पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है अमरकंटक

भोपाल : अमरकंटक प्रसिद्ध तीर्थ और नयनाभिराम पर्यटन स्थल है। विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच 1,065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हरा-भरा होने के साथ-साथ अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं। आश्चर्य नहीं कि यहां के बंदर भी आपको ध्यान करते हुए मिल जाएं। भारत की प्रमुख 7 नदियों में से अनुपम नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है और यह मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित अमरकंटक पवित्र स्थलों में गिना जाता है। यहां एक प्राचीन कमंडल है, जो हमेशा पानी से भरा रहता है। कपिल धारा से लगभग 1 कि॰मी॰ कि दूरी पर पश्चिम दिशा कि ओर दूधधारा नामक श्री नर्मदा जी का अद्वितीय जल प्रपात है। यह घने वनों के मध्य अत्यंत मनोरम छटा उपस्थित करता है इस जलप्रपात कि उचाई 10 फुट है। पुराणों मे ऐसा कहा गया है कि इस स्थान पर दुर्वासा ऋषि ने तपस्या की थी। नर्मदा कुंड से लगभग 7 कि॰मी॰ उत्तर-पश्चिम दिशा में श्री नर्मदा के उत्तर किनारे पर ‘कपिल धारा’ नामक जलप्रपात है| जिसकी जलधारा पहाड़ से लगभग 150 फुट नीचे गिरती है|

शास्त्रों के अनुसार श्री कपिल मुनि ने नर्मदा जई की धारा को रोकने का प्रयत्न किया था। नर्मदा मंदिर से 4 कि॰ मी॰ कि दूरी पर भृगु कमंडल स्थित है। ऐसी जनश्रुति है कई इस स्थान पर भृगु ऋषि ने कठोर तप किया जिसके कारण उनके कमंडल से एक नदी निकली जिसे करा कमंडल भी कहा जाता है। भृगु कमंडल में कमंडल की आकृति की चट्टान से नदी की धार दिखाई देती है। माँई की बगिया माँई की बगिया माता नर्मदा को समर्पित है। यह बगिया नर्मदाकुंड से पूर्व दिशा की ओर एक किलोमीटर की दूरी पर है। इसे चरणोदक कुंड के नाम से भी जाना जाता है,कहा जाता है कि इस हरी-भरी बगिया के स्‍थान से शिव पुत्री नर्मदा पुष्‍पों को चुनती थी। नर्मदा मंदिर से कोई आठ किलोमीटर दूर जलेश्वर महादेव मंदिर है। यहीं से अमरकंटक की तीसरी नदी जोहिला नदी की उत्‍पत्ति होती है। विंध्य-वैभव के अनुसार यह शिव लिंग भगवान शंकर ने स्वयं स्थापित किया था। जिससे इसको महा-रूद्र मेरू भी कहा जाता है। कबीर चबूतरा श्री नर्मदा मंदिर से पश्चिम-दक्षिण दिशा की ओर 5 कि॰मी॰ कि दूरी पर कबीर चबूतरा नामक स्थान है। इसी स्थान पर सर्वप्रथम कबीरदास जी ने पड़ाव डाला था उन्होने इस स्थान पर कठोर ताप किया और सिद्धी प्राप्त कि थी। याही कारण है कि कबीर पंथियों के लिए यह स्थान बहुत ही पवित्र मन जाता है। माई का (मडवा) मण्डप श्री नर्मदा मंदिर से पूर्व दिशा की ओर माँई की बगिया से कच्चे मार्ग से होते हुए लगभग 7 कि.मी. की दुरी पर माई का (मडवा) मण्डप नामक स्थान स्थित है| कहा जाता है कि यहां वह स्थान भी है जहां चिरकुंआरी मां नर्मदा का विवाह मंडप बनाया गया था।