चाणक्य के अनुसार, नहीं करना चाहिए इन लोगों का कभी भला, मिलता है दुःख…

चाणक्य ने इंसान को बेहतर जीवन जीने के लिए अनेक बातें बताई हैं , अगर कोई भी इंसान उनकी कही गयी बातों को सही से अपने जीवन में लागू कर ले तो उसका जीवन बेहतर होने में जरा भी देर नहीं लगती है। चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में अनेक विषयों के बारे में बताया है, जैसे किस तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, किस तरह की महिला से शादी करनी चाहिए, कौन से काम नहीं करने चाहिए इत्यादि। चाणक्य ने अपने इस कथन से स्पष्ट कर दिया है कि आज से हजारों साल पहले भी उन्होंने ऐसी बातें कहीं है जो आज के समाज पर भी उतनी ही बेहतर तरीके से लागू होती है जितनी पहले हुआ करती थी।

“कामयाब होने के लिए अच्छे मित्रों की जरुरत होती है, लेकिन ज्यादा कामयाब होने के लिए अच्छे शत्रुओं की जरुरत होती है।“ चाणक्य ने ऐसी बात कही है जो आज के समय में बिलकुल ही सही बैठती है। किसी को भी कामयाब होने के लिए एक अच्छे दोस्त की जरुरत होती है जो उसकी हर समय सहायता कर सके, जो उसका मार्गदर्शन कर सके। एक अच्चा दोस्त हमेशा अच्छा करने की प्रेरणा देता है। लेकिन और ज्यादा आगे बढ़ने के लिए एक अच्छे दुश्मन की जरुरत होती है, क्योंकि एक बेहतर दुश्मन ही अच्छी तरह से दुश्मनी निकाल सकता है। उससे बेहतर करने की चाह आपको हमेशा आगे ले जाती है।

इसके अलावा चाणक्य ने 3 लोगों के बारे में बताया है जिनकी मदद करने से सुख की बजाय दुःख ही आता है। आप भी सोच रहे होंगे की हमेशा तो यही कहा जाता है कि एक अच्छा इंसान हर समय दूसरो की मदद के लिए तत्पर रहता है और जरुरतमंदों की जरूरतों को पूरा करता है। लेकिन यहाँ तो उल्टा ही हो रहा है, यहाँ लोगों की मदद ना करने के लिए कहा जा रहा है। तो जानिए ऐसी क्या वजह थी कि चाणक्य ने इन 3 लोगों की मदद करने से मन किया है।

चाणक्य कहते हैं

मूर्खाशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दु:खिते सम्प्रयोगेण पंडितोऽप्यवसीदति।।

1- चाणक्य कहते हैं कि हमें कभी भी किसी मुर्ख स्त्री या पुरुष को ज्ञान नहीं देना चाहिए :

चाणक्य कहते हैं कि हमें कभी भी किसी मुर्ख स्त्री या पुरुष को ज्ञान नहीं देना चाहिए, क्योंकि उनके लिए ज्ञान का कोई मतलब नहीं होता है। वो आपकी बातें नहीं समझता है और ऐसे व्यक्ति को अपनी बात समझाना समय की बर्बादी है जो आपकी बात ही ना समझे। आप तो उसकी भलाई के लिए यह कर रहे हैं लेकिन उसको इसकी समझ ही नहीं है कि यह किस लिए किया जा रहा है। उनको ज्ञान देने के चक्कर में आपको तनाव झेलना पड़ जाता है इसलिए ऐसे लोगों की भलाई करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए और उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

2- चरित्रहीन और झगड़ालू स्वाभाव की स्त्री से समबन्ध नहीं रखना चाहिए

चरित्रहीन और झगड़ालू स्वाभाव की स्त्री से समबन्ध रखने वाला और उनका भरण- पोषण करने वाला व्यक्ति भी सुख नहीं प्राप्त कर पाता है, ऐसी महिलाएँ केवल आपके धन से प्रेम करती हैं। अगर कोई अच्छा व्यक्ति ऐसी महिला के साथ रहता है तो समाज में उसका मान- सम्मान भी कम होता है। जो महिला धर्म से मार्ग से भटक जाती है वह अपने साथ और लोगों को भी अधर्म के रास्ते पर ले जाती है, इसलिए ऐसी महिलाओं से भी कोई रिश्ता नहीं रखना चाहिए और उनकी भलाई के बारे में नहीं सोचना चाहिए।

3- पास की चीजों से संतुष्ट नहीं हैं हर समय दुखी रहते हैं ऐसे लोगों के साथ
चाणक्य ने कहा है कि जो लोग अपने पास की चीजों से संतुष्ट नहीं हैं और हर समय दुखी रहते हैं और रोते रहते हैं, ऐसे लोगों के साथ रहने से आपको भी सुख की प्राप्ति होती है। जो समझदार और ज्ञानी होता है वह कम में ही गुजारा कर लेता है और खुश रहने का प्रयास करता हैं। वह हर बात के लिए भगवान को दोष नहीं देता है। बिना किसी वजह के दुखी होने वाले लोग दूसरों से नफरत भी करते हैं, इसलिए ऐसे लोगों का भला नहीं करना चाहिए और इन्से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।