संयुक्त किसान मोर्चा – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org By Dastak Times Hindi News Network Tue, 01 Sep 2026 12:05:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png संयुक्त किसान मोर्चा – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org 32 32 चंडीगढ़ बॉर्डर पर फिर गरजे किसान, 22 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर 7 दिन का धरना https://dastaktimes.org/farmers-once-again-roared-at-chandigarh-border-7-day-strike-with-many-demands-including-legal-guarantee-of-msp-on-22-crops/ Tue, 01 Sep 2026 12:05:49 +0000 https://dastaktimes.org/?p=903137 चंडीगढ़: पंजाब के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे और एयरपोर्ट रोड के पास धरना शुरू किया। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 1 सितंबर से 7 सितंबर तक एक सप्ताह का धरना आयोजित …]]>

चंडीगढ़: पंजाब के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे और एयरपोर्ट रोड के पास धरना शुरू किया। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 1 सितंबर से 7 सितंबर तक एक सप्ताह का धरना आयोजित किया जा रहा है। किसानों की प्रमुख मांगों में 22 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी शामिल है। प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

भारतीय किसान यूनियन लखोवाल के वरिष्ठ नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने बताया कि 32 किसान संगठनों के गठबंधन ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। किसानों की मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के अलावा दशकों पुराने जल समझौतों को रद्द करने समेत कई अन्य मुद्दे शामिल हैं।

लखोवाल के मुताबिक किसान संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने आवाज उठा रहे हैं। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एसडीएम और डीसी समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि करीब साढ़े चार साल से किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

पंजाब के पानी के अधिकार का मुद्दा भी आंदोलन में शामिल

किसान नेता ने पंजाब के पानी के अधिकार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पंजाब सरकार से इस विषय पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। लखोवाल ने कहा कि किसान संगठन दो-तीन साल पहले भी इन मुद्दों को उठा चुके हैं और उस समय सरकार की ओर से कुछ मांगों पर सहमति जताई गई थी, लेकिन खासकर पानी से जुड़े मामलों में फैसलों को लागू नहीं किया गया।

लखोवाल ने कहा कि पंजाब सरकार यह कह सकती है कि जल समझौतों से जुड़ा फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर होना है, लेकिन किसान चाहते हैं कि राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराए। उन्होंने पुराने जल समझौतों को रद्द करने की मांग भी दोहराई।

22 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी की मांग

किसानों की प्रमुख आर्थिक मांग केंद्र सरकार की ओर से घोषित 22 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने की है। किसान संगठनों का कहना है कि केवल MSP घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी फसलों के लिए कानूनी रूप से सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए।

हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार 22 फसलों के लिए MSP घोषित करती है, लेकिन किसान संगठनों की मांग है कि इसे कानूनी अधिकार बनाया जाए।

मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ भी आंदोलन की तैयारी

किसान नेता ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ भी देशव्यापी आंदोलन की बात कही। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग स्थानों पर पहले से प्रदर्शन किए जा रहे हैं और किसान संगठन इसे लेकर व्यापक आंदोलन के लिए तैयार हैं।

किसानों के कर्ज और फसल बीमा का मुद्दा उठा

किसान संगठनों ने किसानों के कर्ज का मुद्दा भी उठाया है। लखोवाल ने सवाल किया कि यदि बड़ी कंपनियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा सकते हैं तो किसानों के कर्ज को लेकर भी ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने किसानों के लिए प्रभावी फसल बीमा योजना लागू करने की मांग की।

किसान संगठनों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कर्ज से राहत, बेहतर फसल बीमा और पंजाब के पानी के अधिकार जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

इससे पहले किसानों ने अप्रैल में भी पंजाब में रेल रोको आंदोलन किया था। अब एक बार फिर चंडीगढ़ बॉर्डर पर शुरू हुए सप्ताहभर के धरने के जरिए किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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MSP पर 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर भोपाल में किसानों का डेरा, सड़क पर बनाई दाल-बाटी; CM आवास जाने की तैयारी https://dastaktimes.org/farmers-camp-in-bhopal-demanding-purchase-of-100-moong-at-msp-preparations-to-go-to-daal-bati-cm-residence/ Wed, 29 Jul 2026 04:48:55 +0000 https://dastaktimes.org/?p=896026 भोपाल: मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं …]]>

भोपाल: मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की अपनी मांग पर अड़े हैं।

सड़क किनारे दाल-बाटी बनाकर जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सड़क किनारे कंडों की आग पर दाल-बाटी बनाकर अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों का कहना है कि आंदोलन लंबा चल सकता है, इसलिए वे अपने साथ राशन और भोजन बनाने का पूरा सामान लेकर आए हैं। प्रदर्शन स्थल पर दाल पकाई जा रही है और बाटियां सेंकी जा रही हैं। किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी दाल-बाटी खाने का निमंत्रण दिया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को बनाया अस्थायी ठिकाना

आंदोलन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बिस्तर, राशन और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जहां पुलिस रोकेगी या रात होगी, वहीं ट्रॉली में रुककर विश्राम करेंगे। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन के चलते भोपाल-नागपुर हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर रूट डायवर्ट करना पड़ा है।

सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान का भरोसा दिया

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि मंत्रालय में किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई है। उन्होंने कहा कि मूंग खरीदी समेत किसानों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई है और सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने का प्रयास कर रही है।

क्या है किसानों की प्रमुख मांग?

किसान संगठनों का आरोप है कि वर्तमान खरीदी नीति से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि फिलहाल प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है, जबकि एक एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल उत्पादन होता है। सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,668 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन शेष उपज किसानों को खुले बाजार में 4,000 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचनी पड़ रही है। किसानों का दावा है कि इससे उन्हें प्रति क्विंटल 3,000 से 4,000 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

हनुमान चालीसा के पाठ के साथ शुरू हुआ आंदोलन

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम के सेठानी घाट से हुई। धरना देने के बाद किसानों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और हाथों में तिरंगा लेकर ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे लगाते हुए भोपाल के लिए रवाना हुए। प्रशासन की ओर से नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक साईकृष्ण एस. थोटा ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही और किसान अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गए।

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आगरा: प्रदर्शन से पहले ही किसान नेताओं को उनके घरों में किया नजरबंद https://dastaktimes.org/farmer-leaders-under-house-arrest-even-before-the-demonstration/ Sat, 06 Feb 2021 04:56:35 +0000 https://dastaktimes.org/?p=497632 आगरा : जनपद के कई किसान नेताओं को पुलिस ने शुक्रवार मध्य रात्रि को घर पर ही नजरबंद कर दिया है। उनके घरों पर पाबंद के नोटिस पहुंचा दिए गए हैं। प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए, कहीं भी भीड़ एकत्रित नहीं होने देने को कहा है। संयुक्त किसान …]]>
आगरा: प्रदर्शन से पहले ही किसान नेताओं को उनके घरों में किया नजरबंद

आगरा : जनपद के कई किसान नेताओं को पुलिस ने शुक्रवार मध्य रात्रि को घर पर ही नजरबंद कर दिया है। उनके घरों पर पाबंद के नोटिस पहुंचा दिए गए हैं। प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए, कहीं भी भीड़ एकत्रित नहीं होने देने को कहा है।

संयुक्त किसान मोर्चा व किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों से देशभर में छह फरवरी को चक्का जाम करने का आह्वान किया था। लेकिन बाद में किसानों ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व दिल्ली आदि प्रदेशों में चक्का जाम करने की रणनीति को बदल दिया। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि छह फरवरी को किसान अपने- अपने जनपदों में भारी संख्या में एकत्रित होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचें। जिलाधिकारी को नए कृषि बिलों के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपें। 

पुलिस प्रशासन ने देर रात जनपद में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए, किसान नेता श्याम सिंह चाहर, सोमबीर यादव, बृजमोहन सिंह सिसोदिया, पवन समाधिया सहित अन्य किसान नेताओं को नजरबंद कर दिया है। 

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ट्रैक्टर रैली उपद्रव मामले में दिल्ली पुलिस ने किसान नेता को भेजा नोटिस https://dastaktimes.org/delhi-police-sent-notice-to-farmer-leader/ Thu, 28 Jan 2021 07:17:01 +0000 https://dastaktimes.org/?p=496773 नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए उपद्रव को लेकर किसान नेताओं से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस क्रम में कुछ किसान नेताओं को बुधवार को पुलिस कमिश्नर के ऑफिस से नोटिस जारी किया गया है। ऐसा ही एक नोटिस किसान …]]>
ट्रैक्टर रैली उपद्रव मामले में दिल्ली पुलिस ने किसान नेता को भेजा नोटिस

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए उपद्रव को लेकर किसान नेताओं से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस क्रम में कुछ किसान नेताओं को बुधवार को पुलिस कमिश्नर के ऑफिस से नोटिस जारी किया गया है। ऐसा ही एक नोटिस किसान नेता दर्शन पाल को भी भेजा गया है।

उक्त नोटिस में उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए? उधर कोतवाली थाने में पंजाब के एक्टिविस्ट लखा सिधाना और दीप सिद्धू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

नोटिस में कहा गया

क्रांतिकारी किसान यूनियन और अन्य संगठनों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली थी। इसके लिए उन्होंने पुलिस को अंडरटेकिंग दी थी कि वह तय नियमों का पालन करेंगे। इसके लिए पुलिस द्वारा दिए गए रूट पर उन्होंने सहमति जताई थी। अंडरटेकिंग में उन्होंने हस्ताक्षर भी किया है। इसमें साफ लिखा गया था कि यह रैली शांतिपूर्ण तरीके से दोपहर 12 बजे से पांच बजे के बीच निकलेगी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता इसकी अगुवाई करेंगे। ट्रैक्टर रैली में केवल पांच हजार ट्रैक्टर शामिल होंगे और किसी के पास कोई हथियार नहीं होगा, लेकिन रैली में तय किये गए सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।

क्यों न की जाए कानूनी कार्रवाई

उक्त नोटिस के जरिये किसान नेता से पूछा गया है कि मंगलवार को जिस प्रकार से हिंसा हुई है, उसे लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। इसे लेकर उनसे जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद उनके खिलाफ आगे की कर्रवाई की जायेगी।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को लिखा पत्र, आंदोलन को बदनाम नहीं करने की अपील https://dastaktimes.org/kisan-morcha-wrote-letter-to-govt/ Wed, 16 Dec 2020 07:27:06 +0000 https://dastaktimes.org/?p=490800 नई दिल्ली : कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन बुधवार को 21वें दिन भी जारी है। लगातार बढ़ रही ठंड के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें उनके आंदोलन को बदनाम नहीं करने की अपील की गई …]]>
संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को लिखा पत्र, आंदोलन को बदनाम नहीं करने की अपील

नई दिल्ली : कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन बुधवार को 21वें दिन भी जारी है। लगातार बढ़ रही ठंड के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं।

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें उनके आंदोलन को बदनाम नहीं करने की अपील की गई है। साथ ही कहा गया है कि अगर सरकार किसानों की बात सुनना चाहती है कि कुछेक संगठन के बजाय सभी से एकसाथ बात करे। किसानों के बीच भ्रम और फूट पैदा करने की कोशिश न की जाए।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा

कृषि मंत्रालय को भेजे पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सरकार की ओर से मिले प्रस्ताव को नकार दिया है। उनका कहना है कि सरकार ने जो संशोधन किया है, वह स्वीकार नहीं है। यह प्रस्ताव बीते पांच दिसम्बर को हुई बातचीत में मौखिक प्रस्तावों का ही लिखित प्रारूप है। जबकि किसानों की मांग इससे परे है। सरकार को इधर-उधर करने के बजाय हमारी मांगों पर चर्चा और विचार करना चाहिए।

पत्र में कहा गया

पत्र में कहा गया है कि ‘किसान पहले ही अपनी बात कई दौर की हुई बातचीत में रख चुके हैं। हम चाहते हैं कि सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करना बंद करे और दूसरे किसान संगठनों से समानांतर वार्ता बंद करे। बातचीत जब भी हो वो सभी संगठनों के साथ मिलकर हो।’ यह भी साफ किया गया है कि जब तक सरकार किसानों के बारे में नहीं सोचेगी आंदोलन जारी रहेगा, बल्कि उसे और तेज किया जाएगा।

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दरअसल, बीते सोमवार को अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति से जुड़े दस संगठनों ने कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर से मुलाकात कर कृषि कानून पर अपना समर्थन दिया था। उन्होंने केंद्र सरकार के नये कृषि कानून को किसानों के हित में भी बताया था। इसी बात को लेकर अन्य किसान संगठन नाराज हैं और पत्र लिखकर कुछ संगठनों से बातचीत नहीं करने को कहा है। वहीं आंदोलनकारी किसानों ने एकबार फिर दिल्ली-नोएडा बॉर्डर को ब्लॉक कर दिया है।

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