बाल दिवस: जाने चाचा नेहरू के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें

नई दिल्‍ली: द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद कई देश गुलामी से मुक्‍त हुए और वैश्विक मानचित्र पर एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र के रूप में उभरकर सामने आए। भारत भी उन्‍हीं में से एक है। भारत का नेतृत्‍व करने का अवसर पंडित जवाहर लाल नेहरू को मिला। उन्‍होंने भारत को विकास के पथ पर ले जाने और मजबूत राष्‍ट्र के रूप में उभारने के लिए कई कदम उठाए। उन्‍होंने अपने कार्यकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्‍थाओं को मजबूती देने का काम किया। यही कारण है कि वो आज भी सभी को याद आते हैं। आज उनका जन्‍मदिन है। इसलिए उनके बड़े योगदान के बारे में जानना भी जरूरी हो जाता है।

1. बांधों और उद्योगों को बढ़ावा
1947 में उन्होंने देश की बागडोर संभाली तो देश खस्ताहाल था। आर्थिक रूप से भारत बहुत कमजोर हो गया था। देश के अंदर एक सुई तक नहीं बनती थी। गरीबी, भूखमरी और अशिक्षा का राज था। बेरोजगारी बड़े पैमाने पर थी। इन समस्‍याओं से पार पाने के लिए उन्‍होंने सबसे पहले मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया। लघु उद्योग के लिए अवसर पैदा हुए। मशीनरी और कच्चे माल के आयात पर भारी टैक्स लगाया। स्थानीय उद्योगों को फलने-फूलने का मौका मिला। इसके साथ ही उन्‍होंने कई बांध बनाए। जैसे भाखड़ा नंगल। गुजरात में नर्मदा बांध भी उनका सपना था। इसी तरह देश भर में बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया। बड़े उद्योगों के कारण टाटानगर, भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला, कानपुर जैसे शहर उभरकर सामने आए। इसके साथ ही शिक्षा और परमाणु ऊर्जा सहित विज्ञान के क्षेत्र में बड़े उद्यमों को भी बढ़ावा मिला। वह बड़े उद्योगों को आधुनिक भारत का मंदिर कहा करते थे।

2. विकास पर जोर
पड़ोसी देश पाकिस्तान ने धर्म आधारित आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी का हिस्सा बनाया। दूसरी तरफ नेहरू ने शिक्षा, विकास और वैज्ञानिक सोच को देश का आधार बनाया। उसका नतीजा आज आप देख सकते हैं कि भारत कहां है और पाकिस्तान कहां है। नेहरू को विज्ञान पर काफी भरोसा था और वह उसमें आकर्षण महसूस करते थे। उन्होंने विज्ञान को एक ऐसे जादू के तौर पर देखा जो देश को आगे ले जाएगा। उन्होंने वैज्ञानिक सोच और वैज्ञानिक कारनामों को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी की बुनियाद रखी तो इसरो जैसे संस्थान की भी नींव डाली।

3. धर्मनिरपेक्षता
देश को भाईचारे और सभी के साथ तालमेल बिठाकर आगे ले जाने के लिए धर्मनिरपेक्षता के अपने सिद्धांत पर जोर दिया। हालांकि वह इन बातों को लेकर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे। इस बात के उन्‍होंने परवाह नहीं कि और सभी को साथ लेकर चले। उन्होंने कट्टरपंथी ताकतों को हावी नहीं होने दिया और अल्पसंख्यकों को यह महसूस कराया कि वे सुरक्षित हैं।

4. विविधता में एकता
हमारा देश जिस समय आजाद हुआ, उस समय की स्थिति बहुत अलग-अलग थी। पूरे राष्ट्र को बिखरकर टुकड़े-टुकड़े में बंट जाने का खतरा था। ऐसे में किसी ऐसे करिश्माई शख्सियत की जरूरत थी जिसकी एक आवाज पर देश के लोग एकजुट हो जाएं और जिन पर सभी को विश्वास हो। वह उन कुछ लोगों में शामिल थे जिन्होंने सभी भारतीय को आपस में जोड़ा और उनको महसूस कराया कि कई अंतरों के बावजूद वे लोग एक राष्ट्र हैं। ऐसा इसलिए संभव हुआ कि नेहरू ने सभी को एक साथ लेकर चलने पर सबसे ज्‍यादा जोर दिया।

5. पंचशील का सिद्धांत
नेहरू के प्रयासों से पंचशील समझौते पर 63 साल पहले 29 अप्रैल 1954 को भारत और चीन के बीच हस्ताक्षर हुए थे। ये समझौता चीन के क्षेत्र तिब्बत और भारत के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को लेकर ये समझौता हुआ था। इसमें पांच सिद्धांत थे जो अगले पांच साल तक भारत की विदेश नीति की रीढ़ रहे थे। इस समझौते के बाद ही हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे लगे थे। भारत ने गुट निरपेक्ष रवैया अपनाया। हालांकि 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में इस संधि की मूल भावना को काफ़ी चोट पहुंची थी। इस सिद्धांत के तहत दोनों देशों ने यह तय किया कि एक-दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। परस्पर अनाक्रमण, एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना, समान और परस्पर लाभकारी संबंधों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देंगे।