान एंड कंटेम्पररी चैलेंजेस’ किताब लिखी है। उन्होंने शाहबानो मामले में मुस्लिम कठमुल्लों के आगे सरकार के समर्पण के कारण 1985 में राजीव गांधी से रिश्ते तोड़ लिए थे।एक एजेंसी को दिए इंटरव्यू में खान ने कहा कि ताले खोलने का मतलब दूसरे अर्थों में यह था कि विवादित ढांचे को मंदिर के रूप में मान्यता देना। इसके परिणामस्वरूप वहां भव्य मंदिर बनाने और परिसर के अंदर पहले से चल रहे कार्यक्रमों को मजबूती मिली।इसी कारण तत्कालीन सरकार को तत्कालीन गृहमंत्री की देखरेख में वहां सावधानीपूर्वक शिलान्यास की इजाजत देने पर सहमत होना पड़ा। </strong></p>
<p><strong>1986 में ताले खुलवाने के पीछे की सियासत का खुलासा करते हुए खान ने कहा कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ’मिल्ली तशक्खुश’ को खतरा बताया था। बोर्ड का कहना था कि यह मुस्लिम समुदाय की विशिष्ट पहचान है। फैसले के खिलाफ आंदोलनों में वह बहुत आक्रामक व धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करता था। इस पर 15 जनवरी 1986 को सरकार का फैसला पलटना गंभीर झटका साबित हुआ। इसके मात्र एक सप्ताह में सरकार को शाहबानो केस से ध्यान हटाने के लिए कुछ करने की जरूरत महसूस हुई।</strong></p>
<p><strong>पूरे मामले में राजीव गांधी की भूमिका का जिक्र करते हुए खान ने कहा कि ताले खोलने के बाद वह राजीव से मिले थे।उन्होंने कहा कि ताले खोलने से पहले मुस्लिम नेताओं को सूचित किया गया था।वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं जैसे एनडी तिवारी,बूटा सिंह,अर्जुन सिंह,पीवी नरसिंहराव की भूमिका पर भी खान ने बातें की।नरसिंह राव के प्रधानमंत्री काल में ही हिंदू कट्टरपंथियों ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाई थी।खान का कहना है कि इन नेताओं का मानना है कि सरकार समाज सुधारक की भूमिका नहीं अपना सकती, तब भी जब मामला अल्पसंख्यक समुदाय का हो। इन नेताओं की आलोचना किए बिना खान ने कहा कि एक दृष्टि से उनकी रणनीति ठीक थी, क्योंकि वे कोई चुनावी जोखिम नहीं लेना चाहते थे।</strong></p>
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