1971 भारत-पाक युद्ध – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org By Dastak Times Hindi News Network Tue, 27 Oct 2026 06:36:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png 1971 भारत-पाक युद्ध – Dastak Times | दस्तक टाइम्स https://dastaktimes.org 32 32 मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को दी श्रद्धांजलि, बोले- सादगी और ईमानदारी की मिसाल था उनका जीवन https://dastaktimes.org/chief-minister-dhami-paid-tribute-to-former-cm-major-general-bhuvan-chandra-khanduri-and-said-that-his-life-was-an-example-of-simplicity-and-honesty/ Tue, 27 Oct 2026 06:36:14 +0000 https://dastaktimes.org/?p=921167 भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण रहा। उन्होंने देश की रक्षा …]]>

भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण रहा। उन्होंने देश की रक्षा से लेकर उत्तराखंड के विकास तक विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया।

सैनिक से जनसेवक तक का सफर रहा प्रेरणादायी

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करना भावुक क्षण है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी बेटी के लिए उसके पिता पहले नायक होते हैं, लेकिन जनरल खंडूड़ी केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने अपने जीवन में जिन भी जिम्मेदारियों को संभाला, उन्हें ईमानदारी से निभाया और उच्च पदों पर रहते हुए भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

1971 के युद्ध में दिखाया साहस और रणनीतिक कौशल

धामी ने कहा कि भारतीय सेना में रहते हुए भुवन चंद्र खंडूड़ी ने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में साहस और रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया। सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में रहते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। मुख्यमंत्री ने उनके सैन्य जीवन को देशसेवा और अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

पांच बार गढ़वाल से सांसद चुने गए

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद खंडूड़ी ने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 1991 में वे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद में उन्होंने उत्तराखंड की आकांक्षाओं और अलग राज्य की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनके स्पष्ट विचारों और प्रभावशाली वक्तव्यों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को वैचारिक मजबूती देने में भूमिका निभाई।

सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए खंडूड़ी ने देश की सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। इन प्रयासों से देश में सड़क संपर्क के विस्तार को गति मिली, जिसका लाभ आज भी लोगों को मिल रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन पर दिया जोर

धामी ने कहा कि वर्ष 2007 और 2011 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में खंडूड़ी ने पारदर्शी और अनुशासित शासन पर जोर दिया। मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की दिशा में उनकी पहल भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और स्वच्छ प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, खंडूड़ी का मानना था कि सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। उनकी कार्यशैली में सैन्य अनुशासन के साथ जनता के प्रति संवेदनशीलता और सेवाभाव का मेल देखने को मिलता था।

युवाओं को भी करते रहे प्रेरित

मुख्यमंत्री ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी ने उत्तराखंड की राजनीति और जनमानस में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके व्यक्तित्व और कार्यों ने अनेक युवाओं को देवभूमि की सेवा के लिए प्रेरित किया। धामी ने यह भी कहा कि उन्हें खंडूड़ी का स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।

91 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन प्रदेश और देश के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है। उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्व अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। खंडूड़ी का अनुशासित जीवन, ईमानदार कार्यशैली और उत्तराखंड के विकास के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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