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	<title>Europe Flight Route &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>पाकिस्तान ने रोका रास्ता तो चीन की ओर देख रहा भारत, हॉटन से खुलेगा यूरोप का नया एयर रूट?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 08:14:40 +0000</pubDate>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदी के बीच भारत पश्चिमी देशों के लिए उड़ानों का नया रास्ता तलाश रहा है। भारत चीन के शिनजियांग स्थित हॉटन के ऊपर से नया एयर रूट खोलने को लेकर बातचीत कर रहा है। अगर यह रास्ता खुलता है तो दिल्ली और मुंबई से जाने वाली कुछ उड़ानों को पाकिस्तान से बचते हुए चीन के रास्ते यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका तक पहुंचने का विकल्प मिल सकता है।</p>



<p>हालांकि हॉटन के रास्ते उड़ान शुरू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए चीन की अनुमति के साथ-साथ ऊंचे पहाड़ों, आपातकालीन लैंडिंग के लिए सीमित एयरपोर्ट, संवेदनशील सैन्य क्षेत्र और अक्साई चिन से जुड़े सवालों का समाधान भी जरूरी होगा।</p>



<p><strong>हॉटन रूट को लेकर भारत-चीन में बातचीत</strong></p>



<p>नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि भारत और चीन के बीच हॉटन रूट को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय भी चीन के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा है। हालांकि अभी किसी समझौते या रूट शुरू करने की समयसीमा की घोषणा नहीं हुई है।</p>



<p>प्रस्तावित रास्ते के तहत दिल्ली और मुंबई से जाने वाली उड़ानें उत्तर की ओर लेह की तरफ जा सकती हैं। इसके बाद विमान हॉटन के पास चीनी एयरस्पेस में प्रवेश कर पश्चिम की ओर किर्गिस्तान की तरफ बढ़ सकते हैं। वहां से वे यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका जाने वाले मौजूदा एयर रूट से जुड़ सकते हैं।</p>



<p><strong>पाकिस्तान के एयरस्पेस से क्यों बच रहा भारत?</strong></p>



<p>पाकिस्तान ने 24 अप्रैल 2025 को भारतीय पंजीकृत और भारतीय एयरलाइनों द्वारा संचालित विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। इसके छह दिन बाद भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।</p>



<p>इसके बाद उत्तरी भारत से पश्चिम की ओर जाने वाली भारतीय उड़ानों को अरब सागर के ऊपर दक्षिण दिशा में जाकर मस्कट की तरफ बढ़ना पड़ता है और फिर उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ना पड़ता है। इससे उड़ान का समय 45 मिनट से लेकर दो घंटे तक बढ़ गया है।</p>



<p>पाकिस्तान इस प्रतिबंध को कई बार बढ़ा चुका है। 16 सितंबर को जारी ताजा नोटिस 24 अक्टूबर तक लागू है।</p>



<p><strong>विदेशी एयरलाइनों को नहीं हो रही यही परेशानी</strong></p>



<p>पाकिस्तान का प्रतिबंध भारतीय विमानों पर लागू है। विदेशी एयरलाइंस अब भी पाकिस्तान के एयरस्पेस के ऊपर से अपेक्षाकृत सीधा रास्ता इस्तेमाल कर सकती हैं।</p>



<p>दिल्ली-इस्तांबुल रूट पर इंडिगो की 6E-11 उड़ान का निर्धारित समय 8 घंटे 39 मिनट है, जबकि टर्किश एयरलाइंस की TK717 उड़ान का निर्धारित समय 6 घंटे 45 मिनट है।</p>



<p>यानी एक ही रूट पर भारतीय एयरलाइन को एयरस्पेस प्रतिबंध के कारण लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।</p>



<p><strong>लंबे रास्ते से बढ़ रहा ईंधन और परिचालन खर्च</strong></p>



<p>विमान को जितनी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, उतना ही ज्यादा ईंधन खर्च होता है। इसके साथ विमान और चालक दल को ज्यादा समय तक हवा में रहना पड़ता है। लंबी उड़ानों में कई बार ईंधन भरने के लिए अतिरिक्त ठहराव की जरूरत भी पड़ सकती है।</p>



<p>अक्टूबर 2025 में एयर इंडिया के तत्कालीन सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कहा था कि एयरस्पेस बंद होने से एयरलाइन पर करीब 4,000 करोड़ रुपये का असर पड़ा था। नवंबर 2025 में एयर इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ लंबी दूरी वाली उड़ानों पर ईंधन की लागत 29 फीसदी तक बढ़ गई थी, जबकि कुछ रूटों पर यात्रा का समय तीन घंटे तक बढ़ गया था।</p>



<p>दिल्ली-शिकागो उड़ान पर भी इसका असर दिखाई दिया। प्रतिबंध से पहले इस उड़ान का औसत समय 14 घंटे 47 मिनट था। शुरुआती दिनों में ईंधन भरने के लिए रुकने समेत इसे 19 घंटे से ज्यादा समय लगा।</p>



<p>एयर इंडिया ने 1 सितंबर 2025 से दिल्ली-वॉशिंगटन सेवा भी निलंबित कर दी थी। इसके पीछे फ्लीट रेट्रोफिट के साथ पाकिस्तान के एयरस्पेस का लगातार बंद रहना भी एक कारण बताया गया था।</p>



<p><strong>भारतीय एयरलाइनों की प्रतिस्पर्धा पर भी असर</strong></p>



<p>पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने के लिए लंबा रास्ता अपनाने से भारतीय एयरलाइनों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सैन फ्रांसिस्को से मुंबई जाने वाली उड़ान में म्यूनिख के रास्ते लुफ्थांसा की यात्रा एयर इंडिया से सिर्फ पांच मिनट ज्यादा लंबी थी। विदेशी एयरलाइन जहां अपेक्षाकृत सीधा रास्ता इस्तेमाल कर सकती है, वहीं भारतीय एयरलाइनों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।</p>



<p><strong>पाकिस्तान को भी हो रहा आर्थिक नुकसान</strong></p>



<p>एयरस्पेस बंद करने का आर्थिक असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने नेशनल असेंबली को बताया कि 24 अप्रैल से 30 जून 2025 के बीच ओवरफ्लाइट फीस के रूप में उसे 4.1 अरब पाकिस्तानी रुपये का नुकसान हुआ।</p>



<p>2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद किया था। उस समय 26 फरवरी से सभी नागरिक उड़ानों के लिए एयरस्पेस बंद किया गया था और 16 जुलाई को इसे पूरी तरह खोला गया था।</p>



<p>तब तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि 2 जुलाई तक उस एयरस्पेस बंदी से एयर इंडिया को 491 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। मौजूदा प्रतिबंध अब 2019 वाली अवधि से तीन गुने से भी ज्यादा समय तक चल चुका है।</p>



<p><strong>ईरान के रास्ते ने भी बढ़ाई मुश्किल</strong></p>



<p>पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध के साथ पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों के लिए ईरान का रास्ता भी मुश्किल हुआ है। 28 फरवरी 2026 को ईरान से जुड़ा युद्ध शुरू हुआ और उसी दिन पश्चिम एशिया के कम से कम आठ देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।</p>



<p>इसके बाद एशिया से यूरोप जाने वाली उड़ानों के सामने भी मुश्किलें बढ़ीं। विमानों को या तो काकेशस और अफगानिस्तान के रास्ते उत्तर की तरफ जाना पड़ता है या ओमान, सऊदी अरब और मिस्र के रास्ते दक्षिण की तरफ।</p>



<p>पहले पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने वाली कुछ भारतीय उड़ानें मध्य एशिया जाने के लिए ईरान के ऊपर से जाती थीं। अब ईरान से भी काफी हद तक बचने की स्थिति में भारतीय एयरलाइनों के लिए पश्चिम की तरफ जाने वाला दक्षिणी रास्ता मुख्य विकल्प रह गया है।</p>



<p><strong>भारत-चीन रिश्तों में सुधार से खुली नई संभावना</strong></p>



<p>भारत और चीन के बीच सीधी विमान सेवा 26 अक्टूबर 2025 को दोबारा शुरू हुई थी। पांच साल से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद इंडिगो की एक उड़ान कोलकाता से ग्वांगझू पहुंची थी।</p>



<p>ऐसे में चीन के रास्ते से वैकल्पिक एयर रूट तलाशने को लेकर बातचीत की संभावना भी बनी है। लेकिन हॉटन के रास्ते उड़ान भरने में कई बड़ी चुनौतियां हैं।</p>



<p><strong>चीन की अनुमति के बिना नहीं खुल सकता रास्ता</strong></p>



<p>किसी देश के एयरस्पेस से होकर उड़ान भरने का अधिकार अपने आप नहीं मिलता। 1944 के शिकागो कन्वेंशन के तहत हर देश को अपने क्षेत्र के ऊपर के एयरस्पेस पर पूर्ण और विशेष संप्रभुता हासिल है।</p>



<p>इंटरनेशनल एयर सर्विसेज ट्रांजिट एग्रीमेंट के तहत सदस्य देशों की एयरलाइनों को एक-दूसरे के क्षेत्र से होकर उड़ान भरने की सुविधा मिलती है। भारत और पाकिस्तान दोनों इसके पक्षकार हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों ने एक-दूसरे के विमानों के लिए एयरस्पेस बंद किया है।</p>



<p>चीन इस समझौते का पक्षकार नहीं है। इसलिए शिनजियांग के ऊपर से भारतीय विमानों को उड़ाने का अधिकार भारत और चीन के बीच सीधे समझौते से ही मिल सकता है।</p>



<p><strong>हॉटन के आसपास बेहद ऊंचे पहाड़ बड़ी चुनौती</strong></p>



<p>हॉटन के आसपास का भूगोल भी बड़ी चुनौती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलाके के चारों ओर 20,000 फीट यानी करीब 6,100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंचे पहाड़ हैं।</p>



<p>विमान के केबिन में दबाव कम होने की स्थिति में पायलटों को विमान को सुरक्षित ऊंचाई तक नीचे लाना पड़ता है। ऑक्सीजन मास्क आम तौर पर 12 से 20 मिनट तक ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकते हैं।</p>



<p>20,000 फीट से ज्यादा ऊंची चोटियों वाले इलाके में सीधे नीचे उतरना संभव नहीं होता। इसलिए ऐसे क्षेत्र से गुजरने वाली एयरलाइनों को पहले से आपातकालीन रास्ते तैयार करने पड़ते हैं, ताकि विमान पहाड़ों से सुरक्षित दूरी पर नीचे आ सके।</p>



<p>इंजन फेल होने की स्थिति में भी ऐसी ही चुनौती सामने आती है। दो इंजन वाले विमान के लिए एक इंजन पर क्रूजिंग ऊंचाई बनाए रखना मुश्किल हो सकता है और उसे पहले से तय सुरक्षित रास्ते से नीचे उतरना पड़ सकता है।</p>



<p><strong>आपात लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट भी कम</strong></p>



<p>हॉटन के आसपास आपात स्थिति में विमान उतारने के लिए एयरपोर्ट भी बहुत कम हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस आमतौर पर इस इलाके से बचती हैं।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से पहले के 12 महीनों में किसी गैर-चीनी एयरलाइन ने हॉटन एयरपोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया था।</p>



<p><strong>सैन्य लिहाज से भी संवेदनशील है क्षेत्र</strong></p>



<p>यह एयरस्पेस चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वेस्टर्न थिएटर कमांड के दायरे में आता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस कमांड के पास मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस से जुड़े व्यापक संसाधन हैं। इसकी जिम्मेदारियों में भारत के साथ किसी भी संभावित संघर्ष से निपटना भी शामिल है।</p>



<p><strong>अक्साई चिन का विवाद भी सामने आएगा</strong></p>



<p>लेह और हॉटन के बीच अक्साई चिन का इलाका आता है। चीन इसे हॉटन प्रीफेक्चर का हिस्सा मानकर शासन करता है, जबकि भारत इसे लद्दाख के लेह जिले का हिस्सा मानता है।</p>



<p>इस इलाके में 7,000 मीटर यानी करीब 23,000 फीट तक ऊंचे पहाड़ हैं। वहीं कुनलुन पर्वत श्रृंखला हॉटन के पास मौजूद तारिम बेसिन को अलग करती है।</p>



<p>अगर लेह से हॉटन तक सीधा एयर ट्रैक बनाया जाता है तो वह इस इलाके के ऊपर से गुजर सकता है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय यात्री विमान इस क्षेत्र के ऊपर से किस तरह उड़ेंगे और ऐसे विमानों को किस देश के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर दिशा देंगे। दोनों सरकारों ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।</p>



<p><strong>हॉटन रूट खुला तो क्या बदलेगा?</strong></p>



<p>अगर भारत और चीन के बीच हॉटन एयर कॉरिडोर को लेकर समझौता होता है तो दक्षिण की तरफ से लिए जाने वाले लंबे रास्ते की तुलना में कुछ पश्चिमी गंतव्यों की उड़ानें छोटी हो सकती हैं।</p>



<p>मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, इस रूट से जॉर्जिया, बाकू, मध्य एशिया और उत्तरी यूरोप जाने वाली उड़ानों में महत्वपूर्ण समय और दूरी की बचत हो सकती है। हालांकि नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संभावित बचत की कोई राशि नहीं बताई है।</p>



<p>फिलहाल भारत और चीन के बीच बातचीत शुरुआती स्तर पर है। दूसरी ओर भारतीय एयरलाइंस 24 अक्टूबर को समाप्त होने वाले पाकिस्तान के मौजूदा एयरस्पेस नोटिस को ध्यान में रखते हुए अपने उड़ान कार्यक्रम की योजना बना रही हैं।</p>



<p></p>
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