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	<title>Hormuz Strait &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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		<title>ट्रंप की धमकी पर ईरान का तीखा जवाब! कहा- हमारा तेल रुका तो किसी देश का निर्यात भी नहीं होगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:39:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/photo6-18.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के जवाब में ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उसे तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र का कोई भी देश अपना तेल निर्यात नहीं कर &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के जवाब में ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उसे तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र का कोई भी देश अपना तेल निर्यात नहीं कर सकेगा। ईरान ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी।</p>



<p><strong>ईरान ने दिया कड़ा संदेश</strong></p>



<p>ईरानी संसद के स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल दो ही विकल्प हैं—या तो सभी देश तेल का निर्यात करेंगे या फिर कोई भी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की सुरक्षा को खतरा बना रहा, तो पूरे क्षेत्र का ऊर्जा ढांचा भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा।</p>



<p>गालिबाफ ने यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थायी सुरक्षा तभी संभव है, जब वहां से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त हो जाए।</p>



<p><strong>ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी</strong></p>



<p>इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियारों से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।</p>



<p>ट्रंप ने कहा था कि ऐसी स्थिति में अमेरिका पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।</p>



<p><strong>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?</strong></p>



<p>हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस समय अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। शुरुआती युद्धविराम समझौते के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी हैं। अमेरिका ने कई ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।</p>



<p>दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए यहां निर्बाध समुद्री आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है।</p>



<p><strong>बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर</strong></p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के सख्त रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>लगातार 12वीं रात ईरान पर अमेरिकी हमला, सिरिक में गूंजे धमाके, सैन्य ठिकानों पर फिर बरसी मिसाइलें</title>
		<link>https://dastaktimes.org/american-attack-on-iran-for-the-12th-consecutive-night-explosions-echoed-in-sirik/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 05:18:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="160" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-1-1-300x160.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-1-1-300x160.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-1-1.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वीं रात भी सैन्य अभियान जारी रखते हुए ताबड़तोड़ हमले किए। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, इससे पहले भी अमेरिकी सेना ईरान के कई इलाकों और द्वीपों &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वीं रात भी सैन्य अभियान जारी रखते हुए ताबड़तोड़ हमले किए। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, इससे पहले भी अमेरिकी सेना ईरान के कई इलाकों और द्वीपों को निशाना बना चुकी है।</p>



<p><strong>सेंटकॉम ने नए हमलों की पुष्टि की</strong></p>



<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी जानकारी में बताया कि कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हमले शुरू किए हैं।</p>



<p>सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य जलक्षेत्र से गुजरने वाले आम नाविकों और व्यावसायिक जहाजों को डराने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि यह मिशन आगे भी जारी रहेगा।</p>



<p><strong>कई सैन्य ठिकाने बने निशाना</strong></p>



<p>अमेरिकी सेना लगातार कई रातों से ईरान पर हवाई हमले कर रही है। इस अभियान के दौरान एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकानों और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया है।</p>



<p>अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए पैदा होने वाले खतरे को कम करना है।</p>



<p><strong>ईरान भी दे रहा जवाब</strong></p>



<p>तनाव के बीच ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। मंगलवार को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया। इसके अलावा बहरीन और कुवैत में संभावित मिसाइल हमलों की चेतावनी के चलते सायरन भी बजाए गए। इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।</p>



<p><strong>ट्रंप ने बातचीत में नहीं दिखाई रुचि</strong></p>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल उनकी ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सेना जल्द ही ईरान के उस इलाके को भी निशाना बना सकती है, जो उसके प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्रों के करीब स्थित है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>ईरान पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, एयरक्राफ्ट हैंगर से ड्रोन स्टोरेज तक कई सैन्य ठिकाने तबाह; जंग के बीच बढ़ा वैश्विक तनाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/americas-major-air-attack-on-iran-destroys-many-military-bases-from-aircraft-hangar-to-drone-storage-global-tension-increases-amid-war/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 05:26:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/022-1-300x169.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/022-1-300x169.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/022-1-390x220.webp 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/022-1.webp 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार और तेज होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए। इस अभियान में एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकानों और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार और तेज होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए। इस अभियान में एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकानों और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे को कम करना है।</p>



<p>अमेरिकी सैन्य कमान का दावा है कि हालिया कार्रवाई क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।</p>



<p><strong>होर्मुज में जहाजों पर हमलों का लगाया आरोप</strong></p>



<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, पिछले तीन महीनों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 30 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए हैं। इन घटनाओं से सैकड़ों नाविकों की जान खतरे में पड़ी और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार भी प्रभावित हुआ। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि इन घटनाओं के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए खुला हुआ है।</p>



<p><strong>ट्रंप बोले- फिलहाल बातचीत में नहीं है रुचि</strong></p>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनकी ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत में रुचि नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिकी सेना आगे चलकर ईरान के उन इलाकों को भी निशाना बना सकती है, जो उसके प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्रों के निकट स्थित हैं।</p>



<p><strong>ईरान की जवाबी कार्रवाई भी जारी</strong></p>



<p>दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कदम उठाए हैं। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमला किया गया। इसके अलावा बहरीन और कुवैत में संभावित मिसाइल हमलों की चेतावनी के चलते सायरन भी बजाए गए।</p>



<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, बढ़ा आर्थिक दबाव</strong></p>



<p>मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 4 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है, जिससे ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ गया है।</p>



<p><strong>500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल होने का दावा</strong></p>



<p>एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी संघर्ष में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 के पार पहुंच चुकी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह आंकड़ा पेंटागन के आधिकारिक रिकॉर्ड से भी अधिक है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक आने के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई और महंगे ईंधन को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब पर संकट! हूतियों की धमकी से भारत-चीन आ रहे तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न, बढ़ी वैश्विक चिंता</title>
		<link>https://dastaktimes.org/after-hormuz-now-crisis-on-bab-al-mandeb/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 05:03:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच जारी जंग के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर संकट और गहरा गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब एक और अहम समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से भारत और चीन के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहे दो तेल टैंकरों को बीच रास्ते से यू-टर्न लेना पड़ा। यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/oil-tankers.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका-ईरान के बीच जारी जंग के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर संकट और गहरा गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब एक और अहम समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से भारत और चीन के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहे दो तेल टैंकरों को बीच रास्ते से यू-टर्न लेना पड़ा। यह फैसला यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूतियों की धमकियों के बाद लिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर नई चिंता खड़ी हो गई है।</p>



<p>दोनों टैंकरों ने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से चीन और भारत के लिए कच्चा तेल लोड किया था। योजना के मुताबिक उन्हें लाल सागर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार कर हिंद महासागर की ओर बढ़ना था, लेकिन सुरक्षा खतरे को देखते हुए जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। अब ये टैंकर स्वेज नहर की दिशा में बढ़ गए हैं और लंबा समुद्री मार्ग तय कर अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे।</p>



<p><strong>हूतियों की धमकी के बाद बदला समुद्री मार्ग</strong></p>



<p>उत्तरी और पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से, जिनमें लाल सागर के मुहाने वाले तटीय इलाके भी शामिल हैं, पर नियंत्रण रखने वाले हूतियों ने सोमवार को सऊदी अरब की नौसैनिक घेराबंदी का ऐलान किया था। इसके बाद शिपिंग कंपनियों को भेजे गए एक पत्र में उन्होंने चेतावनी दी कि सऊदी तेल को लोड या अनलोड करने वाले सभी जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।</p>



<p>इसी वजह से जिन टैंकरों को बाब-अल-मंदेब होते हुए भारत और चीन की ओर बढ़ना था, उन्होंने अपना मार्ग बदल लिया और स्वेज नहर की दिशा में रवाना हो गए।</p>



<p><strong>होर्मुज बंद होने के बाद लाल सागर बना था विकल्प</strong></p>



<p>अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते खाड़ी से बाहर निकलने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले ही बंद हो चुका है। ऐसे में लाल सागर के जरिए सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से पाइपलाइन के माध्यम से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल भेजा जा रहा था। अब बाब-अल-मंदेब के आसपास बढ़ते खतरे ने इस वैकल्पिक मार्ग पर भी संकट खड़ा कर दिया है।</p>



<p>पहले जहाजों को यानबू से लाल सागर के रास्ते भारत पहुंचना था, लेकिन हूतियों की चेतावनी के बाद उन्हें अपना पूरा रूट बदलना पड़ा और अब वे काहिरा की दिशा से लंबा सफर तय करेंगे।</p>



<p><strong>तेल की कीमतों में दो फीसदी से ज्यादा उछाल</strong></p>



<p>समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिका में गैसोलीन की कीमत फिर से 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई।</p>



<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी</strong></p>



<p>इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब तक हूतियों ने बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा किया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन यदि ऐसा होता है तो अमेरिका उससे निपटने के लिए तैयार है।</p>



<p><strong>18 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि</strong></p>



<p>डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इनमें हाल के दिनों में जॉर्डन और इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों में मारे गए चार सैनिक भी शामिल हैं।</p>



<p><strong>ईरान पर लगातार 11वीं रात बमबारी</strong></p>



<p>दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान में हवाई हमले किए। तेहरान के अलावा दक्षिण-पूर्वी तटीय शहर चाबहार और कोनारक में भी धमाकों की खबर सामने आई। वहीं बुशहर में भी दो विस्फोट सुनाई दिए, जहां ईरान का एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है।</p>



<p>इससे पहले ईरान बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका है। वहीं खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर भी हमला किया गया था।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>ईरान का बड़ा पलटवार! होर्मुज में तेल टैंकरों में आग, कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले</title>
		<link>https://dastaktimes.org/irans-major-counterattack-fire-in-oil-tankers-in-hormuz/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 05:29:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-3-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-3-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-3-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-3.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव और गहरा गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और ईरानी सेना ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। वहीं, इससे पहले 20 जुलाई की रात अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने भी ईरान &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव और गहरा गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और ईरानी सेना ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। वहीं, इससे पहले 20 जुलाई की रात अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने भी ईरान के ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए थे। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।</p>



<p><strong>कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना</strong></p>



<p>ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि कुवैत में अमेरिकी रडार, संचार और सैटेलाइट सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ‘अली अल सालेम’ एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगर पर भी हमला किए जाने का दावा किया गया है।</p>



<p>ईरानी सेना के अनुसार, कुवैत स्थित ‘कैंप आरिफजान’ में तैनात अमेरिकी मिसाइल सिस्टम को भी निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि इन हमलों के जरिए अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।</p>



<p><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों में लगी आग</strong></p>



<p>आईआरजीसी के दावे के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में बड़े धमाकों के बाद आग लग गई। इसके अलावा ओमान के तट के पास भी एक अन्य टैंकर को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।</p>



<p><strong>बहरीन में एयर डिफेंस सिस्टम पर भी हमला</strong></p>



<p>ईरान ने बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा किया है। आईआरजीसी के अनुसार, मुहर्रक क्षेत्र में अमेरिकी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। इसके साथ ही बहरीन के रिफा क्षेत्र में तैनात अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को भी निशाना बनाया गया।</p>



<p><strong>कतर ने जताई कड़ी आपत्ति</strong></p>



<p>ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद कतर ने कड़ा रुख अपनाया है। कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर अपने देश पर हुए ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही ईरान से इन हमलों में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी की है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>अमेरिका-इराक की 60 अरब डॉलर की मेगा डील से बदलेगा तेल कारोबार? होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प तैयार करने की बड़ी रणनीति शुरू</title>
		<link>https://dastaktimes.org/america-will-change-the-oil-business-with-iraqs-60-billion-dollar-mega-deal-big-strategy-to-prepare-an-alternative-to-the-strait-of-hormuz-started/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:22:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका और इराक ने ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े करीब 60 अरब डॉलर के बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का मकसद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है। साथ ही ऐसे वैकल्पिक तेल और गैस आपूर्ति मार्ग विकसित &#8230;]]></description>
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<p><strong>वॉशिंगटन:</strong> पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका और इराक ने ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े करीब 60 अरब डॉलर के बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का मकसद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है। साथ ही ऐसे वैकल्पिक तेल और गैस आपूर्ति मार्ग विकसित करने की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, जिससे भविष्य में वैश्विक बाजार की होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सके।</p>



<p><strong>ऊर्जा के साथ बुनियादी ढांचे पर भी रहेगा फोकस</strong></p>



<p>अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स में हुए इन समझौतों में केवल तेल और गैस क्षेत्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, दूरसंचार और आधारभूत ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पहले के मुकाबले अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बन सकती है।</p>



<p><strong>क्यों दुनिया के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?</strong></p>



<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा प्रभाव डालता है।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए ऐसे वैकल्पिक मार्गों की तलाश लगातार की जा रही है, जिनके जरिए तेल निर्यात बिना किसी बड़ी बाधा के जारी रखा जा सके।</p>



<p><strong>नई पाइपलाइन तैयार करने में लगेगा लंबा समय</strong></p>



<p>ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करना आसान काम नहीं होगा। निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषण के मुताबिक, किसी एक देश के भीतर नई पाइपलाइन बनाने में भी करीब ढाई वर्ष का समय लग सकता है। यदि पाइपलाइन कई देशों से होकर गुजरती है, तो कूटनीतिक मंजूरियों और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण परियोजना में और अधिक समय लग सकता है।</p>



<p><strong>तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल</strong></p>



<p>पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का भाव लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि तनाव बढ़ने से पहले इसकी कीमत करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहने तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।</p>



<p><strong>अमेरिकी कंपनियां बढ़ाएंगी इराक में निवेश</strong></p>



<p>इराक के प्रधानमंत्री अली फलाह अल-जैदी ने अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों से देश में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने की अपील की है। उनका कहना है कि इराक विदेशी कंपनियों को केवल ठेकेदार के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश साझेदार के तौर पर देखता है।</p>



<p>इसी क्रम में अमेरिकी ऊर्जा कंपनी शेवरॉन ने इराक सरकार के साथ तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें दो परियोजनाएं तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़ी हैं, जबकि तीसरी परियोजना नई निर्यात पाइपलाइन विकसित करने पर केंद्रित है।</p>



<p><strong>क्या बदल सकती है वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की तस्वीर?</strong></p>



<p>प्रस्तावित पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए इराक से तेल को सीरिया और तुर्किये के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बन सकती है।</p>



<p>हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनियों की वास्तविक सफलता उनके समय पर निर्माण, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगी। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि यदि सभी प्रमुख परियोजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष 2028 तक ये वैकल्पिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल परिवहन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को संभालने की क्षमता विकसित कर सकते हैं।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका से समझौते पर ईरान ने लगाई रोक, इस्लामाबाद वार्ता से भी किया किनारा; बढ़ा कूटनीतिक तनाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/iran-put-a-stop-to-the-agreement-with-america-also-kept-away-from-islamabad-talks/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 06:08:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-us-talk-stop-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-us-talk-stop-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/iran-us-talk-stop.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लागू नहीं करेगा। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने युद्धविराम से जुड़े अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। इसके साथ ही &#8230;]]></description>
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<p><strong>तेहरान:</strong> पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लागू नहीं करेगा। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने युद्धविराम से जुड़े अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। इसके साथ ही ईरान ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से भी इनकार कर दिया है।</p>



<p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रेस वार्ता में कहा कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते या आगे की प्रक्रिया पर प्रगति संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।</p>



<p><strong>अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप</strong></p>



<p>इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका के संबंध फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन ने अपने वादों का पालन नहीं किया, जिसके कारण आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है।</p>



<p>उन्होंने हालिया सैन्य घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत थी। बघाई ने दोहराया कि जब तक दूसरा पक्ष अपने दायित्वों का पालन नहीं करेगा, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।</p>



<p><strong>हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी जताई आपत्ति</strong></p>



<p>ईरानी विदेश मंत्रालय ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की गतिविधियों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। बघाई ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में उठाए गए अमेरिकी कदम युद्धविराम समझौते की भावना के विपरीत हैं और ईरान की संप्रभुता में हस्तक्षेप करते हैं।</p>



<p>उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक क्षेत्र है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, ईरान लंबे समय से इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता रहा है।</p>



<p><strong>पश्चिम एशिया में अस्थिरता के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</strong></p>



<p>विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियां क्षेत्र में तनाव कम करने के बजाय अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं। बघाई ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा देने के दावे से हालात और जटिल हो सकते हैं तथा इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और शिपिंग क्षेत्र के भरोसे पर पड़ सकता है।</p>



<p><strong>इस्लामाबाद वार्ता पर भी लगाया विराम</strong></p>



<p>ईरान ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने की खबरों को भी खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी किसी बैठक की पुष्टि नहीं की गई है।</p>



<p>उल्लेखनीय है कि पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे और इसके बाद स्विट्जरलैंड में कई दौर की बातचीत भी हुई थी। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालिया घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास फिर बढ़ गया है।</p>



<p></p>
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		<title>होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया संकट! US-ईरान तनाव से थमा समुद्री ट्रैफिक, तेल-गैस सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 06:19:43 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="181" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-300x181.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-768x463.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164-780x470.jpg 780w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/9A_164.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री जहाजों की आवाजाही बेहद धीमी पड़ गई है। भारत समेत दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।</p>



<p><strong>उत्तरी समुद्री मार्ग तक सीमित हुई जहाजों की आवाजाही</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक लगभग ठहर गया है। फिलहाल अधिकांश जहाज केवल उस उत्तरी समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिसे ईरान की मंजूरी प्राप्त है। वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित हो गई है। हाल के घंटों में केवल एक अमेरिकी मंजूरी प्राप्त सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज के इस जलमार्ग से गुजरने की जानकारी सामने आई है।</p>



<p><strong>सैन्य तनाव बढ़ते ही तेजी से घटी जहाजों की संख्या</strong></p>



<p>डेटा फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे थे। 24 जून को यह संख्या बढ़कर 59 तक पहुंच गई थी। हालांकि ताजा सैन्य टकराव के बाद जहाजों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर सके।</p>



<p><strong>होर्मुज पर नियंत्रण को रणनीतिक ताकत मानता है ईरान</strong></p>



<p>अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे अहम रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी वार्ता में इसे दबाव बनाने के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।</p>



<p>विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर यह सुनिश्चित करने का दबाव है कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।</p>



<p><strong>ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का लगाया आरोप</strong></p>



<p>ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया और इन हमलों को होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब के रूप में पेश करना महज एक बहाना है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।</p>



<p><strong>कतर, कुवैत और बहरीन तक पहुंचा संघर्ष</strong></p>



<p>अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। वहीं होर्मुज क्षेत्र के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप सहित कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग पर इसका लंबा असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, समुद्री परिवहन लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>खामनेई को इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक, अंतिम यात्रा में लगे अमेरिका-इजरायल विरोधी नारे; पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/khamenei-laid-to-rest-in-imam-reza-dargah-anti-us/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 05:56:38 +0000</pubDate>
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<p><strong>तेहरान:</strong> ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर मशहद में कर दिया गया। उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके साथ ही छह दिनों तक चले राजकीय शोक और अंतिम संस्कार कार्यक्रम का समापन हो गया। इस दौरान ईरान और इराक के विभिन्न शहरों से लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम यात्रा के दौरान अमेरिका और इजरायल के विरोध में नारे भी लगाए गए।</p>



<p><strong>101 वर्षीय धर्मगुरु ने पढ़ाई नमाज-ए-जनाजा</strong></p>



<p>अंतिम संस्कार से पहले खामनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान, कोम और अन्य प्रमुख शहरों में श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। अंतिम दिन उनका ताबूत मशहद पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, जनाजे की रस्म 101 वर्षीय धर्मगुरु अयातुल्ला हुसैन नूरी हमदानी ने नमाज-ए-जनाजा पढ़ाकर पूरी कराई। वर्ष 1925 में जन्मे हुसैन नूरी हमदानी को ईरान के सबसे कट्टरपंथी धर्मगुरुओं में गिना जाता है।</p>



<p><strong>मोजतबा खामनेई की गैरमौजूदगी से उत्तराधिकार पर बढ़ी चर्चा</strong></p>



<p>अंतिम संस्कार के दौरान खामनेई के बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सुरक्षा कारणों और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के चलते उन्होंने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने केवल एक लिखित संदेश जारी कर लोगों का आभार व्यक्त किया।</p>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामनेई समेत उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई थी।</p>



<p><strong>ईरान के परमाणु संयंत्र के पास अमेरिकी हवाई हमले</strong></p>



<p>इस बीच अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान पर नए हवाई हमले किए। ईरान ने आरोप लगाया कि बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास भी हमला किया गया, हालांकि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने दो दिनों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 14 लोगों की मौत हुई।</p>



<p><strong>ट्रंप के बयान के बाद और तेज हुए हमले</strong></p>



<p>ताजा हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुए, जिसमें उन्होंने ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समाप्त होने का संकेत बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि हमले नहीं रुके तो संघर्ष और अधिक बढ़ सकता है।</p>



<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइल भंडार, सैन्य स्पीड बोट तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित तटीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। कमांड ने कुछ वीडियो भी जारी किए, जिनमें हवाईअड्डों के रनवे और मिसाइल लॉन्चरों पर हमले दिखाई गए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करना है।</p>



<p><strong>कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक पहुंचा तनाव</strong></p>



<p>ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन हमले किए। इन हमलों में कुवैत के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर के अर्ली वॉर्निंग सैटेलाइट एंटीना और बहरीन में अमेरिकी सेना के फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया।</p>



<p>बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है, वहां तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे। इसके अलावा कुवैत और कतर की ओर भी मिसाइलें दागी गईं। गुरुवार दोपहर जॉर्डन के अजराक सैन्य अड्डे पर भी 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जहां अमेरिका ने अपने सैनिकों और लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रखी है।</p>



<p></p>
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		<title>&#8216;मैं ईरान का नंबर वन टारगेट हूं&#8217;&#8230; ट्रंप का सनसनीखेज दावा, बोले- तेहरान मेरी हत्या की साजिश रच रहा, समझौते के सभी रास्ते बंद</title>
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		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 04:46:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/trump-3-2.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि वह ईरान का &#8220;नंबर वन टारगेट&#8221; हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के साथ किसी &#8230;]]></description>
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<p><strong>अंकारा:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि वह ईरान का &#8220;नंबर वन टारगेट&#8221; हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते की संभावना अब नहीं बची है। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर नई राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>



<p><strong>हत्या की साजिश का लगाया गंभीर आरोप</strong></p>



<p>ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व उन्हें अपना सबसे बड़ा निशाना मानता है और उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके कुछ विरोधी नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं और कुछ अन्य भी शायद नहीं रहे। उन्होंने कहा, &#8220;मैं भी शायद जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं।&#8221; ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले 47 वर्षों से उनका रवैया इसी प्रकार का रहा है।</p>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की पूर्व नेतृत्व व्यवस्था पूरी तरह अमेरिका विरोधी रही, जबकि मौजूदा नेतृत्व पहले की तुलना में कुछ अधिक समझदारी से काम करता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालना है।</p>



<p><strong>ईरान के साथ बातचीत खत्म करने का ऐलान</strong></p>



<p>ट्रंप ने बताया कि कुछ घंटे पहले ही उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते के प्रयासों को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की डील करना केवल समय की बर्बादी है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान लगातार समझौतों का उल्लंघन करता रहा है और अब अमेरिका उसे कड़ा जवाब देगा।</p>



<p>युद्धविराम को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां तक उनका सवाल है, युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना सख्त रुख जारी रखेगा।</p>



<p><strong>अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई</strong></p>



<p>अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने दावा किया कि बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।</p>



<p><strong>होर्मुज में बढ़ते तनाव पर कतर की चिंता</strong></p>



<p>ओमान तट के निकट तरलीकृत प्राकृतिक गैस वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद कतर ने ईरान से होर्मुज क्षेत्र में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है। कतर सरकार ने कहा कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखती है। कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>



<p>अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज मार्ग से जहाजों का संचालन नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग छह हजार नाविकों की सुरक्षा पर अनावश्यक खतरा उत्पन्न हो सकता है।</p>



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