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	<title>Urs Qadri &#8211; Dastak Times |  दस्तक टाइम्स</title>
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	<description>By Dastak Times Hindi News Network</description>
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		<title>गुजरी बाजार मेरठ में मदरसा इस्लामी अरबी में आयोजित उर्स में की मुल्क की तरक्की की दुआ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[KP Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 07:37:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/6140860024562061130-300x225.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/6140860024562061130-300x225.jpg 300w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/6140860024562061130-1024x768.jpg 1024w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/6140860024562061130-768x576.jpg 768w, https://dastaktimes.org/wp-content/uploads/2026/06/6140860024562061130.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />Meerut News: मंगलवार मदरसा इस्लामी अरबी अन्दर कोट गुज़री बाज़ार मेरठ शहर में हज़रत अल्लामा अलहाज शाह मुफ्ती कारी मौ० याकूब कादरी (अल०) का 32 वाॅ उर्स पाक (उर्स कादरी) मनाया गया है। जिसमे भारत के इस्लाम से जूड़े प्रसिद्ध विद्वानों और कवियो ने भाग लिया। साहिबे उर्स की बारगाह में सभी लोगों ने सम्मान &#8230;]]></description>
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<p><strong>Meerut News: </strong>मंगलवार मदरसा इस्लामी अरबी अन्दर कोट गुज़री बाज़ार मेरठ शहर में हज़रत अल्लामा अलहाज शाह मुफ्ती कारी मौ० याकूब कादरी (अल०) का 32 वाॅ उर्स पाक (उर्स कादरी) मनाया गया है। जिसमे भारत के इस्लाम से जूड़े प्रसिद्ध विद्वानों और कवियो ने भाग लिया। साहिबे उर्स की बारगाह में सभी लोगों ने सम्मान के प्रतीक फूल अर्पित किए। उर्से पाक का आरम्भ हज़रत हाफिज़ व कारी मौ० इमरान आलम साहब ने कलाम-ए-रब्बानी से किया। उर्स की सरपरस्ती अध्यक्षता खानकाहे सरकारे सरावा शरीफ के सज्जादा नशीन हज़रत मौलाना हमीदुल्ला खान साहब किबला कादरी ने फरमाई। कयादत साहिबे सज्जादा हज़रत अल्लामा मौ० शम्स कादरी साहब प्रिंसिपल मदरसा ने फरमाई। उर्स का संचालन हज़रत अल्लामा मौलाना मुहम्मद रईस साहब ने किया। उर्स में मौजूद कवियो ने व मदरसा के छात्रो ने साहिबे उर्स की शान में नज़राना-ए-अकीदत पेश की। विशेष रूप से कवि हज़रत मौलाना नूर मौ० (जिगर मेरठी), ने अपनी आवाज़ से पुरकैफ समां बाँधा।<br><strong>मुसलमानों में आज बेचैनी और अशांति का दौर</strong><br>उर्स पाक के खानकाही खतीब हज़रत अल्लामा मुफ्ती मौ० रहमतुल्लाह साहब मिस्बाही ने हालात हाज़रा और इस्लाहे मुआशरा के विषय पर फिकरी व इस्लाही खिताब में फरमाया की आज मुस्लमान जिस कदर बेचैनी अशांति के दौर से गुज़र रहे हैं। और उन पर अत्याचार, उत्पीड़न, और निंदा हो रही है। वे व्यापार और अप्रवासन को लेकर शिकायत कर रहे हैं। हर जगह, हर क्षेत्र में और हर कोने में उनका अपमान और बेइज्जती हो रही है।<br><strong>अल्लाह व रसूल की शिक्षाओं व आदेशों से परहेज़</strong><br>इसका मुख्य कारण यह है कि आज हमने अल्लाह व रसूल की शिक्षाओं व आदेशों से परहेज़ करना, विद्वानों, संतों और धार्मिक गुरुओं के मार्ग से पूर्णतः विमुख होकर भटकना, अपने सिद्धांतों और नेताओं से विमुख होना, आपस में चुगली करना, राजद्रोह और भ्रष्टाचार, स्वार्थ और अत्याचार, रिश्वतखोरी और सूदखोरी, शराब पीना और व्यभिचार, हत्या और परस्त्रीगमन, दुराचार और अनैतिकता तथा अश्लीलता को अपना आदर्श बना लिया है। इस प्रवृत्ति के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। निःसंदेह ये सभी बुरे कर्म हमारे विश्वास और कर्मों के लिए कैंसर हैं। इसलिए, मुस्लिम उम्माह को अल्लाह और उसके रसूल के सामने आकर इन अपराधों के लिए सच्चे मन से पश्चाताप करना चाहिए ताकि, जानिसार सहबा-ए-कराम की तरह, हम आज एक विजयी समूह के रूप में अनुकरणीय और मिसाल कायम कर सकें।<br><strong>साहिब-ए-उर्स के विचारों और सिद्धांतों से समुदाय को अवगत कराया</strong><br>मेरठ के प्रसिद्ध मुफ्ती, हज़रत अल्लामा मुफ्ती इश्तियाक अल-कादरी साहब मिस्बाही ने साहिब-ए-उर्स के विचारों और सिद्धांतों से समुदाय को अवगत कराया और कहा कि साहिब-ए-उर्स हज़रत अल्लामा अलहाज़ शाह मुफ्ती, कारी मौ0 याकूब साहब कादरी (रह0) एक महान अनुयायी थे। उन्होंने धार्मिक और सांसारिक मामलों में जनता के दृष्टिकोण को अपनाया। वे पैगंबर और सही राह पर चलने वाले खलीफाओं के विचारों को अपने चिंतन में आदर्श मानते थे और उन्हें व्यवहारिक रूप देते थे।<br><strong>समुदाय को प्रेम, स्नेह, सहानुभूति और आपसी भाईचारे का पाठ पढ़ाया</strong><br>उन्होंने हमेशा समुदाय को प्रेम, स्नेह, सहानुभूति और आपसी भाईचारे का पाठ पढ़ाया और जीवन भर विज्ञान और कला के माध्यम से इस्लाम का प्रचार-प्रसार करते रहे। इसलिए, मुस्लिम उम्माह को ऐसे नेताओं, मार्गदर्शकों और नेतृत्वकर्ताओं की तलाश करनी चाहिए और उनके पदचिन्हों को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाना चाहिए, ताकि वे समाज में गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।<br><strong>तरक्की के लिये दुआ की गई<br></strong>साहिबे सज्जादा ने हाज़रीने उर्स व जुम्ला मेहमानो की बारगाहे में हदिया-ए-तशक्कुर पेश किया फिर हज़रत अल्लामा व मौलाना मौ0 राशिद रज़ा जीलानी साहब ने रिक्क़त आमेज़ अदांज में सलातो सलाम का नज़राना बारगाहे रसूल में पेश किया। इसके बाद हज़रत अल्लामा मौलाना वासिफ रज़ा साहब ने मुल्क व मिल्लत की फलाह व बाबूद के लिये दुआ फरमाई। खुसुसियत के साथ मदरसा इस्लामी अरबी व अहले मेरठ व मुनतजेमीने उर्स ओर मदरसा हाज़ा के मुआविनीन की तरक्की के लिये दुआ की गई। उर्स पाक के विशेष वक्ताओं में हज़रत मौलाना मुफ्ती फैज़ान रज़ा साहब मेवात, हज़रत मौलाना मौ0 नसीम अहमद साहब मेवात, हज़रत मौलाना सफवान साहब मेवात, हज़रत मौलाना अब्दुल हफ़ीज़ साहब मेवात, हज़रत मौलाना आबाद साहब गौसपुर, हज़रत मौलाना तनवीर आलम साहब गौसपूर, हज़रत मौलाना फुरकान साहब गौसपूर, हमदर्द-ए-इस्लाम अलहाज मौ0 इल्य़ास साहब मथुरा वाले, हज़रत हाफिज़ व कारी मौ0 ताहिर अशरफी साहब दिल्ली वगैरह ने शिरकत फरमाई। </p>
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