<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सांस्कृतिक विरासत &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a4/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Tue, 07 Jul 2026 12:53:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.5</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>सांस्कृतिक विरासत &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>1170 साल पुराने प्राम्बानन शिव मंदिर के संरक्षण में भारत देगा तकनीकी सहयोग, इंडोनेशिया से सांस्कृतिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती</title>
		<link>https://dastaktimes.org/india-will-provide-technical-support-in-the-conservation-of-1170-year-old-prambanan-shiva-temple-cultural-relations-with-indonesia-will-get-new-strength/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:52:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[cultural heritage]]></category>
		<category><![CDATA[India Indonesia Relations]]></category>
		<category><![CDATA[Prambanan Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shiva Temple Indonesia]]></category>
		<category><![CDATA[UNESCO World Heritage]]></category>
		<category><![CDATA[प्राम्बानन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[प्राम्बानन शिव मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[भारत इंडोनेशिया संबंध]]></category>
		<category><![CDATA[यूनेस्को विश्व धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक विरासत]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदू मंदिर इंडोनेशिया]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=893609</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="163" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1-300x163.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1-300x163.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1.jpg 768w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई दिशा देने की पहल के तहत जावा द्वीप स्थित ऐतिहासिक प्राम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में भारत तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। लगभग 1170 वर्ष पुराने इस मंदिर को हिंदू स्थापत्य कला की उत्कृष्ट धरोहर माना जाता है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="163" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1-300x163.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1-300x163.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/7-2-768x416-1.jpg 768w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई दिशा देने की पहल के तहत जावा द्वीप स्थित ऐतिहासिक प्राम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में भारत तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। लगभग 1170 वर्ष पुराने इस मंदिर को हिंदू स्थापत्य कला की उत्कृष्ट धरोहर माना जाता है। दोनों देशों के बीच यह सहयोग साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>



<p><strong>भगवान शिव को समर्पित है ऐतिहासिक मंदिर</strong></p>



<p>इंडोनेशिया के योग्याकार्ता क्षेत्र के निकट स्थित प्राम्बानन मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में मातरम साम्राज्य के हिंदू संजय वंश के शासकों द्वारा कराया गया था। मंदिर परिसर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव को समर्पित विशाल मंदिर है। इसके साथ भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के मंदिर भी मौजूद हैं। पूरा परिसर त्रिमूर्ति की अवधारणा पर आधारित है और इसमें सैकड़ों छोटे-बड़े मंदिर शामिल हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथा को बारीक शिल्पकला के माध्यम से उकेरा गया है, जिसे भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।</p>



<p><strong>समुद्री व्यापार से जुड़े भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन संबंध</strong></p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार पहली शताब्दी से ही भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री व्यापार सक्रिय था। भारतीय व्यापारी मसाले, वस्त्र और अन्य वस्तुओं के व्यापार के लिए इंडोनेशिया पहुंचते थे। इसी दौरान भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा, धार्मिक परंपराएं, मंदिर निर्माण की कला तथा रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों का प्रभाव भी वहां पहुंचा। समय के साथ स्थानीय शासकों ने इन परंपराओं को अपनाया और हिंदू तथा बौद्ध संस्कृति वहां के सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।</p>



<p><strong>प्राकृतिक आपदाओं से हुआ था भारी नुकसान</strong></p>



<p>प्राम्बानन मंदिर का निर्माण लगभग 850 से 856 ईस्वी के बीच माना जाता है। बाद के वर्षों में ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण मंदिर परिसर को भारी क्षति पहुंची और लंबे समय तक यह उपेक्षित रहा। बाद में पुरातात्विक अनुसंधानों के दौरान इसके ऐतिहासिक महत्व का पता चला, जिसके बाद मूल पत्थरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया गया।</p>



<p><strong>यूनेस्को विश्व धरोहर के संरक्षण में भारत की भूमिका</strong></p>



<p>वर्ष 1991 में प्राम्बानन मंदिर परिसर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। अब भारत के तकनीकी सहयोग से परिसर के क्षतिग्रस्त छोटे मंदिरों के पुनर्स्थापन की योजना पर काम किया जाएगा। इस प्रक्रिया में मूल पत्थरों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा ताकि मंदिर का ऐतिहासिक स्वरूप सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से भी पत्थरों की मूल स्थिति का आकलन किया जाएगा।</p>



<p><strong>सांस्कृतिक कूटनीति को मिलेगी नई ऊर्जा</strong></p>



<p>इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन वहां आज भी प्राचीन हिंदू और बौद्ध विरासत को समान सम्मान दिया जाता है। विशेष रूप से बाली द्वीप पर हिंदू परंपराएं आज भी जीवंत रूप में मौजूद हैं। ऐसे में प्राम्बानन मंदिर के संरक्षण में भारत का सहयोग केवल एक पुरातात्विक परियोजना नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>12 साल का मोदी युग: सेवा, सुशासन और संकल्प के सहारे बदली विकास की तस्वीर, नए भारत की कहानी पर बड़ा विमर्श</title>
		<link>https://dastaktimes.org/12-years-of-modi-era-changed-the-picture-of-development-with-the-help-of-service-good-governance-and-determination-big-discussion-on-the-story-of-new-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 06:42:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Developed India Mission]]></category>
		<category><![CDATA[Digital India]]></category>
		<category><![CDATA[Good Governance India]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh Development]]></category>
		<category><![CDATA[Modi Government 12 Years]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra Modi 12 Years]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra Modi Leadership]]></category>
		<category><![CDATA[New India Vision]]></category>
		<category><![CDATA[Service Governance Commitment]]></category>
		<category><![CDATA[Viksit Bharat]]></category>
		<category><![CDATA[डिजिटल इंडिया]]></category>
		<category><![CDATA[नरेंद्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यू इंडिया]]></category>
		<category><![CDATA[भारत की वैश्विक भूमिका]]></category>
		<category><![CDATA[भारत विकास मॉडल]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश विकास]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी नेतृत्व]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी सरकार 12 साल]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[विकसित भारत]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक विरासत]]></category>
		<category><![CDATA[सुशासन]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा सुशासन संकल्प]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=890196</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />भोपाल: मई 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत हुई। बीते 12 वर्षों के इस सफर को केवल योजनाओं और सरकारी उपलब्धियों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शासन की कार्यशैली, विकास के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/pm-modi-1.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>भोपाल:</strong> मई 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत हुई। बीते 12 वर्षों के इस सफर को केवल योजनाओं और सरकारी उपलब्धियों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शासन की कार्यशैली, विकास के दृष्टिकोण और जनभागीदारी की बदलती सोच के रूप में भी देखा जा रहा है। इस पूरे कालखंड को सेवा, सुशासन और संकल्प के तीन प्रमुख स्तंभों से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता रहा है।</p>



<p><strong>सेवा को बनाया शासन का मूल आधार</strong></p>



<p>लंबे समय तक राजनीति में सत्ता को अधिकार और प्रभाव के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन इस दौर में शासन को सेवा के माध्यम के रूप में स्थापित करने का प्रयास दिखाई दिया। स्वयं को &#8220;प्रधान सेवक&#8221; बताने की अवधारणा ने राजनीतिक संवाद और प्रशासनिक दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत दिया। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की सोच को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।</p>



<p>समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की अवधारणा को केंद्र में रखकर कई नीतियों और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया। इसे सामाजिक समावेशन और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा गया।</p>



<p><strong>सुशासन को मिली नई पहचान</strong></p>



<p>लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास शासन की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। ऐसे में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरल प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया गया। डिजिटल तकनीक के विस्तार के जरिए नागरिकों और शासन के बीच की दूरी कम करने की कोशिश की गई।</p>



<p>सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निर्णय लेने की गति बढ़ाने जैसे कदमों को सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। इस दौरान कई बड़े फैसलों को निर्णायक नेतृत्व की पहचान के रूप में भी देखा गया।</p>



<p><strong>विकसित भारत का लक्ष्य बना राष्ट्रीय संकल्प</strong></p>



<p>बीते वर्षों में विकसित भारत की अवधारणा राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में उभरकर सामने आई। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत राष्ट्रीय पहचान से भी जुड़ा रहा।</p>



<p>देश को विकासशील राष्ट्र की श्रेणी से आगे बढ़ाकर वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करने की सोच को विभिन्न मंचों पर प्रमुखता से रखा गया। इससे समाज में आत्मविश्वास और भविष्य को लेकर नई उम्मीदों का माहौल बना।</p>



<p><strong>मध्यप्रदेश में विकास परियोजनाओं को मिली गति</strong></p>



<p>मध्यप्रदेश में भी कई बड़े विकास कार्यों और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना, पीएम मित्र पार्क, मेट्रो रेल, साइबर तहसील और एयरपोर्ट विस्तार जैसे प्रोजेक्ट्स को राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>



<p>राज्य सरकार का दावा है कि केंद्र सरकार के सहयोग से निवेश, औद्योगिक विकास और अधोसंरचना निर्माण को नई गति मिली है। निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई पहलें की गई हैं।</p>



<p><strong>सांस्कृतिक विरासत को मिला नया विस्तार</strong></p>



<p>इस अवधि की एक प्रमुख विशेषता भारतीय संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान दिलाने के प्रयास भी रहे। सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पुनर्विकास से जुड़े कई कदमों को राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर देखा गया।</p>



<p>अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी के पुनर्विकास और योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने जैसे प्रयासों को भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।</p>



<p><strong>अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत हुई भारत की मौजूदगी</strong></p>



<p>पिछले 12 वर्षों में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को भी अधिक प्रभावशाली माना गया। विदेश नीति में संतुलित दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्वतंत्र रुख और वैश्विक मंचों पर बढ़ती सक्रियता ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूती दी।</p>



<p>कई वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान भारत की भूमिका और दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से सुना गया, जिससे देश की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई।</p>



<p><strong>राजनीतिक विमर्श में आया बदलाव</strong></p>



<p>राजनीतिक चर्चा के केंद्र में भी बदलाव देखने को मिला। जहां पहले जातीय समीकरण और गठबंधन राजनीति प्रमुख विषय हुआ करते थे, वहीं अब विकास, रोजगार, आधारभूत ढांचा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अधिक प्रमुखता से सामने आने लगे हैं।</p>



<p>विशेष रूप से युवाओं के बीच अवसर, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर नई सोच विकसित होती दिखाई दी है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को नई दिशा देने का काम किया है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तराखंड : टिहरी एवं जौनपुर की सांस्कृतिक विरासत पेश की</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a5%8c%e0%a4%a8%e0%a4%aa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Aug 2017 09:42:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक विरासत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dastaktimes.org/?p=177350</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />मसूरी: राजकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय कुमाल्डा में सीसीआरटी द्वारा तीन दिवसीय उप कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन प्रधानाध्यापक बीएस रावत ने किया। कार्यशाला के पहले दिन मुख्य अतिथि सुरेंद्र पुंडीर ने जनपद टिहरी एवं जौनपुर की संस्कृति एवं इतिहास की विस्तृत जानकारी दी गई। दूसरे सत्र में जनपद टिहरी की सांस्कृतिक विरासत पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p><strong><a href="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-177351 aligncenter" src="http://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg" alt="" width="696" height="464" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2017/08/tihari.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></a>मसूरी: राजकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय कुमाल्डा में सीसीआरटी द्वारा तीन दिवसीय उप कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन प्रधानाध्यापक बीएस रावत ने किया। कार्यशाला के पहले दिन मुख्य अतिथि सुरेंद्र पुंडीर ने जनपद टिहरी एवं जौनपुर की संस्कृति एवं इतिहास की विस्तृत जानकारी दी गई। दूसरे सत्र में जनपद टिहरी की सांस्कृतिक विरासत पर प्रोजेक्ट तैयार किया गया तथा दीपक शर्मा ने क्राफ्ट में पंखें, टोकरी आदि बनाना सिखाया गया। साथ ही देश की सांस्कृतिक विरासत से संबधित प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। </strong><strong>अंतिम दिवस में प्रोजेक्टर के माध्यम से उत्तराखंड दर्शन, हिमाचली नाटी तथा समस्त प्रतिभागियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गये। प्रशिक्षण शिविर में जनपद टिहरी के डीआरपी रामाश्रय सिंह ने सभी प्रतिभागियों को सीसीआरटी से संबंधित विस्तृत जानकारी के साथ ही प्रमाण पत्र प्रदान किए गये। कार्यक्रम का संचालन ताजवर सिंह नेगी ने किया वहीं प्रशिक्षण में मदनमोहन सेमवाल, देव सिंह नेगी, दयाल सिंह बिष्ट, संजय बहुगुणा, अरविंद रावत, मक्खन शाह, अरुण सकलानी, वंदना, नीलम, सनिता आदि के साथ विभिन्न विद्यालयों से आये 40 प्रतिभागी मौजूद रहे।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-08-03 21:12:43 by W3 Total Cache
-->