बड़ा खुलासा: नोटेबंदी में इन बड़े नेताओं का हुआ सबसे अधिक फायदा

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की की रात आठ बजे पूरे देश में नोटबंदी की घोषणा की थी जिसमें 500 और एक हजार के नोट बंद करने का फैसला लिया गया था. जिसके पीछे भष्टाचार और कालेधर पर लगाम लगाए जाने की बात कही गई थी लेकिन इससे न तो भ्रष्टाचार कम हुआ और न ही कालेधन पर कोई लगाम लगी बल्कि नोटबंदी के फैसले से जिसको परेशना हुई वो थी आम जनता और जिसको फायदा हुआ वो थे राजनीतिक पार्टियों के नेता. जिसका खुलासा हुआ है एक आरटीआई के तहत मिली जानकारी से जिसमे पता चला कि नोटबंदी के दौरान राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा चलाए जा रहे सहकारी बैंकों में बहुत अधिक मात्रा में पुराने नोट जमा किए गए हैं.बता दें की 745.59 करोड़ रुपये के पुराने नोट्स बदलने के साथ गुजरात के अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक सबसे टाॅप पर है।बड़ा खुलासा: नोटेबंदी में इन बड़े नेताओं का हुआ सबसे अधिक फायदा

यहां के निदेशक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष बीजेपी नेता अजयभाई एच पटेल हैं। दूसरा 693.19 करोड़ रुपये के साथ, राजकोट जिला सहकारी बैंक है। इसके अध्यक्ष जयेशभाई राडियाडिया हैं। तीसरे स्थान पर पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक है, जिसके अध्यक्ष पूर्व एनसीपी विधायक रमेश थोरात हैं। इस बैंक की उपाध्यक्ष कांग्रेस नेता अर्चना गारे हैं। वहीं, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे इसके निदेशकों में शामिल हैं। यहां 551.62 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए। चाैथे स्थान पर कांगरा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक है, जहां 543.11 करोड़ रुपये बदले गए। इस बैंक के अध्यक्ष कांग्रेस नेता जगदीश सपेहिया थे, जिन्हें 9 महीने पहले निलंबित कर दिया गया।

पांचवे स्थान पर सूरत जिला सहकारी बैंक है, जहां 369.85 करोड़ रुपये बदले गए। इसके अध्यक्ष भाजपा नेता नरेशभाई भिखाभाई पटेल हैं।छठे स्थान पर सबरकंठा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक है, जहां 328.5 करोड़ रुपये बदले गए। इसके अध्यक्ष भाजपा नेता महेशभाई अमिचंदभाई पटेल हैं। सातवें स्थान पर साउठ केनरा जिला सहकारी बैक है, जहां 327.81 करोड़ रुपये बदले गए। इसके अध्यक्ष कांग्रेस नेता एमएन राजेंद्र कुमार है।आठवें स्थान पर नासिक जिला केंद्रीय सहकारी बैक है, जहां 319.68 करोड़ रुपये बदले गए। इसके अध्यक्ष शिवसेना नेता नरेंद्र दारडे थे, जिन्होंने 30 नवंबर 2017 को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। नौंवे नंबर पर सतारा जिला केंद्रीय सहकारी बैक है, जहां 312.04 करोड़ रुपये बदले गए।

इसके अध्यक्ष छत्रपति शिवेनद्र सिंह राजे अभय सिंह राजे भोसले हैं, जो राकंपा नेता हैं। सतारा से विधायक हैं। वहीं, दसवें नंबर पर संगली जिला सहकारी बैंक है, जहां 301.08 करोड़ रुपये बदले गए। इसके उपाध्यक्ष संग्राम सिहं समपत्रो देशमुख हैं, जो भाजपा नेता हैं।याद रहे की जिस सहकारी बैंक में सबसे ज्यादा 745.59 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा किए गए हैं वो गुजरात के अहमदाबाद का जिला सहकारी बैंक है जिसके निदेशक हैं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अजयभाई एच पटेल हैं. जबकि राजकोट का जिला सहकारी बैंक पुराने नोट जमा करवाने में दूसरे नंबर पर है जिसमें 693.19 करोड़ रुपये जमा कराए गए जिसके अध्यक्ष हैं बीजेपी नेता जयेशभाई राडियाडिया.