तेलंगाना गैंगरेप-मर्डर केस: जहां अपराधियों ने की थी दरिंदगी, पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर

हैदराबाद: तेलंगाना की डॉक्‍टर (परिवर्तित नाम दिशा) के गैंगरेप-मर्डर केस के चारों आरोपियों को पुलिस आज देर रात घटनास्‍थल पर ले गई थी. क्राइम सीन को रीक्रिएट करने के लिए उनको उसी जगह पर ले जाया गया था जहां इन्‍होंने दरिंदगी दिखाई थी. पुलिस के मुताबिक उस दौरान आरोपियों ने वहां से फरार होने की कोशिश की. पुलिस पर हमला भी किया. लिहाजा पुलिस ने आत्‍मरक्षा में एनकाउंटर कर चारों आरोपियों को मार गिराया. डीसीपी शमशाबाद प्रकाश रेड्डी ने कहा, ‘साइबराबाद पुलिस आरोपियों को क्राइम सीन को रीक्रिएट करने के लिए घटनास्‍थल पर ले गई थी. वहां पर आरोपियों ने पुलिस से हथियार खींचकर उन पर फायरिंग की. पुलिस ने आत्‍मरक्षा में फायरिंग की जिसमें सभी आरोपी मारे गए.’

साइबराबाद पुलिस कमिश्‍नर वीसी सज्‍जनार ने कहा कि आरोपी मो आरिफ, नवीन, शिवा और चेन्‍नाकेशवुलु आज सुबह तीन बजे से छह बजे के बीच शादनगर के चेत्‍तनपल्‍ली में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए. इस संबंध में दिशा के पिता ने कहा कि आज मेरी बेटी को गए 10 दिन हो गए. मैं तेलंगाना पुलिस और सरकार को बधाई देता हूं. उन्‍होंने कहा कि अब मेरी बेटी की आत्‍मा को शांति मिलेगी.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि जिस तरह तेलंगाना के मामले में पुलिस ने न्‍याय किया उसी तरह निर्भया के दोषियों को भी सजा मिलनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि उनकी बेटी निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने दी है लेकिन अभी तक उनको फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया गया. हमको अभी तक न्‍याय नहीं मिला है लेकिन जिस तरह तेलंगाना पुलिस ने काम किया, उसी तरह निर्भया के दोषियों को फांसी देकर बेटी को न्‍याय देना चाहिए. ZEE NEWS से खास बातचीत करते हुए निर्भया की मां ने ये बात कही.

उल्‍लेखनीय है कि तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बाहरी इलाके शमशाबाद में पिछले हफ्ते 27 वर्षीय पशु चिकित्सक युवती के साथ चार ट्रक ड्राइवरों और क्लीनर ने सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसे जलाकर मार देने की वीभत्‍य घटना को अंजाम दिया था. इस केस की त्वरित सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने बुधवार को विशेष अदालत गठित करने का आदेश दिया था. सरकार ने सुझाया कि महबूबनगर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को विशेष अदालत में बदलकर मामले की त्वरित सुनवाई की जाए.

सरकार ने यह आदेश तब दिया, जब उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत के लिए विधि सचिव द्वारा भेजा गया प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. विशेष अदालत महबूबनगर में इसलिए बनाई गई, क्योंकि मामला पास के शादनगर थाने में दर्ज है. मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने मामले की जल्द सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की पहल करने का अधिकारियों को निर्देश दिया था.