<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Indian Air Force &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/indian-air-force/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Thu, 13 Aug 2026 06:56:59 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.7</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>Indian Air Force &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>वायुसेना को मिलेंगे 60 नए ट्रांसपोर्ट विमान, पुराने कार्गो बेड़े की जगह लेंगे; ₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी</title>
		<link>https://dastaktimes.org/air-force-will-get-60-new-transport-aircraft-to-replace-the-old-cargo-fleet-tender-worth-%e2%82%b9-1-lakh-crore-issued/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:56:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[1 लाख करोड़ टेंडर]]></category>
		<category><![CDATA[60 ट्रांसपोर्ट विमान]]></category>
		<category><![CDATA[C-130]]></category>
		<category><![CDATA[C-130J Super Hercules]]></category>
		<category><![CDATA[C-295]]></category>
		<category><![CDATA[C-390]]></category>
		<category><![CDATA[hal]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[कार्गो विमान]]></category>
		<category><![CDATA[टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय वायुसेना]]></category>
		<category><![CDATA[महिंद्रा डिफेंस]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षा मंत्रालय]]></category>
		<category><![CDATA[वायुसेना आधुनिकीकरण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=899176</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="190" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-300x190.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-300x190.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-768x486.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के पुराने हो रहे कार्गो विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों की अहम भूमिका होगी। हिंदुस्तान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="190" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-300x190.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-300x190.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3-768x486.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/000000000-11-3.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारतीय वायुसेना के पुराने हो रहे कार्गो विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों की अहम भूमिका होगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, टाटा और महिंद्रा इस दौड़ में शामिल हैं।</p>



<p><strong>भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी विमान निर्माता भी मैदान में</strong></p>



<p>महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ साझेदारी की है। इस गठजोड़ के तहत सी-390 परिवहन विमान की पेशकश की जाएगी। वहीं, टाटा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ साझेदारी की है और सी-130 विमान की पेशकश करेगा। सी-130 विमान पहले से ही भारतीय वायुसेना में विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>



<p><strong>भारत में ही तैयार होंगे ज्यादातर विमान</strong></p>



<p>इस कार्यक्रम के तहत करीब 20 प्रतिशत विमान पूरी तरह तैयार स्थिति में भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इन विमानों में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माताओं के बीच संयुक्त उपक्रम के माध्यम से किया जाएगा। इस पूरी परियोजना में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की भी भूमिका रहेगी।</p>



<p><strong>वायुसेना के पास अभी 12 सी-130जे विमान</strong></p>



<p>भारतीय वायुसेना के मौजूदा बेड़े में फिलहाल 12 सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान शामिल हैं। इसके अलावा वायुसेना एयरबस के साथ सी-295 परिवहन विमान कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। इसके तहत करीब 70 सी-295 विमानों को वायुसेना में शामिल किया जाना है। इनमें अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।</p>



<p><strong>वायुसेना के आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा</strong></p>



<p>60 बहुउद्देश्यीय परिवहन विमानों की खरीद वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भी टेंडर जारी किया है। इसके अलावा पुराने हॉक प्रशिक्षक विमानों को बदलने और पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक प्रशिक्षक विमानों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।</p>



<p><strong>सिर्फ सैनिकों की आवाजाही नहीं, हवा में ईंधन भरने का भी काम</strong></p>



<p>नए बहुउद्देश्यीय परिवहन विमानों का इस्तेमाल केवल सैनिकों और सैन्य उपकरणों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए नहीं किया जाएगा। भारतीय वायुसेना इन विमानों को हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा, इनकी मदद से सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही सुनिश्चित करने की क्षमता भी बढ़ेगी।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर भारत की नजर, फ्रांस के FCAS कार्यक्रम से जुड़ने की तैयारी तेज; वायुसेना को मजबूत करने पर जोर</title>
		<link>https://dastaktimes.org/india-eyes-sixth-generation-fighter-aircraft-preparations-to-join-frances-fcas-program-intensifies/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 07:46:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[Advanced Medium Combat Aircraft]]></category>
		<category><![CDATA[AMCA]]></category>
		<category><![CDATA[Defence Ministry]]></category>
		<category><![CDATA[FCAS]]></category>
		<category><![CDATA[Future Combat Air System]]></category>
		<category><![CDATA[India France Defence]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Defence]]></category>
		<category><![CDATA[LCA MK2]]></category>
		<category><![CDATA[MRFA]]></category>
		<category><![CDATA[Sixth Generation Fighter Jet]]></category>
		<category><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर]]></category>
		<category><![CDATA[छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान]]></category>
		<category><![CDATA[भारत फ्रांस रक्षा समझौता]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय वायुसेना]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षा मंत्रालय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=897451</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="206" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-300x206.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-300x206.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-768x527.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-220x150.jpg 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: भारत ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की क्षमता हासिल करने की दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस की अगुवाई में चल रहे फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम कार्यक्रम से जुड़ने के लिए समन्वित प्रयास शुरू किए हैं। संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने भी मंत्रालय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="206" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-300x206.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-300x206.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-768x527.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3-220x150.jpg 220w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/08/0000000000000000-3.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की क्षमता हासिल करने की दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस की अगुवाई में चल रहे फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम कार्यक्रम से जुड़ने के लिए समन्वित प्रयास शुरू किए हैं। संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने भी मंत्रालय से छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास और खरीद को लेकर स्पष्ट रोडमैप और समयसीमा तैयार करने को कहा है।</p>



<p><strong>छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर क्या है योजना</strong></p>



<p>संसदीय समिति ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा दौर में युद्ध तेजी से वायु-केंद्रित होता जा रहा है। ऐसे में भारत की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। समिति ने रक्षा मंत्रालय से छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और अधिग्रहण की योजना को स्पष्ट दिशा देने तथा आगे की प्रक्रिया तेज करने की सिफारिश की है।</p>



<p>समिति के मुताबिक, उसे बताया गया है कि भारतीय वायुसेना किसी एक अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम के साथ जुड़ने की कोशिश करेगी। साथ ही छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को प्राथमिकता में रखा जाएगा, ताकि अत्याधुनिक विमानों की क्षमता हासिल करने में भारत पीछे न रह जाए।</p>



<p><strong>दो अंतरराष्ट्रीय समूह विकसित कर रहे छठी पीढ़ी के विमान</strong></p>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास पर दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह काम कर रहे हैं। इनमें एक कंसोर्टियम ब्रिटेन, इटली और जापान का है, जबकि दूसरा फ्रांस और जर्मनी के बीच सहयोग से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>भारत की ओर से फ्रांस की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम कार्यक्रम से जुड़ने के प्रयास इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताए गए हैं।</p>



<p><strong>AMCA के डिजाइन पर भी आगे बढ़ रहा काम</strong></p>



<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का डिजाइन तैयार हो चुका है और इसके निर्माण को लेकर बातचीत जारी है। समिति ने कहा कि वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए विमानों की तकनीकी क्षमता में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।</p>



<p>रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि फ्रांस सरकार की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत ने समन्वित प्रयास शुरू कर दिए हैं।</p>



<p>समिति ने छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और अधिग्रहण की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। इसके साथ ही खरीद के लिए तैयार किए गए रोडमैप और संभावित समयसीमा की जानकारी देने को कहा गया है। AMCA के विकास और निर्माण की स्थिति पर भी कार्रवाई संबंधी बयान के साथ विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।</p>



<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा तैयारियों पर जोर</strong></p>



<p>समिति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में सेना की निर्णायक भूमिका की सराहना की। साथ ही रक्षा तैयारियों में लगातार निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। समिति ने कहा कि भविष्य के बजट में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि भारतीय सेना की मौजूदा क्षमता को बनाए रखने के साथ उसे और मजबूत किया जा सके।</p>



<p><strong>पड़ोसी देशों के रक्षा खर्च के अनुरूप बजट बढ़ाने की बात</strong></p>



<p>संसदीय समिति ने कहा कि भारत का रक्षा खर्च पड़ोसी देशों के रक्षा बजट में हो रही बढ़ोतरी के अनुरूप होना चाहिए। समिति के अनुसार, सेना का पूंजीगत बजट इतना पर्याप्त होना चाहिए कि किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में देश विरोधियों को प्रभावी ढंग से रोकने की क्षमता बनाए रख सके।</p>



<p>मंत्रालय से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए समिति ने कहा कि रक्षा सेवा अनुमानों में वायुसेना के राजस्व बजट की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह हिस्सेदारी वर्ष 2021-22 में 8.83 प्रतिशत थी, जो 2026-27 में बढ़कर 10.80 प्रतिशत हो गई है।</p>



<p><strong>वायुसेना के बजट में और बढ़ोतरी की जरूरत</strong></p>



<p>समिति ने मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और युद्ध के तेजी से वायु-केंद्रित होने को देखते हुए रक्षा सेवा अनुमानों के बजट में भारतीय वायुसेना की कुल हिस्सेदारी और बढ़ाने की जरूरत बताई है। समिति का मानना है कि इससे वायुसेना की क्षमता मजबूत करने और देश को संभावित युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार रखने में मदद मिलेगी।</p>



<p><strong>MRFA और LCA कार्यक्रम पर भी काम जारी</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। क्षमता की कमी को दूर करने और देश में निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम भी जारी है।</p>



<p>समिति ने बताया कि एलसीए एमके-2 और एएमसीए फिलहाल डिजाइन और विकास के चरण में हैं। युद्ध तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए समिति ने भारतीय वायुसेना को नियर-स्पेस ऑपरेशन की जरूरतों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और समर्थन उपलब्ध कराने की बात कही है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमता के क्षेत्र में भारत को अन्य वैश्विक शक्तियों के बराबर मजबूती से खड़ा करना है।</p>



<p><strong>नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों का प्रावधान</strong></p>



<p>सरकार ने समिति को बताया कि नौसेना की प्रमुख नई परियोजनाओं में 26 राफेल-एम विमानों का अनुबंध, एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के लिए आगे की सहायता और आपूर्ति तथा स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए हेवीवेट टॉरपीडो शामिल हैं।</p>



<p>समिति के अनुसार, आधुनिकीकरण बजट में भारतीय नौसेना के लिए 47,748.31 करोड़ रुपये यानी 73.57 प्रतिशत राशि प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए आवंटित की गई है। वहीं 17,146.28 करोड़ रुपये यानी 26.43 प्रतिशत राशि नई योजनाओं के लिए रखी गई है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत की सीमा के करीब चीन की बड़ी सैन्य तैनाती! 11 J-20 स्टील्थ फाइटर जेट एयरबेस पर तैनात, बढ़ी रणनीतिक चिंता</title>
		<link>https://dastaktimes.org/chinas-large-military-deployment-near-indias-border-11-j-20-stealth-fighter-jet-deployed-at-airbase-increased-strategic-concern/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:48:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[AMCA India]]></category>
		<category><![CDATA[Border Security]]></category>
		<category><![CDATA[China J-20 Fighter Jet]]></category>
		<category><![CDATA[China Military News]]></category>
		<category><![CDATA[Chinese Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[Damxung Airbase]]></category>
		<category><![CDATA[Hotan Airbase]]></category>
		<category><![CDATA[India China Border]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[J-20 Stealth Fighter]]></category>
		<category><![CDATA[Ladakh News]]></category>
		<category><![CDATA[Stealth Fighter Jet]]></category>
		<category><![CDATA[Tawang Border]]></category>
		<category><![CDATA[चीन J-20 फाइटर जेट]]></category>
		<category><![CDATA[भारत चीन सीमा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=896081</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="178" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-300x178.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-300x178.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-768x455.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: भारत के साथ संबंधों में सुधार की बात करने के बीच चीन ने एक बार फिर सीमा क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से सटे अपने अग्रिम एयरबेस पर पांचवीं पीढ़ी के 11 J-20 स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="178" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-300x178.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-300x178.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48-768x455.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/07/28A_48.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत के साथ संबंधों में सुधार की बात करने के बीच चीन ने एक बार फिर सीमा क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से सटे अपने अग्रिम एयरबेस पर पांचवीं पीढ़ी के 11 J-20 स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में यह तैनाती दर्ज की गई, जिससे सीमा क्षेत्र में चीन की सैन्य तैयारियों को लेकर नई रणनीतिक चिंता पैदा हो गई है।</p>



<p><strong>सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई तैनाती</strong></p>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में शिनजियांग स्थित होटन एयरबेस और तिब्बत के डैम्सुंग एयरबेस पर कुल 11 J-20 स्टील्थ फाइटर जेट दिखाई दिए हैं। इनमें सात विमान होटन एयरबेस पर और चार डैम्सुंग एयरबेस पर तैनात हैं। बताया गया है कि यह तस्वीरें जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के शुरुआती दिनों में ली गई थीं।</p>



<p><strong>लेह और दौलत बेग ओल्डी के करीब होटन एयरबेस</strong></p>



<p>9 जुलाई को ली गई तस्वीरों में होटन एयरबेस पर रनवे के समीप सात J-20 लड़ाकू विमान खड़े दिखाई दिए। यह एयरबेस भारतीय सीमा के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह लेह से लगभग 389 किलोमीटर और भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड से करीब 245 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सामने किसी चीनी एयरबेस पर एक साथ J-20 विमानों की यह अब तक की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है।</p>



<p><strong>तवांग के सामने भी बढ़ी चीन की मौजूदगी</strong></p>



<p>एक अन्य सैटेलाइट तस्वीर में तिब्बत के ल्हासा क्षेत्र स्थित डैम्सुंग एयरबेस पर चार J-20 स्टील्थ फाइटर जेट दिखाई दिए हैं। यह एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग से लगभग 344 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। चीन का J-20, जिसे &#8216;माइटी ड्रैगन&#8217; भी कहा जाता है, आधुनिक स्टील्थ तकनीक और उन्नत एईएसए रडार से लैस माना जाता है।</p>



<p><strong>क्या है J-20 की सबसे बड़ी ताकत?</strong></p>



<p>J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसे रडार पर पकड़ना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। स्टील्थ डिजाइन और आधुनिक सेंसर प्रणाली इसे हवाई अभियानों में सामरिक बढ़त प्रदान करने के लिए विकसित की गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय वायुसेना के मौजूदा लड़ाकू विमानों, जिनमें राफेल भी शामिल हैं, में स्टील्थ क्षमता नहीं है।</p>



<p><strong>भारत का स्टील्थ फाइटर अभी विकास चरण में</strong></p>



<p>भारत फिलहाल अपने पहले स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना पर काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस विमान को भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन में शामिल होने में अभी लगभग एक दशक का समय लग सकता है। इसकी समयसीमा परीक्षण और तकनीकी सत्यापन की सफलता पर निर्भर करेगी।</p>



<p><strong>तेजी से बढ़ रहा है चीन का J-20 बेड़ा</strong></p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, चीन लगातार J-20 स्टील्थ फाइटर जेट का उत्पादन बढ़ा रहा है। वर्ष 2019 में चीन के पास लगभग 50 J-20 विमान थे, जबकि 2022 तक इनकी संख्या करीब 200 हो गई। अनुमान है कि वर्ष 2026 के मध्य तक चीन के पास 300 से 500 J-20 विमान हो सकते हैं। वहीं, एक अंतरराष्ट्रीय रक्षा अध्ययन संस्थान के आकलन के अनुसार 2030 तक चीन के बेड़े में करीब 1000 J-20 स्टील्थ फाइटर शामिल हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में नई चुनौतियां उभर सकती हैं।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राफेल डील में नया मोड़! रूस के बड़े ऑफर से बदले समीकरण, फ्रांस पर बढ़ा दबाव</title>
		<link>https://dastaktimes.org/new-twist-in-rafale-deal-equations-changed-due-to-russias-big-offer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 04:46:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BrahMos Missile]]></category>
		<category><![CDATA[Defence News India]]></category>
		<category><![CDATA[Fighter Jet News]]></category>
		<category><![CDATA[IAF Rafale]]></category>
		<category><![CDATA[India France Defence Deal]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[Rafale Deal]]></category>
		<category><![CDATA[Rafale Fighter Jet]]></category>
		<category><![CDATA[Russia India Defence Relations]]></category>
		<category><![CDATA[S-400 Air Defence System]]></category>
		<category><![CDATA[Su-57 Fighter Jet]]></category>
		<category><![CDATA[Vladimir Putin]]></category>
		<category><![CDATA[एस-400]]></category>
		<category><![CDATA[एसयू-57]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रह्मोस मिसाइल]]></category>
		<category><![CDATA[भारत फ्रांस रक्षा समझौता]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय वायुसेना]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षा समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[राफेल डील]]></category>
		<category><![CDATA[राफेल फाइटर जेट]]></category>
		<category><![CDATA[रूस भारत रक्षा संबंध]]></category>
		<category><![CDATA[लड़ाकू विमान]]></category>
		<category><![CDATA[व्लादिमीर पुतिन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=889661</guid>

					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के घटते लड़ाकू स्क्वाड्रनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत जारी है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस संभावित डील पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। हाल ही में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-768x432.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/5A_188.jpg 999w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारतीय वायुसेना के घटते लड़ाकू स्क्वाड्रनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत जारी है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस संभावित डील पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। हाल ही में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी फ्रांस दौरे पर रहे, लेकिन सौदे से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा अब भी अनसुलझा बना हुआ है।</p>



<p>भारत की मांग है कि राफेल विमान में स्वदेशी हथियार प्रणालियों, खासकर ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों को एकीकृत करने के लिए आवश्यक तकनीकी इंटरफेस से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। भारत का कहना है कि यदि सोर्स कोड साझा करना संभव नहीं है तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट दिया जाए। वहीं, फ्रांस इस मामले में सतर्क रुख अपनाए हुए है और ऐसी तकनीकी जानकारी साझा करने को लेकर फिलहाल तैयार नहीं दिख रहा है।</p>



<p><strong>रूस ने पेश किया बड़ा विकल्प</strong></p>



<p>राफेल डील को लेकर जारी गतिरोध के बीच रूस की ओर से भारत को एक अहम प्रस्ताव मिला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम तक हर क्षेत्र में सहयोग देने के लिए तैयार है।</p>



<p>पुतिन के इस बयान को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत एसयू-57 की खरीद के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। ऐसे में भविष्य में भारत कितनी संख्या में राफेल या अन्य लड़ाकू विमान खरीदता है, यह मौजूदा बातचीत के नतीजों पर भी निर्भर करेगा।</p>



<p><strong>पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर नजर</strong></p>



<p>एसयू-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। वर्तमान में अमेरिका, चीन और रूस ही ऐसे देश हैं जिनके पास इस श्रेणी के लड़ाकू विमान परिचालन में हैं। हालांकि, एसयू-57 को लेकर समय-समय पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय सामने आती रही है, लेकिन रूस की ओर से तकनीकी सहयोग, स्थानीय उत्पादन और भारतीय जरूरतों के अनुरूप संशोधन जैसे प्रस्तावों ने इसकी अहमियत बढ़ा दी है।</p>



<p>रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत राफेल के साथ-साथ एसयू-57 के कुछ स्क्वाड्रनों को भी शामिल करने की रणनीति पर विचार कर सकता है। इससे भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत पूरी हो सकती है। इसके बाद स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम के परिपक्व होने तक क्षमता संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।</p>



<p><strong>फ्रांस के लिए भी माना जा रहा संकेत</strong></p>



<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति का यह सार्वजनिक प्रस्ताव केवल भारत के लिए सहयोग का संदेश नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार को भी संकेत देता है कि भारत के पास कई विकल्प मौजूद हैं। यदि तकनीकी शर्तों पर सहमति नहीं बनती है तो भारत अन्य रक्षा साझेदारों की ओर भी रुख कर सकता है।</p>



<p>भारत और रूस के रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। भारतीय वायुसेना के बेड़े में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की बड़ी संख्या मौजूद है। 250 से अधिक ऐसे विमान सेवा में हैं और इन्हें वायुसेना की प्रमुख ताकत माना जाता है।</p>



<p>रूस ने सुखोई-30 एमकेआई के मौजूदा उत्पादन ढांचे का उपयोग करते हुए एसयू-57 के निर्माण और असेंबली का भी प्रस्ताव दिया है। इससे लागत कम होने के साथ-साथ भारतीय हथियार प्रणालियों के एकीकरण की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव भारत की रक्षा रणनीति और भविष्य की लड़ाकू विमान जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>



<p></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-09-07 05:29:31 by W3 Total Cache
-->