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	<title>supreme court &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, जज बोले- ‘आपकी जगह जेल में है’, मंगलवार तक भुगतान का आदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 05:37:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-300x168.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-300x168.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-768x430.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll.jpg 914w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: चेक बाउंस से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामलों में बकाया रकम चुकाने का वादा पूरा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-300x168.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-300x168.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-768x430.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/2026_10image_19_19_393130148rajpalyadav-ll.jpg 914w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> चेक बाउंस से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामलों में बकाया रकम चुकाने का वादा पूरा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। पीठ ने मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया और मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए पहले मामले के तौर पर सूचीबद्ध करने को कहा।</p>



<p><strong>‘हो सकता है वे आपसे ज्यादा अमीर हों, लेकिन रकम आपने हड़पी’</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने शिकायतकर्ता के बारे में कहा कि वे गरीब नहीं हैं। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि संभव है शिकायतकर्ता अभिनेता से अधिक अमीर हों, लेकिन रकम उनसे ली गई है। न्यायमूर्ति बागची ने यह भी कहा कि इस तरह के अहंकार को सही जगह दिखाने की जरूरत है और व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि कब क्या बोलना है।</p>



<p>इसी दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी जगह जेल में है।”</p>



<p><strong>दो करोड़ रुपये जमा करने का दिया था निर्देश</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को राजपाल यादव को दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया था। अदालत ने उन्हें निजी कंपनी की बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने और शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था।</p>



<p>सोमवार को पीठ ने कहा कि दो सप्ताह की समय सीमा खत्म हो चुकी है और पांच अक्टूबर तक कोई भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि राजपाल यादव को सोमवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।</p>



<p><strong>50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पर भी उठे सवाल</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की एक प्रति अदालत में पेश की। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट बैंक में है और उसकी प्रक्रिया चल रही है। इस पर पीठ ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तविक है या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।</p>



<p>शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अभिनेता पर अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव फिल्म अभिनेता हैं और अदालत में भी अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता को संस्था की गरिमा का सम्मान नहीं है।</p>



<p><strong>2010 में फिल्म के लिए ली थी पांच करोड़ की मदद</strong></p>



<p>शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अनुसार, वर्ष 2010 में एक फिल्म के लिए राजपाल यादव को पांच करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी गई थी। इस रकम के निपटारे के लिए वर्ष 2013 में यादव की ओर से 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए गए थे। कंपनी का आरोप है कि ये सभी चेक बाउंस हो गए।</p>



<p>शिकायतकर्ता के मुताबिक, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी।</p>



<p><strong>साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं राजपाल यादव</strong></p>



<p>15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने से मिली छूट को पांच अक्टूबर तक बढ़ाया था। उस समय पीठ ने उनके आचरण पर भी नाराजगी जताते हुए कहा था कि वह नाटक करने में माहिर हैं और अदालत के पहले के आदेशों का पालन नहीं किया गया है।</p>



<p>पीठ ने यह भी कहा था कि यादव के आचरण से विश्वास पैदा नहीं होता, लेकिन उन्हें अंतिम मौका दिया जा रहा है। राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने हेतु दो सप्ताह का समय मांगा था और अपनी बातों की प्रमाणिकता साबित करने के लिए दो करोड़ रुपये जमा करने की बात कही थी।</p>



<p>वकील ने यह भी बताया था कि राजपाल यादव करीब साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं और मनोरंजन उद्योग में उनके दोस्तों ने उन्हें जमानत दिलाई थी। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता बकाया रकम को लेकर है, क्योंकि राजपाल यादव अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर पाए हैं।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस से कहा- अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करें</title>
		<link>https://dastaktimes.org/supreme-court-strict-on-crime-against-women-in-delhi-ncr-told-police-to-create-fear-of-law-in-the-minds-of-criminals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Oct 2026 13:34:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ रेप और अन्य अपराधों की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अपराध करने की सोच रखने वाले लोगों के मन में कानून का डर पैदा करने के निर्देश दिए हैं। महिलाओं के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/supreme-court-delhi-police.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ रेप और अन्य अपराधों की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अपराध करने की सोच रखने वाले लोगों के मन में कानून का डर पैदा करने के निर्देश दिए हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।</p>



<p>सोमवार को इसी ‘सुओ मोटो’ मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त रुख अपनाया जाए और अपराधियों के मन में ऐसा डर पैदा किया जाए कि वे इस तरह के अपराध करने से पहले सोचें।</p>



<p><strong>रेप जैसे गंभीर अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग भी होंगे जो आर्टिकल 21 और मानवाधिकारों की बात करेंगे। कोर्ट ने कहा कि मानवाधिकार समूह अपराधियों के साथ बुरे व्यवहार का विरोध कर सकते हैं, लेकिन अधिकारी रेप जैसे घिनौने अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं।</p>



<p>कोर्ट ने कहा कि जब तक अपराधियों के मन में यह डर नहीं होगा कि इस तरह का अपराध करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे, तब तक ऐसे अपराधों को रोकना मुश्किल होगा। पुलिस को अपराध करने की सोच रखने वाले लोगों के मन में डर पैदा करने की जरूरत है।</p>



<p><strong>दुर्गा पूजा और दिवाली के दौरान अपराधियों के सक्रिय होने की आशंका</strong></p>



<p>जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि दुर्गा पूजा और दिवाली जैसी छुट्टियों के दौरान बदमाश और गुंडे अधिक सक्रिय हो जाते हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से कहा कि अपराधियों को केवल पकड़कर जेल में डालना ही एकमात्र समाधान नहीं है, बल्कि हालात के मुताबिक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।</p>



<p>उन्होंने कहा कि छेड़छाड़ या रेप का शिकार होने वाली हर महिला और लड़की हमारी बहन और मां के समान है। जस्टिस पारदीवाला ने पुलिस अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी निभाने और ऐसी घटनाओं को रोकने को चुनौती के तौर पर लेने को कहा।</p>



<p><strong>महिलाओं की सुरक्षा पर दिल्ली पुलिस से मांगा हलफनामा</strong></p>



<p>सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए एक एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने पुलिस को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है।मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>SIR विवाद के बीच जस्टिस उज्जल भुइयां का बड़ा बयान, बोले- वोटिंग का अधिकार छीनना अनुच्छेद 14 और 326 का उल्लंघन होगा</title>
		<link>https://dastaktimes.org/sir-amid-the-controversy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Oct 2026 05:40:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Article 14]]></category>
		<category><![CDATA[Article 326]]></category>
		<category><![CDATA[Justice Ujjal Bhuyan]]></category>
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		<category><![CDATA[मतदान का अधिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/05-2-300x169.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/05-2-300x169.webp 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/05-2-390x220.webp 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/10/05-2.webp 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने वोट देने के अधिकार को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक की नागरिकता और उसके वोट देने के अधिकार को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। किसी भारतीय नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना उसे अपने ही देश में &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने वोट देने के अधिकार को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक की नागरिकता और उसके वोट देने के अधिकार को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। किसी भारतीय नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना उसे अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती और संविधान से ऊपर कोई नहीं है।</p>



<p>एनएएलएसएआर में आयोजित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि एक भारतीय नागरिक के नजरिए से वोट देने का अधिकार और मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार अलग-अलग नहीं हैं। उन्होंने इसे शरीर से आत्मा निकालने जैसा बताया।</p>



<p><strong>वोट के अधिकार से वंचित करना अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता। एक वर्ग उन नागरिकों का नहीं हो सकता, जिन्हें वोट देने का अधिकार है और दूसरा उन नागरिकों का, जिनके पास यह अधिकार नहीं है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके जरिए बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जाता है, संविधान के अनुच्छेद 326 और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगी।</p>



<p>उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में वोट देने के अधिकार से वंचित कर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बना देती है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी होगी। उनके मुताबिक, इसे किसी भी तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।</p>



<p><strong>जस्टिस भुइयां ने इसे संवैधानिक व्यवस्था से जोड़ा</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के मूल पर असर डालती है और भारतीय संविधान के तहत अपनाई गई संवैधानिक व्यवस्था को नकारने जैसी होगी।</p>



<p>उन्होंने कहा कि नागरिकता और मतदान का अधिकार आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, नागरिक के वोट देने के अधिकार में लिंग, नस्ल, धर्म, संपत्ति, शिक्षा या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेद नहीं किया जा सकता, सिवाय सीमित और उचित अपवादों के।</p>



<p><strong>एमपी जैन का हवाला, स्वतंत्र चुनाव को बताया जरूरी</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने एमपी जैन का हवाला देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विधायिका मतदान के अधिकार को सीमित करने के लिए तर्कहीन या अनुचित प्रावधान न बनाए।</p>



<p>उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा लोकतंत्र संविधान की बुनियादी विशेषताएं हैं। अगर यह सिद्धांत कानून के लिए लागू होता है, तो किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए भी उतना ही, बल्कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है।</p>



<p><strong>डॉ. आंबेडकर के भाषण का भी किया जिक्र</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के समापन भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने चेतावनी दी थी कि वोट देने का अधिकार और भारतीय नागरिक का वयस्क मताधिकार संविधान में लिखा जाना चाहिए। इसे केवल संसदीय कानून के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।</p>



<p>उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार विदेशी शासन के खिलाफ भारत के लंबे संघर्ष से जुड़ा हुआ है। यह लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हासिल हुई आजादी की अभिव्यक्ति है।</p>



<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि अनुच्छेद 326 के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। कोई प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता और कोई अदालत भी इसे सही नहीं ठहरा सकती। उन्होंने कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है।</p>



<p><strong>NALSAR के छात्रों की भी तारीफ</strong></p>



<p>राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में जस्टिस भुइयां ने NALSAR के छात्रों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छात्रों ने देश और दुनिया को दिखाया है कि विश्वविद्यालय के छात्र और खासकर कानून के छात्र कैसे होने चाहिए।</p>



<p>उन्होंने छात्रों को प्रतिभाशाली, निडर और साहसी बताया। वहीं, संकाय सदस्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह निभाई हैं और वही किया है, जिसकी एक विश्वविद्यालय के शिक्षक से उम्मीद की जाती है।</p>



<p></p>
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		<item>
		<title>दिल्ली-NCR में लगातार यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कालकाजी गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में नाबालिग से छेड़छाड़ का लिया स्वतः संज्ञान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/supreme-court-strict-on-continuous-sexual-crimes-in-delhi-ncr-suo-motu-cognizance-taken-of-kalkaji-gang-rape-and-molestation-of-minor-in-moving-sleeper-bus/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Sep 2026 08:05:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-768x511.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और ग्रेटर नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll-768x511.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/2026_9image_11_59_228072250sc-ll.jpg 914w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और ग्रेटर नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक सूची में 28 सितंबर 2026 को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ दर्ज है।</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर PIL दर्ज करने को कहा</strong></p>



<p>जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यौन अपराधों की लगातार सामने आ रही घटनाओं पर चिंता जताई। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।</p>



<p>पीठ के अनुसार, हालिया घटनाओं के साथ दिल्ली-NCR में यौन अपराधों की अन्य रिपोर्टों को देखते हुए कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती हैं।</p>



<p><strong>सार्वजनिक जगहों को हाई-रिस्क जोन बनने से रोकने पर जोर</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सम्मान के साथ और हिंसा के डर के बिना जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अहम हिस्सा है।</p>



<p>अदालत ने यह भी कहा कि पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज जैसी सार्वजनिक जगहें खराब रोशनी, निगरानी की कमी, गश्त के अभाव या प्रशासन की ऐसी कमियों के कारण हाई-रिस्क जोन नहीं बननी चाहिए, जिन्हें रोका जा सकता है।</p>



<p><strong>कालकाजी मंदिर के पास 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप</strong></p>



<p>मामलों में शामिल एक घटना दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क की है। पुलिस के मुताबिक, 22 सितंबर को 17 वर्षीय लड़की अपने एक पुरुष मित्र के साथ कालकाजी मंदिर गई थी और बाद में पास के एक पार्क में चली गई।</p>



<p>आरोप है कि वहां तीन लोगों ने उनसे संपर्क किया और खुद को पुलिसकर्मी बताया। कथित तौर पर आरोपियों ने उन्हें धमकाया और उनके मोबाइल फोन छीन लिए। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि इनमें से दो लोग उसे पार्क के सुनसान हिस्से में ले गए, जहां उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया।</p>



<p>पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आसिफ नाम के एक आरोपी ने उसे धमकाते हुए बंदूक दिखाई। पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मुठभेड़ के दौरान आसिफ को पकड़ा गया और उसे गोली लगने की बात सामने आई। अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी थी।</p>



<p><strong>चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में चलती स्लीपर बस के अंदर 16 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है। अगस्त में सामने आई इस घटना में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक लड़की शामिल थी, जो नोएडा की ओर गई थी और अपना स्टॉप छूटने के बाद एक स्लीपर बस में सवार हुई थी।</p>



<p>आरोप है कि बस के चालक और परिचालक ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।</p>



<p><strong>NHRC भी मामले का ले चुका है संज्ञान</strong></p>



<p>इस घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहले ही स्वतः संज्ञान ले चुका है। आयोग ने दिल्ली और गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों तथा मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर मामले की जांच और पीड़िता को दिए गए मुआवजे, यदि कोई हो, से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी।</p>



<p>पुलिस ने बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया था। जांच के लिए स्लीपर बस को जब्त कर फोरेंसिक परीक्षण कराया गया। जांचकर्ताओं ने बस की आवाजाही और घटना से जुड़े घटनाक्रम का पता लगाने के लिए रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जुटाई।</p>



<p><strong>अपराध रोकने और जवाबदेही तय करने पर जोर</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से यौन अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कमजोर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी रेखांकित की।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूर्व मेयर विशाखा राउत की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पार्षद की सीट खाली रखने का निर्देश</title>
		<link>https://dastaktimes.org/hearing-in-the-supreme-court-on-the-disqualification-of-former-mayor-vishakha-raut-instructions-to-keep-the-councilors-seat-vacant/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2026 12:46:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-1-copy-244-300x169.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-1-copy-244-300x169.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-1-copy-244-390x220.jpg 390w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/Untitled-1-copy-244.jpg 700w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर को मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (यूबीटी) की पार्षद विशाखा राउत की अयोग्यता से जुड़े मामले पर सुनवाई की। मामला उनके ओबीसी जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किए जाने और इसके आधार पर पार्षद पद से अयोग्य ठहराए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर को मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (यूबीटी) की पार्षद विशाखा राउत की अयोग्यता से जुड़े मामले पर सुनवाई की। मामला उनके ओबीसी जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किए जाने और इसके आधार पर पार्षद पद से अयोग्य ठहराए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और राउत की प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के शिंदे गुट की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।</p>



<p><strong>पार्षद की सीट खाली रखने का निर्देश</strong></p>



<p>जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि विशाखा राउत के पास रही पार्षद की सीट को फिलहाल भरा नहीं जाए। अदालत ने कहा कि लंबित अपील पर अपीलीय प्राधिकरण स्वतंत्र रूप से फैसला करे और किसी प्रभाव में आए बिना मामले का निर्णय करे।</p>



<p><strong>ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद</strong></p>



<p>विशाखा राउत ने ओबीसी जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद हुई अपनी अयोग्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अपील की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि उनकी प्रतिद्वंद्वी उस पद पर बैठना चाहती हैं और ऐसा होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>



<p><strong>सीट खाली रखने की दी गई दलील</strong></p>



<p>इंदिरा जयसिंह ने अदालत के समक्ष कहा कि हाई कोर्ट के फैसले और चुनाव याचिका, दोनों की कार्यवाही पर रोक लगनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक संबंधित मामलों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक पार्षद की सीट खाली रखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अपील पर फैसला आने से पहले उनकी प्रतिद्वंद्वी को सीट पर बैठाने की कोशिश की जा सकती है।</p>



<p><strong>वार्ड 191 से जीती थीं विशाखा राउत</strong></p>



<p>विशाखा राउत ने वार्ड 191 से चुनाव जीता था। यह सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी। चुनाव में उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर को हराया था। चुनाव के बाद जाति जांच समिति ने राउत के ओबीसी यानी कुनबी जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया।</p>



<p><strong>जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद अयोग्यता</strong></p>



<p>जाति प्रमाण पत्र अमान्य घोषित होने के बाद महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी की ओर से विशाखा राउत को पार्षद पद से अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी सीट खाली हो गई। राउत ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अयोग्यता से जुड़े फैसले को बरकरार रखा था।</p>



<p><strong>अब चुनाव आयोग और प्रतिद्वंद्वी का पक्ष होगा अहम</strong></p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और प्रिया सरवणकर को नोटिस जारी किया है। अदालत के निर्देश के मुताबिक वार्ड 191 की पार्षद सीट फिलहाल खाली रखी जाएगी। वहीं, विशाखा राउत की अयोग्यता और जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पैसे और पावर से जमानत का दावा? SC ने कहा- जेल से बाहर आया तो आजादी का जश्न मनाना गलत कैसे</title>
		<link>https://dastaktimes.org/claiming-bail-through-money-and-power-sc-said/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2026 06:53:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Article 21]]></category>
		<category><![CDATA[Bail Case]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Haryana High Court]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
		<category><![CDATA[आजादी का जश्न]]></category>
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		<category><![CDATA[कोर्ट का फैसला]]></category>
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		<category><![CDATA[हत्या आरोपी]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा क्राइम]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने आजादी का जश्न मनाया, तो इसमें गलत क्या है। शिकायतकर्ता ने आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो को आधार बनाकर दावा किया था कि उसने पैसे और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2-300x200.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2-300x200.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/supreme-court-2.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने आजादी का जश्न मनाया, तो इसमें गलत क्या है। शिकायतकर्ता ने आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो को आधार बनाकर दावा किया था कि उसने पैसे और प्रभाव के दम पर जमानत हासिल की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वीडियो से ऐसा नहीं लगता कि आरोपी ने किसी तरह के प्रभाव का इस्तेमाल कर जमानत हासिल की।</p>



<p>जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। आरोपी को हाई कोर्ट से पांचवीं याचिका पर जमानत मिली थी। इससे पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।</p>



<p><strong>सोशल मीडिया वीडियो पर उठे थे सवाल</strong></p>



<p>जमानत मिलने के बाद आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें उसने कहा था कि इस देश में पैसे और पावर के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। शिकायतकर्ता ने इसी वीडियो को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग की थी।</p>



<p>सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी अगर अपनी आजादी का जश्न मना रहा था तो इसमें गलत क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके बयान से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उसने पैसे या प्रभाव के दम पर जमानत हासिल की।</p>



<p><strong>कोर्ट ने कहा- अगर पैसे होते तो जेल क्यों जाता?</strong></p>



<p>सुनवाई से पहले पीठ ने टिप्पणी की कि जेल से बाहर आना आरोपी के लिए एक उपलब्धि हो सकती है और आजादी मिलने पर उसका जश्न मनाना गलत नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि अगर आरोपी के पास इतना पैसा ही होता कि वह प्रभाव का इस्तेमाल कर जमानत हासिल कर सके, तो वह जेल में गया ही क्यों होता। पीठ ने वकीलों की फीस का भी उल्लेख किया।</p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।</p>



<p><strong>जमीन विवाद में हुई थी हत्या</strong></p>



<p>यह मामला हरियाणा के बेरला गांव का है। आरोपी का अपने पड़ोसी के साथ जमीन को लेकर विवाद था। दोनों एक जमीन पर अपना-अपना दावा कर रहे थे। अभियोजन के अनुसार, जब विरोधी पक्ष वहां टिन शेड रखने लगा तो विवाद बढ़ गया।</p>



<p>आरोप है कि आरोपी ने एक महिला के सिर पर डंडे से वार किया, जिससे उसे चोट लगी। वहीं उसके पति पर कुल्हाड़ी से हमला किए जाने का आरोप था। बाद में महिला के पति की मौत हो गई।</p>



<p>घटना के बाद आरोपी को अक्टूबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2024 में सेशन कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी चार याचिकाएं लगातार खारिज हुईं। आखिरकार 23 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।</p>



<p><strong>पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी हाई कोर्ट ने किया था जिक्र</strong></p>



<p>हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी पर लगाए गए आरोप पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। कोर्ट के मुताबिक मृतक के शरीर पर धारदार हथियार से चोट के निशान नहीं मिले थे। वहीं घटनास्थल से भी कुल्हाड़ी के बजाय डंडा बरामद होने की बात सामने आई थी।</p>



<p>आरोपी करीब साढ़े तीन साल जेल में रहा। उसके मामले में 8 गवाहों की अदालत में गवाही भी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने उसके मामले में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार का भी उल्लेख किया।</p>



<p>शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो से संकेत मिलता है कि उसने जमानत हासिल करने के लिए पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बंगाल SIR: 37 लाख से ज्यादा अपील लंबित, 5 महीने में निपटे 1.26 लाख केस; मौजूदा रफ्तार से 12 साल लगने का अनुमान</title>
		<link>https://dastaktimes.org/bengal-sir-more-than-37-lakh-appeals-are-pending/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Sep 2026 06:09:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[1.26 lakh cases]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="208" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000000-17-1-300x208.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000000-17-1-300x208.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000000-17-1-768x532.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/000000000-17-1.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े मामलों की अपीलों का बड़ा बैकलॉग सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अप्रैल से अब तक 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया है, जबकि 37 लाख से ज्यादा &#8230;]]></description>
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<p><strong>कोलकाता:</strong> पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े मामलों की अपीलों का बड़ा बैकलॉग सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अप्रैल से अब तक 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया है, जबकि 37 लाख से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं। आयोग के मुताबिक मौजूदा गति बनी रही तो सभी अपीलों के निपटारे में करीब 12 साल लग सकते हैं।</p>



<p><strong>एक महीने में करीब 25 हजार मामलों का निपटारा</strong></p>



<p>चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 16 सितंबर तक 37,05,235 अपील लंबित थीं। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मौजूदा ढांचे और काम करने की रफ्तार को देखते हुए इतने बड़े बैकलॉग को निपटाने में लंबा समय लग सकता है। इससे अपीलों के जल्द निपटारे को लेकर न्यायाधिकरणों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत सामने आई है।</p>



<p><strong>न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव</strong></p>



<p>चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मौजूदा बुनियादी ढांचा और कर्मचारियों की संख्या इतनी बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त नहीं है। आयोग ने अपीलीय न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों को घर से काम करने की सुविधा देने से भी मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने में मदद मिलने की बात कही गई है। यह जवाब टीएमसी सांसद डेरेक ओ&#8217;ब्रायन की ओर से अपीलों के निपटारे को लेकर दायर याचिका के संदर्भ में दिया गया है।</p>



<p><strong>कांग्रेस ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना</strong></p>



<p>कांग्रेस ने 20 सितंबर को SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इसे “शाह-इंस्टीगेटेड रिमूवल” बताते हुए संविधान पर हमला करार दिया। कांग्रेस का दावा है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्गों के मतदाता इससे disproportionately प्रभावित हुए हैं। ये कांग्रेस के आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और अपीलों के निपटारे से संबंधित अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है।</p>



<p>चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई के लिए गठित न्यायाधिकरणों के सामने बड़ी संख्या में अपीलें आई हैं। आयोग ने लंबित मामलों को देखते हुए व्यवस्था को बढ़ाने की जरूरत बताई है, ताकि इन अपीलों का निपटारा तेजी से किया जा सके।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज</title>
		<link>https://dastaktimes.org/big-blow-to-abu-salem-from-supreme-court-plea-for-premature-release-in-1993-mumbai-blasts-case-rejected/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:51:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[1993 Mumbai Blasts]]></category>
		<category><![CDATA[1993 मुंबई बम धमाके]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="188" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327-300x188.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327-300x188.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि वह अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुका है और उसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="188" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327-300x188.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327-300x188.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/19-e1789039646327.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि वह अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुका है और उसे जेल से जल्द रिहा किया जाना चाहिए, लेकिन अदालत ने उसकी दलील स्वीकार नहीं की।</p>



<p>12 मार्च 1993 को मुंबई के 12 अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 800 लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि धमाकों को बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया था।</p>



<p><strong>साजिश में अबू सलेम की बताई गई थी अहम भूमिका</strong></p>



<p>जांच के दौरान अबू सलेम की भूमिका इस पूरी साजिश में अहम बताई गई थी। जांच में यह साबित हुआ कि वह हमले की योजना तैयार करने में शामिल था। उसके बारे में यह भी सामने आया था कि उसने गुजरात के भरुच से मुंबई तक हथियार और विस्फोटक पहुंचाए थे। इसके अलावा उसे हत्या के एक मामले में भी दोषी ठहराया गया था।</p>



<p>इन मामलों के आधार पर विशेष टाडा अदालत ने अबू सलेम को 25 साल कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने समय से पहले रिहाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सलेम की ओर से दलील दी गई कि पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसे 25 साल से अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।</p>



<p><strong>प्रत्यर्पण समझौते के आधार पर मांगी थी रिहाई</strong></p>



<p>अबू सलेम की यह दलील अदालतों के सामने पहले भी रखी जा चुकी है, लेकिन उसे कई बार खारिज किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट भी उसकी इसी तरह की याचिका को पहले ठुकरा चुका है। हाईकोर्ट ने सजा में मिलने वाली छूट की गणना को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया था।</p>



<p>हाईकोर्ट के अनुसार, सजा में मिलने वाली छूट की गणना रिहाई की निर्धारित तारीख से केवल एक महीने पहले की जा सकती है। ऐसे में मौजूदा समय में यह मानना सही नहीं होगा कि अबू सलेम की सजा पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग को मंजूरी नहीं दी गई थी।</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत</strong></p>



<p>अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला भी इसी रुख के अनुरूप आया है। अदालत ने अबू सलेम की जल्द रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है। सलेम ने प्रत्यर्पण समझौते में तय 25 साल की अवधि को आधार बनाकर जेल से बाहर आने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस दलील के आधार पर उसे राहत नहीं दी।</p>



<p>सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मौजूदा कोशिश सफल नहीं हो सकी है। पहले के अदालती फैसलों और अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के मुताबिक फिलहाल उसकी सजा पूरी मानकर तत्काल रिहाई नहीं की जा सकती। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में वह अपनी सजा काटता रहेगा।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां चिंतित, बोले- असहमति पर दंडात्मक रवैया ठीक नहीं</title>
		<link>https://dastaktimes.org/supreme-court-justice-bhuyan-worried-about-lathicharge-on-students-at-jantar-mantar-said-punitive-attitude-on-dissent-is-not-right/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 12:48:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Human Rights]]></category>
		<category><![CDATA[Jantar Mantar Protest]]></category>
		<category><![CDATA[Justice Ujjal Bhuyan]]></category>
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		<category><![CDATA[कानून व्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[छात्रों का विरोध प्रदर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज]]></category>
		<category><![CDATA[जंतर मंतर लाठीचार्ज]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस उज्जल भुइयां]]></category>
		<category><![CDATA[पुलिस कार्रवाई]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदर्शन का अधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[मानवाधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="177" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/9-1-e1788592758352-300x177.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/9-1-e1788592758352-300x177.png 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/09/9-1-e1788592758352.png 600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को परेशान करने वाली घटना बताते हुए कहा कि केवल अलग विचार रखने के कारण छात्रों के साथ दंडात्मक व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस &#8230;]]></description>
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<p>नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को परेशान करने वाली घटना बताते हुए कहा कि केवल अलग विचार रखने के कारण छात्रों के साथ दंडात्मक व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस भुइयां ने कानून-व्यवस्था संभालते समय पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने पर जोर दिया।</p>



<p><strong>प्रदर्शनकारियों से कठोर व्यवहार पर जताई चिंता</strong></p>



<p>जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ कठोर व्यवहार किया जाना निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों से जिस निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, उसमें कमी दिखाई देना गंभीर चिंता का विषय है। कानून लागू करने वाली संस्था के कामकाज में निष्पक्षता को उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया।</p>



<p><strong>अनावश्यक बल प्रयोग से बचने की सलाह</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने पुलिस को जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए अनावश्यक शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस की कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ आम नागरिकों के अधिकारों और गरिमा का भी सम्मान हो।</p>



<p><strong>पुलिस पर भरोसा कायम रहना जरूरी</strong></p>



<p>उन्होंने पुलिस की विश्वसनीयता को भी अहम बताया। जस्टिस भुइयां के मुताबिक आम नागरिक के लिए वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मी सरकार की शक्ति और अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। परेशानी की स्थिति में नागरिक मदद के लिए पुलिस के पास पहुंचता है, इसलिए पुलिस के प्रति जनता का भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है।</p>



<p><strong>सरकारी संस्थाओं के कानून तोड़ने पर जताया खतरा</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो इससे समाज में कानून के प्रति सम्मान कमजोर हो सकता है। ऐसी स्थिति अराजकता को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य व्यवस्था में सरकारी संस्थाओं से कानून का पालन करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की अपेक्षा की जाती है।</p>



<p><strong>पुलिस व्यवस्था और कानून के शासन पर रखी बात</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने ये टिप्पणियां पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कीं। राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने पुलिस व्यवस्था और कानून के शासन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई देते हैं तो यह स्थिति निराशाजनक होती है।</p>



<p><strong>मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत की जरूरत</strong></p>



<p>जस्टिस भुइयां ने मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की जरूरत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, उन्हें उचित राहत मिलनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने नागरिक अधिकारों की रक्षा में न्यायिक व्यवस्था की भूमिका की ओर भी ध्यान दिलाया।</p>



<p><strong>छात्रों के विरोध के अधिकार पर पहले भी टिप्पणी</strong></p>



<p>छात्रों के विरोध और असहमति के अधिकार को लेकर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी पहले टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों को किसी भी मुद्दे का विरोध करने का अधिकार है। हैदराबाद के एक लॉ संस्थान के छात्रों के पंजीकरण से जुड़े विवाद के दौरान उन्होंने छात्रों और उनके बीच किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाया था।</p>



<p>जंतर-मंतर की पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में जस्टिस भुइयां की टिप्पणी विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन की जरूरत को सामने रखती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करना नागरिक अधिकारों का हिस्सा है, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में पुलिस से निष्पक्ष, संयमित और जवाबदेह कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत, MP सरकार ने केस की मंजूरी से किया इनकार; बताईं 5 वजहें</title>
		<link>https://dastaktimes.org/big-relief-to-minister-vijay-shah-in-the-matter-of-comment-on-colonel-sophia-qureshi-mp-government-refused-to-approve-the-case-gave-5-reasons/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dastak Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:00:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Colonel Sofiya Qureshi]]></category>
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<p>भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया था। इसके बाद सरकार का प्रस्ताव राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास भेजा गया, जिसे सोमवार देर रात मंजूरी मिल गई।</p>



<p><strong>सरकार ने केस की मंजूरी क्यों नहीं दी?</strong></p>



<p>सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देने के पीछे पांच प्रमुख वजहें बताई हैं। सरकार के अनुसार, विजय शाह की टिप्पणी के बाद किसी व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा सरकार का दावा है कि शाह ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम नहीं लिया था।</p>



<p>सरकार ने यह भी कहा कि विवादित बयान के बाद विजय शाह ने कई बार माफी मांगी। उनके बयान के पीछे किसी व्यक्ति का अपमान करने की मंशा नहीं थी। सरकार का तर्क है कि टिप्पणी से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित नहीं हुआ और ऐसा करने का उनका कोई इरादा भी नहीं था।</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया गया था?</strong></p>



<p>मामले की सुनवाई के दौरान बीते सोमवार को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम अपनी पड़ताल पूरी कर चुकी है। उन्होंने अदालत को बताया था कि मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। अब सरकार की ओर से अदालत में अपना जवाब पेश किए जाने की संभावना है।</p>



<p><strong>मई 2025 में सामने आया था विवादित वीडियो</strong></p>



<p>विजय शाह उस समय विवादों में आए थे, जब मई 2025 में उनका एक वीडियो सामने आया था। इसमें उन्होंने कथित तौर पर कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और विजय शाह की भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने पुलिस को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।</p>



<p>इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और मामले को अपने पास लेते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।</p>



<p><strong>माफी मांगने के बाद भी कोर्ट ने लगाई थी फटकार</strong></p>



<p>विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने माफी मांगी थी। हालांकि, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का रिकॉर्ड पेश नहीं किए जाने पर उन्हें फटकार लगाई थी। अदालत ने उन्हें अपने धैर्य की परीक्षा नहीं लेने की चेतावनी दी थी। इसके बाद विजय शाह ने कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।</p>



<p></p>
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