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	<title>Bihar High Alert &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन इलाकों में हाई अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 05:34:03 +0000</pubDate>
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<p><strong>पटना:</strong> कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल में शुक्रवार को खतरा उस समय और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा पर बनी एक और झील फट गई। संभावित स्थिति को देखते हुए बिहार के सभी तटबंधों पर चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के निर्देश के बाद वाल्मीकिनगर और कोसी बराज पर भी सतर्कता कड़ी कर दी गई है।</p>



<p>गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा आने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध समेत सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं।</p>



<p><strong>नेपाल में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर कड़ी निगरानी</strong></p>



<p>नेपाल में आई बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी बढ़ा दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा सभी स्पर, स्टड और अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य बताई गई है।</p>



<p>कंट्रोल रूम के मुताबिक शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक पानी दर्ज हुआ। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक रहा, जबकि बराह क्षेत्र में यह बढ़कर 99,500 क्यूसेक पहुंच गया।</p>



<p>शाम छह बजे कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक दर्ज किया गया। बराह क्षेत्र में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना जताई गई है, हालांकि इससे कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं बताई गई है।</p>



<p><strong>दिन-रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम</strong></p>



<p>सभी संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाढ़ की स्थिति बनने पर तत्काल जरूरी कार्रवाई की जा सके। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है।</p>



<p>संबंधित जिलों के जिलाधिकारी अपने अधीन आने वाले तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे में गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखते हुए काम कर रही है।</p>



<p><strong>उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने क्या कहा?</strong></p>



<p>उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने के कारण नेपाल में बाढ़ से तबाही हुई है। उन्होंने बताया कि नेपाल में घटना के केंद्रबिंदु से बिहार के वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज की दूरी करीब 250 से 300 किलोमीटर है।</p>



<p>उनके अनुसार, इतनी दूरी तय करने के दौरान नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह और उसका प्रभाव काफी कम हो गया, जिसका लाभ बिहार को मिला। इसके अलावा गंडक नदी के पूरे प्रवाह में पहले से ही सामान्य से कम पानी था और नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही थी। इसलिए नेपाल से आए पानी के बावजूद बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी।</p>



<p>उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वाल्मीकिनगर बराज के समीप गंडक नदी में करीब एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।</p>



<p><strong>नेपाल की दो दर्जन से अधिक नदियों से उत्तर बिहार को खतरा</strong></p>



<p>नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियां पश्चिम चंपारण सहित उत्तर बिहार के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसी घटना सीमावर्ती इलाकों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक और सिकरहना नदियों से तबाही की आशंका जताई गई है।</p>



<p>नेपाल से आने वाली नारायणी नदी भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी नदी में त्रिशूली नदी का संगम होता है।</p>



<p>नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात और नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली के अनुसार, त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। यह नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है।</p>



<p>ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण त्रिशूली नदी को बेहद खतरनाक माना जाता है। इसी नदी में बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने की घटना का असर भारतीय क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है।</p>



<p><strong>तिब्बत के नाले से निकलती है गंडक नदी</strong></p>



<p>नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव के अनुसार, गंडक नदी तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है, जहां इसे जुगूं खोला के नाम से जाना जाता है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी कहलाती है और इसमें ठाकुर जी नदी मिलती है।</p>



<p>आगे बढ़ने पर इसे कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जाना जाता है। बराज से पहले यह गंडक कहलाने लगती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं, जिन पर अवरोधक बने हुए हैं और इनके कभी भी बर्स्ट आउट होने की आशंका से भारी तबाही की स्थिति बन सकती है।</p>



<p><strong>सिकरहना नदी पहले भी ला चुकी है तबाही</strong></p>



<p>रामनगर और गौनाहा से आने वाली करीब डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया और सिकटा क्षेत्रों में पहुंचकर सिकरहना नदी में मिलती हैं। वर्ष 2017 में सिकरहना नदी में आई बाढ़ ने चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में भारी तबाही मचाई थी।</p>



<p>बताया गया कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आई थी। नेपाल का पानी गंडक नदी में आने के बाद गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर जिलों में बाढ़ की संभावना जताई गई थी।</p>



<p>स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी आसानी से आगे निकल सके।</p>



<p></p>
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