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	<title>हूती विद्रोही &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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	<title>हूती विद्रोही &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>लाल सागर में 14 भारतीयों से भरी नाव पर हमला, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार; बचाव की कोशिश का दावा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:17:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>सना:</strong> यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि वे लाल सागर में हमले का शिकार हुई एक नाव पर सवार 14 भारतीयों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक, नाव पर जबल जुकर द्वीप के पास हमला हुआ। यह इलाका बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के नजदीक स्थित है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद अहम मार्ग है। हूतियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, नाव पर सवार भारतीयों की मौजूदा स्थिति और बचाव अभियान के नतीजे को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।</p>



<p><strong>सऊदी अरब पर हूतियों ने लगाया हमले का आरोप</strong></p>



<p>हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि हमले के बाद नाव पर सवार भारतीयों को बचाने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने सऊदी अरब पर नाव को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और हमले की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।</p>



<p><strong>सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बरकरार</strong></p>



<p>यह घटनाक्रम सऊदी अरब में हुए हालिया हमलों के बीच सामने आया है। इससे पहले सऊदी अरब में एक हमले में दो लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। उस घटना में आठ लोग घायल हुए थे, जिनमें दो भारतीय नागरिक बताए गए थे।</p>



<p>क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्गों और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।</p>



<p><strong>सऊदी अरब में भारतीयों की मदद कर रहा भारत</strong></p>



<p>सऊदी अरब में हमलों के बीच भारत ने नागरिकों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने वाली घटनाओं की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताते हुए हमलों को तत्काल रोकने की मांग की।</p>



<p>मंत्रालय ने 21 अक्टूबर को दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सऊदी अरामको के शैबा तेल क्षेत्र पर हुए हमलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। भारत ने इन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।</p>



<p>दम्माम में मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए विदेश मंत्रालय ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। रियाद स्थित भारतीय दूतावास सऊदी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों को सहायता उपलब्ध करा रहा है।</p>



<p><strong>सऊदी अरब में फंसे उमराह यात्रियों की वापसी की तैयारी</strong></p>



<p>क्षेत्र में बढ़ते तनाव और भारतीय विमानन कंपनियों की उड़ानें निलंबित होने के कारण सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों की स्वदेश वापसी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।</p>



<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, पिछले सप्ताह उपलब्ध उड़ानों के जरिए करीब 3,000 भारतीय तीर्थयात्री भारत लौटे। इसी अवधि में 10,000 से अधिक अन्य तीर्थयात्री भी स्वदेश पहुंचे।</p>



<p>जायसवाल ने बताया कि शेष उमराह यात्रियों की जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है। रियाद और जेद्दा स्थित भारतीय मिशन सामुदायिक स्वयंसेवकों की मदद से तीर्थयात्रियों को जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।</p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>यमन में हूतियों का भीषण मिसाइल हमला, सैन्य शिविर में 53 सैनिकों की मौत; 200 से ज्यादा जवान घायल</title>
		<link>https://dastaktimes.org/houthis-massive-missile-attack-in-yemen-53-soldiers-killed-in-military-camp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 12:25:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[53 सैनिकों की मौत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="185" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769-300x185.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769-300x185.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="185" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769-300x185.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769-300x185.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/6-7-e1792479097769.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में बड़ी संख्या उन सैनिकों की है, जिन्हें हाल ही में भर्ती किया गया था। इस हमले के बाद देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के फिर से भड़कने की आशंका बढ़ गई है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>प्रशिक्षण केंद्र पर दागीं तीन बैलिस्टिक मिसाइलें</strong></h4>



<p>यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाकर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी है।</p>



<p>हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की सटीक संख्या नहीं बताई।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>रणनीतिक रूप से अहम इलाके में स्थित है सैन्य शिविर</strong></h4>



<p>अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां से सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक जाने वाले रास्तों पर नजर रखी जा सकती है। इस इलाके के जरिए सरकारी बलों को सैन्य सामग्री और जरूरी आपूर्ति पहुंचाने में भी मदद मिलती है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह ने किया था।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>नई सुरक्षा इकाई के जवान बने निशाना</strong></h4>



<p>एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले की चपेट में आए सैनिक रैपिड इंटरवेंशन नामक नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रशिक्षण केंद्र पर मिसाइल हमले से सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>2022 के संघर्षविराम पर फिर मंडराया खतरा</strong></h4>



<p>यमन में बढ़ते संघर्ष के पीछे कई क्षेत्रीय और राजनीतिक कारण हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से तनाव बढ़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्रीय हालात पर पड़ रहा है।</p>



<p>वर्ष 2022 में लागू संघर्षविराम ने यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई कम करने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने इस व्यवस्था की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और शांति बहाली की कोशिशों के सामने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>सादा प्रांत में हवाई हमले में नौ लोगों की मौत का दावा</strong></h4>



<p>यमन के उत्तरी हिस्से में स्थित हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को भी हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने इसके लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है।</p>



<p>सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>सऊदी अरब और लाल सागर तक पहुंच रहा संघर्ष का असर</strong></h4>



<p>यमन में जारी संघर्ष का प्रभाव सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर फिर से हमले शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने सऊदी हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण हजारों उड़ानें प्रभावित होने और 19 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर हमले की सूचना भी सामने आई है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>लाल सागर के अहम समुद्री मार्ग पर भी बढ़ी चिंता</strong></h4>



<p>लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम है। इस रणनीतिक क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ने के बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। ताजा मिसाइल हमले ने यमन में शांति बहाली की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है।</p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>यमन के अदन में राष्ट्रपति भवन पर हूती हमला, 5 की मौत और 16 घायल; सरकारी सेना ने 24 घंटे में 1,250 हमलों का किया दावा</title>
		<link>https://dastaktimes.org/houthi-attack-on-rashtrapati-bhavan-in-aden-yemen/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 11:52:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
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<p><strong>विदेश डेस्क:</strong> यमन के दक्षिणी शहर अदन स्थित अल-माशिक राष्ट्रपति भवन पर हुए हूती हमले में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हो गए। यमन के स्वास्थ्य मंत्री कासिम मोहम्मद बुहैबेह के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। यह हमला हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच जारी संघर्ष के बीच हुआ है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>



<p><strong>हूती प्रवक्ता ने ली हमले की जिम्मेदारी</strong></p>



<p>हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि अदन स्थित सऊदी सैन्य संचालन मुख्यालय को निशाना बनाना सऊदी सेना की गतिविधियों और सैन्य मौजूदगी को वैध लक्ष्य मानने की उनकी घोषित रणनीति का हिस्सा है।</p>



<p>इस हमले के बाद यमन में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। अदन में राष्ट्रपति भवन पर हमला ऐसे समय हुआ है, जब सरकारी बल हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं।</p>



<p><strong>राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख ने बताया पिछले हमलों का विस्तार</strong></p>



<p>यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने हमले को यमन और सऊदी अरब के हवाई अड्डों तथा तेल सुविधाओं पर पहले हुए हमलों का विस्तार बताया। उन्होंने सरकारी बलों को राज्य के संस्थानों की रक्षा करने, आतंकवादी खतरों का मुकाबला करने और हमलों के स्रोतों के खिलाफ उचित कदम उठाने के निर्देश दिए।</p>



<p>अल-अलीमी ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में शुरू किया गया ‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान राज्य के संस्थानों को बहाल करने और राजधानी सना तक सरकारी नियंत्रण का विस्तार करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>वहीं, यमन के युवा मंत्री नाएफ सालेह अल-बकरी ने पुष्टि की कि अदन में सभी कैबिनेट मंत्री सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि हमले के बाद सरकार का कोई भी सदस्य शहर छोड़कर नहीं जाएगा।</p>



<p><strong>सरकारी सेना का दावा- 24 घंटे में हूती ठिकानों पर 1,250 हमले</strong></p>



<p>यमन की सरकारी सेना ने दावा किया है कि ‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान के तहत पिछले 24 घंटों में हूती ठिकानों पर 1,250 हमले किए गए। सैन्य प्रवक्ता माजिद अल-नूजैली के मुताबिक, इन अभियानों में लड़ाकू विमानों, ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया गया।</p>



<p>सेना ने दावा किया कि इन हमलों में हूती विद्रोहियों के 150 वाहन नष्ट हो गए और ताइज़ मोर्चे पर उनकी किलेबंदियों को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, इन सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।</p>



<p><strong>मारिब पर मिसाइल हमलों की भी खबर</strong></p>



<p>मारिब गवर्नरेट के मीडिया कार्यालय के अनुसार, गुरुवार शाम मारिब शहर पर नौ बैलिस्टिक मिसाइलें और सात अन्य प्रोजेक्टाइल दागे गए। कार्यालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें नागरिकों को निशाना बनाने वाला हमला बताया।</p>



<p>अदन में राष्ट्रपति भवन पर हमले, सरकारी सेना के जवाबी अभियान और मारिब पर मिसाइल हमलों की खबरों के बीच यमन में सुरक्षा स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। घटनाक्रम का असर देश के भीतर जारी संघर्ष के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>सऊदी अरब पर हमला हुआ तो पाकिस्तान देगा सैन्य मदद? रक्षा मंत्री बोले- ‘हमारे सभी सैन्य संसाधन उपलब्ध’</title>
		<link>https://dastaktimes.org/if-saudi-arabia-is-attacked-pakistan-will-provide-military-help-defense-minister-said/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:36:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/photo-5-24-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/photo-5-24-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/photo-5-24-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/photo-5-24.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने अपनी सैन्य प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास मौजूद सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।</p>



<p>रोम में मंगलवार को मीडिया से बातचीत में आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तानी सेना यमन में ईरानी ठिकानों पर किए जा रहे हवाई हमलों में शामिल हुई है। उन्होंने इस बारे में न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सैन्य सहायता मांगी है या नहीं।</p>



<p><strong>मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद बढ़ी चर्चा</strong></p>



<p>आसिफ का बयान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के संदर्भ में आया है। तीनों देशों ने 7 अगस्त को मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर होने वाले हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है और कहा है कि यह किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।</p>



<p>समझौते में सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने की व्यवस्था की गई है। पाकिस्तान ने सितंबर में कहा था कि यह समझौता लागू है। हालांकि, सैन्य तैनाती और संभावित कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।</p>



<p><strong>हूती हमलों के बीच सऊदी सुरक्षा पर चिंता</strong></p>



<p>आसिफ ने कहा कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि हूतियों ने हाल में यमन के लाल सागर तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा किया है। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनकी मौजूदगी बढ़ी है।</p>



<p>बाब-अल-मंदेब वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हालिया संघर्ष के बीच इस क्षेत्र में हूती गतिविधियों को लेकर समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति पर भी चिंता जताई गई है।</p>



<p>आसिफ ने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है। उनके मुताबिक, सऊदी टैंकरों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोकने की कोशिश भी की गई है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन है।</p>



<p><strong>रक्षा समझौते के लिए तैयार किया जा रहा संस्थागत ढांचा</strong></p>



<p>पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के रक्षा समझौते को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जा रहा है। तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों की हाल में रियाद में बैठक हुई थी। इसमें रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य क्षमताओं के समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।</p>



<p>समझौते के लिए एक सचिवालय भी बनाया जा रहा है। इसके जरिए गठबंधन के कामकाज और आपसी समन्वय की व्यवस्था तय की जाएगी। कुछ अन्य देशों ने भी इस व्यवस्था में शामिल होने में रुचि दिखाई है, हालांकि फिलहाल इसके विस्तार की कोई योजना नहीं बताई गई है।</p>



<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी तीनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने समझौते को लागू करने और सऊदी अरब पर हुए हमलों के मुद्दे पर बातचीत की थी।</p>



<p><strong>सऊदी के साथ समझौते के बीच ईरान से बातचीत जारी रखने की तैयारी</strong></p>



<p>सऊदी अरब को सैन्य समर्थन देने की प्रतिबद्धता के साथ पाकिस्तान ईरान के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है। इस्लामाबाद क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू कराने के पक्ष में है।</p>



<p>पाकिस्तान ने अप्रैल में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी की थी। जून में दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए थे। हालांकि, बाद में दोबारा संघर्ष शुरू होने के कारण यह समयसीमा पूरी हो गई।</p>



<p>पाकिस्तान की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। इसके साथ ही वह सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू करने की बात भी कह रहा है।</p>



<p></p>
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		<title>पेट्रोल की दौलत और अरबों के हथियार भी नहीं आए काम? हूती हमलों के बीच सऊदी अरब क्यों पड़ा अकेला, पाकिस्तान-तुर्किये से अमेरिका तक ने बनाई दूरी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/even-the-wealth-of-petrol-and-the-weapons-of-the-arabs-did-not-work-why-was-saudi-arabia-left-alone-amid-the-houthi-attacks-pakistan-was-created-by-turkey-and-america/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 19:04:41 +0000</pubDate>
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<p><strong>रियाद:</strong> तेल से मिली अपार संपत्ति और अमेरिका से खरीदे गए अत्याधुनिक हथियारों के बावजूद सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने राजधानी रियाद और बंदरगाह शहर यान्बु में तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया है। हमलों के बाद रियाद में कई घंटे तक धुआं दिखाई देने और हवाई यातायात प्रभावित होने की खबर सामने आई।</p>



<p>सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका के प्रमुख सुरक्षा साझेदारों में रहा है और उसने रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया है। इसके बावजूद मौजूदा संघर्ष में उसे तत्काल सैन्य मदद को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।</p>



<p><strong>हूती विद्रोहियों ने रियाद और यान्बु को बनाया निशाना</strong></p>



<p>हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में दावा किया कि सऊदी अरब की ओर से यमन की राजधानी सना को निशाना बनाए जाने के जवाब में हूती बलों ने दो सैन्य अभियान चलाए।</p>



<p>हूती प्रवक्ता के मुताबिक, पहले अभियान में रियाद के संवेदनशील ठिकानों पर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। दूसरे अभियान में यान्बु में सऊदी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हूती पक्ष ने दावा किया कि इन हमलों से सऊदी अरब की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचा।</p>



<p>हमलों के शुरुआती घंटों में हूती विद्रोहियों ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी, लेकिन बाद में प्रवक्ता ने दोनों अभियानों को स्वीकार किया।</p>



<p><strong>रियाद में आग और धुएं से मचा हड़कंप</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ईंधन डिपो में आग लग गई। यहां अरामको के ईंधन टैंक को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।</p>



<p>हमले के बाद राजधानी में कई घंटे तक धुएं का गुबार दिखाई देता रहा। लोगों के बीच भी अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। सुरक्षा अलर्ट के बीच लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई।</p>



<p>हवाई अड्डे पर कुछ समय के लिए उड़ानों के आने-जाने पर भी असर पड़ा। कई उड़ानों को रद्द किया गया और लैंडिंग तथा टेकऑफ पर रोक लगाई गई। देश के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा भी बढ़ाई गई। कुछ समय बाद जब अतिरिक्त हमले नहीं हुए तो हवाई अड्डों का संचालन फिर शुरू कर दिया गया।</p>



<p><strong>हूती हमलों की बढ़ती क्षमता बनी चुनौती</strong></p>



<p>हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में अपने सैन्य अभियान तेज किए हैं। उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों का दायरा बढ़ने के साथ ही लाल सागर के आसपास उनकी रणनीतिक मौजूदगी भी महत्वपूर्ण हो गई है।</p>



<p>हूती विद्रोहियों की ओर से मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल ने सऊदी अरब के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी की है, जिसमें दूर से किए जाने वाले हमलों को रोकना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। तेल सुविधाओं और दूसरे संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाए जाने से सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था और समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंता बढ़ी है।</p>



<p><strong>पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांगने की चर्चा</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांगी। इस दौरान दोनों देशों के साथ हुए मक्का समझौते का भी हवाला दिया गया।</p>



<p>हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस संघर्ष में तत्काल सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अलग रुख सामने आया। बताया गया कि समझौते की शर्तों के तहत सहयोग को किसी नए संघर्ष में दुश्मन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जोड़ना उचित नहीं माना गया, क्योंकि हूती-सऊदी संघर्ष पहले से चला आ रहा विवाद है।</p>



<p><strong>अमेरिका ने भी सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी रखी</strong></p>



<p>सऊदी अरब ने अमेरिका से भी मदद की मांग की। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को किसी नए संघर्ष में शामिल करने से इनकार किया।</p>



<p>अमेरिका लंबे समय से सऊदी अरब का प्रमुख सुरक्षा साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी व्यापक रहा है। लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय संघर्षों के बीच वाशिंगटन की ओर से सीधे नए सैन्य मोर्चे में शामिल होने से दूरी बनाए रखने की बात सामने आई है।</p>



<p>इस स्थिति ने सऊदी अरब के सामने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय साझेदारियों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।</p>



<p><strong>सऊदी अरब के सामने अब सबसे बड़ा सवाल</strong></p>



<p>हूती विद्रोहियों के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि सऊदी अरब अपने महत्वपूर्ण शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित करेगा।</p>



<p>तेल से मिलने वाली विशाल आय ने सऊदी अरब को रक्षा और बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च करने की क्षमता दी है। अमेरिका से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदने के बावजूद दूर से होने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना एक अलग तरह की सुरक्षा चुनौती साबित हो रहा है।</p>



<p>मौजूदा घटनाक्रम में सऊदी अरब को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से अपेक्षित सैन्य समर्थन हासिल करने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं, हवाई यातायात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।</p>



<p></p>
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		<title>यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण जंग, 24 घंटे में 44 की मौत</title>
		<link>https://dastaktimes.org/fierce-war-between-government-forces-and-houthi-rebels-in-yemen-44-killed-in-24-hours/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 06:32:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>ताइज:</strong> यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। दक्षिण-पश्चिमी ताइज और लहज प्रांतों में पिछले 24 घंटों के दौरान कई मोर्चों पर हुई भीषण लड़ाई में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई। दोनों पक्ष रणनीतिक इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार अतिरिक्त सैनिक और हथियार तैनात कर रहे हैं।</p>



<p>बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित कहबूब और ताइज के अल-कधा-अल-वाजियाह इलाके इस समय संघर्ष के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। यहां दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार जारी है।</p>



<p><strong>ताइज और लहज में कई मोर्चों पर संघर्ष जारी</strong></p>



<p>सरकारी सेना के एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र के मुताबिक, ताइज और लहज प्रांतों में कई मोर्चों पर लगातार लड़ाई चल रही है। दोनों पक्ष रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिकों और हथियारों को भेज रहे हैं।</p>



<p>सूत्र ने बताया कि ताइज प्रांत के अल-कधा और अल-वाजियाह इलाकों में पिछले 24 घंटों के दौरान हूती विद्रोहियों ने सरकारी ठिकानों पर कई हमले किए। सरकारी सेना का दावा है कि इन सभी हमलों को विफल कर दिया गया। इन झड़पों में सरकारी सेना के छह जवान और हूती समूह के 11 लड़ाके मारे गए।</p>



<p><strong>सरकारी सेना ने हूती हमले नाकाम करने का दावा किया</strong></p>



<p>सरकारी सूत्र ने दावा किया कि हूती विद्रोहियों ने बड़ी संख्या में अतिरिक्त लड़ाकों को भेजकर कई स्थानों पर सरकारी सेना की रक्षा पंक्ति तोड़ने की कोशिश की। हालांकि, उनके मुताबिक, हूती लड़ाकों को पीछे हटना पड़ा।</p>



<p>वहीं, लहज प्रांत के कहबूब पर्वतीय क्षेत्र में भी दोनों पक्षों के बीच भारी लड़ाई जारी है। यह इलाका बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक रणनीतिक ऊंचाई वाला क्षेत्र माना जाता है।</p>



<p><strong>कहबूब में दोनों पक्षों के नुकसान के अलग-अलग दावे</strong></p>



<p>एक अन्य सरकारी सैन्य अधिकारी के अनुसार, कहबूब मोर्चे पर पिछले 24 घंटों में सरकारी सेना के 12 जवान मारे गए।</p>



<p>दूसरी ओर, हूती समूह के एक सैन्य सूत्र ने दावा किया कि इसी अवधि में कहबूब क्षेत्र में हुई लड़ाई में 15 हूती लड़ाके मारे गए। इनमें एक कमांडर के भी शामिल होने की बात कही गई है। दोनों पक्षों की ओर से बताए गए हताहतों के आंकड़े उनके संबंधित सूत्रों के दावे हैं।</p>



<p><strong>बाब-अल-मंदेब के पास बढ़ा तनाव</strong></p>



<p>यमन में संघर्ष ऐसे समय में तेज हुआ है, जब सितंबर की शुरुआत में हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी लाल सागर तट पर महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने का दावा किया था।</p>



<p>हूती समूह के मुताबिक, 10 सितंबर को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर उसका कब्जा हुआ था। इसके अगले दिन 11 सितंबर को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित मय्यून यानी पेरिम द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल करने की बात कही गई थी।</p>



<p><strong>2014 से जारी है यमन का गृहयुद्ध</strong></p>



<p>यमन में मौजूदा संघर्ष 2014 के अंत में तेज हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था।</p>



<p>इसके बाद मार्च 2015 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से यमन में संघर्ष अलग-अलग मोर्चों पर जारी रहा है।</p>



<p></p>
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		<title>सऊदी अरब को हूतियों का बड़ा झटका? F-15 फाइटर जेट गिराने का किया दावा</title>
		<link>https://dastaktimes.org/houthis-big-blow-to-saudi-arabia-claimed-to-have-shot-down-f-15-fighter-jet/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:52:44 +0000</pubDate>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> यमन में हूतियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सैन्य तनाव बढ़ता जा रहा है। हूतियों ने दावा किया है कि उनकी सेना ने यमन के मारिब गवर्नरेट के आसमान में सऊदी अरब के F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक, यह विमान उनके खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान के दौरान हवाई हमला करने पहुंचा था।</p>



<p>याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी F-15 मारिब क्षेत्र में हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई कार्रवाई कर रहा था। इसी दौरान हूती बलों ने उसे निशाना बनाया। उनके अनुसार, विमान को स्थानीय स्तर पर निर्मित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से गिराया गया। यह F-15 लड़ाकू विमान सऊदी अरब ने अमेरिका से खरीदा था।</p>



<p><strong>मिसाइल हमले के बाद मलबे की तलाश में पहुंचे दो और F-15</strong></p>



<p>अल जजीरा ने हूती सूत्रों के हवाले से बताया कि लड़ाकू विमान मारिब के उत्तर-पश्चिम में माउंट हेलान के पास गिरा। हालांकि, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से हूतियों के इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में F-15 को गिराए जाने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।</p>



<p>हूतियों ने यह भी दावा किया कि विमान के गिरने के बाद उसके मलबे की तलाश में पहुंचे दो अन्य सऊदी F-15 लड़ाकू विमानों को भी उनके लड़ाकों ने निशाना बनाया। हूती प्रवक्ता के अनुसार, इन दोनों विमानों के साथ भी उनकी सेना की मुठभेड़ हुई।</p>



<p><strong>एक हफ्ते में 450 से ज्यादा हवाई हमलों का दावा</strong></p>



<p>हूती सैन्य प्रवक्ता ने पिछले एक सप्ताह के दौरान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से किए गए हवाई हमलों के बारे में भी दावा किया। याह्या सरी के मुताबिक, इस अवधि में सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के अलग-अलग हिस्सों में 450 से अधिक हवाई हमले किए।</p>



<p>हूतियों के अनुसार, इन हमलों में ताइज, लहज, अल-जौफ, हज्जाह, मारिब, सादा और अल-बायदा समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया। हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि इन हवाई हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने की घटनाएं भी हुई हैं।</p>



<p><strong>हूती बोले- हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए जारी रहेगी कार्रवाई</strong></p>



<p>हूतियों ने कहा है कि यमन के हवाई क्षेत्र और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उनकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। याह्या सरी ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले या हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का उपलब्ध सभी तरीकों से मुकाबला करेगी।</p>



<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच जमीनी और हवाई संघर्ष बढ़ने का दावा किया जा रहा है। हूतियों के हमलों के बीच सऊदी अरब की ओर से भी सैन्य अभियान तेज किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में F-15 लड़ाकू विमान को गिराए जाने का हूतियों का दावा दोनों पक्षों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को सामने लाता है।</p>



<p></p>
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		<title>यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का आरोप, 7 की मौत का दावा; हूतियों ने सऊदी अरब को दी जवाबी कार्रवाई की धमकी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 06:21:01 +0000</pubDate>
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<p>नई दिल्ली: यमन में संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब पर उत्तरी यमन के जौफ प्रांत में एक जेल को हवाई हमले में निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हूतियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। 7 लोग घायल बताए गए हैं, जिनमें एक महिला भी है।</p>



<p><strong>हज्म की सेंट्रल जेल में हमले का दावा, मलबे में फंसे कैदी</strong></p>



<p>जौफ प्रांत के हज्म शहर स्थित सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी में यह हमला होने की बात कही गई है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जेल की इमारत का एक हिस्सा ढह गया। इसके बाद मलबे में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला के फंसे होने की जानकारी दी गई है।</p>



<p>हूती मीडिया ने हमले के बाद के वीडियो भी प्रसारित किए हैं। इन तस्वीरों में क्षतिग्रस्त इमारत, आसपास बिखरा मलबा और लोगों की तलाश में जुटी बचाव टीमें दिखाई दे रही हैं।</p>



<p><strong>हूती सैन्य प्रवक्ता बोले- हमले का दिया जाएगा जवाब</strong></p>



<p>हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने जौफ में हवाई हमला कर नरसंहार करने का सऊदी अरब पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी होगी।</p>



<p>याह्या सरी ने बाद में दावा किया कि हूती लड़ाकों ने पिछले 24 घंटे के दौरान सऊदी अरब के चार टोही ड्रोन भी मार गिराए हैं। हालांकि, इन दावों पर सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।</p>



<p><strong>कई मोर्चों पर सरकारी बलों की बढ़त का दावा</strong></p>



<p>जेल पर हमले का आरोप ऐसे समय लगाया गया है, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रति वफादार बल कई मोर्चों पर आगे बढ़ रहे हैं। इनमें जौफ के अलावा बैदा, दहले और मारिब के इलाके भी शामिल हैं।</p>



<p>यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत 2014 में हुई थी। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।</p>



<p><strong>यमन में पहले भी जेल और हिरासत केंद्र बने निशाना</strong></p>



<p>यमन के संघर्ष के दौरान जेल और हिरासत केंद्र पहले भी हमलों की चपेट में आ चुके हैं। वर्ष 2022 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हमले में सादा स्थित हिरासत केंद्र में कम से कम 87 कैदियों की मौत हुई थी।</p>



<p>इससे पहले 2019 में धमार में हूतियों द्वारा संचालित हिरासत केंद्र पर हुए हमले में 100 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।</p>



<p><strong>गृहयुद्ध में डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान</strong></p>



<p>संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक, यमन के लंबे गृहयुद्ध में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार चले संघर्ष ने देश को गंभीर मानवीय संकट और भुखमरी की स्थिति में धकेल दिया है। वर्ष 2022 से बड़े स्तर पर कायम युद्धविराम अब काफी कमजोर पड़ चुका है, जिससे यमन में फिर से हिंसा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।</p>



<p></p>
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