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	<title>वैज्ञानिकों ने खोजा पाताल लोक &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<dc:creator><![CDATA[Ranjeet Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 May 2016 07:07:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अद्धयात्म]]></category>
		<category><![CDATA[दस्तक-विशेष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-768x460.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />वैज्ञानिकों ने रामायण में वर्णित पाताल लोक को खोज निकालने का दावा किया है। यह स्थान अमेरिकी महाद्वीप में होंडुरास के जंगलों के नीचे दफन है। हनुमान जी ने यहीं से भगवान राम व लक्ष्मण को पातालपुरी के राजा अहिरावण के चंगुल से छुड़ाया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लाइडर विधि से इस स्थान का 3-डी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-768x460.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figure id="attachment_94477" aria-describedby="caption-attachment-94477" style="width: 176px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/DN-Verma_photo.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-94477 " src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/DN-Verma_photo-248x300.jpg" alt="DN Verma_photo" width="176" height="213" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/DN-Verma_photo-248x300.jpg 248w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/DN-Verma_photo.jpg 489w" sizes="auto, (max-width: 176px) 100vw, 176px" /></a><figcaption id="caption-attachment-94477" class="wp-caption-text"><strong>डी.एन. वर्मा</strong></figcaption></figure>
<p><strong>वैज्ञानिकों ने रामायण में वर्णित पाताल लोक को खोज निकालने का दावा किया है। यह स्थान अमेरिकी महाद्वीप में होंडुरास के जंगलों के नीचे दफन है। हनुमान जी ने यहीं से भगवान राम व लक्ष्मण को पातालपुरी के राजा अहिरावण के चंगुल से छुड़ाया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लाइडर विधि से इस स्थान का 3-डी नक्शा तैयार किया है, जिसमें जमीन की गहराइयों में गदा जैसा हथियार लिये वानर देवता की मूर्ति की पुष्टि हुई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों की इस खोज की पुष्टि करते हुए लखनऊ स्थित स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के निदेशक व वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रभारी प्रो. भरत राज सिंह ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के एक पायलट ने होंडुरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखे थे। उसकी पहली जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थिंयोडोर मोर्ड ने 1940 में दी थी। एक अमेरिकी पत्रिका में उसने उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होने की बात भी लिखी थी। बाद में रहस्यमय हालात में थियोडोर की मौत हो गयी और रहस्य बरकरार रहा।</strong><br />
<strong>करीब 70 साल बाद अमेरिका ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी व नेशनल सेंटर फार एयरबोर्न लेजर मैपिंग के वैज्ञानिकों ने होंडुरास के घने जंगलों में मस्कीटिया नामक स्थान पर लाइडर तकनीक से जमीन के नीचे 3-डी मैपिंग की, जिसमें प्राचीन शहर का पता चला। इसमें जंगल के ऊपर से विमान से अरबों लेजर तरंगें जमीन पर फेंकी गयी। इससे तैयार 3-डी नक्शे में जमीन के नीचे गहराइयों में मानव निर्मित कई वस्तुएं दिखाई दीं। इसमें हाथ में गदा जैसा हथियार लिये वानर मूर्ति भी दिखी है। यहां खुदाई करने पर रोक होने के कारण वास्तविक स्थिति का पता लग पाना मुश्किल है। अमेरिका के इतिहासकार भी मानते हैं कि पूर्वोत्तर होंडुरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नामक इलाके में हजारों साल पहले एक गुप्त शहर सियूदाद ब्लांका का वजूद था। वहां के लोग एक विशालकाय वानर मूर्ति की पूजा करते थे। </strong><br />
<strong><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/br-singh.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft  wp-image-94478" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/br-singh-245x300.jpg" alt="br singh" width="195" height="239" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/br-singh-245x300.jpg 245w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/br-singh.jpg 315w" sizes="auto, (max-width: 195px) 100vw, 195px" /></a>प्रो. भरत राज सिंह ने बताया कि बंगाली रामायण में पाताल लोक की दूरी 1000 योजन बतायी गयी है, जो लगभग 12,800 किलोमीटर है। यह दूरी सुरंग के माध्यम से भारत व श्रीलंका की दूरी के बराबर है। रामायण में वर्णन है कि अहिरावण के चंगुल से भगवान राम व लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए बजरंग बली को पातालपुरी के रक्षक मकरध्वज को परास्त करना पड़ा था। मकरध्वज बजरंगबली के ही पुत्र थे, इसलिए उनका स्वरूप बजरंग बली जैसा ही था। अहिरावण के वध के बाद भगवान राम ने मकरध्वज को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था। जमीन के नीचे वानर मूर्ति मिलने के बाद अनुमान लगाया जा सकता है कि वहां के लोग मकरध्वज की ही मूर्ति की पूजा करने लगे होंगे।</strong><br />
<strong>रामायण की कथा के मुताबिक पवनपुत्र हनुमान पाताल लोक तक पहुंचे थे, जो भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे। रामायण की कथा के मुताबिक रामभक्त हनुमान अपने ईष्ट देव को अहिरावण के चंगुल से बचाने के लिए एक सुरंग से पाताल लोक पहुंचे थे। इस कथा के मुताबिक पाताल लोक ठीक धरती के नीचे है। वहां तक पहुंचने के लिए 70 हजार योजन की गहराई पर जाना पड़ता है। अगर आज के वक्त में हम अपने देश में कहीं सुरंग खोदना चाहें तो ये सुरंग अमेरिका महाद्वीप के मैक्सिको, ब्राजील और होंडुरास जैसे देशों तक पहुंचेगी। </strong><br />
<strong>पाताल लोक- वो दुनिया जो जमीन के नीचे है, वो दुनिया जहां इंसानों का पहुंचना संभव नहीं। पौराणिक कथाओं में पाताल लोक का जिक्रबार-बार मिलता है, लेकिन सवाल ये है कि क्या पाताल लोक काल्पनिक है या इसका वजूद भी है? आईये इसके बारे में कुछ सचाई को जानने की कोशिश करें। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मध्य अमेरिका महाद्वीप के होंडुरास में सियूदाद ब्लांका नाम के एक गुम प्राचीन शहर की खोज की है। वैज्ञानिकों ने इस शहर को आधुनिक लाइडर तकनीक से खोज निकाला है। इस शहर को बहुत से जानकार वो पाताल लोक मान रहे हैं जहां राम भक्त हनुमान पहुंचे थे। दरअसल, इस विश्वास की कई पुख्ता वजह है। संभव है कि भारत या श्रीलंका से कोई सुरंग खोदी जाएगी तो वो सीधे यहीं निकलेगी। दूसरी वजह ये है कि वक्त की हजारों साल पुरानी परतों में दफन सियुदाद ब्लांका में ठीक राम भक्त हनुमान के जैसे वानर देवता की मूर्तियां मिली हैं। इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन शहर सियुदाद ब्लांका के लोग एक विशालकाय वानर देवता की मूर्ति की पूजा करते थे। लिहाजा, ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं हजारों साल प्राचीन सियूदाद ब्लांका ही तो रामायण में जिक्र पाताल पुरी तो नहीं है। किवदंतियां हैं कि पूर्वोत्तर होंडुरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में हजारों साल पहले एक गुप्त शहर सियूदाद ब्लांका था। कहा जाता है कि हजारों साल पहले इस प्राचीन शहर में एक फलती-फूलती सभ्यता सांस लेती थी, जो अचानक ही वक्त की गहराइयों में गुम हो गई। अब तक कि खुदाई में इस शहर के ऐसे कई अवशेष मिले हैं जो इशारा करते हैं कि सियूदाद के निवासी वानर देवता की पूजा करते थे। यहां सियूदाद के वानर देवता की घुटनों के बल बैठे मूर्ति को देखते ही राम भक्त हनुमान की याद आ जाती है। घुटनों पर बैठे वजरंग बली की मूर्ति वाले मंदिर आपको हिंदुस्तान में जगह-जगह मिल जाएंगे। हनुमान जी के एक हाथ में उनका जाना-पहचाना हथियार गदा भी रहता है। दिलचस्प बात ये है कि प्राचीन शहर से मिली वानर-देवता की मूर्ति के हाथ में भी गदा जैसा हथियार नजर आता है। </strong><br />
<strong><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft  wp-image-94480" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg" alt="patal" width="272" height="163" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-300x180.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal-768x460.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 272px) 100vw, 272px" /></a>पाताल पुरी का जिक्र रामायण के उस अध्याय में आता है, जब मायावी अहिरावण राम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें अपने माया लोक पाताल पुरी ले जाता है। रामायण की कथा के अनुसार हनुमान जी को अहिरावण तक पहुंचने के लिए पातालपुरी के रक्षक मकरध्वज को परास्त करना पड़ा था जो ब्रह्मचारी हनुमान का ही पुत्र था। दरअसल, मकरध्वज एक मत्स्यकन्या से उत्पन्न हुए थे, जो लंकादहन के बाद समुद्र में आग बुझाते हनुमान जी के पसीना गिर जाने से गर्भवती हुई थी। रामकथा के मुताबिक अहिरावण वध के बाद भगवान राम ने वानर रूप वाले मकरध्वज को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था, जिसे पाताल पुरी के लोग पूजने लगे थे। </strong><strong>होंडुरास के गुप्त प्राचीन शहर के बारे में सबसे पहले ध्यान दिलाने वाले अमेरिकी खोजी थियोडोर मोर्डे ने दावा किया था कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया था कि वहां के प्राचीन लोग वानर देवता की ही पूजा करते थे। उस वानर देवता की कहानी काफी हद तक मकरध्वज की कथा से मिलती-जुलती है। हालांकि अभी तक प्राचीन शहर सियूदाद ब्लांका और रामकथा में कोई सीधा रिश्ता नहीं मिला है। </strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">लाइडर तकनीक से खोज निकाला प्राचीन शहर</span> </strong><br />
<strong>मध्य अमेरिकी देश होंडुरास में वानर देवता वाले प्राचीन शहर की खोज बरसों पुरानी है। होंडुरास में उस प्राचीन शहर की किवदंती सदियों से सुनाई जाती हैं जहां बजरंग बली जैसे वानर देवता की पूजा की जाती थी। ये कहानियां होंडुरास पर राज करने वाले पश्चिमी लोगों तक भी पहुंची। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद एक अमेरिकी पायलट ने होंडुरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखने की बात की, लेकिन इसके बारे में पहली पुख्ता जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थियोडोर मोर्डे ने 1940 में दी। एक अमेरिकी मैगजीन में उसने लिखा कि उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होती थी, लेकिन उसने शहर की जगह का खुलासा नहीं किया। बाद में रहस्यमय हालात में थियोडोर की मौत हो जाने से प्राचीन शहर की खोज अधूरी रह गई। इसके करीब 70 साल बाद, होंडुरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में, जमीन में दफन एक प्राचीन शहर अपने इतिहास के साथ सांस ले रहा था, ये शायद दुनिया कभी नहीं जा पाती अगर अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने उसे तलाशने के लिए क्रांतिकारी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया होता। यह संभव हुआ लाइडर के नाम से जानी जाने वाली तकनीक से, जो जमीन के नीचे की 3-डी मैपिंग द्वारा प्राचीन शहर को खोज निकाला।</strong><br />
<strong> <a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal_1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft  wp-image-94481" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2016/05/patal_1.jpg" alt="patal_1" width="281" height="193" /></a>अमेरिका के ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी और नेशनल सेंटर फॉर एयरबोर्न लेजर मैपिंग ने होंडुरास के जंगलों के ऊपर आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से प्राचीन शहर के निशान को खोज निकाला है। लाइडर तकनीक की मदद से ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने होंडुरास के जंगलों के ऊपर से उड़ते हुए अरबों लेजर तरंगें जमीन पर फेंकी। इससे जंगल के नीचे की जमीन का 3-डी डिजिटल नक्शा तैयार हो गया। थ्री-डी नक्शे से जो आंकड़े मिले उससे जमीन के नीचे प्राचीन शहर की मौजूदगी का पता चल गया। वैज्ञानिकों ने पाया की जंगलों की जमीन की गहराइयों में मानव निर्मित कई चीजें मौजूद हैं। हालांकि लाइडर तकनीक से जंगल के नीचे प्राचीन शहर होने के निशान मिल गए हैं, लेकिन ये निशान किवदंतियों में जिक्र होने वाला सियूदाद ब्लांका के ही हैं,ये शायद कभी पता ना चले। दरअसल, पर्यावरण के प्रति सजग होंडुरास जंगलों के बीच खुदाई की इजाजत नहीं देता है, ऐसे में सिर्फ ये अनुमान ही लगाया जा सकता है कि जंगलों में एक प्राचीन शहर दफन है, इस इलाके में बजरंगबली जैसी वानर देवता की कुछ मूर्तियां जरूर मिली हैं, जिससे ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि कहीं किवदंतियों का ये शहर रामायण में जिक्र पाताल लोक ही तो नहीं है। </strong><strong>हम सभी भारतीयों को गर्व करना चाहिए कि हमारे पौराणिक ग्रन्थ, जैसे रामायण, महाभारत, वेद व पुराण आदि प्राचीन इतिहास की एक धरोहर है, न कि एक काल्पनिक पुस्तकीय लेख जो भारत वर्ष की प्राचीन सभ्यता और वैज्ञानिक प्रगति को विश्पपटल पर एक पथ प्रदर्शक होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है। आइये हम सभी इस मिट्टी को नमन करें और अपने पुराने ज्ञान को दुनिया में फैलाने में अग्रणी बनें।</strong></p>
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