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	<title>CBI investigation &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>&#8216;पेपर लीक हत्या से भी बड़ा अपराध&#8217;, हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी; पूर्व आईएएस अधिकारी को जमानत देने से इनकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:41:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>रायपुर:</strong> छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करवाना हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है। अदालत ने कहा कि इस तरह का कृत्य लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और करियर को बर्बाद कर देता है तथा पूरे समाज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी।</p>



<p><strong>पूर्व आईएएस अधिकारी को नहीं मिली राहत</strong></p>



<p>62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव को केंद्रीय जांच एजेंसी ने सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। वर्ष 2020 से 2022 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के दौरान वह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर कार्यरत थे। उनके बेटे सुमित ध्रुव भी इस मामले में आरोपी हैं, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था। जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 31 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।</p>



<p><strong>&#8216;लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है&#8217;</strong></p>



<p>हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने या उसमें सहयोग करने वाला व्यक्ति लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। अभ्यर्थी वर्षों तक कठिन मेहनत कर इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे अपराध का प्रभाव केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज के विश्वास और व्यवस्था को प्रभावित करता है। इसी आधार पर अदालत ने इसे हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध बताया।</p>



<p><strong>सचिव पद का दुरुपयोग करने का आरोप</strong></p>



<p>अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपी की भूमिका को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। आदेश के अनुसार आरोपी ने आयोग के सचिव पद पर रहते हुए अपने आधिकारिक दायित्वों का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उसने वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया, जिसके बाद उसका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। अदालत ने यह भी कहा कि घर से हुई बरामदगी, गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।</p>



<p><strong>बचाव पक्ष ने खुद को बताया निर्दोष</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जीवन किशोर ध्रुव को केवल सचिव पद पर रहने के कारण इस मामले में फंसाया गया है। वकील ने कहा कि प्रारंभिक प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और जांच के दौरान बाद में उन्हें आरोपी बनाया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक मोबाइल फोन के अलावा आरोपी के पास से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या गोपनीय प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ है और प्रश्नपत्र लीक करने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण भी उपलब्ध नहीं है।</p>



<p><strong>सीबीआई ने जमानत का किया विरोध</strong></p>



<p>जमानत याचिका का विरोध करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि आरोपी की भूमिका, अपराध की गंभीरता और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती। एजेंसी के अनुसार यह मामला राज्य सिविल सेवा परीक्षा 2021 में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं तथा हजारों अभ्यर्थियों के विश्वास को प्रभावित किया है।</p>



<p><strong>भर्ती घोटाले में पहले भी दर्ज हो चुके हैं दो मामले</strong></p>



<p>छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2020 से 2022 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले दो मामले दर्ज किए गए थे। बाद में जुलाई 2024 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूरे भर्ती घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली। इस मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी, पूर्व उप नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।</p>



<p></p>
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		<title>NEET UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा, पर्चियों और याद किए सवालों से बाहर निकला प्रश्नपत्र, 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट चार्जशीट में शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:27:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="210" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/00000-4-1-300x210.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/00000-4-1-300x210.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/00000-4-1-768x538.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/00000-4-1.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच में बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के दिल्ली स्थित कार्यालय से परीक्षा के प्रश्न अलग-अलग तरीकों से बाहर निकाले। जांच में सामने आया है कि एक विशेषज्ञ &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच में बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के दिल्ली स्थित कार्यालय से परीक्षा के प्रश्न अलग-अलग तरीकों से बाहर निकाले। जांच में सामने आया है कि एक विशेषज्ञ ने सवालों को छोटी-छोटी पर्चियों पर लिखकर छिपाया, जबकि दो अन्य विशेषज्ञों ने प्रश्नों को याद कर लिया और बाद में होटल पहुंचकर उन्हें लिख लिया या एनसीईआरटी की पुस्तकों में संबंधित पैराग्राफ चिन्हित कर दिए।</p>



<p>सीबीआई का कहना है कि यह सब इसलिए संभव हो सका क्योंकि एनटीए कार्यालय के प्रथम तल पर स्थित गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय इन विशेषज्ञों की तलाशी नहीं ली जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि वहां सीसीटीवी कैमरे तो थे, लेकिन उनकी निगरानी के लिए कोई लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम मौजूद नहीं था।</p>



<p><strong>चार्जशीट में तीन विशेषज्ञों के नाम शामिल</strong></p>



<p>दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में 28 जुलाई को दाखिल सीबीआई की चार्जशीट में एनटीए की बायोलॉजी विशेषज्ञ मनीषा मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार के नाम शामिल किए गए हैं।</p>



<p>जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों विशेषज्ञों को एनटीए के गोपनीय अनुभाग में रफ ट्रांसलेशन के कार्य के लिए सादे कागज उपलब्ध कराए गए थे, जिनका कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।</p>



<p><strong>छोटी पर्चियों पर लिखे गए सवाल</strong></p>



<p>सीबीआई जांच में पाया गया कि पीवी कुलकर्णी ने दिए गए कागजों का इस्तेमाल छोटी-छोटी पर्चियां तैयार करने में किया। आरोप है कि उसने केमिस्ट्री के सभी 135 प्रश्नों को उनके विकल्पों और सही उत्तरों के साथ संक्षिप्त रूप में लिख लिया।</p>



<p>जांच के अनुसार कुलकर्णी ने मनीषा वाघमारे की मदद से विशेष कोचिंग कक्षाएं संचालित कीं, जहां छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर लिखवाए गए। सीबीआई के मुताबिक उसने 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच प्रश्नपत्र के तीन सेट, यानी कुल 135 प्रश्नों का बैक ट्रांसलेशन किया था।</p>



<p><strong>होटल पहुंचकर लिखे और किताबों में किए निशान</strong></p>



<p>सीबीआई के अनुसार, बॉटनी की अंग्रेजी से मराठी अनुवादक और जूलॉजी की बैक ट्रांसलेटर मनीषा मंधारे प्रश्नों को याद करके होटल लौटती थीं। वहां वे एनसीईआरटी की पुस्तकों में संबंधित पैराग्राफ चिन्हित करती थीं। जांच में यह भी सामने आया कि वह पुणे स्थित अपने घर पर छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं भी चलाती थीं।</p>



<p><strong>फिजिक्स के सवाल भी किए गए नोट</strong></p>



<p>जांच एजेंसी के मुताबिक फिजिक्स विषय की बैक ट्रांसलेशन और तीन सेट की प्रूफ रीडिंग का कार्य संभालने वाली मनीषा संजय हवलदार भी कथित तौर पर प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में नोट करती थीं।</p>



<p>सीबीआई ने बताया कि गोपनीय अनुभाग में प्रवेश और बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की तलाशी नहीं होती थी। इसके अलावा जांच एजेंसी को केवल 20 से 25 दिनों का सीसीटीवी फुटेज ही उपलब्ध हो सका, जिससे नीट प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।</p>



<p></p>
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		<title>पेपर लीक मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार</title>
		<link>https://dastaktimes.org/eds-big-action-in-paper-leak-case-former-chairman-of-chhattisgarh-public-service-commission-arrested/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:21:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
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<p><strong>रायपुर:</strong> प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी ने यह कार्रवाई रायपुर में पूछताछ के बाद की। मामला वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों से जुड़ा है।</p>



<p><strong>पूछताछ के बाद पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी</strong></p>



<p>जांच अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान टामन सिंह सोनवानी के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। ईडी ने उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया और आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की मांग की है।</p>



<p><strong>सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच</strong></p>



<p>ईडी की यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई है। यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस की शिकायत पर दर्ज हुआ था। इससे पहले वर्ष 2024 में सीबीआई भी टामन सिंह सोनवानी को इसी मामले में गिरफ्तार कर चुकी थी।</p>



<p><strong>रिश्तेदारों और कथित रूप से घूस देने वाले अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का आरोप</strong></p>



<p>ईडी का आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष ने कथित रूप से परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर कर अपने रिश्तेदारों और अवैध रूप से लाभ पहुंचाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के चयन में भूमिका निभाई। एजेंसी का दावा है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नियमों में भी बदलाव किए गए।</p>



<p><strong>भर्ती नियमों में बदलाव का भी आरोप</strong></p>



<p>जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2021 में भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से &#8216;भतीजा&#8217; और &#8216;भांजा&#8217; शब्द हटाए गए। ईडी का आरोप है कि ऐसा कथित रूप से रिश्तेदारों के सरकारी पदों पर चयन का रास्ता आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया।</p>



<p><strong>45 लाख रुपये लेने का भी दावा</strong></p>



<p>ईडी ने जांच में दावा किया है कि कथित रिश्वत की राशि का एक हिस्सा नकद लिया गया, जबकि कुछ रकम परिवार के नियंत्रण वाली एक समिति के माध्यम से एक कथित अस्तित्वहीन कॉलेज के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) दान के नाम पर प्राप्त की गई। एजेंसी के अनुसार दो डिप्टी कलेक्टर पदों पर चयन में कथित लाभ पहुंचाने के बदले एक निजी कंपनी से करीब 45 लाख रुपये लिए गए।</p>



<p><strong>जांच जारी</strong></p>



<p>फिलहाल ईडी मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। एजेंसी विभिन्न वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।</p>



<p></p>
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		<title>करूर भगदड़ मामले में विजय सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का आदेश रद्द</title>
		<link>https://dastaktimes.org/big-blow-to-vijay-government-in-karur-stampede-case-from-high-court-order-to-give-government-jobs-to-the-families-of-the-deceased-cancelled/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 05:12:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[CBI investigation]]></category>
		<category><![CDATA[Compassionate Appointment]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/Untitled-170-768x432-1-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/Untitled-170-768x432-1-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/Untitled-170-768x432-1-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/Untitled-170-768x432-1.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की विजय सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की विजय सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट भी कर रहा है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इस विषय पर किसी भी प्रकार की राय बनाना या प्रशासनिक निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता।</p>



<p>मद्रास हाई कोर्ट ने उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का आदेश जारी किया गया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार का आदेश निरस्त कर दिया।</p>



<p><strong>सीबीआई जांच पूरी होने तक टिप्पणी से किया इनकार</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि करूर भगदड़ की जांच अभी सीबीआई के अधीन है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। अदालत ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम तथ्य सामने नहीं आते, तब तक घटना की जिम्मेदारी या उससे जुड़े किसी भी पहलू पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने सरकारी नौकरी देने के आदेश को रद्द करने का फैसला सुनाया।</p>



<p><strong>जनहित याचिकाओं में दी गई थी फैसले को चुनौती</strong></p>



<p>यह मामला 27 सितंबर 2025 का है, जब करूर जिले के वेलुस्वामीपुरम में टीवीके की एक राजनीतिक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। विजय का भाषण सुनने के लिए बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। भीड़ अनियंत्रित होने से 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। इस घटना की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी टीवीके के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज कर चुकी है। इसी बीच राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं।</p>



<p><strong>सरकार ने 32 पात्र परिजनों को सौंपे थे नियुक्ति पत्र</strong></p>



<p>मुख्यमंत्री बनने के बाद 10 जुलाई 2026 को विजय पहली बार करूर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सितंबर 2025 की करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत की थी। कार्यक्रम के दौरान 41 मृतकों के परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए थे। राज्य सरकार ने भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया था, जिसे अब मद्रास हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।</p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>त्विषा शर्मा केस: पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर फैसला सुरक्षित, आज आ सकता है कोर्ट का आदेश</title>
		<link>https://dastaktimes.org/tvisha-sharma-case-decision-on-bail-of-former-district-judge-giribala-singh-reserved-court-order-may-come-today/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 06:03:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Bail Hearing]]></category>
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		<category><![CDATA[गिरिबाला सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[जमानत याचिका]]></category>
		<category><![CDATA[त्विषा शर्मा केस]]></category>
		<category><![CDATA[भोपाल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="186" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-300x186.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-300x186.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-768x475.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भोपाल: राजधानी भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मृत्यु मामले में न्यायिक हिरासत में बंद सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर शुक्रवार को जिला न्यायालय में लंबी सुनवाई हुई। सीबीआई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जमानत याचिका पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="186" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-300x186.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-300x186.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16-768x475.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/0000000000-16.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>भोपाल:</strong> राजधानी भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मृत्यु मामले में न्यायिक हिरासत में बंद सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर शुक्रवार को जिला न्यायालय में लंबी सुनवाई हुई। सीबीआई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जमानत याचिका पर शनिवार को आदेश आने की संभावना जताई जा रही है।</p>



<p>मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले तीन न्यायाधीश अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों से इस याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं। शुक्रवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने भी यह कहते हुए सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि उन्होंने आरोपी गिरिबाला सिंह के अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद मामला प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई।</p>



<p><strong>बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य का दिया हवाला</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह की मां करीब 100 वर्ष की हैं और उनकी देखभाल पूरी तरह आरोपी पर निर्भर है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह स्वयं कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं तथा जेल में उन्हें पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।</p>



<p>दलीलों में यह भी कहा गया कि आरोपी को नियमित पेंशन और युद्ध वीरांगना पेंशन प्राप्त होती है। आर्थिक रूप से सक्षम होने के कारण उन पर दहेज प्रताड़ना का आरोप स्वाभाविक नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी जांच में सहयोग कर रही हैं और उनके जेल में रहने के दौरान उनके घर में चोरी की घटना भी हो चुकी है।</p>



<p><strong>सीबीआई ने जमानत का किया कड़ा विरोध</strong></p>



<p>सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केवल महिला होना या आर्थिक रूप से संपन्न होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। एजेंसी ने अदालत में जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश करते हुए आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई।</p>



<p>सीबीआई ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय पहले ही आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है। जांच के दौरान आरोपी ने अपना वॉइस सैंपल देने से भी इनकार किया था, जिसे एजेंसी ने जांच में सहयोग नहीं करने का आधार बताया।</p>



<p><strong>गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका जताई</strong></p>



<p>सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी ने निजी प्रतिनिधि के माध्यम से एक सीसीटीवी तकनीशियन और सैलून संचालक से संपर्क कर फुटेज हासिल करने का प्रयास किया था। एजेंसी का कहना है कि यदि जमानत दी जाती है तो गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका बनी रहेगी।</p>



<p>वहीं, त्विषा शर्मा के परिजनों की ओर से पेश अधिवक्ता ने बचाव पक्ष के उस तर्क का विरोध किया, जिसमें आरोपी की बुजुर्ग मां की देखभाल का मुद्दा उठाया गया था। उनका कहना था कि आरोपी की मां कभी उनके साथ नहीं रहीं और यह तर्क केवल जेल से बाहर आने के उद्देश्य से दिया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।</p>



<p>दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में शनिवार को आदेश सुनाए जाने की संभावना है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>504 करोड़ के हरियाणा बैंक घोटाले में CBI का शिकंजा और कसा! IAS मोहम्मद शाइन की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड तलब, 5 ठिकानों पर छापेमारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:58:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="196" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-300x196.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-300x196.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-768x501.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />हरियाणा: हरियाणा के चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज करते हुए बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने इस मामले से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन की वर्ष 2011 से अब तक की सभी विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड हरियाणा सरकार से मांगा है। इसके साथ ही जांच के सिलसिले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="196" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-300x196.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-300x196.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll-768x501.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/2026_7image_15_55_317988961cbitakesmajoractioninha-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>हरियाणा:</strong> हरियाणा के चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज करते हुए बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने इस मामले से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन की वर्ष 2011 से अब तक की सभी विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड हरियाणा सरकार से मांगा है। इसके साथ ही जांच के सिलसिले में गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में पांच स्थानों पर छापेमारी भी की गई।</p>



<p><strong>पांच ठिकानों पर कार्रवाई, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त</strong></p>



<p>सीबीआई की कार्रवाई के दौरान चंडीगढ़ और लुधियाना स्थित पांच ठिकानों पर तलाशी ली गई। एजेंसी ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच की जाएगी।</p>



<p><strong>सरकारी फंड की हेराफेरी का आरोप</strong></p>



<p>सीबीआई के मुताबिक यह मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के फंड में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी विभागों के सरप्लस फंड को अनियमित तरीके से फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश के रूप में दर्शाया गया। इसके लिए विशेष उद्देश्य से बैंक खाते खोले गए और कथित फर्जी लेन-देन के जरिए सार्वजनिक धन को अन्य स्थानों पर डायवर्ट किया गया।</p>



<p><strong>हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने संभाली जांच</strong></p>



<p>यह जांच सीबीआई ने हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। आरोप है कि यह पूरा घोटाला चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा से जुड़ा है।</p>



<p><strong>504 करोड़ रुपये के घोटाले में अब तक 17 आरोपियों पर चार्जशीट</strong></p>



<p>जांच के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपये कथित तौर पर फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के माध्यम से शेल कंपनियों में भेजे गए। इस मामले में सीबीआई अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोक सेवक, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।</p>



<p></p>
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			</item>
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		<title>₹12 हजार कमाने वाले के खाते में आया ₹165 करोड़! CBI की जांच में बड़ा खुलासा, हाईकोर्ट को दी अहम जानकारी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/%e2%82%b9165-crore-came-into-the-account-of-a-person-earning-%e2%82%b912-thousand-big-revelation-in-cbi-investigation-important-information-given-to-the-high-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:44:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-768x512.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भिलाई: छत्तीसगढ़ के चर्चित 165 करोड़ रुपये के संदिग्ध बैंक लेनदेन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाईकोर्ट के समक्ष अहम जानकारी पेश की है। खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के बैंक खाते में वर्ष 2020 में हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच कर रही एजेंसी ने बताया है कि उसे धनराशि के स्रोत और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2-768x512.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/cbi_22_2.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>भिलाई:</strong> छत्तीसगढ़ के चर्चित 165 करोड़ रुपये के संदिग्ध बैंक लेनदेन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाईकोर्ट के समक्ष अहम जानकारी पेश की है। खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के बैंक खाते में वर्ष 2020 में हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच कर रही एजेंसी ने बताया है कि उसे धनराशि के स्रोत और उसके आगे हुए हस्तांतरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल चुकी हैं।</p>



<p>मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति आर.के. अग्रवाल शामिल रहे। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और अब कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।</p>



<p><strong>राशि कहां से आई और कहां गई, CBI को मिले सुराग</strong></p>



<p>सीबीआई ने अदालत को जानकारी दी कि एजेंसी को यह पता चल गया है कि संबंधित राशि किन माध्यमों से बैंक खाते में पहुंची और बाद में उसका उपयोग या हस्तांतरण किस प्रकार किया गया। एजेंसी ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आगामी सुनवाई में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।</p>



<p>हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की है। अब इस सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।</p>



<p><strong>2020 में सामने आया था चौंकाने वाला मामला</strong></p>



<p>यह मामला वर्ष 2020 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के यस बैंक खाते में 165 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई थी। बताया गया था कि अनिमेष सिंह की मासिक आय करीब 12 हजार रुपये थी, ऐसे में उनके खाते में इतनी बड़ी रकम का लेनदेन कई सवाल खड़े कर गया था।</p>



<p>मामले के सार्वजनिक होने के बाद धनराशि के स्रोत और लेनदेन की प्रकृति को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।</p>



<p><strong>हाईकोर्ट में दायर हुई थी जांच की याचिका</strong></p>



<p>इस मामले में अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी और सामाजिक कार्यकर्ता प्रभु नाथ मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि करोड़ों रुपये के इस लेनदेन की वास्तविकता सामने आ सके।</p>



<p><strong>जांच को लेकर सरकार के रुख पर उठे सवाल</strong></p>



<p>याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी का कहना है कि शुरुआत से ही मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। उनके अनुसार, प्रारंभिक चरण में अदालत को बताया गया था कि मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही है, लेकिन जांच की प्रगति और निष्कर्षों को लेकर लगातार अस्पष्टता बनी रही।</p>



<p>उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भी अदालत के समक्ष मामले से जुड़ी पूरी जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे जांच प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई।</p>



<p><strong>जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें</strong></p>



<p>मामले में अब सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्यों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि जांच की परतें खुलने के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।</p>



<p>फिलहाल पूरे मामले में जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने वाली सुनवाई का इंतजार है, जब सीबीआई अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी।</p>



<p></p>
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		<title>अनिल अंबानी के करीबी पूर्व अधिकारी पर ED का शिकंजा, मुंबई से गिरफ्तारी के बाद दिल्ली लाया जा रहा मामला</title>
		<link>https://dastaktimes.org/eds-grip-on-former-officer-close-to-anil-ambani-case-being-brought-to-delhi-after-arrest-from-mumbai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 07:47:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="189" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/00000-10-300x189.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/00000-10-300x189.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/00000-10-768x483.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/00000-10.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस समूह से जुड़े एक बड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति अनिल अंबानी के करीबी माने जाने वाले सतीश सेठ को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को &#8230;]]></description>
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<p><strong>मुंबई:</strong> प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस समूह से जुड़े एक बड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति अनिल अंबानी के करीबी माने जाने वाले सतीश सेठ को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है। अब उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है।</p>



<p>ईडी ने इसी मामले में समूह के एक अन्य पूर्व अधिकारी गौतम दोशी के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों पर धन शोधन निवारण कानून के तहत जांच चल रही है।</p>



<p><strong>सीबीआई की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच</strong></p>



<p>जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इसी वर्ष मार्च में सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान दोनों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की।</p>



<p><strong>735 करोड़ रुपये के ऋण मामले में जांच</strong></p>



<p>जांच एजेंसियों के अनुसार, 11 बैंकों के एक बैंकिंग समूह ने एक दूरसंचार कंपनी को कुल 735 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर किया था। आरोप है कि इस स्वीकृत ऋण में से करीब 114.98 करोड़ रुपये के उपयोग में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और धोखाधड़ी की गई।</p>



<p>जांच में यह भी देखा जा रहा है कि ऋण राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ था या नहीं तथा धन के प्रवाह में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी या नहीं।</p>



<p><strong>48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली</strong></p>



<p>गिरफ्तारी के बाद सतीश सेठ को अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड प्रदान की गई। चूंकि मामला दिल्ली में दर्ज है, इसलिए ईडी की टीम उन्हें राजधानी लाकर संबंधित अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की मांग कर सकती है।</p>



<p><strong>पूर्व में संभाल चुके हैं बड़ी जिम्मेदारियां</strong></p>



<p>सतीश सेठ लंबे समय तक रिलायंस समूह में शीर्ष पदों पर कार्य कर चुके हैं। उन्हें समूह के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारियों में गिना जाता था। उन्होंने समूह में प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई थी।</p>



<p><strong>भूमिका की गहराई से जांच जारी</strong></p>



<p>जांच एजेंसियां अब इस पूरे कथित बैंक ऋण घोटाले में दोनों पूर्व अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऋण वितरण, धन के उपयोग और वित्तीय लेनदेन में किस स्तर तक अनियमितताएं हुईं और उनमें संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्विशा शर्मा मौत केस में CBI की हाईटेक जांच, ‘टनल व्यू’ तकनीक से जोड़े जा रहे आखिरी पलों के सबूत</title>
		<link>https://dastaktimes.org/cbis-high-tech-investigation-in-twisha-sharma-death-case-evidence-of-last-moments-being-added-through-tunnel-view-technique/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 05:45:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="160" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-300x160.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-300x160.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-768x408.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भोपाल: ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब बेहद एडवांस और तकनीकी स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस हाई-प्रोफाइल केस में ‘टनल व्यू’ तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, जिसके जरिए ट्विशा शर्मा की मौत से पहले के आखिरी पलों को डिजिटल तरीके से दोबारा तैयार किया जा रहा है। एजेंसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="160" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-300x160.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-300x160.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll-768x408.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/2026_5image_08_21_052993521twisha-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>भोपाल:</strong> ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब बेहद एडवांस और तकनीकी स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस हाई-प्रोफाइल केस में ‘टनल व्यू’ तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, जिसके जरिए ट्विशा शर्मा की मौत से पहले के आखिरी पलों को डिजिटल तरीके से दोबारा तैयार किया जा रहा है। एजेंसी का मकसद यह पता लगाना है कि 12 मई की रात आखिर ससुराल में क्या हुआ था और किन परिस्थितियों में उनकी मौत हुई।</p>



<p>सूत्रों के मुताबिक CBI ट्विशा शर्मा की गतिविधियों का मिनट-दर-मिनट वर्चुअल रीकंस्ट्रक्शन तैयार कर रही है। इसके लिए जांच एजेंसी CCTV फुटेज, मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, Wi-Fi लॉग, इंटरनेट एक्टिविटी, स्मार्ट डिवाइस डेटा और गवाहों के बयान को एक तय टाइमलाइन में जोड़ रही है। इस तकनीक को ‘टनल व्यू’ इन्वेस्टिगेशन कहा जाता है।</p>



<p><strong>क्या है ‘टनल व्यू’ तकनीक?</strong></p>



<p>‘टनल व्यू’ जांच पद्धति में किसी घटना से जुड़े हर डिजिटल और फिजिकल सबूत को एक साथ जोड़कर घटनास्थल का वर्चुअल मॉडल तैयार किया जाता है। इसमें यह समझने की कोशिश की जाती है कि घटना से पहले कौन कहां मौजूद था, किस समय किस डिवाइस का इस्तेमाल हुआ और किस तरह घटनाओं का क्रम आगे बढ़ा। इस तकनीक की मदद से किसी भी अपराध या संदिग्ध मौत के आखिरी पलों का डिजिटल सिमुलेशन तैयार किया जा सकता है।</p>



<p>CBI फिलहाल कटारा हिल्स स्थित घर का डिजिटल स्पेशल मॉडल तैयार कर रही है, जहां ट्विशा शर्मा मृत पाई गई थीं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले घर के किन हिस्सों में गतिविधियां हुईं, कौन-कौन वहां मौजूद था और क्या घटनास्थल के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी।</p>



<p>सूत्रों के अनुसार जांचकर्ता CCTV कैमरों के टाइमस्टैम्प को मोबाइल फोन एक्टिविटी और इंटरनेट उपयोग से सिंक्रोनाइज कर रहे हैं। इससे ट्विशा के आखिरी कुछ घंटों का विजुअल सिमुलेशन तैयार किया जा रहा है। एजेंसी को उम्मीद है कि इससे यह साफ हो सकेगा कि मामला आत्महत्या का था या फिर इसके पीछे किसी साजिश की भूमिका थी।</p>



<p>ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली पूर्व अभिनेत्री और मॉडल थीं। उनकी शादी पिछले साल दिसंबर में भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई को वह अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी मिली थीं। इस घटना के बाद परिवार ने हत्या, घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे।</p>



<p>ट्विशा के माता-पिता ने उनकी सास गिरिबाला सिंह पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। शुरुआती दौर में परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार करते हुए AIIMS दिल्ली में दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की थी। दोबारा पोस्टमॉर्टम के बाद 24 मई को उनका अंतिम संस्कार किया गया।</p>



<p>दूसरी ओर, ट्विशा के ससुराल पक्ष ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अप्रैल में प्रेग्नेंसी की जानकारी मिलने के बाद ट्विशा का व्यवहार बदल गया था और वह गर्भपात कराना चाहती थीं। वहीं घटना के करीब 10 दिन बाद पति समर्थ सिंह ने आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद 22 मई को उन्हें जबलपुर से गिरफ्तार किया गया।</p>



<p>इस बीच CBI ने 28 मई को ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार एजेंसी मां-बेटे को आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों का मिलान करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर जांच आने वाले दिनों में और अहम मोड़ ले सकती है।</p>



<p></p>
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		<title>Twisha Case: हाईकोर्ट में MP सरकार का बड़ा दावा, ‘ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान संघर्ष की ओर इशारा करते हैं’</title>
		<link>https://dastaktimes.org/twisha-case-mp-governments-big-claim-in-the-high-court-injury-marks-on-twishas-body-indicate-a-struggle/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 11:01:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/Twisha-Sharma-1-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/Twisha-Sharma-1-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/Twisha-Sharma-1-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/05/Twisha-Sharma-1.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />भोपाल: मॉडल और पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान यह संकेत देते हैं कि मौत से पहले किसी तरह का संघर्ष या हाथापाई हुई हो &#8230;]]></description>
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<p><strong>भोपाल:</strong> मॉडल और पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान यह संकेत देते हैं कि मौत से पहले किसी तरह का संघर्ष या हाथापाई हुई हो सकती है। सरकार की इस दलील के बाद अब तक आत्महत्या माने जा रहे मामले में नए सवाल खड़े हो गए हैं और जांच की दिशा भी बदलती नजर आ रही है।</p>



<p>सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्विशा की कलाई, कोहनी और सिर पर चोट के निशान पाए गए थे। उन्होंने दलील दी कि ये चोटें शव को नीचे उतारने के दौरान आईं, ऐसा मानना उचित नहीं होगा। सरकार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कई गंभीर परिस्थितियों की ओर संकेत कर रही है।</p>



<p>मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उस याचिका पर हो रही थी, जिसमें ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। राज्य सरकार ने कोर्ट में आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह द्वारा ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था।</p>



<p><strong>शादी के बाद तानों और प्रताड़ना का आरोप</strong></p>



<p>सरकार ने अदालत को बताया कि ट्विशा के परिवार द्वारा शादी में कथित तौर पर कम खर्च किए जाने को लेकर उसे लगातार ताने दिए जाते थे। आरोप है कि पति और सास दोनों मिलकर मानसिक दबाव बनाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।</p>



<p><strong>‘जांच में सहयोग नहीं किया गया’</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने गिरिबाला सिंह पर जांच एजेंसियों का सहयोग न करने का आरोप भी लगाया। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 13 और 14 मई को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन आरोपी पक्ष जांच में शामिल नहीं हुआ। सरकार ने यह भी कहा कि जब पुलिस नोटिस देने उनके घर पहुंची, तब भी वह मौजूद नहीं मिलीं।</p>



<p>सरकार ने अदालत में दावा किया कि आरोपी पक्ष ने मामले को प्रभावित करने और संभावित रूप से साक्ष्यों पर असर डालने की कोशिश की। साथ ही यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने अग्रिम जमानत देते समय आरोपी के प्रभावशाली पद और परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।</p>



<p><strong>मीडिया में बयानबाजी पर भी उठे सवाल</strong></p>



<p>ट्विशा केस में सुनवाई के दौरान मीडिया से लगातार बातचीत का मुद्दा भी अदालत में उठा। तुषार मेहता ने कहा कि जांच में सहयोग करने का समय नहीं था, लेकिन मीडिया के सामने बयान देने के लिए पर्याप्त समय था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए एक विशेष नैरेटिव तैयार करने और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।</p>



<p><strong>व्हाट्सएप चैट्स का भी अदालत में जिक्र</strong></p>



<p>राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह को उदार और सहयोगी महिला के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि व्हाट्सएप चैट्स कुछ अलग तस्वीर दिखाती हैं। कोर्ट में पेश दलीलों के अनुसार, ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई बातचीत में बार-बार समझौता करने और सास के साथ रिश्ते संभालने की बात सामने आई।</p>



<p>सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि चैट्स से संकेत मिलता है कि सास के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दूरी बढ़ रही थी।</p>



<p><strong>ट्विशा के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप</strong></p>



<p>ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कहा कि अग्रिम जमानत ऐसे बयान के आधार पर दे दी गई, जिसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया था। उन्होंने दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के शुरुआती चरण में ही बिना जांच की प्रकृति समझे राहत दे दी गई।</p>



<p>लूथरा ने अदालत में व्हाट्सएप चैट्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ट्विशा के ससुराल पक्ष ने उसके बच्चे की पितृत्व तक पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि यह किसी भी महिला के लिए बेहद क्रूर स्थिति हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्विशा का गर्भपात हुआ था।</p>



<p><strong>‘मेरा दम घुटता है यहां’ — कोर्ट में पढ़ा गया मैसेज</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान ट्विशा द्वारा अपनी मां को भेजा गया एक मैसेज भी अदालत में पढ़ा गया। लूथरा ने बताया कि ट्विशा ने लिखा था, “ये सब बहुत ज्यादा निर्दयी हैं, कोई दया नहीं है, मेरा दम घुटता है यहां।” परिवार की ओर से दावा किया गया कि अंतिम दिनों में ट्विशा मानसिक रूप से बेहद परेशान और डरी हुई थी।</p>



<p><strong>CBI ने पति समर्थ सिंह को हिरासत में लिया</strong></p>



<p>मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को हिरासत में ले लिया। राज्य सरकार ने सीबीआई की कस्टडी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि जमानत की शर्तों के बावजूद जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया।</p>



<p>सरकार ने अदालत में कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका पर आरोप लगाए गए, जबकि वह अब अपनी बात रखने के लिए इस दुनिया में नहीं है।</p>



<p><strong>12 मई को मिली थी ट्विशा की लाश</strong></p>



<p>गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। परिवार ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। एफआईआर के मुताबिक, 9 दिसंबर 2025 को हुई शादी में दिए गए दहेज से आरोपी पक्ष संतुष्ट नहीं था।</p>



<p>मामला उस समय और गंभीर हो गया जब ट्विशा के माता-पिता ने शुरुआती जांच पर सवाल उठाए। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर एम्स दिल्ली की टीम से दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया। अब सभी की नजर हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी है, जिसमें गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने को लेकर आदेश सुनाया जाना है।</p>



<p></p>
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