<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Saudi oil pipeline &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<atom:link href="https://dastaktimes.org/tag/saudi-oil-pipeline/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
	<lastBuildDate>Thu, 24 Sep 2026 18:59:02 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.9</generator>

<image>
	<url>https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2024/01/cropped-DT-ICon-copy.png</url>
	<title>Saudi oil pipeline &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
	<link>https://dastaktimes.org</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>हूती-सऊदी की जंग से ठप हो सकता है मिडिल ईस्ट का तेल कारोबार? होर्मुज के बाद लाल सागर पर भी संकट, 100 डॉलर पार पहुंचा कच्चा तेल</title>
		<link>https://dastaktimes.org/middle-easts-oil-business-may-come-to-a-halt-due-to-houthi-saudi-war-after-hormuz-crisis-on-red-sea-also/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 18:59:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दस्तक-विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[स्तम्भ]]></category>
		<category><![CDATA[Global Oil Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Houthi Rebels]]></category>
		<category><![CDATA[Iran War]]></category>
		<category><![CDATA[Middle East oil]]></category>
		<category><![CDATA[Red Sea Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[Saudi Arabia Houthi Conflict]]></category>
		<category><![CDATA[Saudi oil pipeline]]></category>
		<category><![CDATA[Strait of Hormuz]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान अमेरिका युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[क्रूड ऑयल]]></category>
		<category><![CDATA[तेल की कीमत]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[लाल सागर संकट]]></category>
		<category><![CDATA[हूती सऊदी संघर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dastaktimes.org/?p=908699</guid>

					<description><![CDATA[<img width="234" height="300" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-234x300.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-234x300.webp 234w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-799x1024.webp 799w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-768x984.webp 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-1199x1536.webp 1199w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-1598x2048.webp 1598w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-scaled.webp 1998w" sizes="(max-width: 234px) 100vw, 234px" />तेहरान: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है। अब हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से प्रभावित है और अब लाल सागर के रास्ते पर भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="234" height="300" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-234x300.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-234x300.webp 234w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-799x1024.webp 799w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-768x984.webp 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-1199x1536.webp 1199w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-1598x2048.webp 1598w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Red-Sea-1789730261876-scaled.webp 1998w" sizes="(max-width: 234px) 100vw, 234px" />
<p><strong>तेहरान:</strong> अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है। अब हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से प्रभावित है और अब लाल सागर के रास्ते पर भी खतरा बढ़ गया है। इन घटनाक्रमों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।</p>



<p>दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती रही है। युद्ध के कारण इस रास्ते से तेल की आवाजाही प्रभावित होने के बाद कुछ जहाज लाल सागर के रास्ते का इस्तेमाल करने लगे थे। लेकिन हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े तनाव ने इस वैकल्पिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>



<p><strong>एक दशक पुराना तनाव फिर कैसे भड़का?</strong></p>



<p>हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के सैन्य गठबंधन के बीच करीब एक दशक से संघर्ष चला आ रहा है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था और हमले रुक गए थे।</p>



<p>पिछले सप्ताह यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया। हूती पहले ही इस इलाके में सऊदी जहाजों की नाकेबंदी का एलान कर चुके हैं। अगर इसे सख्ती से लागू किया जाता है तो शिपिंग कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और जहाजों का बीमा खर्च भी बढ़ सकता है।</p>



<p><strong>रेड सी पाइपलाइन पर भी बढ़ा खतरा</strong></p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को छह महीने से अधिक समय हो चुका है और होर्मुज में नाकेबंदी के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस दौरान सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पूरी क्षमता से काम कर रही थी। इसके जरिए अरब प्रायद्वीप को पार करते हुए लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक रोजाना करीब 7 मिलियन बैरल तेल पहुंचाया जा रहा था।</p>



<p>यह पाइपलाइन वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए अहम रास्ता बनी हुई थी। लेकिन पिछले सप्ताह इस पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले का आरोप इराक में मौजूद ईरान समर्थित शिया मिलिशिया पर लगाया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ जब लाल सागर के तट पर हूती विद्रोही भी आगे बढ़ रहे थे।</p>



<p><strong>सऊदी अरब और हूती के बीच क्यों बढ़ी लड़ाई?</strong></p>



<p>मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ा टकराव अचानक नहीं हुआ। इसकी पृष्ठभूमि में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़ा घटनाक्रम भी बताया गया है।</p>



<p>ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद उसके समर्थक गुटों में शामिल हूती विद्रोहियों ने खुद को सीधे संघर्ष से दूर रखा था। जुलाई में खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हूती प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा था।</p>



<p>वापसी के दौरान जब एक ईरानी विमान हूती प्रतिनिधिमंडल को लेकर यमन जाने वाला था, तब सऊदी अरब ने इसका विरोध किया। सऊदी अरब नहीं चाहता था कि विमान हूती विद्रोहियों को लेकर यमन में उतरे। इसके बाद सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी की, जिस पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण माना जाता है। हालांकि हमले के बावजूद ईरानी विमान आखिरकार वहां उतर गया।</p>



<p><strong>मक्का पर ड्रोन हमले के आरोप से बढ़ी चिंता</strong></p>



<p>सऊदी हमले के जवाब में हूती विद्रोहियों की ओर से कार्रवाई की गई। खबरों के मुताबिक, इसी सप्ताह की शुरुआत में मक्का की ओर एक ड्रोन दागा गया। हालांकि हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया और आरोप को खारिज किया।</p>



<p>इसके बाद सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने मक्का में हवाई हमले के खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर घर के भीतर रहने और खतरा टलने तक खिड़कियों व दरवाजों से दूर रहने की सलाह दी गई।</p>



<p><strong>अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव</strong></p>



<p>सऊदी अरब के हवाई अड्डे पर हमले के बाद हूती गुट के बयानों और जवाबी कार्रवाई में तेजी आई। इसके पीछे फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों और शिपिंग पर अमेरिकी नाकेबंदी को भी एक वजह बताया जा रहा है।</p>



<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी का असर ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ईरान का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है और ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि लोग नकदी के बजाय अंडे जैसी जरूरी वस्तुओं को जमा करने लगे हैं।</p>



<p><strong>ईरान और हूती की बढ़ती भूमिका से बदले समीकरण</strong></p>



<p>मौजूदा घटनाक्रम में ईरान और हूती एक ही धुरी में खड़े दिखाई दे रहे हैं। हूती गुट की गतिविधियों के जरिए यह संदेश जाने की बात कही जा रही है कि अगर होर्मुज से तेल की आवाजाही बाधित होती है तो दूसरे महत्वपूर्ण रास्तों को भी सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा।</p>



<p>लाल सागर के तट पर हूती विद्रोहियों की मौजूदगी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हूती की सीधी लड़ाई सऊदी अरब के साथ है, जिसके खिलाफ वह 2015 से संघर्ष कर रहा है। वहीं ईरान के &#8216;एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस&#8217; यानी प्रतिरोध धुरी के सदस्य के रूप में हूती को तेहरान से साजो-सामान और खुफिया सहायता मिलने की बात कही जाती है।</p>



<p>ईरान के लिए हूती की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि मिडिल ईस्ट के युद्ध में उसके दो अन्य समर्थक गुटों हिज्बुल्लाह और हमास को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में ईरान समर्थित धुरी में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जहां हूती और इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया अधिक प्रमुख भूमिका में नजर आ रहे हैं।</p>



<p><strong>अमेरिका की सीमित मदद से सऊदी की चुनौती बढ़ी</strong></p>



<p>सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़े संघर्ष में अमेरिका ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है। अमेरिका की ओर से सऊदी अरब को कूटनीतिक समर्थन दिया जा रहा है, लेकिन सैन्य स्तर पर मदद सीमित बताई जा रही है।</p>



<p>सऊदी अरब को मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्टर की जरूरत है, लेकिन ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण अमेरिकी भंडार पर भी दबाव है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र और ब्रिटेन से भी सहायता मांगी है, लेकिन अभी तक रियाद को तत्काल सैन्य मदद नहीं मिली है।</p>



<p>सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच हाल में हुए मक्का समझौते पर भी अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।</p>



<p><strong>होर्मुज के बाद दूसरे रास्ते भी सुरक्षित नहीं</strong></p>



<p>मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को व्यापक स्तर पर देखें तो अलग-अलग पक्ष अपनी सैन्य ताकत के साथ महत्वपूर्ण जलमार्गों पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों से ईरान के &#8216;एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस&#8217; में यमनी मिलिशिया की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती दिखाई दे रही है।</p>



<p>इसका असर ईरान युद्ध के साथ-साथ लाल सागर और हॉर्न ऑफ अफ्रीका की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा कारोबार के लिए होर्मुज के अलावा समुद्री रास्तों और पाइपलाइनों को विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन अब इन रास्तों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ईरान समर्थित अलग-अलग मिलिशिया गुट इन रास्तों को निशाना बना सकते हैं।</p>



<p>मौजूदा युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में वेस्ट एशिया की भूमिका और वहां की निर्भरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र से बाहर ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर विचार की जरूरत बढ़ सकती है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: dastaktimes.org @ 2026-09-25 02:38:33 by W3 Total Cache
-->