चंद्रग्रहण और गुरु पूर्णिमा एक साथ, अद्भुत संयोग

ज्योतिष : 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण और गुरु पूर्णिमा एक साथ पड़ रहा है। इस चंद्रग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा यानि किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित नहीं होंगे। पूजा पाठ और भोजन से जुड़े कार्य किया जा सकेंगे। लेकिन फिर भी संयम बरतने और नियमों का पालन करना जरूरी है। वैसे चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल लगने के बाद से कुछ भी खाना नहीं चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई रविवार के दिन पड़ रहा है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी दिन तमाम ग्रंथों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। तभी से उनके सम्मान में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के मौके पर चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। क्योंकि गुरु ही होता है जो आपको गोविंद से साक्षात्कार करवाता है।

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सात्विक भोजन लेने की सलाह दी जाती है। वहीं, पानी में 8-10 तुलसी के पत्ते डालकर, उबाल कर पीना चाहिए। भारत में इस ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। यह ग्रहण यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। इस ग्रहण का कुल समय तकरीबन पौने तीन घंटे कहा जा रहा है।

5 जुलाई को चंद्र ग्रहण का समय
उपच्छाया से पहला स्पर्श : सुबह 8:38 बजे
परमग्रास चंद्र ग्रहण : सुबह 9:59 बजे
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श : सुबह 11:21 बजे
ग्रहण अवधि : 2 घंटे 43 मिनट 24 सेकंड

जनवरी 2020 में पहला चन्द्र ग्रहण लगा था। इस वर्ष कुल 6 ग्रहण लगने वाले हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार एक वर्ष में 3 या तीन से अधिक ग्रहण का लग्न किसी भी तरह से ठीक नहीं होता है।

मानव जीवन को काफी विचलित कर सकते हैं इतने ग्रहण। इस ग्रहणकाल में 6-6 ग्रहों (बुद्ध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु) के वक्री होने से तूफान, भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं, गृह युद्ध, अग्नि की घटनाओं, अनहोनी की संभावना बढ़ जाती है। इस पृथ्वी के अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।