दस्तक-विशेष

शेरे—आंध्र थे टी. प्रकाशम

के. विक्रम राव स्तंभ: भारत के प्रथम भाषावार प्रदेश आंध्र के पहले मुख्य मंत्री आंध्र—केसरी बैरिस्टर टंगटूरि प्रकाशम रहे थे।…

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शिव लौटे ज्ञानवापी में तांडव करते !

के. विक्रम राव स्तंभ: रामजन्मभूमि विवाद के पांच सदियों बाद हल हो जाने की तुलना में काशी ज्ञानवापी मस्जिद का…

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भारतीय मूल्यों के आधार पर हो पत्रकारिता: प्रो. द्विवेदी

लखनऊ के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में हुआ संगोष्ठी का आयोजन लखनऊ: भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली के…

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चीन के विश्वविद्यालयों में छात्रों का विद्रोह !

के. विक्रम राव स्तंभ: कम्युनिस्ट चीन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गत सप्ताह से छात्र विद्रोह व्यापा है। इनमें सदियों पुराने…

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अरबों के अच्छे दिन कब ?

के. विक्रम राव जब भारत द्वारा ”विभीषिका दिवस” पर विभाजन के त्रासद (14 अगस्त) को स्मरण करने की नरेन्द्र मोदी…

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पुतिन का आश्नायी का फसाना !

के. विक्रम राव महाऊर्जावान व्लादीमीर पुतिन ने कल (14 मई 2022) सीमावर्ती नन्हें गणराज्य फिनलैण्ड की बिजली कटवा दी। रुस…

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सकारात्मक चिंतन से कम होगा पत्रकारों का तनाव: प्रो. द्विवेदी

‘पत्रकारों के तनाव प्रबंधन’ पर ब्रह्माकुमारीज ने किया संगोष्ठी का आयोजन गाजियाबाद, 15 मई। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के…

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भारत के सुकरात के शिष्य सत्यनिष्ठा और निर्भीकता के उदाहरण थे गोखले

विवेक ओझा भारत के ग्लैडस्टोन गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती पर विशेष स्तम्भ: महात्मा गांधी ने एक बार कहा था…

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स्मृतियों के झरोखों से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर

विवेक ओझा जन्म दिवस विशेष स्तम्भ: आज 7 मई के दिन ही भारत भूमि की सामाजिक, सांस्कृतिक उर्वरता के नायक…

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पहाड़ के “प्रेमचंद ” से जुड़ी 5 प्रमुख बातें

विवेक ओझा देहरादून: हिंदी साहित्य के महानतम लेखकों में से एक मुंशी प्रेमचंद को भारत में कौन नहीं जानता ,…

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समाज के सपनों के साथ संवाद करने का माध्यम हैं फिल्में: प्रो. द्विवेदी

आईआईएमसी फिल्म फेस्टिवल 2022′ का शुभारंभ, गुरुवार को फेस्टिवल में शामिल होंगी शर्मिला टैगोर नई दिल्ली, 4 मई। आजादी के…

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स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम चेहरों को सामने लाना जरूरी: प्रो. कुमार रत्नम

नई दिल्ली, 28 अप्रैल। आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्…

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आजादी के आंदोलन में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका: प्रो. संजय द्विवेदी

नई दिल्ली, 27 अप्रैल: ”कहते हैं कि तथ्‍य अपरिवर्तनीय होते हैं, लेकिन व्‍याख्‍याओं में भिन्‍नता हो सकती है। जहां तक…

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कलाबोध से ही बनेगा एक सुंदर समाजः प्रो. द्विवेदी

नई दिल्ली। कलाओं को समर्पित संस्था आर्ट अमीगोस द्वारा आयोजित चार दिवसीय बहुआयामी कला उत्सव ‘पलाश’ का समापन समारोह इंदिरा…

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हिंदी को जन-जन की भाषा बनाएं: प्रो.नागेश्वर राव

नई दिल्ली: हमें हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने में सक्रिय योगदान देना होगा। इसके लिए जरूरी है कि साहित्यिक…

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‘गवर्नमेंट’ से ‘गवर्नेंस’ की तरफ बढ़ने की जरुरत: प्रो. संजय द्विवेदी

नई दिल्ली, 18 अप्रैल। भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने जनसंपर्क अधिकारियों को जनता और सरकार…

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