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	<title>Life Imprisonment &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>मेरठ का गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड: 23 मई 2008 की वो खौफनाक रात, कांप उठा था मेरठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[KP Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 07:08:16 +0000</pubDate>
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<p><strong>Meerut News : </strong>मेरठ का चर्चित गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड को आज पूरे 18 साल हो गए हैं। अगस्त 2024 में मेरठ की सेशन कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी इजलाल कुरैशी समेत कई आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। एक तरफ दोषियों ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की है, वहीं पीड़ित पक्ष ने फांसी की सजा की मांग करते हुए रिवीजन डाली है। फिलहाल मुख्य आरोपी इजलाल कुरैशी बागपत जेल में बंद है।<br><strong>तिहरे हत्याकांड से हिल गया था पूरा मेरठ<br></strong>23 मई 2008 को हुए इस तिहरे हत्याकांड ने पूरे मेरठ को हिला दिया था। मेरठ कॉलेज के छात्र सुनील ढाका, पुनीत गिरि और सुधीर उज्जवल की बर्बर हत्या कर उनके शव बागपत के बलैनी क्षेत्र में फेंक दिए गए थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि तीनों की हत्या गुदड़ी बाजार में की गई थी।<br><strong>हाई प्रोफाइल परिवार की शीबा सिरोही बनी कत्ल की वजह<br></strong>पुलिस जांच और चार्जशीट के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। हाईप्रोफाइल परिवार से ताल्लुक रखने वाली शीबा सिरोही की मुलाकात आबूलेन स्थित एक बेकरी पर इजलाल कुरैशी से हुई थी। बताया गया कि शीबा के एक परिचित ने इजलाल का हिंदू नाम बताकर परिचय कराया था।<br>शीबा का परिवार बेहद प्रतिष्ठित माना जाता था। पिता सेना में कर्नल थे, मां मेरठ के नामचीन सीबीएसई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी थीं और बाद में दुबई चली गई थीं। शीबा की शादी सेना के एक कैप्टन से हुई थी, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते दोनों अलग रहने लगे थे। इसके बाद शीबा गंगानगर के राधा गार्डन में अकेली रहने लगी थी।<br><strong>मीट कारोबारी और रसूख देखकर शीबा आई इजलाल के करीब<br></strong>इधर इजलाल कुरैशी गुदड़ी बाजार का बड़ा मीट कारोबारी था। पैसा, रसूख और रुतबा देखकर शीबा उसके करीब पहुंचती चली गई। जब तक उसे इजलाल की असली पहचान का पता चला, तब तक दोनों के रिश्ते शहरभर में चर्चा का विषय बन चुके थे।<br>बताया जाता है कि इजलाल अक्सर राधा गार्डन पहुंचकर शीबा को अपने साथ ले जाता था। कॉलोनी के लोगों को यह बात खटकने लगी। इसी दौरान राधा गार्डन के कुछ युवकों को यह मामला नागवार गुजरा। इनमें सुनील ढाका, सुधीर उज्जवल और पुनीत गिरि के परिचित भी शामिल बताए गए।<br>विरोध बढ़ा तो एक दिन इजलाल और युवकों के बीच मारपीट हो गई। यहीं से दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी गहराती चली गई। बाद में समझौते जैसे हालात जरूर बने, लेकिन पुलिस के मुताबिक इजलाल के मन में बदले की आग सुलगती रही।<br><strong>22 मई 2008 की वो खौफनाक रात<br></strong>पुलिस चार्जशीट के अनुसार 22 मई 2008 की रात सुनील, सुधीर और पुनीत विक्टोरिया पार्क के स्वीमिंग पूल में दोस्तों के साथ थे। बाद में इजलाल ने उन्हें गुदड़ी बाजार बुलाया। वहां पहले विवाद हुआ और फिर तीनों पर हमला कर दिया गया।<br>आरोप है कि इजलाल ने सबसे पहले सुधीर उज्जवल को गोली मारी। इसके बाद बाकी दोनों युवकों को पकड़कर बेरहमी से पीटा गया। पाइपों और धारदार हथियारों से हमला किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या की क्रूरता सामने आई थी। तीनों के शरीर पर गहरे जख्म, गोलियों के निशान और गला काटने के सबूत मिले थे।<br><strong>शवों को कार की डिग्गी में डालकर बलैनी के पास फेंका<br></strong>हत्या के बाद शवों को कार की डिग्गी में डालकर बागपत के बलैनी क्षेत्र में फेंक दिया गया था। अगले दिन तीनों शव मिलने के बाद पूरे मेरठ में सनसनी फैल गई थी। इस तिहरे हत्याकांड के विरोध में मेरठ के कॉलेजों के छात्र सड़कों पर उतर आए थे। शहर बंद कराया गया। जगह-जगह प्रदर्शन हुए। मामले की जांच बाद में सदर बाजार थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर डीके बालियान को सौंपी गई।<br><strong>आरोपियों का नाम हटाने को आईओ पर दबाव<br></strong>रिटायर सीओ डीके बालियान ने बाद में बताया था कि आरोपियों के नाम हटाने के लिए उन पर भारी दबाव बनाया गया। करोड़ों रुपये का ऑफर तक दिया गया, लेकिन उन्होंने केस से नाम हटाने से इनकार कर दिया। उनका तबादला भी कर दिया गया था, लेकिन छात्रों के विरोध के बाद उन्हें वापस मेरठ भेजा गया।<br><strong>14 आरोपियों पर चार्जशीट, कई जेलों में बंद<br></strong>इस मामले में इजलाल कुरैशी, अफजाल, परवेज समेत 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। शीबा सिरोही पर भी इजलाल को उकसाने का आरोप लगा था। हालांकि वह बाद में जमानत पर बाहर आ गई। वर्तमान में मुख्य आरोपी इजलाल बागपत जेल में बंद है। अफजाल बिजनौर जेल में है। जबकि अन्य दोषियों को मेरठ और आगरा सेंट्रल जेल समेत अलग-अलग जेलों में भेजा गया है।<br><strong>मेरठ सेशन कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा<br></strong>अगस्त 2024 में मेरठ सेशन कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से अनिल ढाका ने रिवीजन दायर कर दोषियों को फांसी देने की मांग की। फिलहाल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है।<br>तीनों परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि जिस तरह की क्रूरता से हत्या की गई, उसे देखते हुए दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।<br><strong>एक जेलर ने भी किया बचाने का प्रयास<br></strong>जेल के एक बड़े अधिकारी ने भी आरोपियों को बचाने का प्रयास किया। उसने शासन को यहां तक लिखकर भेज दिया कि आरोपियों का व्यवहार काफी अच्छा है लिहाजा उनको रिहा कर दिया जाए। बताया गया कि जिस जेल के बड़े अधिकारी ने यह लेटर लिखा था वह उत्तर प्रदेश के एक मिनिस्टर का रिश्तेदार है। हालांकि जब यह मामला सोशल मीडिया में आया तब वह अधिकारी बैक फुट पर आ गया।</p>
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